Prediabetes in Hindi

Prediabetes क्या है? जानिए पूर्व मधुमेह के लक्षण, कारण और आयुर्वेदिक उपचार

Prediabetes in Hindi : प्री-डायबिटीज जिसे बॉर्डरलाइन डायबिटीज या पूर्व मधुमेह भी कहा जाता है एक ऐसी स्वास्थ्य स्थिति है जिसमें रक्त में शर्करा का स्तर सामान्य से अधिक होता है परन्तु यह स्तर इतना अधिक नहीं है कि इसे मधुमेह कहा जा सके।

रिसर्च के अनुसार,  प्री डायबिटीज की डायबिटीज में बदलने की सम्भावना 50% से अधिक होती है। इसलिए प्रीडायबिटीज की स्थिति में ब्लड शुगर लेवल नियंत्रित बनाए रखना जरुरी है।

इस पोस्ट के माध्यम से हम आपको प्री डायबिटीज (पूर्व मधुमेह) क्या है?, प्री-डायबिटीज के लक्षण, कारण, जोखिम कारक, बचाव के उपाय सहित प्रीडायबिटीज और डायबिटीज में अंतर के बारे में बता रहे हैं।

तो आइये अब इस पोस्ट को शुरू करते हैं।

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प्री डायबिटीज (पूर्व मधुमेह) क्या है? | What is Prediabetes in Hindi

Prediabetes in Hindi
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प्री डायबिटीज का मतलब है कि मरीज का ब्लड शुगर लेवल सामान्य से ज्यादा है। परन्तु, यह इतना अधिक नहीं है कि इसे टाइप 2 मधुमेह कहा जा सके। (1)

प्रीडायबिटीज स्थिति अच्छी नहीं मानी जाती है। क्योंकि, यदि इसे अनुपचारित (untreated) छोड़ दिया जाए, तो प्रीडायबिटीज टाइप 2 मधुमेह में बदल सकती है। साथ ही यह स्थिति हृदय रोग, स्ट्रोक, किडनी रोग सहित अन्य स्वास्थ्य सम्बन्धी जटिलताओं को भी जन्म दे सकती है। (2)

कई डॉक्टर प्रीडायबिटीज को टाइप 2 डायबिटीज होने का का पहला चरण या टाइप 2 डायबिटीज होने की शुरुवात मानते हैं।

सौभाग्य से, प्री-डायबिटीज स्थिति को ठीक किया जा सकता है।

प्री डायबिटीज अन्य नामों से भी जाना जाता है। जिसमें शामिल हैं –

  • बॉर्डरलाइन डायबिटीज – Borderline diabetes

  • हाइपोग्लाइसेमिया – Hyperglycemia, which means “high blood sugar”

  • ग्लूकोज टॉलरेंस – Glucose intolerance

  • इम्पाइरेड फास्टिंग ग्लूकोस – Impaired fasting glucose

और पढ़ें – जानिए हार्ट अटैक कब, कैसे और क्यों आता है।

यदि आपको प्री-डायबिटीज है तो मधुमेह होने की संभावना कितनी है?

प्री डायबिटीज से पीड़ित 50 प्रतिशत लोगों को 5-10 साल के भीतर टाइप 2 डायबिटीज होने की सम्भावना रहती है। (3)

हालांकि, प्री डायबिटीज होने का मतलब यह बिल्कुल नहीं है कि आपको टाइप 2 डायबिटीज हो जाएगी।

डॉक्टर प्रीडायबिटीज की स्थिति को खराब होने से बचाने के लिए कई प्रभावी योजना बना सकते हैं, ताकि आपको टाइप 2 मधुमेह से बचाया जा सके।

प्रभावी योजना का अर्थ है जीवनशैली में बदलाव। जिसमें स्वस्थ आहार खाना और व्यायाम करना शामिल है।

और पढ़ें – हृदय रोग क्या है, जानिए इसके लक्षण, कारण और बचाव

प्री-डायबिटीज का निदान कैसे किया जाता है? | How is Prediabetes diagnosed in Hindi

प्री डायबिटीज निदान के लिए कई रक्त परीक्षण उपलब्ध हैं। जिसमें शामिल हैं – (3)

  • फास्टिंग ब्लड शुगर टेस्ट
  • हीमोग्लोबिन A1C टेस्ट
  • ओरल ग्लूकोज टॉलरेंस टेस्ट

प्री डायबिटीज फास्टिंग ब्लड शुगर टेस्ट –

फास्टिंग ब्लड शुगर टेस्ट 8 घंटे के उपवास के बाद किया जाता है।

  • 100 mg/dL (5.6 mmol/L) के नीचे फास्टिंग ब्लड शुगर रेंज सामान्य मानी जाती है।
  • 100 से 125 mg/dL (5.6 से 7.0 mmol/L) के बीच फास्टिंग ब्लड शुगर रेंज प्रीडायबिटीज कहलाती है।
  • 126 mg/dL (7.0 mmol/L) या इससे अधिक फास्टिंग ब्लड शुगर रेंज टाइप 2 मधुमेह का संकेत देती है।

यदि आपका फास्टिंग ब्लड शुगर टेस्ट प्रीडायबिटीज दिखता है, तो डॉक्टर उसके बाद A1C टेस्ट करवाने की सलाह दे सकते हैं।

प्री-डायबिटीज हीमोग्लोबिन A1C टेस्ट या HbA1c

यह परीक्षण पिछले तीन महीनों की शुगर की औसत मात्रा का पता लगता है।

  • 5.7% से नीचे A1C रेंज, रक्त शर्करा का सामान्य स्तर (नार्मल रेंज) माना जाता है।
  • 5.7% से 6.4% के बीच A1C रेंज, प्रीडायबिटीज मानी जाती है।
  • 6.5% या उससे अधिक A1C की रेंज टाइप 2 मधुमेह का संकेत होता है।

कुछ स्थतियों में A1C परीक्षण के नतीजे गलत आ सकती हैं – जैसे गर्भवती महिला या किसी व्यक्ति के ब्लड के  हेमोग्लोबिन की संरचना असामान्य हो।

अमेरिकन डायबिटीज़ एसोसिएशन के अनुसार, ऐसे व्यक्ति जिनका A1C 5.5 से लेकर 6 प्रतिशत तक होता है उनमें मधुमेह होने का खतरा 5 वर्षों में  25 प्रतिशत तक रहता है और वहीं ऐसे व्यक्ति जिनका A1C 6 से 6.4 प्रतिशत होता है उनका यह अनुमान 50 प्रतिशत तक बढ़ जाता है।

प्री डायबिटीज ओरल ग्लूकोज टॉलरेंस टेस्ट

इस टेस्ट में पहला सैंपल 8 घंटे के उपवास के बाद दिया जाता है।

सैंपल देने के बाद आपको चीनी का घोल पिलाया जाता है और फिर दो घंटे बाद फिर से सैंपल दिया जाता है।

  • 140 mg/dL (7.8 mmol/L) से कम रक्त शर्करा का स्तर सामान्य माना जाता है।
  • 140 से 199 mg/dL (7.8 से 11.0 mmol/L) के बीच रक्त शर्करा का स्तर प्रीडायबिटीज माना जाता है।
  • 199 mg/dL (11.1 mmol/L) से अधिक रक्त शर्करा का स्तर टाइप 2 मधुमेह का संकेत देता है।

यदि आप प्रीडायबिटीज पाए जाते हैं तो डॉक्टर हर साल आपके रक्त परीक्षण की सलाह दे सकते हैं।

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प्री-डायबिटीज ब्लड शुगर लेवल्स चार्ट | Prediabetes blood suger range in Hindi

प्री-डायबिटीज रेंज

शुगर टेस्ट 

(Sugar Test)

नॉर्मल

(Normal)

प्री-डायबिटीज

(Pre-Diabetes)

डायबिटीज

(Diabetes)

फास्टिंग ब्लड शुगर टेस्ट

(Blood sugar fasting test)

12 घंटे उपवास के बाद

<100mg/dL 100-125 mg/dL >125 mg/dL
ओरल ग्लूकोज टॉलरेंस टेस्ट

(oral glucose tolerance test)

140 mg/dL (7.8 mmol/L) 140 से 199 mg/dL (7.8 से 11.0 mmol/L) >199 mg/dL
हीमोग्लोबिन A1C शुगर टेस्ट

(HbA1C Sugar Test)

<5.7% 5.7%-6.4% >6.5%

प्री डायबिटीज के शुरुआती प्रमुख लक्षण क्या हैं? | What are the symptoms of Prediabetes in Hindi

Symptoms of Prediabetes in Hindi
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पूर्व मधुमेह के लक्षण – Symptoms of Prediabetes

पूर्व मधुमेह के कोई स्पष्ट लक्षण नहीं है।

प्री-डायबिटीज के तब तक कोई लक्षण दिखाए नहीं देते हैं जब तक कि प्री-डायबिटीज टाइप 2 मधुमेह में विकसित न हो जाए।

हालांकि, त्वचा के रंग का गहरा होना या गहरे धब्बे पड़ना, प्री-डायबिटीज के शुरुवाती लक्षण हो सकते हैं।

इसके अलावा प्री डायबिटीज की स्थिति में त्वचा के रंग में भी बदलाव देखा जा सकता है। (4)

जैसे-

  • कोहनी के रंग में बदलाव,
  • बगल के रंग में बदलाव,
  • घुटने की त्वचा के रंग का बदलना,
  • गले और गर्दन की स्किन में बदलाव होना,
  • आर्मपिट की त्वचा के रंग का बदलना।

प्री-डायबिटीज के अन्य लक्षण में शामिल हो सकते हैं- (5)

  • मुँह सूखना,
  • अधिक प्यास लगना,
  • पेशाब  का बार बार आना,
  • अतिरिक्त भूख,
  • अधिक थकान,
  • धुंधली दृष्टि,
  • चोट या घाव का जल्दी न भरना,
  • किसी भी तरह के संक्रमण का जल्दी ठीक न होना।

और पढ़ें – किडनी स्टोन में लो ऑक्सलेट डाइट के फायदे

प्री डायबिटीज के जोखिम कारक क्या हैं | What are the risk factors of Prediabetes in Hindi

Risk factors of Prediabetes in Hindi
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जोखिम कारक का मतलब है कि किस व्यक्ति को प्री-डायबिटीज होने का खतरा अधिक है। कई जोखिम कारक प्रीडायबिटीज के विकास में योगदान कर सकते हैं।

प्री-डायबिटीज के कुछ मुख्य जोखिम कारक में शामिल हैं – (6)

  • मोटापा, विशेष रूप से पेट का मोटापा,
  • हाई ब्लड प्रेशर,
  • ट्राइग्लिसराइड्स,
  • उम्र (45 से अधिक),
  • पर्याप्त व्यायाम नहीं करना,
  • टाइप 2 मधुमेह का पारिवारिक इतिहास होना,
  • तनाव का बढ़ा हुआ स्तर,
  • धूम्रपान या बहुत अधिक शराब पीना,
  • नियमित रूप से हाई-शुगर ड्रिंक्स का सेवन,
  • पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम (PCOS) से पीड़ित महिला,
  • उच्च घनत्व लिपोप्रोटीन (एचडीएल) कोलेस्ट्रॉल का निम्न स्तर।

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प्री डायबिटीज की जटिलताएं क्या हैं? | What are the complications of Prediabetes in Hindi

प्री-डायबिटीज की बीमारी बढ़ने पर टाइप 2 डायबिटीज का खतरा बढ़ जाता है।

टाइप 2 डायबिटीज के कारण अन्य स्वास्थ सम्बन्धी जटिलताएं होने लगती हैं। जिसमें शामिल हैं- (7 & 8)

  • मधुमेह न्यूरोपैथी (तंत्रिका की क्षति),
  • डायबिटिक रेटिनोपैथी (आंखों की क्षति) का होना,
  • ग्लूकोमा और मोतियाबिंद जैसी बीमारी का बढ़ना,
  • गुर्दे की बीमारी और किडनी का खराब होना,
  • दिल की बीमारी,
  • घावों का धीमे भरना,
  • डायबिटीज हाइपरस्मोलर सिंड्रोम।

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प्री-डायबिटीज का कारण क्या हैं | What are the Causes of pre-diabetes in hindi

Causes of pre-diabetes in hindi
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प्री-डायबिटीज का सटीक कारण अभी तक ज्ञात नहीं है।

हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि पारिवारिक इतिहास और कुछ जेनेटिक्स फैक्टर इस रोग का कारण हो सकते हैं। (9)

इसके अलावा शारीरिक गतिविधि में कमी या मोटापे का अधिक होना भी प्री-डायबिटीज का कारण बन सकता है। (10)

दरअसल, हम जब भी कुछ खाते हैं, तो हमारा शरीर कार्बोहाइड्रेट को तोड़कर इसे ग्लूकोज़ में बदल देता है। इसके बाद इंसुलिन हॉर्मोन (insulin hormone) कोशिकाओं (cells) को ग्लूकोज़ सोखने का निर्देश देती हैं। ग्लूकोज़ सोखने से कोशिकाओं को ऊर्जा मिलती है और वह अपना कार्य आसानी से कर पाती हैं। (11)

परन्तु डायबिटीज के केस में आपका शरीर या तो पर्याप्त इंसुलिन नहीं बना पाता है, या जो इंसुलिन बनाता है उसका शरीर प्रभावी ढंग से उपयोग नहीं कर पाता है। जिसकारण रक्त में ग्लूकोस का स्तर बढ़ जाता है। यह स्थति इंसुलिन प्रतिरोध (Insulin resistance) के कारण आती है। इंसुलिन प्रतिरोध का मतलब है शरीर द्वारा इंसुलिन का उपयोग न किया जाना है। (12)

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प्री डायबिटीज और डायबिटीज में अंतर | Prediabetes vs Diabetes in Hindi

नीचे दी गई टेबल में आप प्री-डायबिटीज और डायबिटीज के बीच अंतर जान सकते हैं।

प्री डायबिटीज

डायबिटीज

परिभाषा प्रीडायबिटीज तब कहा जाता है जब किसी व्यक्ति के रक्त शर्करा का स्तर सामान्य से अधिक होता है। डायबिटीज तब कहा जाता है जब व्यक्ति के रक्त शर्करा का स्तर उच्च होता है।
प्रकार

कोई प्रकार नहीं हैं।

  • टाइप 1 मधुमेह
  • टाइप 2 मधुमेह
  • गर्भकालीन मधुमेह
ओरल ग्लूकोज टॉलरेंस टेस्ट रेंज 140 से 199 mg/dL (7.8 से 11.0 mmol/L) के बीच रहती है। रेंज >199 mg/dL (11.1 mmol/L) से उच्च होती है।
फास्टिंग ब्लड शुगर टेस्ट रेंज 100-126 mg/dL के बीच रहती है। रेंज >126 mg/dL से उच्च होती है।
हीमोग्लोबिन A1C शुगर टेस्ट रेंज 5.7%-6.4% के बीच रहती है। रेंज >6.5% से उच्च होती है।
लक्षण
  • प्री-डायबिटीज के कोई स्पष्ट लक्षण नहीं है।
  • हालांकि, त्वचा के रंग का गहरा होना या गहरे धब्बे पड़ना, प्री-डायबिटीज का शुरुवाती लक्षण हो सकता है।
  • मुँह सूखना
  • अधिक प्यास लगना
  • पेशाब  का बार बार आना
  • अतिरिक्त भूख
  • अधिक थकान
  • धुंधली दृष्टि
  • चोट या घाव का जल्दी न भरना
  • संक्रमण का जल्दी ठीक न होना
इलाज ज्यादातर मामलों में डॉक्टर रोगी के जीवनशैली में बदलाव लाकर प्रीडायबिटीज इलाज शरू कर सकते हैं। जिसमें स्वस्थ भोजन लेना और व्यायाम करना शामिल हैं। डॉक्टर जीवनशैली में बदलाव और मेटफॉर्मिन जैसी दवा लेने की सलाह दे सकते हैं।

क्या प्रीडायबिटीज को रोका या टाला जा सकता है? | Can prediabetes be prevented or avoided in Hindi

जी हैं, प्रीडायबिटीज के जोखिम को कम किया जा सकता है।

आमतौर पर प्रीडायबिटीज का बचाव अतरिक्त वजन कम करके किया जाता है। इसके अलावा लो कर्ब आहार लेकर और नियमित रूप से व्यायाम करके भी इस रोग से बचा जा सकता है या प्रीडायबिटीज को टाइप 2 डायबिटीज में बदलने में देरी की जा सकती है।

प्रीडायबिटीज या मधुमेह की स्थति जितने अधिक समय तक रहती है उतनी ही अधिक स्वास्थ्य समस्याएं उत्पन्न होती है। जिसमें ह्रदय रोग, किडनी का खराब होना आदि शामिल हैं।

इसलिए बीमारी के शुरुवाती दौर में ही प्रीडायबिटीज का  इलाज शुरू कर देना चाहिए।

और पढ़ें – लो कैलोरी डाइट के फायदे, नुकसान और आहार योजना।

प्री डायबिटीज का इलाज | Treatment of Prediabetes in Hindi

प्री डायबिटीज के इलाज के लिए डॉक्टर पहले घरेलू उपायों द्वारा इलाज शुरू करते हैं।

इसके लिए डॉक्टर कम कार्बोहाइड्रेट और कम चीनी वाले खाद्य पदार्थ खाने की सलाह देते हैं और साथ ही शारीरिक गतिविधि अधिक करने के लिए कहते हैं जिसमें कम से कम 30 मिनट तक चलना या व्यायाम करना शामिल है। (13)

शारीरिक गतिविधि आपके शरीर की कोशिकाओं को इंसुलिन के प्रभावों के प्रति अधिक संवेदनशील बनाती हैं। इसका मतलब है कि इंसुलिन आपके रक्त से चीनी को अधिक प्रभावी ढंग से हटा सकता है और इसे ऊर्जा के रूप में उपयोग करने के लिए कोशिकाओं को दे सकता है।

यदि इसके बाद भी प्री डायबिटीज स्थिति बानी रहती है तो डॉक्टर शुगर की ऐलोपैथी दवा शुरू कर सकते हैं। डॉक्टर प्रीडायबिटीज के इलाज में मेटफॉर्मिन या एकरबोस जैसी दवा लेने की सलाह दे सकते हैं। (14)

मेटफोर्मिन मधुमेह की एक प्रभावी दवा है जो आपके लीवर द्वारा निर्मित शर्करा की मात्रा को कम करती है और आपके आहार में शर्करा (sugar) को रक्तप्रवाह में अवशोषित होने से बचाती है।

इसके अलावा मेटफोर्मिन दवा प्रीडायबिटीज को डायबिटीज में बदलने से भी रोकने में मदद कर सकती है।

और पढ़ें – जानिए मधुमेह रोगी डायबिटीज में क्या खाएं और क्या न खाएं।

प्री डायबिटीज का आयुर्वेदिक उपचार | Ayurvedic treatment for Prediabetes in Hindi

Ayurvedic treatment for Prediabetes in Hindi
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आप शुगर को कम करने के लिए आयुर्वेदिक उपायों को भी अपना सकते हैं।

नीचे दिए गए आयुर्वेदिक उपायों द्वारा मधुमेह से बच जा सकता है।

डायबिटीज के इलाज में फायदेमंद तुलसी – Benefits of tulsi leaves for diabetes in Hindi

प्री डायबिटीज के इलाज में तुलसी काफी फायदेमंद होती है। (15)

तुलसी की पत्ती में मौजूद एन्टीऑक्सिडेंट और जरुरी पोषक तत्व शरीर में इन्सुलिन जमा करने वाली और छोड़ने वाली कोशिकाओं को ठीक से काम करने में मदद करती है।

आयुर्वेदिक डॉक्टर मधुमेह में रोजाना खाली पेट दो से तीन तुलसी के पत्ते खाने की सलाह देते हैं। जिसके सेवन से शुगर या डायबिटीज के लक्षणों (sugar ke lakshan) में कमी आती है।

और पढ़ें – HDL Cholesterol क्या है? जानिए गुड कोलेस्ट्रॉल बढ़ाने के तरीके

डायबिटीज के इलाज में फायदेमंद सौंफ – Benefits of Fennel for diabetes in Hindi

शोधकर्ताओं के अनुसार, सौंफ में पाए जाने वाला पोलीफेनोल, एंटीऑक्सिडेंट्स और जिनेरोल, कार्बोहाइड्रेट के अवशोषण को धीमा करते हैं जिससे पेंक्रियाज़ से इंसुलिन के स्राव में वृद्धि होती है। (16, & 17)

जिसके फलस्वरूप, कोशिकाओं की रक्त से ग्लूकोज के सोखने की क्षमता बढ़ जाती है।

और पढ़ें – हाई कोलेस्ट्रॉल के लक्षण, कारण और घरेलू उपचार

डायबिटीज के इलाज में लाभकारी जामुन – Benefits of blackberry for diabetes in Hindi

जामुन का फल खाने से खून में शुगर की मात्रा कंट्रोल में होती है। (18)

इसके अलावा आप जामुन की गुठलियाँ को सूखा लें और फिर उसे पीसकर चूर्ण बना लें।

अब एक चम्मच दिन में दो बार गुनगुने पानी या दूध के साथ इसका सेवन करें। ऐसा करने से मधुमेह की बीमारी को जड़ से समाप्त किया जा सकता है।

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प्री डायबिटीज के उपचार में फायदेमंद है अंजीर के पत्ते – Benefits of Fig leaves for diabetes in Hindi

अंजीर के पत्तों को खाली पेट चबाने या पानी में उबाल कर पीने से मधुमेह कंट्रोल हो सकता है। (19)

अंजीर के पत्तों में मधुमेह विरोधी गुण होते हैं, जिससे ब्लड शुगर लेवल कम होने में मदद मिल सकती है।

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प्री डायबिटीज के उपचार में फायदेमंद है मेथी – Benefits of Fenugreek for diabetes in Hindi

मधुमेह के रोगियों के लिए मेथी बहुत फायदेमंद मानी जाती है। (20)

मेथी  के बीजों में फाइबर और अन्य रसायन होते हैं जो पाचन को धीमा कर सकते हैं और साथ ही शरीर में कार्बोहाइड्रेट और चीनी के अवशोषण को बड़ा सके हैं।

इसके लिए आपक एक चम्मच मेथी के बीज को रात भर एक गिलास पानी में भिगोकर रखें। सुबह खाली पेट बीज समेत पानी को पी लें।

नियमित रुप से इसका सेवन करने से डायबिटीज नियंत्रण में रह सकती है।

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प्री-डायबिटीज नियंत्रण करने मैं फायदेमंद है लहसुन – Benefits of Garlic for diabetes in Hindi

लहसुन के सेवन से कोलेस्ट्रॉल कम करने और मधुमेह को कंट्रोल करने में मदद मिलती है। (21)

इसके लिए आप रातभर लहसुन की 2-3 कलियों को पानी में भिगो दें। और सुबह खाली पेट इन्हें चबाकर खा लें।

और पढ़ें – Acid reflux (हाइपर एसिडिटी) और खट्टी डकार से छुटकारा पाने का घरेलू इलाज

डायबिटीज या शुगर की दवा है करेला- Benefits of Bitter gourd for diabetes in Hindi

करेले में कैरेटिन नामक रसायन होता है जो खून में शुगर लेवल को बढ़ने नहीं देता है। (22)

करेले के 100 ml रस में इतना ही पानी मिलाकर दिन में तीन बार लेने से लाभ मिल सकता है।

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डायबिटीज को नियंत्रण करने में सहायक अलसी के बीज – Benefits of flax seeds for diabetes in Hindi

अलसी के बीज मधुमेह को नियंत्रण करने, इंसुलिन की संवेदनशीलता में सुधार लाने और हृदय रोग के जोखिम को कम कर में मदद करते हैं। (23)

अलसी के बीज मधुमेह टाइप 2 के उपचार में विशेष भूमिका निभाते हैं क्योंकि यह प्री-डायबिटीज में फास्टिंग प्लाज्मा ग्लूकोज (FPG) की सांद्रता को कम करने में मदद करते हैं।

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डायबिटीज में लाभकारी दालचीनी – Benefits of Cinnamon for diabetes in Hindi

रिसर्च के अनुसार, दालचीनी में पॉलीफेनॉल्स (Polyphenols) पाया जाता है। जिसका एंटी-हाइपरग्लाइसेमिक (Anti-hyperglycemic) गुण  इंसुलिन की संवेदनशीलता को बढ़ाता है। (24)

जिससे ब्लड में ग्लूकोज (शुगर) का लेवल कम होने लगता है और डायबिटीज कुछ हद तक नियंत्रित हो जाती है।

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आंवले का रस डायबिटीज में फायदेमंद – Benefits of gooseberry for diabetes in Hindi

आंवले का रस डायबिटीज के लक्षण (Sugar ke lakshan) और उससे होने वाली स्वास्थ समस्याओं को कम करने में मदद कर सकता है। (25)

इसके लिए आप 10 मि.ग्रा. आँवले के जूस को 2 ग्रा. हल्दी के पाउडर में मिलाकर दिन में दो बार सेवन करें।

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डायबिटीज को नियंत्रण करने में फायदेमंद नीम – Benefits of Neem for diabetes in Hindi

नीम में एंटी-बैक्टीरियल और एंटी-फंगल गुण होते हैं। इसके अलावी नीम में एंटी-डायबिटिक गुण भी पाए जाते हैं। ये सभी तत्व मधुमेह को कंट्रोल करने में मदद करते हैं। (26)

कई अध्ययनों से भी पता चला है कि नीम के पत्तों के मधुमेह विरोधी गुण ब्लड में ग्लूकोज की मात्रा को कम करने में मदद करती हैं।

1mg के अनुसार, डायबिटीज या शुगर के लक्षण दिखते ही नीम के पत्तों के जूस का सेवन शुरु कर देना चाहिए। जहां तक हो सके रोज सुबह खाली पेट नीम का रस पिएं।

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प्री-डायबिटीज से बचाव के उपाय | Prediabetes prevention tips in Hindi

Prediabetes prevention tips in Hindi
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प्री डायबिटीज से बचाव कैसे किया जा सकता है इसके लिए हमने नीचे कुछ टिप्स बताई हैं जिन्हें ध्यान में रखकर प्रीडायबिटीज के जोखिम को कुछ हद तक कम किया जा सकता है:

  • अतरिक्त वजन को हमेशा नियंत्रण में रखें।
  • हमेशा स्वस्थ एवं संतुलित आहार का सेवन करें
  • अत्यधिक मीठे खाद्य व पेय पदार्थों के सेवन से भी बचें
  • परिष्कृत वसा का सेवन कम करें
  • ट्रांस फैट को न खाएं
  • रिफाइंड कार्बोहाइड्रेट ना खाए
  • भोजन को एक साथ न खाके छोटे छोटे अन्तराल में लें
  • नियमित रूप से योग या व्यायाम करें
  • अगर परिवार में किसी को मधुमेह की समस्या है, तो डॉक्टर से बात करें और सलाह लें
  • धूम्रपान एवं शराब के सेवन से परहेज करें।

और पढ़ें –  इन एंटीऑक्सीडेंट आहार से करें अपना वजन कम।

प्री-डायबिटीज डाइट प्लान | Prediabetes diet plan in Hindi

डॉक्टर प्री-डायबिटीज में कम ग्लाइसेमिक इंडेक्स (जीआई) वाले खाद्य पदार्थ खाने की सलाह दे सकते हैं।

किसी खाद्य पदार्थ का ग्लाइसेमिक इंडेक्स 0 से 100 के बीच में होता है।

इस इंडेक्स (सूचकांक) के आधार पर, खाद्य पदार्थों को निम्न, मध्यम या उच्च ग्लाइसेमिक खाद्य पदार्थों के रूप में वर्गीकृत किया जाता है।

ध्यान रहे किसी भोजन का जीआई इंडेक्स जितना अधिक होगा, वह उतनी ही तेजी से रक्त शर्करा बढ़ा सकता है।

ऐसे खाद्य पदार्थ जिनका ग्लाइसेमिक इंडेक्स <55 से कम होता है, प्री-डायबिटीज या डायबिटीज में अच्छे माने जाते हैं।

और पढ़ें – डायबिटीज से लेकर कैंसर तक में साबुत अनाज के फायदे

प्री-डायबिटीज में क्या खाना चाहिए? –  Foods to eat in Prediabetes in Hindi

प्री-डायबिटीज में क्या खाना चाहिए? इसे आप नीचे दिए गई प्री-डायबिटीज डाइट प्लान में देख सकते हैं-

सब्जियां

(vegetables)

फल

(Fruits)

साबुत अनाज

(Whole grain)

डेयरी उत्पाद

(Dairy Products)

ग्लाइसेमिक इंडेक्स <55
ब्रोकोली

(Broccoli)

जामुन

(Black Berries)

ब्राउन राइस

(Brown Rice)

बादाम का दूध

(Almond Milk)

पत्ता गोभी

(Cabbage)

चकोतरा

(Pomelo)

ओट्स

(Oats)

नारियल का दूध

(Coconut Milk)

गोभी

(Cauliflower)

संतरा

(Orange)

राई

(Rye)

मैकाडामिया दूध

(Macadamia Milk)

पालक

(Spinach)

आडू

(Peach)

जौ

 (Barley)

अलसी का दूध

(Linseed Milk)

केल

(Kale)

नाशपाती

(Pear)

बल्गर यानि मोटा पिसा हुआ गेहूं

(Bulgar)

सोया दूध

(Soy Milk)

मेथी

(Fenugreek)

आलूबुखारा

(Plum)

बाजरा (ज्वार का आटा)

(Millet)

काजू का दूध

(Cashew Milk)

गाजर

(carrot)

कीवी

(Kiwi)

क्विनोआ

(Quinoa)

मटर का दूध

(Pea Milk)

तोरी

(Zucchini)

अमरुद

(Guava)

पनीर

(Tofu)

शतावरी

(Asparagus)

खुबानी

(Dried Apricot)

चीज़

(Cheese)

टमाटर

(Tomatoes)

खजूर 

(Date)

योगर्ट

(Yogurt)

मशरूम

(Mushrooms)

अनार

(Pomegranate)

बटर   

(Butter)

प्री-डायबिटीज में क्या नहीं खाना चाहिए? | Foods to avoid in Prediabetes in Hindi

Foods to avoid in Prediabetes in Hindi
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यदि आप पूर्व-मधुमेह या मधुमेह से बचना चाहते हैं, तो आपको उच्च कार्बोहाइड्रेट, संतृप्त वसा, ट्रांस वसा और यहां तक कि प्राकृतिक शर्करा के सेवन से बचने या सीमित करने की आवश्यकता होगी।

डायबिटीज में इन खाद्य पदार्थों को बिल्कुल न खाएं –

प्री-डायबिटीज में अधिक कार्बोहाइड्रेट से बचें – Avoid High Carbohydrates in Pre-Diabetes in Hindi

बहुत अधिक कार्ब या गलत प्रकार के कार्ब खाने से कभी-कभी स्वास्थ्य समस्याएं होने लगती हैं, जिनमें सबसे आम समस्या है अवांछित वजन बढ़ना। (27)

वजन बढ़ने से टाइप 2 मधुमेह और मेटाबोलिक सिंड्रोम का खतरा बढ़ जाता है।

अधिक कार्बोहाइड्रेट खाद्य पदार्थों में शामिल हैं-

  • ब्रेड,
  • पास्ता,
  • बीन्स,
  • आलू,
  • चावल,
  • अनाज
  • आइसक्रीम,
  • सॉफ्ट ड्रिंक्स,
  • कैंडी,
  • हाइड्रोजनीकृत या आंशिक रूप से हाइड्रोजनीकृत तेल।

और पढ़ें – आहार जिनमें होते हैं खूब कार्बोहाइड्रेट (अच्छे और खराब कार्ब्स)

पूर्व-मधुमेह में संतृप्त वसा का परहेज करें – Avoid Saturated Fat in Pre-Diabetes in Hindi

सैचुरेटेड वसा वाले खाद्य पदार्थों के सेवन से प्री-डायबिटीज की स्थिति पैदा हो सकती है। (28)

ऐसे खाद्य पदार्थ जिनमें अधिक मात्रा में संतृप्त वसा होता है उनमें शामिल हैं:

  • पिज्जा, बर्गर, चीज, मेयोनीज, केक जैसे फूड आइटम्स,
  • कुछ मांस जैसे बीफ, मेमने का मांस और पोर्क,
  • प्रोसेस्ड मीट,
  • वसायुक्त दूध,
  • मलाई,
  • आइसक्रीम,
  • सफेद ब्रेड,
  • पास्ता
  • साबुत दूध और पनीर।

और पढ़ें – केटोजेनिक डाइट क्या है, जानिए कीटो डाइट के फायदे और नुकसान।

प्री-डायबिटीज में ट्रांस फैट ना खाएं – Avoid Trans Fats in Pre-Diabetes

प्री-डायबिटीज में ट्रांस फैट के सेवन से बचना चाहिए।

जिन खाद्य पदार्थों में ट्रांस वसा हो सकते हैं उनमें शामिल हैं: (29)

  • मक्खन
  • कुकीज़
  • केक
  • फ्रेंच फ्राइज़
  • चिप्स
  • डोनट्स

और पढ़ें – फ्लेक्सिटेरियन डायट : फायदे, नुकसान और डाइट प्लान।

प्री-डायबिटीज में शर्करा का सेवन कम करें – Reduce sugar intake in prediabetes in Hindi

प्री-डायबिटीज में अधिक चीनी या एडेड शुगर वाले खाद्य पदार्थों का सेवन कम करना चाहिए। (30)

जिन खाद्य पदार्थों में अतरिक्त शुगर  हो सकती है उनमें शामिल हैं:

  • बहुत मीठा दही (Sweet yogurt),
  • आइसक्रीम (Ice Cream),
  • सॉफ्ट ड्रिंक्स (Soft drinks)।
  • सोडा (Soda),
  • कैंडी (Candy),
  • स्पोर्ट्स ड्रिंक (Sports drink),
  • कुकीज (Cookies),
  • बिस्कुट (Biscuits),
  • केक (Cake),
  • पेस्ट्री (Pastry).

और पढ़ें –  रेशेदार भोजन (फाइबर युक्त आहार) क्या है? जानिए इनसे होने वाले लाभ।

स्वस्थ मधुमेह आहार के लिए टिप्स | Tips for Prediabetes Diet in Hindi

रक्त शर्करा के स्तर को स्वाभाविक रूप से कम करने के लिए मधुमेह रोगी नीचे दिए गए कुछ टिप्स को अपना सकते हैं।

  • स्वस्थ पौधे आधारित (plant based) खाद्य पदार्थ का सेवन अधिक करें,
  • स्वस्थ वसा खाएं,
  • अतरिक्त कार्बोहाइड्रेट वाले खाद्य पदार्थों के सेवन से बचें,
  • जितना हो सके अधिक फाइबर वाले भोज्य पदार्थों का सेवन करें,
  • खूब पानी पिएं और हाइड्रेटेड रहें,
  • कम ग्लाइसेमिक इंडेक्स वाले खाद्य पदार्थों को चुनें,
  • अपने रक्त शर्करा के स्तर की निगरानी करें,
  • प्रोबायोटिक युक्त खाद्य पदार्थ खाएं।

और पढ़ें – एक अच्छे कुकिंग ऑयल का चुनाव कैसे करें?

निष्कर्ष | Conclusion

प्रीडायबिटीज को यदि अनुपचारित छोड़ दिया जाता है, तो प्रीडायबिटीज कई स्वास्थ्य समस्याओं का कारण बन सकती है, जिसमें टाइप 2 मधुमेह, हृदय रोग और स्ट्रोक शामिल हैं।

सौभाग्य से, प्रीडायबिटीज को रोका जा सकता है या ठीक किया जा सकता है। इसके लिए बस आपको अपने आहार और जीवन शैली में बदलाव लाना है।

डॉक्टर प्रीडायबिटीज में कम कार्बोहाइड्रेट, कम चीनी और अधिक फाइबर युक्त खाद्य पदार्थ खाने की सलाह देते हैं।

इसके अलावा डॉक्टर शारीरिक गतिविधि अधिक करने के लिए कहते हैं जिसमें कम से कम 30 मिनट तक चलना या व्यायाम करना शामिल है।

फिर भी, यदि प्राकृतिक उपचार से प्रीडायबिटीज नियंत्रण में नहीं आ रही है, तो डॉक्टर शुगर की एलोपैथिक दवा शुरू कर सकते हैं।

डॉक्टर प्रीडायबिटीज के इलाज में मेटफॉर्मिन जैसी दवा खाने की सलाह दे सकते हैं।

और पढ़ें – Iron Supplements क्या हैं? जानिए इसके फायदे, मात्रा और दुष्प्रभाव


ये है प्री डायबिटीज के लक्षण, कारण और आयुर्वेदिक उपचार के बारे में बताई गई पूरी जानकारी। कमेंट में बताएं आपको Pre diabetic in Hindi पोस्ट कैसी लगी। अगर आपको पोस्ट पसंद आई हो, तो इसे शेयर जरूर करें।

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Disclaimer : ऊपर दी गई जानकारी पूरी तरह से शैक्षणिक दृष्टिकोण से दी गई है। इस जानकारी का उपयोग किसी भी बीमारी के निदान या उपचार हेतु बिना विशेषज्ञ की सलाह के नहीं किया जाना चाहिए। इसके अलावा किसी भी चीज को अपनी डाइट में शामिल करने या हटाने से पहले किसी योग्य डॉक्टर या आहार विशेषज्ञ (Dietitian) की सलाह जरूर लें। 

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