Chronic Constipation in Hindi

Chronic Constipation के लक्षण कारण और इलाज | कब्ज में क्या खाएं और क्या ना खाएं

Chronic Constipation in Hindi : ज्यादातर मामलों में कब्ज की बीमारी सामान्य मानी जाती है। हालांकि, कभी कभी कब्ज के बिगड़ने से कोलोरेक्टल कैंसर या इर्रिटेबल बाउल सिंड्रोम (विकार जो बड़ी आंत को प्रभावित करता है।) होने का खतरा बढ़ जाता है। कब्ज का मुख्य कारण गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल में होने वाला बदलाव है। इसलिए कब्ज के पनपने से पहले ही कब्ज का इलाज करना जरुरी है। इस पोस्ट के माध्यम से हम आपको कब्ज के लक्षण, कारण और आयुर्वेदिक इलाज के बारे में बता रहे हैं। इसके अलावा कॉन्स्टिपेशन दूर करने के उपाए (कब्ज का परमानेंट इलाज), कब्ज में क्या खाना चाहिए और क्या नहीं खाना चाहिए आदि के बारे में भी बता रहे हैं।

तो आइये अब इस पोस्ट को शरू करते हैं।

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कब्ज क्या है? | What is chronic constipation in Hindi

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Constipation in hindi meaning

Constipation (कॉन्स्टिपेशन) जिसे हिंदी भाषा में कब्ज कहते हैं एक पाचन सम्बन्धी विकार है।

कब्ज में मल कठोर, सूखा या ढेलेदार हो जाता है जिसकारण मल त्याग के समय काफी जोर लगाना पड़ता है जिससे दर्द और तकलीफ होती है।

यदि किसी व्यक्ति को सप्ताह में तीन बार से कम मल त्याग होता है, तो यह स्थिति कब्ज कहलाती है। (1)

हलाकि, कभी-कभी डॉक्टर कब्ज को क्रोनिक कॉन्स्टिपेशन (chronic constipation) भी कहते है, जिसका मतलब होता है पुरानी कब्ज। 

किसी कब्ज को पुराना तब कहा जाता है जब कॉन्स्टिपेशन की स्थिति कई सप्ताह या उससे अधिक समय तक रहती है।

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कब्ज होने के कारण क्या है? | Reason of chronic constipation in Hindi

Reason of chronic constipation in Hindi
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कब्ज क्यों होती है? अक्सर ये सवाल हमारे मन में होता है। इसका जवाब है गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल (gastrointestinal) में होने वाला बदलाव।

गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल एक बड़ी आंत है जो पोषक तत्वों को पचाने, अवशोषित करने और अपशिष्ट उत्पादों को बाहर निकलने का काम करती है।

गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल में बदलाव आने से अपशिष्ट पदार्थ बहार नहीं निकल पाते हैं, नतीजन यह Constipation का कारण बनता है।

कॉन्स्टिपेशन होने का दूसरा कारण है कोलन द्वारा पानी का अधिक सोखे जाना। पानी के अधिक सोखने से मल सूख जाता है और फिर मल का निकलना कठिन हो जाता है।

इसके अलावा भी chronic constipation के कई और कारण हो सकते हैं जिसमें जीवनशैली में बदलाव, दवाएं, चिकित्सीय स्थितियां और गर्भावस्था शामिल हैं।

 बच्चों और वयस्कों में कब्ज के निम्नलिखित कारण नीचे दिए गए हैं। (1, 2, 3 & 4)

कब्ज के सामान्य कारण – Common causes of chronic constipation in Hindi

क्रोनिक कॉन्स्टिपेशन के सामान्य कारणों में शामिल हैं:

  • कम फाइबर आहार का सेवन करना,
  • मांस, दूध, या पनीर का अधिक सेवन करना,
  • पर्याप्त पानी नहीं पीना (निर्जलीकरण),
  • पर्याप्त व्यायाम नहीं करना,
  • आपकी नियमित दिनचर्या में बदलाव, जैसे यात्रा करना, खाने के समय में बदलाव या अलग-अलग समय में सोना,
  • लम्बे समय तक तनाव में रहना,
  • हेल्थ सप्लीमेंट्स का उपयोग किया जाना,
  • मल त्याग करने की इच्छा का विरोध करना,
  • बैक्टीरियल इन्फेक्शन,
  • गर्भावस्था,
  • वृद्धावस्था (कब्ज 60 वर्ष और उससे अधिक आयु के लोगों के लगभग एक तिहाई को प्रभावित करती है।)

और पढ़ें –  जानिए मधुमेह रोगी डायबिटीज में क्या खाएं और क्या न खाएं।

कब्ज के चिकित्सीय कारण – Medical Causes of Chronic Constipation in Hindi

निम्नलिखित चिकित्सीय स्थितियां भी कब्ज का कारण हो सकती हैं:

  • कोलोरेक्टल कैंसर,
  • इर्रिटेबल बाउल सिंड्रोम का होना,
  • डायवर्टिक्युलाइटिस (आंतों का रोग) रोग होना,
  • जीआई पथ अन्य  समस्याएं,
  • पेट में ट्यूमर,
  • सीलिएक रोग,
  • कोलन पॉलीप्स,
  • मल्टीपल स्क्लेरोसिस,
  • मधुमेह,
  • थायरॉयड का होना  (हाइपोथायरायडिज्म),
  • यूरीमिया,
  • हाइपरकैल्सीमिया,
  • पार्किंसंस रोग,
  • आघात।

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कब्ज का कारण है दवाएं – Drugs that Cause chronic Constipation in Hindi 

इसके अलावा कुछ दवाएं ऐसी हैं जो कब्ज का कारण बन सकती हैं। इन दवाओं में शामिल हैं:

  • एंटासिड (अपच और सीने की जलन को दूर करने की दवा),
  • मतली विरोधी दवाएं,
  • एलर्जी की दवाएं,
  • दर्द निवारक दवाएं,
  • आयरन की दवा,
  • एंटीडिप्रेसन्ट दवा, एं
  • टी-इंफ्लेमेटरी दवा,
  • मूत्रवर्धक और
  • पार्किंसंस रोग के उपचार में आने वाली दवाइयां आदि शामिल हैं।

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पुरानी कब्ज के लक्षण क्या हैं? – Symptoms of chronic constipation in Hindi

बच्चों और वयस्कों में कब्ज के लक्षण

पेट में कब्ज के लक्षण में शामिल हैं- (1 & 5)

  • एक सप्ताह में तीन से कम मल त्याग,
  • ढेलेदार, सख्त, या सूखे मल होना,
  • सामान्य से कम मल विसर्जन होना
  • मल त्याग के दौरान तनाव या दर्द,
  • शौच के बाद लगना कि पेट साफ नहीं हुआ,
  • पेट में दर्द होना।

नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ डायबिटीज एंड डाइजेस्टिव एंड किडनी डिजीज (NIDDK) के अनुसार, यदि किसी व्यक्ति को निम्नलिखित लक्षण दिखते हैं तो ऐसी स्थिति Constipation के लिए मेडिकल इमरजेंसी हो सकती हैं।

  • मलाशय से खून आना,
  • मल में खून होना,
  • पेट में मरोड़ उठना या दर्द होना,
  • पीठ के निचले हिस्से में दर्द,
  • ऐसा महसूस होना कि गैस फंस गई है,
  • उल्टी,
  • बुखार,
  • वजन का लगातार घटना।

उपरोक्त में से यदि 3 या 4 लक्षण दिखते हैं तो डॉक्टर कोलोरेक्टल कैंसर या इर्रिटेबल बाउल सिंड्रोम के लिए आपकी जाँच कर सकते हैं।

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कब्ज के नुकसान क्या हैं? | Complications of chronic constipation in Hindi

लम्बे समय तक Constipation रहने से निम्नलिखित नुकसान हो सकते हैं- (6 & 7)

  • लगातार कॉन्स्टिपेशन रहने से बवासीर की समस्या हो सकती है।
  • कब्ज के कारण पेट साफ नहीं होता है जिससे मुहांसों की समस्या हो सकती है।
  • लम्बे समय तक constipation के बने रहने से पुरुषों में वैरिकोसील रोग (नसों की खराबी का रोग) का कारण बन सकता है। यह समस्या पुरुषों की प्रजनन क्षमता में कमी ला सकती है।
  • अधिक समय से कब्ज के कारण मरीजों को कुछ मानसिक विकार भी हो सकते हैं, जिसमें चिंता, तनाव और अवसाद शामिल हैं।
  • लम्बे समय तक अगर constipation रहे तो शरीर के अंदर वायरस, बैक्टीरिया या कैंसर सेल पनपने का खतरा बढ़ जाता है।
  • कब्ज हमरी रोग प्रतिरोधक क्षमता पर असर डालते हैं और उसे कमजोर बनाते हैं।
  • लंबे समय से कॉन्स्टिपेशन की समस्या की वजह से हमारे यूरिनरी ट्रैक्ट में इंफेक्शन भी हो सकता है।

और पढ़ें – इम्युनिटी बढ़ाने के घरेलू उपाय।

कब्ज के जोखिम कारक क्या हैं? | Risk factors for chronic constipation in Hindi

क्लिनिकल इंटरवेंशन इन एजिंग (Clinical Interventions in Aging) जर्नल में प्रकाशित एक अध्ययन के अनुसार, कब्ज के प्रमुख जोखिम कारक महिलाएं और बुजुर्ग हैं। (8 & 9)

महिला लिंग – Female gender

महिलाओं में कॉन्स्टिपेशन होने की सम्भावना पुरुषों के मुकाबले अधिक होती है, खासकर जब महिला गर्भवती हों।

प्रेगनेंसी के समय हार्मोन में होने वाला बदलाव कब्ज के खतरे को बढ़ा सकता है।

गर्भ के अंदर बच्चा आंतों को निचोड़ता है, मल के मार्ग को धीमा कर सकता है। constipation की स्थिति प्रसव के बाद भी लम्बे समय तक रह सकती है।

एक वृद्ध वयस्क (65 से अधिक) – Age over 65

उम्र के बढ़ने के साथ चयापचय क्रिया धीमी हो जाती है जो कब्ज का कारण बनता है।

और पढ़ें – सुपरफूड क्या हैं, जानिए इसके स्वास्थ्यवर्धक फायदे।

कब्ज के अन्य जोखिम कारक | Other Risk factors for constipation in Hindi

उपरोक्त जोखिम कारक के अलावा भी निम्नलिखित व्यक्तियों को कब्ज होने का जोखिम अधिक रहता है।

अवसाद या तनाव – Depression or Stress

तनाव कई तरह से कॉन्स्टिपेशन पैदा कर सकता है। तनाव हार्मोन शारीरिक प्रक्रियाओं को प्रभावित करके सीधे मल त्याग को प्रभावित करते हैं। अवसाद के अलावा मानसिक स्वास्थ्य समस्या भी कब्ज का कारण बनता है।

फाइबर युक्त आहार कम लेना – Low fiber diet

रेशेदार भोजन कब्ज को दूर करने में फायदा पहुंचते हैं। फाइबर पानी को अवशोषित करने और मल को आपस में जोड़ने में मदद करता है। जिससे मल के वजन और आकार दोनों में बढ़ोतरी होती है साथ ही मल को नरम भी करते हैं।

पर्याप्त मात्रा में उच्च फाइबर वाले खाद्य पदार्थ को न खाने से constipation के होने की सम्भावना बढ़ती है।

दवाइयों का अधिक सेवन – Medicine

जैसे हमने उप्पर बताया है की बहुत सी दवाएं ऐसी होती हैं जो कब्ज का कारण बनती हैं।

इन दवाओं के लम्बे समय तक सेवन करने से कब्ज होने की सम्भावना बढ़ती है।

और पढ़ें – केटोजेनिक डाइट क्या है, जानिए कीटो डाइट के फायदे और नुकसान।

कब्ज का निदान कैसे किया जाता है? | How is constipation diagnosed in Hindi

How is constipation diagnosed in Hindi
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कब्ज का निदान कॉन्स्टिपेशन की अवधि और गंभीरता पर निर्भर करता है।

यदि constipation की स्थिति ज्यादा गंभीर नहीं है तो डॉक्टर यूरिन परीक्षण, मल परीक्षण या कुछ ब्लड टेस्ट करवा कर कब्ज का निदान करते हैं।

परन्तु,  यदि कब्ज की स्थिति अधिक गंभीर है तो डॉक्टर कब्ज के निदान के लिए आपके मलाशय की जाँच कर सकते हैं।

कॉन्स्टिपेशन के निदान में निम्नलिखित टेस्ट शामिल हो सकते हैं:

थायराइड हार्मोन द्वारा कब्ज की जाँच – Thyroid hormone test for constipation in Hindi

  • हाइपोथायरायडिज्म (थायराइड की कमी) के कारण कब्ज हो सकती है इसलिए डॉक्टर constipation की जाँच में थायराइड हार्मोन का टेस्ट कर सकते हैं।

सिग्मायोडोस्कोपी द्वारा कॉन्स्टिपेशन की जाँच – Sigmoidoscopy for constipation in Hindi

  • कब्ज की जाँच के लिए सिग्मायोडोस्कोपी का उपयोग किया जा सकता है। सिग्मायोडोस्कोप एक लचीली ट्यूब होती है जिसमें आगे की ओर कैमरा लगा होता है। जिसे गुदा के माध्यम से डाला जाता है। सिग्मायोडोस्कोपी द्वारा रेक्टम और कोलन के निचले भाग की जाँच होती है।
  • इसके अलावा सिग्मोइडोस्कोपी दस्त, पेट दर्द, constipation , असामान्य वृद्धि और रक्तस्राव के कारणों की पहचान करने में भी सहायक होता है।

कोलोनोस्कोपी द्वारा कब्ज का परीक्षण – Colonoscopy for constipation in Hindi

  • कोलोनोस्कोपी, कब्ज की जाँच के लिए उपयोग में लाया जा सकता है। कोलोनोस्कोपी द्वारा कोलोन की जांच की जाती है।

एनोरेक्टल मैनोमेट्री कब्ज की जाँच – Anorectal manometry constipation test

  • कब्ज की जाँच में एनोरेक्टल मैनोमेट्री का उपयोग लाया जा सकता है। रेक्टल मैनोमेट्री एक परीक्षण है जिसका उपयोग मलाशय में दबाव और संवेदना को मापने और आकलन करने के लिए किया जाता है।

और पढ़ें – Sleep Apnea के लक्षण, कारण, आयुर्वेदिक इलाज और योगासन

कब्ज में क्या खाना चाहिए? | What to eat in constipation in Hindi

Food to eat in constipation in Hindi
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कब्ज दूर करने के लिए आप ऐसे आहार का सेवन करें जिन में उच्च फाइबर मौजूद हों।

फाइबर पाचन तंत्र में भोजन के पारगमन को तेज करने में मदद करते हैं और साथ ही chronic constipation को बनने से रोकता है।

कब्ज में क्या-क्या खाना चाहिए, इसके बारे में नीचे बताया हुआ है।

कब्ज में खाने वाली सब्जियां – Eat vegetables in constipation

कब्ज भगाने के लिए आप निम्नलिखित सब्जियों का सेवन कर सकते हैं। (10, 11 & 12)

  • ब्रोकली (Broccoli)
  • पालक (Spinach) और अन्य हरी सब्जियां
  • कटहल (Jackfruit)
  • मटर (Peas)
  • शतावरी,
  • मक्का,
  • आलू के छिलके
  • शकरकंद

ऊपर बताई गई सभी सब्जियां फाइबर का अच्छा स्रोत हैं। जो कब्ज दूर करने में मदद कर सकती हैं।

और पढ़ें – एक अच्छे कुकिंग ऑयल का चुनाव कैसे करें?

कब्ज दूर करने वाले फल – Eat fiber rich fruits to reduce chronic constipation in Hindi

Fiber rich fruits to reduce chronic constipation in Hindi
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कब्ज में कौन सा फल खाएं? शायद आप भी इसका जवाब ढूंढ़ रहे होंगे। 

कब्ज से राहत पाने के लिए आप उच्च फाइबर युक्त फलों का सेवन कर सकते हैं।

फाइबर की मात्रा बढ़ाने के लिए आप फलों के छिलके का भी सेवन कर सकते हैं। जैसे चीकू और सेब को छिलके के साथ खाना।

कब्ज दूर करने वाले फलों में शामिल हैं-

  • नाशपाती( Pear)
  • ब्लूबेरी या जामुन
  • ब्लैकबेरी (Blueberries & Blackberries)
  • आड़ू,
  • खुबानी
  • पका केला ( Bananas)
  • ग्रीन कीवी
  • अंजीर
  • सेब (Apple)
  • तरबूज (Watermelon)
  • खरबूजा

और पढ़ें – पोटेशियम की कमी दूर करते हैं ये आहार

कब्ज दूर करने के लिए खाएं दाल – Eat pulse to reduce constipation in Hindi

Eat pulse to reduce constipation in Hindi
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अधिकांश बीन्स, अरहर, मूंग दाल, छोले और मटर में सब्जियों की तुलना में दो गुना फाइबर मौजूद होता है, जो अच्छे पाचन को बढ़ावा देते हैं और साथ ही कब्ज को कम करने में मदद करते हैं।

फाइबर कब्ज को कम करने में बहुत ज्यादा लाभदायक है। इसलिए जितना हो सके अधिक से अधकि फाइबर युक्त खाद्य पदार्थ खाना चाहिए।

कॉन्स्टिपेशन दूर करने के लिए खाएं साबुत अनाज – Eat whole grains to reduce chronic constipation in Hindi

Eat whole grains to reduce chronic constipation in Hindi
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साबुत अनाज भी फाइबर के अच्छे स्त्रोत माने जाते हैं जो कब्ज को दूर करने में मदद कर सकते हैं।

कब्ज दूर करने के लिए साबुत अनाज में शामिल करें –

  • गेहूं का चोकर (Wheat)
  • भूरा चावल (Brown Rice)
  • ओट्स (Oats)
  • राई (Rye)
  • बल्गर (मोटा पिसा हुआ गेहूं) (Bulgur)
  • बाजरा (ज्वार का आटा) (Millet)
  • जौ (Barley)

और पढ़ें – लो कैलोरी डाइट के फायदे, नुकसान और आहार योजना।

कब्ज दूर करने के लिए खाएं मेवे (नट्स) – Eat nuts to reduce constipation in Hindi

अखरोट और बादाम जैसे नट्स भी आपकी डाइट में फाइबर की मात्रा को बढ़ाएंगे। इसलिए कब्ज को दूर करने के लिए अखरोट और बादाम जैसे नट्स का सेवन करें।

कब्ज में खाएं ड्राई फ्रूट – Eat dry fruits to reduce constipation in Hindi

ड्राय फ्रूट जैसे अंजीर, खजूर, खुबानी और किशमिश फाइबर के बेहतर अच्छे स्त्रोत हैं। फाइबर कब्ज को कम करने में सहायक है।

फाइबर आपके आंत में पानी की मात्रा बनाए रखता है और मल त्याग में भी मदद करता है। इसके साथ ही साथ यह कॉन्स्टिपेशन को भी ठीक करता है।

ड्राय फ्रूट में बहुत अधिक मात्रा में कैलोरी और शुगर होते हैं, इसलिए इस बात का ध्यान रखते हुए इन्हें खाएं।

और पढ़ें –  इन एंटीऑक्सीडेंट आहार से करें अपना वजन कम।

कॉन्स्टिपेशन को दूर करने के लिए खाएं बीज – Eat seeds to reduce chronic constipation in Hindi

कई तरह के बीज फाइबर के बेहतरीन स्रोत हैं। आप इन्हें स्मूदी (cream) में मिला कर खा सकते हैं या दही या सलाद पर छिड़क कर भी खा सकते हैं।

कब्ज दूर करने के लिए फाइबर युक्त बीजों में शामिल करें –

  • चिया के बीज ,
  • अलसी के बीज और
  • कद्दू के बीज

कब्ज को दूर करने के लिए पिए हर्बल टी  – Drink Hearbal Tea for Constipation in Hindi

Drink Hearbal Tea for Constipation in Hindi
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हर्बल टी में कई प्रकार के पोषक तत्व मौजूद होते हैं जिसमें विटामिन और खनिज प्रमुख हैं, साथ ही हर्बल टी में पाए जाने वाले एंटी-इंफ्लेमेट्री, एंटी-बैक्टीरियल और एंटीऑक्सीडेंट जैसे गुण पाचन तंत्र को तदरूस्त रखने में हमारी मदद करते हैं।

इसके अलावा हर्बल चाय में मौजूद फ्लेवोनॉइड, जिंजरॉल जैसे यौगिक भोजन को पचाने में मदद करते हैं। भोजन के ठीक से पचने से कब्ज और गैस की समस्या नहीं होती हैं।

कब्ज दूर करने के लिए सौंफ की चाय सबसे ज्यादा स्वास्थ्यवर्धक मानी जाती हैं। इसलिए कॉन्स्टिपेशन भगाने के लिए सौंफ की चाय का सेवन किया जा सकता है।

और पढ़ें – आयरन की कमी को दूर करते हैं ऐसे आहार।

कब्ज में परहेज या कब्ज में क्या नहीं खाना चाहिए? – Foods to Avoid in Constipation in Hindi

Foods to Avoid in Constipation in Hindi
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यदि कब्ज से बचना चाहते हैं, तो आप कब्ज में ऐसे आहार के सेवन से बचें जिनमें उच्च मात्रा में कार्बोहाइड्रेट, संतृप्त वसा और ट्रांस वसा मौजूद होता है। इसके अलावा कब्ज की समस्या के दौरान कम या बिना फाइबर वाले खाद्य पदार्थों के सेवन से बचना चाहिए। (13)

तो आइये, अब समझते हैं कि कब्ज में क्या क्या नहीं खाना चाहिए।

कब्ज में नहीं खाना चाहिए उच्च कार्बोहाइड्रेट खाद्य पदार्थ – Avoid high carb foods in chronic Constipation in Hindi

अधिक कार्बोहाइड्रेट खाद्य पदार्थ कॉन्स्टिपेशन पैदा कर सकते हैं। उच्च कार्बोहाइड्रेट खाद्य पदार्थ में शामिल हैं- (14 )

  • सफेद ब्रेड,
  • पास्ता,
  • आलू,
  • सफेद चावल,
  • आइसक्रीम,
  • सॉफ्ट ड्रिंक्स,
  • कैंडी,
  • हाइड्रोजनीकृत या आंशिक रूप से हाइड्रोजनीकृत तेल।

इसके अलावा ध्यान रखें कब्ज में मैदा, नया चावल, काला चना और कच्चा केला बिलकुल भी नहीं खाना है। ये सभी भोज्य पदार्थ कब्ज में योगदान कर सकते हैं।

और पढ़ें – आहार जिनमें होते हैं खूब कार्बोहाइड्रेट (अच्छे और खराब कार्ब्स)

कॉन्स्टिपेशन में हानिकारक हैं संतृप्त वसा – Avoid Saturated Fat in Constipation in Hindi

ऐसे खाद्य पदार्थ जिनमें अधिक मात्रा में संतृप्त वसा होता है उनमें शामिल हैं:

  • पिज्जा, बर्गर, चीज, मेयोनीज, केक जैसे फूड आइटम्स,
  • लाल मांस जैसे बीफ, मेमने का मांस और पोर्क,
  • प्रोसेस्ड मीट,
  • वसायुक्त दूध,
  • मलाई,
  • आइसक्रीम।

और पढ़ें – क्या Green coffee स्वास्थ्य के लिए लाभदायक है? जानिए रिसर्च क्या कहती हैं।

कब्ज में न खाएं ट्रांस फैट – Avoid Trans Fats in constipation in Hindi

कब्ज में ट्रांस फैट के सेवन से बचना चाहिए।

जिन खाद्य पदार्थों में ट्रांस वसा हो सकते हैं उनमें शामिल हैं: (15)

  • मक्खन
  • कुकीज़
  • केक
  • फ्रेंच फ्राइज़
  • चिप्स
  • डोनट्स

कॉन्स्टिपेशन में शर्करा का सेवन कम करें – Reduce sugar intake in constipation in Hindi

कब्ज में अधिक चीनी या एडेड शुगर वाले खाद्य पदार्थों का सेवन कम करना चाहिए। (16)

जिन खाद्य पदार्थों में अतरिक्त शुगर हो सकती है उनमें शामिल हैं:

  • बहुत मीठा दही (Sweet yogurt),
  • आइसक्रीम (Ice Cream),
  • सॉफ्ट ड्रिंक्स (Soft drinks)।
  • सोडा (Soda),
  • कैंडी (Candy),
  • स्पोर्ट्स ड्रिंक (Sports drink),
  • कुकीज (Cookies),
  • बिस्कुट (Biscuits),
  • केक (Cake),
  • पेस्ट्री (Pastry).

कुछ व्यक्तियों में डेयरी उत्पाद कब्ज पैदा कर सकते हैं। यह प्रभाव उन लोगों में सबसे आम है जो गाय के दूध में पाए जाने वाले प्रोटीन के प्रति संवेदनशील होते हैं। डेयरी पदार्थों में मौजूद लैक्टोज कब्ज और गैस का कारण बन सकता है। इसके अलावा अधिक कैफीन और शराब भी कब्ज में योगदान देते हैं। 

कब्ज दूर करने के उपाए और बचाव के उपाय | Prevention of chronic Constipation in Hindi

निम्नलिखित उपाय कब्ज दूर करने में आपकी मदद कर सकते हैं-

  • रोजाना सुबह और शाम व्यायाम करें,
  • खाना खाने के बाद कुछ देर टहलें,
  • समय पर भोजन करें,
  • ताजा एवं हल्का गर्म भोजन करें।
  • भोजन के तुरंत बाद पानी ना पियें,
  • दिन के समय खूब पानी पिएं,
  • भोजन को अच्छी प्रकार से चबाकर एवं धीरे-धीरे खाएं,
  • जितनी भूख लगे उससे कम खाएं,
  • भोजन करने के बाद एकदम बेड पर न लेटें
  • रात में देर तक जागने से बचें,
  • रात में कॉफ़ी का सेवन ना करें,
  • तनावमुक्त जीवन जीने की कोशिश करें,
  • रोजाना सुबह योगासन करें।

और पढ़ें – कैफीन क्या है, जानिए इसके 8 फायदे और नुकसान

कब्ज के लिए डाइट चार्ट | Constipation Diet Chart in Hindi

Breakfast

      Lunch

Snacks

Dinner

Monday

एक ग्लास गाय का दूध और दाल का पराठा

या

गाजर और मटर का परांठा

दाल की खिचड़ी

या

भूरे चावल के साथ कोफ्ता करी

मुट्ठी भर अखरोट, भीगे बादाम, काजू, किसमिस, खजूर

या

फल व ताजे अंकुरित अनाज युक्त सलाद

एक कटोरी दाल,

भिंडी की सब्जी और एक गिलास छाछ के साथ रोटी

Tuesday

एक कटोरी गेहूं का दलिया

या

एक ग्लास गाय का दूध और आलू पराठा

 एक कटोरी पालक पनीर के साथ रोटी और भूरे  चावल

पनीर और मकई सैंडविच

या

पाव भाजी या रोटी भाजी

वेजिटेबल खिचड़ी

Wednesday

एक प्लेट रवा या उपमा या  पोहा

या

सब्जियों के साथ  बनी आटे की सेंवई

 राजमा या छोले के साथ ब्राउन राइस

या

रोटी और मिक्स वेज के साथ रायता

शकरकंद

या

इडली और सांभर

एक कटोरी सब्जी और दही के साथ मिश्रित दाल खिचड़ी

Thursday

एक ग्लास गाय का दूध, एक आमलेट के साथ 2 व्होले ग्रेन ब्रेड

पंजाबी कढ़ी चवाल

या

ब्रोकली की सब्जी के साथ रोटी और चावल

चीज और कॉर्न या सब्जी से बना सैंडविच

एक कटोरी दही के साथ वेजिटेबल पुलाव

Friday

गाजर या पालक के परांठे दही के साथ

या

एक कटोरी गेहूं का दलिया

पालक की सब्जी, मूंग दाल और रोटी

गुड़ या कम चीनी से बना गाजर का हलवा

या

लौकी का हलवा

मिश्रित दाल और दही

या

पालक पनीर के साथ रोटी

Saturday

एक कटोरी सूजी का दलिया

या

उत्पम

या

सब्ज़ी युक्त आमलेट

अरहर दाल, सब्जी और एक कटोरी दही के साथ रोटी 

चिया के बीज

या

अलसी के बीज

या

कद्दू के बीज

कोफ्ता करी,  रोटी और चावल

या

वेजिटेबल पुलाव

Sunday

ओट्स इडली और सांभर

या

लौकी का खस्ता परांठा

गाजर और मटर का परांठा दही

मूंग दाल चीला

या

रवा उपमा

एक गिलास छाछ और

गाजर मटर का पराठा

कब्ज का इलाज कैसे करें | Treatment of constipation in Hindi

कॉन्स्टिपेशन का इलाज निम्नलिखित तरीके से किया जा सकता है। कब्ज तोड़ने की दवा में शामिल हैं –

  • आयुर्वेदिक दवा द्वारा पुरानी कब्ज (chronic constipation) का इलाज,
  • होम्योपैथिक दवा द्वारा पुरानी कब्ज का इलाज,
  • अंग्रेजी दवा द्वारा पुरानी कब्ज का इलाज।

पुरानी कब्ज के लिए आयुर्वेदिक दवा | Kabj ka ayurvedic upchar

आयुर्वेद द्वारा कब्ज का परमानेंट इलाज किया जाना संभव है। आयुर्वेदिक इलाज से पेट की कब्ज के साथ-साथ बदहजमी और गैस की समस्या को भी दूर किया जा सकता है।

कब्ज दूर करने के आयुर्वेदिक तरीकों में शामिल हैं-

मुनक्का – Black raisins for chronic constipation in Hindi

भीगी हुए मुनक्के खाने से न सिर्फ कॉन्स्टिपेशन दूर होती है बल्कि पाचन क्रिया भी मजबूत रहती है। मुनक्के फाइबर से भरपूर होते है साथ ही ये आयरन की कमी को भी दूर करते है।

रोजाना 8-10 ग्राम मुनक्का खाने से कब्ज को दूर किया जा सकता है।

कब्ज की आयुर्वेदिक दवा है अरंडी का तेल – Castor oil for chronic constipation in Hindi

अरंडी का तेल कॉन्स्टिपेशन दूर करने के लिए काफी फायदेमंद मन जाता है। इसके लिए रोजाना रात में सोने से पहले एक गिलास गुनगुने गर्म दूध में दो चम्मच अरंडी का तेल मिलाकर सेवन करें।

कॉन्स्टिपेशन में फायदेमंद है बेल – vine fruit for constipation in Hindi

विशेषज्ञों के अनुसार बेल फाइबर से भरपूर होता है जो कब्ज दूर करने में मदद कर सकता है। आप चाहें तो बेल के पल्प का सेवन कर सकते हैं या फिर इससे बना शरबत भी पी सकते हैं।

गर्मियों में बेल पेट को ठंडा करता है जिससे कॉन्स्टिपेशन के दौरान गैस की समय नहीं होती है।

गैस और कब्ज की आयुर्वेदिक दवा है जीरा और अजवायन – Thyme and Cumin seeds for constipation in Hindi

विशेषज्ञों के अनुसार जीरा और अजवाइन का सेवन गैस और कब्ज की परेशानी को दूर करने में मदद करती है।

जीरा और अजवाइन के सेवन से पहले इसे धीमी आंच कर कुछ मिनट के लिए भून लें । इसके बाद इसमें काला नमक मिक्स कर लें।

रोजाना 1 गिलास गुनगुने पानी के साथ इसका सेवन करने से कब्ज और गैस की परेशानी से छुटकारा मिल सकता है।

त्रिफला चूर्ण से करें कब्ज का परमानेंट इलाज – Triphala churna for constipation in Hindi

त्रिफला का चूर्ण पेट साफ करने का आयुर्वेदिक उपाय सबसे प्रभावी है।

आयुर्वेद के अनुसार त्रिफला को सुबह खली पेट पीने से पुरानी कब्ज की बीमारी दूर हो सकती है।

कब्ज दूर करने के लिए तीन से पांच ग्राम त्रिफला चूर्ण को एक कप गर्म पानी के साथ पियें।

कॉन्स्टिपेशन में फायदेमंद है सौंफ – Fennel seeds for constipation in Hindi

गैस और कॉन्स्टिपेशन से जूझ रहे लोगों के लिए सौंफ काफी फायदेमंद हो सकता है। इसके लिए रात में सोने से पहले 1 चम्मच भुनी हुई सौंफ लें।

इस सौंफ के साथ 1 गिलास गर्म पानी का सेवन करेँ। इससे आपको काफी आराम महसूस हो सकता है।

कब्ज में खाएं ईसबगोल भूसी – Psyllium husk for constipation in Hindi

ईसबगोल की भूसी फाइबर से भरपूर होती है। यह कोलन की सफाई के लिए बहुत ही मददगार साबित होती है।

रोजाना एक गिलास गर्म पानी में 1 से 2 चम्मच  ईसबगोल भूसी का सेवन करें।

अलसी के बीज से करें कब्ज और गैस को दूर –  Flaxseed to relieve chronic constipation in Hindi

अलसी के बीज कब्ज दूर करने के आयुर्वेदिक उपाय में शामिल है।

कॉन्स्टिपेशन और गैस से राहत पाने के लिए अलसी के बीज आपके लिए काफी फायदेमंद हो सकता है। ऐसा इसलिए क्योंकि अलसी के बीज फाइबर से भरपूर होते है जो कब्ज को दूर करने में मदद कर सकते है।

कब्ज से राहत पाने के लिए 1 चम्मच अलसी के बीज का सेवन रात में सोने से पहले करें। इससे आपको काफी आराम मिल सकता है।

और पढ़ें – हर्बल चाय (हर्बल टी) के 8 फायदे और नुकसान।

कब्ज की होम्योपैथिक दवा | Homeopathic medicine for constipation in Hindi

होम्योपैथी के इलाज द्वारा कब्ज को ठीक किया जा सकता है। कब्ज की होम्योपैथिक मेडिसिन निम्नलिखित हैं।

  • एलुमिना सिलिकाटा (Alumina Silicata)
  • लाइकोपोडियम क्लैवाटम (Lycopodium Clavatum)
  • ब्रायोनिया एल्बा (Bryonia Alba)
  • कैल्केरिया कार्बोनिका (Calcarea Carbonica)
  • ग्रेफाइट (Graphites)
  • नैट्रम म्यूरिएटिकम (Natrum Muriaticum)
  • नक्स वोमिका (Nux Vomica)
  • कॉस्टिकम (Causticum)

कब्ज की अंग्रेजी दवा | Allopathic medicine for constipation in Hindi

अगर कब्ज दूर करने के घरेलू नुस्खे काम न करें,तो डॉक्टर कब्ज के इलाज के लिए अंग्रेजी दवा का इस्तेमाल कर सकते हैं।

कब्ज तोड़ने की अंग्रेजी दवा में शामिल हैं-

  • फाइबर  सप्लीमेंट्स
  • आसमाटिक  एजेंट्स
  • स्टूल  सॉफ्टनर्स
  • लुब्रिकेंट्स , जैसे मिनरल  आयल
  • स्टिमुलैंट्स
  • फाइब्रिल
  • डोकुसेटस
  • फेनोल्फथेलिन
  • बिसकॉडिअल
  • सोडियम पिकोसल्फेट

और पढ़ें – Iron Supplements क्या हैं? जानिए इसके फायदे, मात्रा और दुष्प्रभाव

कब्ज दूर करने के लिए योग (पेट साफ करने के लिए योगासन) | Yoga for constipation in Hindi

Yoga for constipation in Hindi
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शरीर को स्वस्थ बनाए रखने के लिए योग सबसे सरल और प्रभावी उपाय है।

आज के समय में गलत खान-पान के कारण अक्सर लोगों को पेट की तकलीफ (जैसे कब्ज और गैस) से जूझना पड़ता है। पेट की तकलीफ से छुटकारा पाने के लिए पाचनतंत्र का मजबूत होना सबसे ज्यादा जरूरी होता है।

आप योग की सहायता से भी पुराने कब्ज का इलाज कर सकते हैं। कब्ज में लाभ पहुंचाने वाले योग में शामिल हैं-

पवन मुक्तासन से करें कॉन्स्टिपेशन ठीक Pawan Muktasana for constipation in Hindi

पवनमुक्त का अर्थ है पवन या हवा को निकलना।

यह आसन पेट की वायु निकालने में मदद करता है, इसलिए इस आसन का नाम पवनमुक्तासन (Gas Release Pose) है।

इसलिए यदि आप कब्ज के दौरान गैस की समय से पीड़ित होते हैं तो पवन मुक्तासन आपके लिए काफी फायदेमंद हो सकता है।

पेट साफ करने के लिए हलासन – Halasan for constipation in Hindi

हलासन दो शब्दो ‘हल’ और ‘आसन’ से मिलकर बना है। हल जिससे किसान खेत जोतता है और आसन मतलब बैठना।

इस आसन को अंग्रेजी भाषा में ‘प्लो पोज’ कहा जाता है।

इस योगासन से आपका पाचन तंत्र तो मजबूत होता ही है बल्कि शरीर को कई अन्य फायदे भी होते हैं जिसमें कॉन्स्टिपेशन प्रमुख है।

इस आसन को करने से रीढ़ की हड्डी मजबूत होती है और साथ ही कंधों और कमर दर्द में भी आराम मिलता है।

इसके अलावा ये आसन थायरॉयड ग्रंथि से जुड़ी समस्याओं को भी दूर करने में मदद करता है।

कब्ज दूर करने के लिए मयूरासन – Mayurasana for constipation in Hindi

मयूर का अर्थ होता है मोर।

इस आसन को करने से शरीर की आकृति मोर की तरह दिखाई देती है, इसलिए इसका नाम मयूरासन पड़ा।

अगर आप पाचन संबंधी समस्याओं से पीड़ित हैं तो मयूरासन आपके लिए फायदेमंद हो सकता है।

यदि आपको पेट संबंधी समस्याएं जैसे गैस बनना, पेट में दर्द रहना, पेट साफ ना होना इत्यादि है तो आपको मयूरासन आसन करना चाहिए।

कॉन्स्टिपेशन ठीक के लिए सुप्त मत्स्येन्द्रासन – Supta Matsyendrasana for constipation in Hindi

सुप्त मत्स्येन्द्रासन एक सरल आसन है। इस आसन को कोई भी कर सकता है। यह जितना सरल होता है उतना ही उपयोगी भी है।

इस आसन को लेट कर किया जाता है। यह आसन रीढ़ की हड्डी को मोड़कर लंबा और मजबूत बनाता है।

इसके साथ ही यह आसन आंतरिक अंगों को विषाक्त पदार्थों से मुक्त करता है।

सुप्त मत्स्येन्द्रासन आसन खून के प्रवाह को पाचन अंगों तक पहुंचने में मदद करता है, जिससे आपके पूरे पाचन तंत्र स्वस्थ तरीके से काम करता है जिससे कब्ज और गैस की समस्या दूर होती है।

और पढ़ें – Steroids दवा क्या है?, जानिए स्टेरॉयड के फायदे और नुकसान

प्रेगनेंसी में कब्ज क्यों होती है? | Constipation in pregnancy in Hindi

गर्भावस्था के दौरान कब्ज के निम्नलिखित कारण हो सकते हैं। (17, 18 & 19)

प्रोजेस्टेरोन हार्मोन में वृद्धि – Increase in progesterone hormone

गर्भावस्था के दौरान कब्ज प्रोजेस्टेरोन हार्मोन में वृद्धि के कारण होती है।

प्रोजेस्टेरोन हार्मोन आंतों की मांसपेशियों को आराम देती है जिससे भोजन और अपशिष्ट आपके सिस्टम के माध्यम से धीमी गति से आगे बढ़ते हैं।

आंतों के धीमा पड़ जाने पर पाचन भी धीमे काम करने लगता है जिससे कब्‍ज की समस्‍या पैदा होती है।

बढ़ता हुआ गर्भाशय – Growing uterus

गर्भावस्था में कॉन्स्टिपेशन बढ़ता हुआ गर्भाशय हो सकता है।

बढ़ता हुआ गर्भाशय आंत्र (bowel) पर दबाव डालता है, जिससे आंतों के माध्यम से मल को स्थानांतरित करना कठिन हो जाता है।

आयरन की गोलियां – Iron pills

विशेषज्ञों का मानना है कि कभी-कभी आयरन की गोलियां भी प्रेगनेंसी में कब्ज का कारण बन सकती हैं।

इसलिए यदि आप आयरन की खुराक ले रही  हैं तो आप खूब पानी पियें या कोई दूसरा आयरन सप्लीमेंट लें।

फाइबर युक्त आहार में कमी – Low Fiber Diet

फाइबर युक्त आहार का ना लिया जाना भी प्रेगनेंसी में कब्ज का कारण हो सकता है। इसलिए डॉक्टर के अनुसार गर्भावस्था में फाइबर युक्त आहार का सेवन करें।

और पढ़ें – जानिए प्रेगनेंसी में क्या नहीं खाना चाहिए।

निष्कर्ष | Conclusion

कब्ज एक आम समस्या है जो 60 वर्ष से अधिक उम्र के लोगों और प्रेग्नेंट महिलाओं में देखी जाती है।

कब्ज का मुख्य कारण फाइबर युक्त आहार का सेवन न करना और कुछ खास तरह की दवाओं को लम्बे समय तक लेना है।

हालांकि, अधिकतर मामलों में घरेलु उपायों द्वारा कॉन्स्टिपेशन ठीक हो जाती है।

फिर भी यदि chronic constipation की समस्या लम्बे समय तक रहती है और मल के साथ खून भी आता है तो यह स्थिति गंभीर हो सकती है। इसलिए ऐसी स्थिति में अपने डॉक्टर से तुरंत संपर्क करें।


ये है chronic constipation के लक्षण कारण और इलाज के बारे में बताई गई पूरी जानकारी। कमेंट में बताएं आपको chronic constipation in Hindi पोस्ट कैसी लगी। अगर आपको पोस्ट पसंद आई हो, तो इसे शेयर जरूर करें।

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Disclaimer : ऊपर दी गई जानकारी पूरी तरह से शैक्षणिक दृष्टिकोण से दी गई है। इस जानकारी का उपयोग किसी भी बीमारी के निदान या उपचार हेतु बिना विशेषज्ञ की सलाह के नहीं किया जाना चाहिए। इसके अलावा किसी भी चीज को अपनी डाइट में शामिल करने या हटाने से पहले किसी योग्य डॉक्टर या आहार विशेषज्ञ (Dietitian) की सलाह जरूर लें। 

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