Mucormycosis In Hindi | Black Fungus क्या है? जानिए इसके लक्षण, कारण और इलाज

Mucormycosis In Hindi पोस्ट के माध्यम से हम आपको ब्लैक फंगस (म्यूकोर्मिकोसिस) क्या है, यह कैसे फैलता है, ब्लैक फंगस (Black fungus in Hindi) के कारण, लक्षण, इलाज और रोकथाम के बारे में बता रहे हैं। 

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ब्लैक फंगस (या म्यूकोर्मिकोसिस) बीमारी क्या है? – Mucormycosis (Black Fungus) meaning in Hindi

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Black fungus in Hindi

ब्लैक फंगस जिसे म्यूकोर्मिकोसिस भी कहा जाता है, एक घातक फंगस संक्रमण है जो फेफड़े, त्वचा और मस्तिष्क को संक्रमित करता है। हालांकि अधिकतर मामलों में हमारा इम्यून सिस्टम ब्लैक फंगस से संक्रमित नहीं होता है और केवल अति दुर्लभ स्थिति में ही यह लोगों को संक्रमित करता है।ब्लैक फंगस संक्रमण (Black fungus disease in Hindi) के अनियंत्रित हो जाने पर लोगों की आंखों की रोशनी चली जाती है और कुछ मामलों में तो ऊपरी जबड़ा तक हटाना पड़ सकता है।

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ब्लैक फंगस होने के क्या कारण है? Mucormycosis  (Black fungus) disease causes in Hindi

ब्लैक फंगस रोग का कारण

म्यूकोर्मिकोसिस जिसे पहले जाइगोमाइकोसिस कहा जाता था, एक गंभीर लेकिन दुर्लभ फंगल संक्रमण है जो म्यूकोर्मिसेट्स नामक मोल्डों (फंगल स्पोर्स) के समूह के कारण होता है। यह फंगल स्पोर्स वातावरण में मौजूद होते हैं। प्रमुख रूप से ब्लैक फंगस साँस के द्वारा अन्दर जाता है और साइनस या फेफड़े को प्रभावित करता है।

ब्लैक फंगस या म्यूकोर्मिकोसिस कैसे फैलता है? How is black fungus infection transmitted in Hindi

Mucormycosis In Hindi

ब्लैक फंगस (म्यूकोर्मिकोसिस) आम तौर पर सांस लेने, दूषित भोजन खाने या खुले घाव का म्यूकोरालेस (Mucormycosis in Hindi) के संपर्क में आने से फैलता है।

ब्लैक फंगस बीमारी (Fungal infection in Hindi) आमतौर पर मिट्टी, पौधों, फफूंद लगी रोटी या ब्रेड और सड़ने वाले फलों और सब्जियों में पाया जाता है।

खराब वेंटिलेशन, दूषित चिकित्सा उपकरण, अस्पताल की गंदी चादरों के माध्यम से भी ब्लैक फंगस फैल सकता है। हालांकि म्यूकोर्मिकोसिस लोगों के बीच ट्रांसमिट नहीं होता है।

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ब्लैक फंगस (म्यूकोर्मिकोसिस) से कौन प्रभावित होता है? High risk group for black fungus infection in Hindi

Mucormycosis In Hindi

ब्लैक फंगस (Black fungus infection in Hindi) का संक्रमण उन व्यक्तियों के लिए ज्यादा खतरनाक हो सकता है जो लंबे समय तक स्टेरॉयड (दवाईका उपयोग करते हैं या जिनकी इम्युनिटी कम होती है जैसे मधुमेह से ग्रस्त रोगी, कैंसर रोगी, ट्रांसप्लांट हुए रोगी, कोरोना वायरस से संक्रमित लोग (जिनका कोरोना का इलाज लम्बे समय तक चला हो), किडनी और लिवर से पीड़ित रोगी या एचआईवी/एड्स से ग्रस्त रोगी।

अध्ययन में पाया गया है कि ब्लैक फंगस उन रोगियों में भी अधिक देखा जा रहा है, जिन्हें अस्पताल में भर्ती रहने के दौरान वेंटिलेटर या ऑक्सीजन पर रखा गया था। जिनमें कोरोना से ग्रस्त रोगी प्रमुख हैं।

यदि म्यूकोर्मिकोसिस (Fungal infection in Hindi) का उपचार ठीक समय में नहीं किया जाए तो यह घातक भी हो सकता है। ब्लैक फंगस संक्रमण इतना दुर्लभ है कि इसका सटीक मृत्यु दर अभी तक स्पष्ट नहीं हो पाया है। हालांकि शोधकर्ताओं का अनुमान है कि कुल मिलाकर, म्यूकोर्मिकोसिस से संक्रमित व्यक्तियों में से लगभग 54% लोगों की मृत्यु हो जाती है।

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ब्लैक फंगस (म्यूकोर्मिकोसिस) के लक्षण क्या हैं? – Black fungal disease (Mucormycosis)symptoms in Hindi  

ब्लैक फंगस बीमारी के लक्षण (Black fungus ke lakshan in Hindi) इस बात पर निर्भर करते हैं कि शरीर में किस स्थान पर ब्लैक फंगस संक्रमण कर रहा है।

ब्लैक फंगस के लक्षण – Symptoms of Mucormycosis in Hindi

यदि ब्लैक फंगस का संक्रमण श्वसन प्रणाली में हो तो इसके लक्षण निम्न हो सकते हैं:
  • खांसी,
  • बुखार,
  • सिरदर्द,
  • नाक बंद,
  • साइनस दर्द,
  • छाती में दर्द,
  • सांस लेने में कठिनाई।
यदि त्वचा ब्लैक फंगस से संक्रमित होती है, तो त्वचा में –
  • फफोले पड़ना,
  • लाल होना,
  • सूजी हुए दिखाई देना और,
  • कभी कभी त्वचा काली भी दिखाई दे सकती है।
साइनस और मस्तिष्क में म्यूकोर्मिकोसिस के लक्षणों में शामिल हैं:
  • एक तरफा चेहरे की सूजन,
  • सरदर्द,
  • नाक बहना,
  • नाक या साइनस में रूकावट महसूस करना,
  • नाक या मुंह के ऊपरी हिस्से पर काले घाव,
  • बुखार और,
  • दृष्टि का धुंधला होना।
गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल (पाचन क्षेत्र) में म्यूकोर्मिकोसिस के लक्षणों में शामिल हैं:
  • पेट में दर्द और रक्तस्राव,
  • जी मिचलाना,
  • उल्टी।
इसके आलावा नाक बंद हो जाना, नाक की ऊपरी परत पर पपड़ी जम जाना, नाक की त्वचा काली पड़ जाना, आंखों में दर्द और धुंधला दिखाई देना भी  ब्लैक फंगस प्रमुख लक्षण (Black fungus ke lakshan in Hindi) हैं।

ब्लैक फंगस या म्यूकोर्मिकोसिस की रोकथाम कैसे करें – How to protect from black fungus in Hindi

वातावरण में म्यूकोर्मिकोसिस (Mucormycosis in Hindi) आम हैं और कम इम्युनिटी वाले व्यक्ति आसानी से ब्लैक फंगस से संक्रमित हो सकते हैं। म्यूकोर्मिकोसिस को रोकने के लिए अभी कोई कारगर टीके नहीं हैं। हालांकि म्यूकोर्मिकोसिस से संक्रमित होने की संभावना को कम करने के लिए कुछ तरीके है जो निम्न हैं –

ब्लैक फंगस की रोकथाम के तरीके –  Prevention of Mucormycosis in Hindi

  • बहुत अधिक धूल वाली जगह में जाने से बचें जैसे निर्माण क्षेत्र। अगर जाना आवश्यक हो तो आप वहां N95 रेस्पिरेटर (एक प्रकार का फेस मास्क) पहन के ही जाएं।
  • पानी से क्षतिग्रस्त इमारतों के सीधे संपर्क से बचें।
  • ऐसी गतिविधियों से बचें जिनमें मिट्टी का संपर्क शामिल हो, जैसे कि यार्ड का काम या बागवानी।
  • कोरोना संक्रमण से ठीक हुए मरीजों को साफ सफाई पर खास तौर से ध्यान देने की जरूरत है। नियमित रूप से गरम पानी से कुल्ला करते रहें और नहाते समय शरीर को अच्छे से साफ करें।
  • कोरोना रिपोर्ट नेगेटिव आने के बाद अपना टूथ ब्रश अवश्य बदल दें।

ब्लैक फंगस या म्यूकोर्मिकोसिस की पहचान कैसे होती है? – Diagnosis for Mucormycosis (Black Fungus) in Hindi

  • म्यूकोर्मिकोसिस (Mucormycosis in Hindi) संक्रमण होने पर डॉक्टर उस स्थान से तरल पदार्थ का एक नमूना एकत्र कर उसे प्रयोगशाला में माइक्रोस्कोपी के लिए भेज सकते हैं।
  • इसके आलावा संक्रमित स्थान से ऊतक का नमूना (बायोप्सी) निकला जा सकता है।
  • डॉक्टर संक्रमित स्थान (जैसे श्वसन तंत्र, मस्तिष्क आदि) का सीटी स्कैन के लिए भी कह सकते हैं।

ब्लैक फंगस या म्यूकोर्मिकोसिस का इलाज कैसे किया जाता है? – Mucormycosis (Black Fungus) infection treatment in Hindi

ब्लैक फंगस का इलाज क्या है? – Treatment of Mucormycosis In Hindi

ब्लैक फंगस के इलाज (Black Fungus ka ilaj in Hindi) में पहला कदम नसों में एंटिफंगल दवाएं देना है और शल्य चिकित्सा द्वारा सभी संक्रमित ऊतकों (tissues) को हटाना शामिल है। संक्रमित ऊतक को हटाने से संक्रमण को और फैलने से रोका जाता है।
सामान्य ऐंटिफंगल दवाएं (Black Fungus treatment in Hindi) जो आपके डॉक्टर म्यूकोर्मिकोसिस के लिए लिख सकते हैं उनमें शामिल हैं:

ब्लैक फंगस की दवा – Medicine for Black fungus in Hindi

  • एम्फोटेरिसिन बी (amphotericin B) – नसों में दी जाती है।
  • पॉसकोनाज़ोल (posaconazole) – मौखिक रूप से दी जाती है।
  • इसावुकोनज़ोल (isavuconazole) – मौखिक रूप से दी जाती है।
ये हैं ब्लैक फंगस (म्यूकोर्मिकोसिस) संक्रमण के लक्षण, इलाज और रोकथाम के तरीके। हमें कमेंट में बताएं आपको यह पोस्ट कैसी लगी। अगर आपको ये पोस्ट पसंद आई हो तो इस पोस्ट को शेयर जरूर करें।
ऊपर दी गई जानकारी पूरी तरह से शैक्षणिक दृष्टिकोण से दी गई है और यह कहीं से भी योग्य डॉक्टर द्वारा दिए गए मेडिकल सुझाव का विकल्प नहीं है। 
 

सन्दर्भ (References)

  • https://en.wikipedia.org/wiki/Mucormycosis
  • https://www.cdc.gov/fungal/diseases/mucormycosis/symptoms.html
  • https://www.healthline.com/health/mucormycosis
  • https://www.ncbi.nlm.nih.gov/books/NBK544364/
  • https://www.ncbi.nlm.nih.gov/pmc/articles/PMC3286196/
  • https://www.ncbi.nlm.nih.gov/pmc/articles/PMC4158140/
  • https://www.ncbi.nlm.nih.gov/pmc/articles/PMC6162664/
  • https://en.wikipedia.org/wiki/Mucormycosis
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