Sinusitis Disease In Hindi

Sinusitis Disease के लक्षण, कारण और इलाज (आयुर्वेदिक और होम्योपैथिक)

Sinusitis Disease In Hindi : साइनस संक्रमण एक आम संक्रमण है परन्तु कभी-कभी इसके नतीजे गंभीर भी हो सकते हैं। इस पोस्ट के माध्यम से साइनोसाइटिस (साइनस) रोग क्या है?, साइनस के लक्षण (sinusitis symptom), साइनस संक्रमण के कारण (cause of sinus infection) सहित साइनस की होम्योपैथिक दवा (sinusitis homeopathy treatment) और आयुर्वेदिक दवा (sinusitis ayurvedic treatment) के बारे में बताया गया है। इसके अलावा साइनस इन्फेक्शन के बचाव (Sinusitis prevention) के बारे में भी समझाया गया है।

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साइनस क्या है ? What is Sinus in Hindi

 Sinus Meaning in Hindi

साइनस (Sinus in Hindi) माथे, नाक, चीकबोन्स और आंखों के आस पास के वो खाली स्थान हैं जिनमें हवा भरी होती है।

साइनस म्यूकस बनाते हैं, जो आपकी नाक के अंदरूनी हिस्से को नम रखता है।

साइनस में मौजूद म्यूकस धूल, एलर्जी, बैक्टीरिया और प्रदूषण से बचाने में हमारी मदद करता है साथ ही साइनस का कार्य फेफड़ों तक पहुंचने वाली साँस की हवा को गर्म और नम करना है।

प्रत्येक व्यक्ति के साइनस आकृति और माप में अलग-अलग होते हैं। यह भिन्नता अलग-अलग जीन (gene) पर निर्भर करती है जैसे हम सभी के फिंगरप्रिंट अलग-अलग होते हैं। इसके अलावा, प्रत्येक व्यक्ति में दाएं और बाएं साइनस की आकृति और माप में भी अंतर होता है।

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साइनस कितने प्रकार के होते हैं? | Types of Sinus in Hindi

साइनस मुख्यतः चार प्रकार के होते हैं।

  • मैक्सिलरी साइनस- यह नाक के दोनों ओर गाल की हड्डियों के पास होता है।
  • एथमॉइडल साइनस – यह नाक के दोनों ओर आँखों के बीच में होता है।
  • ललाट साइनस – यह माथे की हड्डी के भीतर होता है।
  • स्फेनोइड साइनस- यह नाक के पीछे की ओर होता है।

Types of Sinus in Hindi

साइनोसाइटिस क्या है? | Sinusitis Disease in Hindi

साइनोसाइटिस मीनिंग इन हिंदी – Sinus disease meaning in Hindi

नाक के आसपास की जगह (साइनस परत) में होने वाली सूजन या संक्रमण साइनसाइटिस या साइनस संक्रमण कहलाता है।

साइनस ऊतकों में सूजन के कारण साइनस में हवा की जगह अत्यधिक मवाद या बलगम भर जाता है, जिससे साइनस बंद हो जाते हैं, और इस वजह से मरीजों को सर्दी जुखाम का अनुभव होता है। इसके अलावा रोगी माथे या गाल या ऊपरी जबड़ों में दर्द का अनुभव भी करता है।

दुर्भाग्य से कई रोगी साइनस रोग को मौसमी एलर्जी या सर्दी से जोड़ देते हैं और अपना खुद से ही इलाज करना शुरू कर देते हैं। गलत इलाज मिलने के कारण रोगी में कई जटिलताएं आने लगती हैं।

साइनसाइटिस को साइनस रोग (साइनस डिजीज इन हिंदी) या साइनस संक्रमण (Sinus infection) या एलर्जिक साइनोसाइटिस (Allergic sinusitis) के नाम से भी जाना जाता है।

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साइनस रोग (साइनोसाइटिस) के कारण क्या हैं? | Causes of Sinusitis in Hindi

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साइनस रोग (Sinusitis) मुख्यतः बैक्टीरिया संक्रमण के कारण से होता है। इसके अलावा वायरस या फंगस संक्रमण भी साइनसाइटिस का कारण हो सकता है। संक्रमण के कारण साइनस सूज जाते हैं और ब्लॉक हो जाते हैं। इसके अलावा साइनस संक्रमण के अन्य कारणों में शामिल हैं।

  • सामान्य सर्दी,
  • फेफड़ों में इन्फेक्शन,
  • दंत संक्रमण,
  • अस्थमा,
  • मौसमी एलर्जी,
  • जानवरों के शरीर से निकलने वाली रूसी
  • एचआईवी (HIV) / एड्स (AIDS), सिस्टिक फाइब्रोसिस जैसे विकार,
  • कमजोर प्रतिरक्षा प्रणाली,
  • धुआं और धूल
  • नाक की हड्डी का बढ़ना और,
  • दूषित हवा।

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कौन से बैक्टीरिया साइनसाइटिस का कारण बनते हैं? | What bacteria cause Sinusitis in Hindi

साइनस संक्रमण (साइनस रोग) पैदा करने वाले पांच सबसे आम बैक्टीरिया हैं:

  • स्ट्रैपटोकोकस निमोनिया (Streptococcus pneumoniae),
  • हेमोफिलस इन्फ्लुएंजा (Haemophilus influenzae),
  • मोराक्सेला कटारलिस (Moraxella catarrhalis),
  • स्टेफिलोकोकस ऑरियस (Staphylococcus aureus),
  • स्ट्रेप्टोकोकस प्योगेनेस (Streptococcus pyogenes)।

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साइनोसाइटिस (साइनस रोग) के प्रकार क्या हैं? | Types of Sinusitis Disease in Hindi

साइनोसाइटिस मुख्यतः चार प्रकार के होते हैं।

तीव्र साइनोसाइटिस (साइनस) – Acute sinus Disease in Hindi

तीव्र साइनोसाइटिस में, साइनस रोग के लक्षण अचानक शुरू होते हैं जो दो से चार हफ्तों तक रहते हैं।

वायरल इन्फेक्शन (Viral infection) या कभी कभी मौसमी एलर्जी तीव्र साइनसाइटिस का कारण बन सकता है। हालांकि, जीवाणु संक्रमण (Bacterial infection) या कवक संक्रमण (Fungal infection) भी इसके कारण हो सकते हैं। तीव्र साइनसाइटिस आमतौर पर सर्दी जैसे लक्षणों से शुरू होता है जैसे बहती नाक या भरी हुई नाक और चेहरे के ऊपरी हिस्से में दर्द।

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मध्यम तीव्र साइनोसाइटिस (साइनस) – Sub Acute sinus Disease in Hindi

इस प्रकार के साइनोसाइटिस में, साइनस रोग के लक्षण चार से बारह हफ्तों तक रहते हैं। यह स्थिति आमतौर पर जीवाणु संक्रमण (bacterial infection) या मौसमी एलर्जी के कारण बनती है, जो आगे चल के मध्यम तीव्र साइनोसाइटिस (Sub Acute sinusitis) को जन्म देती हैं।

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क्रोनिक साइनसिसिस (साइनस) – Chronic sinus Disease in Hindi

क्रोनिक साइनसिसिस में, साइनस संक्रमण के लक्षण बारह हफ्तों से अधिक समय तक रहते हैं (यानी करीब 3 महीने तक)। क्रोनिक साइनसिसिस आमतौर पर लगातार एलर्जी या नाक की संरचना में होने वाले परिवर्तन के कारण होता है।

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आवर्तक साइनोसाइटिस (साइनस) -Recurrent sinus Disease in Hindi

इस प्रकार में रोगी को साल में कई बार साइनासाइटिस की समस्या होती रहती है। बार-बार होने की वजह से यह रिकरंट कहलाता है। 

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साइनोसाइटिस (साइनस) के लक्षण और संकेत क्या हैं? | Sinusitis (Sinus) Disease Symptoms in Hindi

Sinusitis symptoms in Hindi

एलर्जिक साइनोसाइटिस (साइनस रोग) के मुख्य लक्षणों में शामिल हैं –

साइनस के लक्षण – Sinus disease symptoms in Hindi

  • साइनस में दर्द,
  • नाक से स्राव या नाक बंद,
  • खांसी,
  • गले में जलन और खराश,
  • गले में कर्कश आवाज,
  • सांस से बदबू,
  • गंध का न आना,
  • थकान और बीमार जैसा महसूस होना,
  • माथे और सिर में दर्द,
  • आंखों के पीछे दर्द और दांतों में दर्द,
  • चेहरे का मुलायम होना।

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साइनस संक्रमण (साइनोसाइटिस) के जोखिम क्या हैं? | Risk factors of Sinusitis in Hindi

जोखिम कारक वह होते हैं जो व्यक्ति के बीमार होने की संभावना को बढ़ाते हैं। निम्नलिखित स्थितियां साइनसिसिस (साइनस संक्रमण) होने के खतरे को बढ़ा सकते हैं। इन स्थितियों में शामिल हैं –

  • दमा,
  • एस्पिरिन के प्रति संवेदनशीलता,
  • दातों का संक्रमण,
  • शरीर में कवक संक्रमण,
  • ट्यूमर,
  • प्रतिरक्षा प्रणाली विकार जैसे एचआईवी/एड्स या सिस्टिक फाइब्रोसिस,
  • हे फीवर या अन्य एलर्जी की स्थिति,
  • धूम्रपान करना,
  • प्रदूषण में दिन भर रहना।

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साइनसाइटिस का निदान कैसे किया जाता है? | How is Sinusitis Diagnosed in Hindi

How is sinusitis diagnosed in Hindi

साइनस संक्रमण (साइनसिसिस) के निदान के लिए डॉक्टर आपके कान, नाक और गले की जांच करते हैं और यह देखते हैं कहीं साइनस में सूजन या कोई रुकावट तो नहीं है। इसके लिए डॉक्टर कुछ परीक्षण करवा सकते हैं। इन परीक्षणों में शामिल हैं –

नाक की एंडोस्कोपी द्वारा साइनस संक्रमण का परीक्षण – Sinusitis diagnosed by endoscopy in Hindi

नाक की एंडोस्कोपी द्वारा डॉक्टर साइनस के अंदर का निरीक्षण करते हैं जिसमें नाक में सूजन या किसी भी प्रकार की रुकावट का पता लगते हैं।

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सीटी स्कैन द्वारा साइनसिसिस का परीक्षण – CT scan for sinus disease in Hindi

सीटी स्कैन, साइनस और नाक क्षेत्र का विवरण दिखाता है। इमेजिंग द्वारा असामान्यताओं या संदिग्ध जटिलताओं को खोजने में मदद मिलती है।

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अल्ट्रासोनोग्राफी द्वारा साइनस संक्रमण का परीक्षण – Sinusitis diagnosed by ultrasound in Hindi

अल्ट्रासोनोग्राफी, साइनसाइटिस के निदान के लिए प्रयोग में लाई जा सकती है। हालांकि, अल्ट्रासोनोग्राफी से आप साइनस का सटीक पता नहीं लगा पते हैं। फिर भी अल्ट्रासोनोग्राफी का उपयोग गर्भवती महिलाओं में साइनसाइटिस की पुष्टि करने के लिए किया जा सकता है, क्योंकि गर्भवती महिलाओं में CT scan या MRI scan हानिकारक हो सकता है।

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नाक और साइनस के नमूने द्वारा साइनसिसिस का परीक्षण – Sinus infection diagnosed by nasal sample in Hindi

नाक के नमूने द्वारा डॉक्टर बैक्टीरिया या वायरस इन्फेक्शन का पता लगते हैं।

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ब्लड टेस्ट द्वारा साइनस रोग का परीक्षण – Sinusitis diagnosed by blood test in Hindi

रक्त परीक्षण जिसमें एरिथ्रोसाइट सेडीमेंटेशन रेट, सीबीसी, सी-रिएक्टिव प्रोटीन आदि विशेष रूप से शामिल हैं। ये सभी टेस्ट साइनस संक्रमण का पता लगते हैं।

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एलर्जी परीक्षण द्वारा साइनस संक्रमण का परीक्षण – Allergy test for Sinus infection in Hindi

यदि आपके डॉक्टर को संदेह है कि एलर्जी ने तीव्र साइनसिसिस को ट्रिगर किया है, तो वह एलर्जी परीक्षण द्वारा साइनोसाइटिस को माप सकते हैं।

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एलर्जिक साइनोसाइटिस की एलोपैथिक दवा | Sinus allopathic medicine in Hindi

निम्नलिखित तरीकों द्वारा डॉक्टर एलर्जिक साइनोसाइटिस (साइनस रोग) का इलाज कर सकते हैं।

साइनस की अंग्रेजी दवा – Medicine for Sinusitis in Hindi

साइनोसाइटिस के इलाज में ईएनटी (आंख, कान, नाक और गले) विशेषज्ञ की आवश्यकता होती है। ईएनटी विशेषज्ञ रोगी के लक्षणों को पहचान कर साइनोसाइटिस के खिलाफ दवाई शुरू कर सकते हैं।

Amoxicillin (एमोक्सीसिलिन) साइनस की अंग्रेजी दवा है जिसे एंटीबायोटिक मेडिसिन के रूप में जाना जाता है। जिसका उपयोग साइनोसाइटिस के इलाज में किया जाता है।

एमोक्सीसिलिन आमतौर पर बैक्टीरिया के अधिकांश strain के खिलाफ प्रभावी होता है।

श्लेष्मा झिल्ली की सूजन को रोकने के लिए, सल्फरस और साल्सो-ब्रोमो-आयोडीन पानी, यानी सोडियम क्लोराइड, आयोडीन और ब्रोमीन से बने पानी के का उपयोग किया जाता है इसे स्प्रे के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है।

इसके अलावा एसिटामिनोफेन या इबुप्रोफेन भी साइनोसाइटिस के इलाज में डॉक्टर के अनुसार ली जा सकती है।

हालांकि, यदि साइनोसाइटिस वायरल इन्फेक्शन द्वारा हुआ हो तो डॉक्टर इसके लिए किसी भी मेडिसिन का विकल्प नहीं चुनते हैं।

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साइनोसाइटिस (साइनस) का होम्योपैथी दवा | Sinusitis Homeopathy Treatment in Hindi

Sinusitis homeopathy treatment in Hindi

एलर्जिक साइनोसाइटिस के इलाज में होम्योपैथिक दवाएं काफी मददगार साबित हो सकती हैं। होम्योपैथिक दवाएं साइनसाइटिस से लड़ने के लिए शरीर की प्रतिरोधक क्षमता का पुनर्निर्माण (reconstruction) करती हैं। साइनसाइटिस का होम्योपैथिक उपचार अन्य उपचारों से कहीं बेहतर माना जाता है ऐसा इसलिए क्योंकि होम्योपैथिक उपचार एंटीबायोटिक का सहारा नहीं लेती हैं और इन होम्योपैथिक दवाओं का दुष्प्रभाव भी ना के बराबर होता है।

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होम्योपैथी के इलाज में डॉक्टर कुछ दवाएं देता है जिनसे सिरदर्द में आराम मिलता है और कैविटी में भरा बलगम जुकाम के जरिए बाहर आ जाता है। होम्योपैथी दवाओं में शामिल हैं-

साइनस की होम्योपैथिक दवा – Homeopathic medicine for Sinus in Hindi

  1. काली बिक्रोमियम (Kali Bichromicum): 5-6 गोली दिन में तीन बार।
  2. आर्सेनिकम अल्बम (Arsenicum Album): 5-5 गोली दिन में तीन बार।
  3. सिलैसिआ (Silicea): 5-6 गोली दिन में तीन बार।
  4. सैम्बुकस निग्रा (Sambucus Nigra): 5-6 गोली दिन में तीन बार।
  5. कैलियम आयोडेटम: 5-6 गोली दिन में तीन बार।
  6. सिलिकिया टेरा: 5-6 गोली दिन में तीन बार।
  7. हेपर सल्फ: 5-6 गोली दिन में तीन बार।
  8. ब्रायोनिया अल्बा: 5-6 गोली दिन में तीन बार।

ध्यान रहे ये सभी दवाएं डॉक्टर मरीज की उम्र और बीमारी के लक्षणों के मुताबिक ही देता है। इसलिए डॉक्टर के अनुसार ही दवाओं का सेवन करें

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साइनस की सर्जरी – Sinusitis surgery in Hindi

ऊपर बताए गए उपचारों को आजमाने के बाद भी यदि एलर्जिक साइनोसाइटिस के लक्षणों में सुधार नहीं होता है, तो डॉक्टर सर्जरी का विकल्प चुन सकते हैं। फंक्शनल एंडोस्कोपिक साइनस सर्जरी (FESS), साइनोसाइटिस में की जाने वाली एक सर्जरी है जिसमें साइनस के भाग से बलगम को बाहर निकाला जाता है।

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साइनोसाइटिस (साइनस) के घरेलू इलाज | Sinus disease home treatment in Hindi

लगभग 70% मामलों में, साइनसिसिस के लक्षण घरेलू इलाज द्वारा नियंत्रित किये जा सकते है। साइनोसाइटिस के घरेलू उपयों (sinusitis treatment at home in Hindi) में शामिल हैं –

नेसल वॉशिंग द्वारा साइनोसाइटिस साइनस इन्फेक्शन का इलाज (Saline nasal spray for Sinusitis treatment in Hindi)

नमकीन नेसल स्प्रे का उपयोग बंद नाक को खोलने में मदद करता है।

भाप से साँस द्वारा साइनस रोग का घरेलू इलाज (Steam inhalation for Sinusitis treatment in Hindi)

भाप में सांस लेने से श्लेष्मा झिल्ली को नम रखने में मदद मिल सकती है, साथ ही साइनस के दबाव से भी राहत मिलती हैं। यह सर्दियों के दौरान या ठंडे मौसम में विशेष रूप से महत्वपूर्ण है।

हाइड्रेशन द्वारा साइनस संक्रमण का इलाज (Hydration for Sinus disease treatment in Hindi)

साइनस के समय हाइड्रेटेड रहने से श्लेष्म झिल्ली को नम बनाने में मदद मिलती है। जिससे साइनस संक्रमण के लक्षण नियंत्रित हो सकते हैं। इसके लिए आप पानी, फलों का रस और हर्बल टी का सेवन कर सकते है।

एसेंशियल ऑयल द्वारा साइनस रोग का उपचार (Essential oils for Sinus disease treatment in Hindi)

गर्म पानी या तौलिये में मेन्थॉल या नीलगिरी के तेल की कुछ बूँदें डालने से यह साइनोसाइटिस के लक्षणों को कुछ हद तक कम कर सकता है। ध्यान रहे एसेंशियल ऑयल को ना निगलें और ना सीधे त्वचा पर लगाएं।

आराम करके एलर्जिक साइनोसाइटिस का इलाज (Treating Sinusitis with rest)

साइनस के दौरान शरीर को उचित आराम देना चाहिए।

एक्यूप्रेशर द्वारा साइनोसाइटिस का घरेलू इलाज (Acupressure for Sinus infection treatment in Hindi)

एक्यूप्रेशर पारंपरिक चीनी चिकित्सा का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। इसमें दर्द या बीमारी के लक्षणों को दूर करने के लिए शरीर के विशिष्ट बिंदुओं पर दबाया जाता है। हलाकि, वैज्ञानिक इस बारे में स्पष्ट नहीं हैं कि एक्यूप्रेशर काम करता है या नहीं, लेकिन यह कुछ लक्षणों को कम कर सकता है। एक्यूप्रेशर का उपयोग लंबे समय से सर्दी, फ्लू के प्रकार और साइनस की समस्याओं के इलाज में किया जा रहा है।

गर्म सिकाई द्वारा साइनस रोग का घरेलू इलाज (Warm compress for Sinus treatment in Hindi)

साइनस क्षेत्र में गर्म सेक करके भी साइनोसाइटिस के लक्षणों को कम किया जा सकता है। इसके लिए आप एक गर्म कपड़े का उपयोग कर सकते है।

Neti pots द्वारा साइनस संक्रमण का घरेलू इलाज (Neti pots for Sinus treatment in Hindi)

छोटे चायदानी के आकार का बर्तन होता है, जो खारे पानी के घोल को नाक गुहा में डालने में मदद करता है। यह sinus की श्लेष्म झिल्ली को नम बनाए रखने और ठीक से काम करने में मदद कर सकता है। Neti pots का इस्तेमाल करने से यह पराग, बैक्टीरिया और अन्य अपशिष्ट पदार्थों को बाहर निकलने में मदद मिलती है।

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साइनोसाइटिस (साइनस) का आयुर्वेदिक इलाज | Sinusitis Ayurvedic Treatment in Hindi

एलर्जिक साइनोसाइटिस के उपचार के लिए कुछ आयुर्वेदिक तरीके कारगर साबित हो सकते हैं। आयुर्वेदिक तरीकों में शामिल हैं –

साइनस की आयुर्वेदिक दवा – Ayurvedic medicine for Sinus in Hindi

  • नियमित रूप से सुबह और शाम प्राणायाम करें.
  • काली मिर्च, अदरक, तुलसी और मुन्नका का काढ़ा बनाकर दिन में दो बार (सुबह-शाम) लेने से संक्रमण की समस्या काफी हद तक कम होती है।
  • अपने चेहरे पर किसी पोषक तेल की मालिश करें।
  • एक कप गुनगुने पानी में एक चुटकी नमक डालकर पानी को चुल्लू की सहायता से अपने एक नाक से खींचे और फिर इसे घिरे घिरे निकाल दें। ऐसा करने से आपको तुरंत राहत मिलेगी। यह इन्फ़ेक़्शन को कम करता है और साइनस के ब्लॉकेज को हटाता है।
  • रात में सोते समय आग में भुने हुए अनार के रस में अदरक का रस मिलाकर पिएं।
  • काली मिर्च साइनस के उपचार में फायदेमंद होती है। इसके लिए आप एक कटोरे सूप में एक छोटा चम्मच काली मिर्च पाउडर डालें और धीरे-धीरे इसे पियें।
  • हर्बल टी साइनस रोग के उपचार में फायदेमंद हो सकती है। हर्बल चाय का उपयोग सैकड़ों वर्षों से विभिन्न बीमारियों के लिए प्राकृतिक उपचार के रूप में भी किया जाता है।
  • हर्बल चाय में कैफीन की मात्रा ना के बराबर होने से ये हमारे स्वास्थ के लिए बहुत ही स्वास्थ्यवर्धक होती है। हर्बल टी विटामिन C, विटामिन E, विटामिन B6, पोटेशियम, मैंगनीज, कॉपर और मैग्नीशियम जैसे विटामिन और खनिजों से भरी होती है।
  • इसके अलावा आयुर्वेदिक चाय में एंटीऑक्सिडेंट, एंटीमाइक्रोबॉयल, एंटीइंफ्लेमेटरी, एंटीबैक्टीरियल, एंटी-डायरियल और एंटीएलर्जिक जैसे गुण होते हैं। जो सूजन और दर्द को दूर करने और साथ ही इम्यून सिस्टम को मजबूत करने में मदद करते हैं।
  • साइनस रोग के लिए आप पुदीने की चाय, अदरक की चाय, तुलसी की चाय और दालचीनी की चाय, हर्बल टी के रूप में ले सकते हैं।

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साइनोसाइटिस की रोकथाम कैसे करें? | How to avoid Sinus Infection in Hindi

साइनसाइटिस (साइनस संक्रमण) से बचने के लिए आप निम्नलिखित तरीकों को अपना सकते हैं।

साइनस संक्रमण से बचने के उपाय – Tips to Prevent sinusitis in Hindi

  • एलर्जिक साइनोसाइटिस की रोकथाम में ऊपरी श्वसन संक्रमण से बचें। उन लोगों के संपर्क में आने से बचें जिन्हें सर्दी-जुखाम या कोई अन्य संक्रमण है।
  • साइनस संक्रमण रोकथाम में अपने हाथों को बार-बार साबुन से धोएं, खासकर भोजन से पहले।
  • यदि आपको किसी चीज से एलर्जी और वह जुखाम करती है, तो इन लक्षणों को नियंत्रित रखें। जब भी संभव हो उन चीजों के संपर्क में आने से बचें जिनसे आपको एलर्जी है।
  • सिगरेट के धुएं और प्रदूषित हवा से बचें। तंबाकू का धुआं और वायु प्रदूषण आपके फेफड़ों और नाक के मार्ग में जलन और सूजन कर सकते हैं।
  • यदि आपके घर में हवा शुष्क है, तो ह्यूमिडिफायर (Humidifier) का इस्तेमाल करें। हवा में नमी जोड़ने से साइनसाइटिस को रोकने में मदद मिल सकती है।
  • अपने घर को mold infection (फफुंदीय संक्रमण) से मुक्त रखना सुनिश्चित करें।
  • इसके अलावा पर्याप्त मात्रा में पानी पीने से साइनस के लक्षण से बचा जा सकता है।

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एलर्जी और साइनस संक्रमण के बीच अंतर | Difference Between Allergies and a Sinus Infection in Hindi

क्योंकि एलर्जी और साइनस संक्रमण के लक्षण लगभग सामान होते हैं। इसलिए इनके बीच अंतर करना कभी-कभी काफी मुश्किल हो जाता है। हालांकि, नीचे दी गई तालिका को ध्यान में रख कर आप एलर्जी और साइनस संक्रमण के बीच अंतर कर सकते हैं।

एलर्जी और साइनस की पहचान

लक्षण

(Symptom)

एलर्जी

(Allergy)

साइनस  इन्फेक्शन

(Sinus infection)

बुखार और ठंड लगना X X
बुखार X
मांसपेशियों और शरीर में दर्द X X
गाढ़ा पीला स्राव (नाक से निकला हुआ) X
स्वाद या गंध ना आना X X
उलटी अथवा मितली X X
दस्त X X
दांत में दर्द X
बदबूदार सांस X
खांसी
साँसों लेने में कठिनाई X
थकान
सिरदर्द X
नाक बंद
आँख में खुजली या पानी आना X
चेहरे में दर्द X
आंखों और गालों में दर्द X
गले में खरास
जुखाम
X = लक्षण दिखाई नहीं देते हैं।

✓= लक्षण दिखाई देते हैं।

डॉक्टर को कब दिखाएं? | When to see a doctor

निम्नलिखित स्थिति में अपने डॉक्टर से तुरंत संपर्क करें –

  • यदि गंभीर सिरदर्द या चेहरे में दर्द हो रहा हो,
  • लक्षणों में सुधार होने के बाद बिगड़ जा रहे हों,
  • लक्षण जो 10 दिनों से अधिक समय तक रहें,
  • 3-4 दिनों से अधिक समय तक बुखार रहना (101.5 डिग्री फ़ारेनहाइट (38.6 डिग्री सेल्सियस) से अधिक होना)
  • आंखों के आसपास अधिक सूजन
  • दृष्टि परिवर्तन।

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निष्कर्ष | Conclusion

साइनसाइटिस (साइनस संक्रमण) एक आम समस्या है जो कई लोगों को प्रभावित करती है। ज्यादातर मामलों में sinus का दर्द हल्का होता है, और व्यक्ति डॉक्टर की निगरानी में घरेलू उपायों द्वारा इस रोग के लक्षणों को कुछ हद तक नियंत्रित कर सकते हैं।

यदि साइनस संक्रमण की समस्या बैक्टीरिया द्वारा है और इसके गंभीर लक्षण लम्बे समय तक दिखाई देते हैं। हालांकि, एंटीबायोटिक दवाओं का उपयोग कर साइनसाइटिस की गंभीरता को कम किया जा सकता है।

वायरस के कारण होने वाले साइनसाइटिस में डॉक्टर किसी भी प्रकार की एंटीबायोटिक दवाओं का उपयोग नहीं करते हैं। ज्यादातर मामलों में वायरस के कारण होने वाली सूजन लगभग 10 -15 दिनों में ठीक हो जाती है।

Sinusitis disease आमतौर पर रोगी के जीवन में अधिक जटिलताएं पैदा नहीं करता है। रोगी या तो खुद से या डॉक्टर द्वारा दी गई दवाओं के सेवन से साइनोसाइटिस के लक्षणों को काफी हद तक नियंत्रित कर लेते हैं।

हालांकि, दुर्लभ मामलों में यह भी सम्भावना रहती है कि संक्रमण आपके तंत्रिका तंत्र में या अन्य स्थानों में फैल जाए (जैसे कि आपका मस्तिष्क, आंखें या रीढ़ की हड्डी।) और स्वास्थ सम्बन्धी जटिलताएं पैदा कर दे। इसलिए समय रहते डॉक्टर द्वारा या किसी विषेयज्ञ द्वारा इस रोग का इलाज शुरू करें।

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ये हैं Sinusitis Disease के लक्षण, कारण और इलाज (आयुर्वेदिक और होम्योपैथिक) के बारे में बताई गई पूरी जानकारी। कमेंट में बताएं आपको यह पोस्ट कैसी लगी। अगर यह पोस्ट (Sinusitis Disease In Hindi) पसंद आई हो तो इसे शेयर जरूर करें।

Disclaimer: ऊपर दी गई जानकारी पूरी तरह से शैक्षणिक दृष्टिकोण से दी गई है। इस जानकारी का उपयोग साइनोसाइटिस बीमारी (साइनस संक्रमण या साइनस रोग) के निदान या उपचार हेतु बिना विशेषज्ञ की सलाह के नहीं किया जाना चाहिए। इसके अलावा किसी भी चीज को अपनी डाइट में शामिल करने या हटाने से पहले किसी योग्य डॉक्टर या आहार विशेषज्ञ (Dietitian) की सलाह जरूर लें।

सन्दर्भ (References)

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