PCOD problems In Hindi

PCOD problems | पीसीओडी क्या है?, जानिए इसके लक्षण, कारण और घरेलू उपचार

PCOD problems in Hindi : पॉलीसिस्टिक ओवेरियन रोग (PCOD), जिसे पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम (PCOS) के रूप में भी जाना जाता है, महिलाओं में होने वाली एक हार्मोनल समस्या है जो उनके मासिक धर्म व गर्भधारण करने की क्षमता को प्रभावित करती है। हालांकि, बहुत सी महिलाओं को पॉलीसिस्टिक ओवरी डिजीज (पॉलीसिस्टिक डिम्बग्रंथि रोग) के बारे में पता तक नहीं होता है और वह इस रोग से उम्र भर प्रभावित रहती हैं। 

इस पोस्ट के माध्यम से हम आपको पीसीओडी के लक्षण, कारण और घरेलू उपचार के बारे में विस्तार से बताते हैं।

तो आइये अब इस पोस्ट को शुरू करते हैं।

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Meaning of PCOD in Hindi/ PCOD Full Form in Hindi

PCOD  का पूरा नाम पॉलीसिस्टिक ओवेरियन डिजीज है जिसे हिंदी भाषा में पॉलीसिस्टिक डिम्बग्रंथि रोग भी कहा जाता है।

PCOD ऐसी स्वास्थ्य स्थिति है जो किशोर और युवा महिलाओं को उनके असंतुलन हॉर्मोन के कारण प्रभावित करती है।

महिलाओं की प्रजनन प्रणाली मुख्य रूप से पांच प्रजनन हार्मोन अर्थात् एस्ट्रोजन, प्रोजेस्टेरोन, एण्ड्रोजन, फॉलिकल स्टिमुलेटिंग हार्मोन और ल्यूटिनाइजिंग हार्मोन की परस्पर क्रिया द्वारा नियंत्रित होती है। 

जिसमें एस्ट्रोजन और प्रोजेस्टेरोन हार्मोन, मासिक धर्म के चक्र को नियंत्रित करते हैं, एण्ड्रोजन बालों के विकास के लिए महत्वपूर्ण है और इसके अलावा फॉलिकल स्टिमुलेटिंग हार्मोन और ल्यूटिनाइजिंग हार्मोन, ओवरी से परिपक्व अण्डों के निकलने को नियंत्रित करते हैं। 

इन हार्मोनों के असंतुलन से ही पॉलीसिस्टिक अंडाशय सिंड्रोम (पॉलीसिस्टिक ओवेरियन रोग) नामक एक विकार उत्पन्न होता है।

पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम के कारण अधिकांश महिलाओं का मासिक धर्म (Menstrual cycle) अनियमित हो जाता है, जिसमें कभी मासिक धर्म ज्यादा तो कभी पूरी तरह रुक जाता है।

मासिक धर्म के असमान्य होने से महिलाओं को गर्भधारण करने में मुश्किल होने लगती है। इसके आलावा पीसीओडी के कारण अंडाशय (Overy) में सिस्ट (द्रव से भरी छोटी थैली) का विकास, अण्डों (eggs) का अविकसित होना, चेहरे में सामान्य से ज्यादा मुंहासे और शरीर में बाल आने लगते हैं। 

और पढ़ें – जानिए प्रेगनेंसी के शुरुआती लक्षण क्या हैं, और कब दिखते हैं।

पीसीओडी (या पीसीओएस) के लक्षण क्या हैं ?। PCOD problem symptoms in Hindi

Symptoms of  PCOD in Hindi
Symptoms of  PCOD in Hindi

PCOD sign in Hindi

पॉलीसिस्टिक ओवेरियन रोग या पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम के लक्षण और संकेत (Symptoms of PCOD in Hindi) हर एक महिलाओं में भिन्न हो सकते हैं।

हालांकि, अधिक वजन वाली महिलाओं में पीसीओडी के लक्षण आमतौर पर अधिक गंभीर होते हैं।

पीसीओडी/ पीसीओएस के कुछ सामान्य संकेत और लक्षणों में शामिल हैं:

  • अनियमित मासिक चक्र (Irregular menstrual cycle)
  • गर्भधारण में असमर्थता (Infertility)
  • बार-बार गर्भपात होना (Miscarriage) 
  • गंभीर मुँहासे (Severe acne)
  • बालो का झड़ना (पुरुष-पैटर्न गंजापन) (Hair loss)
  • चेहरे और शरीर पर बालों की असामान्य वृद्धि (Abnormal growth of hair)
  • त्वचा का काला पड़ना (Dark skin)
  • अतिरिक्त वजन बढ़ना (Excess weight)
  • पेडू में दर्द (Pelvis pain)
  • अंडाशय में सिस्ट (cyst in ovary) 
  • अण्डों का अविकसित होना (Undeveloped eggs)
  • भावनात्मक रूप से अस्थिर रहना (Emotionally unstable) और 
  • चिड़चिड़ापन (Irritability)

पीसीओडी (पीसीओएस) के कारण क्या हैं? | Causes of PCOD problems in Hindi

causes of PCOD in Hindi
Causes of PCOD in Hindi

महिलाओं में पॉलीसिस्टिक ओवेरियन रोग होने का सही कारण ज्ञात नहीं है।

हालांकि, अधिकांश विशेषज्ञ मानते हैं कि आनुवंशिक कारक (Genetic factors) पीसीओडी का प्रमुख कारण हो सकता है। जिसमें एण्ड्रोजन और इंसुलिन का उच्च स्तर होना मुख्य हैं।

पीसीओडी के कारणों को आप नीचे पढ़ सकते हैं-

1. पीसीओएस का कारण है एण्ड्रोजन का उच्च स्तर (High levels of Androgens Hormones)

एण्ड्रोजन का उच्च स्तर पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम का कारण हो सकता है। 

एण्ड्रोजन को “पुरुष हार्मोन” भी कहा जाता है, हालांकि महिलाएं भी अपने शरीर में एण्ड्रोजन की थोड़ी मात्रा बनाती हैं।

ये एण्ड्रोजन हार्मोन पुरुष लक्षणों के विकास को नियंत्रित करते हैं।

PCOD वाली महिलाओं में एण्ड्रोजन का स्तर सामान्य से अधिक हो जाता है। सामान्य से अधिक एण्ड्रोजन का स्तर अंडे को ओवरी या अंडाशय से रिलीज़ होने से रोकता है जिससे मासिक धर्म नहीं आता है।

अंडे के ना निकलने से महिलाऐं शादी के बाद गर्भधारण नहीं कर पाती हैं।

इसके अलावा ल्यूटिनाइजिंग हार्मोन, टेस्टोस्टेरोन हार्मोन और प्रोलैक्टिन हार्मोन का बढ़ा हुआ स्तर भी पीसीओएस का कारण हो सकता है। 

2. पीसीओडी का कारण है इंसुलिन का उच्च स्तर (High levels of insulin)

इंसुलिन एक हार्मोन है जो ब्लड में मौजूद शुगर की मात्रा को नियंत्रित करता है।

कभी-कभी इंसुलिन प्रतिरोध के कारण ब्लड में इंसुलिन का स्तर उच्च हो जाता है और जिसकारण अंडाशय अधिक मात्रा में टेस्टोस्टेरोन नामक हार्मोन का उत्पादन करने लगते हैं

टेस्टोस्टेरोन,  फॉलिकल्स के विकास में हस्तक्षेप करते हैं और सामान्य ओव्यूलेशन को रोकते हैं मतलब अंडे बनने नहीं देते हैं।

इंसुलिन का उच्च स्तर (या इंसुलिन प्रतिरोध) उन महिलाओं में ज्यादा मिलता है जो मोटापे से ग्रस्त होती हैं, अस्वस्थ भोजन लेती हैं, पर्याप्त शारीरिक गतिविधि नहीं करती हैं या उनके परिवार में मधुमेह (आमतौर पर टाइप 2 मधुमेह) का पारिवारिक इतिहास होता है। 

3. पीसीओएस का कारण है गलत आहार (Wrong diet)

जंक फूड और प्रिजरवेटिव आहार का अधिक सेवन करना पॉलीसिस्टिक ओवेरियन रोग का कारण हो सकता है। 

इसके आलावा ज्यादा वसायुक्त एवं मीठा भोजन करना भी इस रोग का कारण हो सकता है। 

4. पीसीओडी का कारण है तनाव (Tension) 

तनाव भी पॉलीसिस्टिक ओवरी रोग का एक मुख्य कारण है।

अधिक तनाव रक्तचाप को बढ़ाता है जिससे पीसीओडी का खतरा बढ़ता है। 

पीसीओडी की जटिलताएं | PCOD problem complications in Hindi

पीसीओएस से पीड़ित महिलाओं को निम्न स्वास्थ्य समस्याएं हो सकती हैं।

पीसीओडी की जटिलताओं में शामिल हैं –

1. मधुमेह (Type 2 diabetes)

पॉलीसिस्टिक ओवेरियन रोग (PCOD) से पीड़ित आधे से अधिक महिलाओं में 40 वर्ष की आयु तक टाइप 2 मधुमेह विकसित होने का खतरा रहता है।

2. गर्भकालीन मधुमेह (Gestational diabetes)

पीसीओडी वाली महिलाओं को गर्भकालीन मधुमेह हो सकता है। 

गर्भकालीन मधुमेह ऐसी स्थति है जिसमें गर्भवती महिला मधुमेह से पीड़ित हो जाती है जो माँ और बच्चे दोनों के लिए नकरात्मक होता है।

मां को गर्भकालीन मधुमेह होने से बच्चे को भी आगे चल के टाइप 2 मधुमेह होने का खतरा रहता है।

3. हृदय रोग (Heart disease)

पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम से पीड़ित महिलाओं को हृदय रोग का अधिक जोखिम रहता है, और यह जोखिम उम्र के साथ बढ़ता जाता है।

4. उच्च रक्तचाप (High blood pressure)

पीसीओडी वाली महिलाओं को उच्च रक्तचाप का खतरा बना रहता है।

उच्च रक्तचाप से हृदय, मस्तिष्क और गुर्दे को नुकसान पहुंचा सकता है।

6. स्ट्रोक (Stroke)

पीसीओएस से पीड़ित महिलाओं में रक्त के थक्के बनने की सम्भावना अधिक रहती है जो कभी कभी स्ट्रोक का कारण बनता है। 

और पढ़ें – जानिए हार्ट अटैक कब, कैसे और क्यों आता है।

अब समझते हैं PCOS test kaise hota hai?

पीसीओडी की जांच कैसे होती है?। Diagnosis of PCOD problem in Hindi

पॉलीसिस्टिक ओवेरियन रोग (पीसीओडी) की जांच निम्नलिखित तरीके से की जाती है।

1. अनियमित पीरियड्स को पहचान कर पीसीओडी की जांच (Irregular or skipped periods)

पीसीओडी की जांच के लिए डॉक्टर आपके पीरियड के बारे में पूछ सकते हैं।

पीसीओडी से पीड़ित अधिकांश महिलाओं का पीरियड्स अनियमित रहता है। जो यह दर्शाता है कि आपका अंडाशय नियमित रूप से अंडे नहीं बना रहा है। 

2. एण्ड्रोजन स्तर द्वारा पीसीओडी की जांच (Androgen level in blood)

डॉक्टर पीसीओडी की जांच के लिए रक्त में एण्ड्रोजन स्तर की जाँच करा सकते हैं।

एण्ड्रोजन का उच्च स्तर पॉलीसिस्टिक ओवेरियन डिजीज से पीड़ित महिलाओं में निम्न लक्षण को देखता है जिसमें 

  • चेहरे या शरीर में अतिरिक्त बाल का होना, 
  • सिर के बालों का झड़ना,
  • चेहरे में अधिक मुंहासे होना।

इसके अतरिक्त पीसीओडी के निदान के लिए डॉक्टर थायरॉइड, कोलेस्ट्रॉल, इंसुलिन और ट्राइग्लिसराइड के स्तर की जांच करवा सकते हैं।

और पढ़ें – एमनियोटिक द्रव क्या है? प्रेगनेंसी में एमनियोटिक द्रव के स्तर का कम या ज्यादा होना

3. अल्ट्रासाउंड द्वारा पीसीओडी की जांच (Ultrasound)

अल्ट्रासाउंड पॉलीसिस्टिक ओवेरी की स्थिति को दिखता है।

पॉलीसिस्टिक ओवेरियन रोग से पीड़ित महिलाओं में ओवेरी आंशिक रूप से विकसित हुई या एक या दोनों ओवेरी (अंडाशयों) का आकार 10 मिली से अधिक बढ़ हुआ दिखाई देता है।

4. पैल्विक परीक्षा द्वारा पीसीओडी की जांच (Pelvic Examination)

पैल्विक परीक्षा आपके अंडाशय या प्रजनन पथ के अन्य भागों में किसी भी समस्या का पता लगाने के लिए किया जाता है।

पीसीओडी की रोकथाम । Precautions of PCOD problem in Hindi/ PCOD problem Treatment in Hindi

पीसीओडी को पूरी तरह ठीक करना मुश्किल है फिर भी कुछ बातों का ध्यान रखकर पीसीओएस (PCOD) से बचा जा सकता है। जिसमें विशेष रूप से जीवनशैली में बहुत बदलाव लाना शामिल है।

आइये जानते हैं कि पीसीओडी से बचाव के लिए क्या करें।

1. पॉलीसिस्टिक ओवेरियन रोग की रोकथाम के लिए वजन कम करें |  Lose weight

महिलाएं पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम से बचने के लिए अपना अतरिक्त वजन कम रखें।

वजन घटाने से इंसुलिन होर्मोनेस और एण्ड्रोजन होर्मोनेस के स्तर को कम किया जा सकता है। इन होर्मोनेस का उच्च स्तर पीसीओडी का कारण बनता है।

और पढ़ें – डायबिटीज से लेकर कैंसर तक में साबुत अनाज के फायदे

2. पॉलीसिस्टिक ओवेरियन रोग के बचाव के लिए कार्बोहाइड्रेट सीमित करें | Limit carbohydrates

उच्च कार्बोहाइड्रेट आहार इंसुलिन के स्तर को बढ़ा सकते हैं। इंसुलिन का उच्च स्तर पीसीओडी का कारण बन सकता है। इसलिए पीसीओएस के बचाव के लिए महिलाएं कार्बोहाइड्रेट की मात्रा सीमित करें।

और पढ़ें – एक अच्छे कुकिंग ऑयल का चुनाव कैसे करें?

3. पॉलीसिस्टिक ओवेरियन रोग के उपचार के लिए व्यायाम करें | Regular exercise

पीसीओएस के इलाज में व्यायाम एक अहम भूमिका निभा सकता है।

यदि आप पीसीओडी से पीड़ित हैं, तो रोजाना व्यायाम करने से इंसुलिन प्रतिरोध को कम या खत्म किया जा सकता है।

व्यायाम रक्त शर्करा के स्तर को कम करने में मदद करता है। जिससे पीसीओडी को रोका जा सकता है।

और पढ़ें – आहार जिनमें होते हैं खूब कार्बोहाइड्रेट (अच्छे और खराब कार्ब्स)

पीसीओडी का घरेलू उपचार। Home Remedies of PCOD problem in Hindi

पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम के उपचार के लिए आयुर्वेद में कई ऐसी सामग्री का सुझाव दिया गया है जो इस रोग के लक्षणों को कम करने में मदद करते हैं। जिसमें दालचीनी, पुदीना और तुलसी विशेष रूप से शामिल हैं

1. दालचीनी से पीसीओडी का करें इलाज | Cinnamon for PCOD problem treatment in Hindi

दालचीनी पीसीओडी के इलाज में मदद कर सकता है।

रिसर्च के अनुसार दालचीनी में पॉलीफेनॉल्स (Polyphenols) पाया जाता है। जिसका एंटी-हाइपरग्लाइसेमिक (Anti-hyperglycemic) गुण इंसुलिन की संवेदनशीलता को बढ़ाता है। जिससे ब्लड में ग्लूकोज का लेवल कम होने लगता है और डायबिटीज कुछ हद तक नियंत्रित हो जाती है। 

इसके अतिरिक्त दालचीनी (Solution for PCOD problem in Hindi ) शरीर का  अतिरिक्त वजन कम करने, पाचन को स्‍वस्‍थ्‍य बनाए रखने, प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत करने आदि में भी मदद करता है।

और पढ़ें – दालचीनी चाय के स्वास्थ्यवर्धक फायदे, बनाने की विधि और नुकसान

2. पुदीने पीसीओडी में फायदेमंद | Mint for PCOD problem treatment in Hindi

अधिकांश मामलों में अतरिक्त वजन पीसीओडी का कारण बनता है। इसलिए वजन को नियंत्रित बनाए रखना जरुरी है।

पुदीने में एंटी-इंफ्लेमेटरी और एंटी-ओबेसोजेनिक (Anti-obesogenic) तत्व, वजन को प्राकृतिक रूप से कम (मिंट के फायदे) करने में मदद करते हैं। इस लिहाज से देखा जाए तो पुदीने का सेवन पीसीओडी में फायदेमंद हो सकता है।

सुबह के वक्त पुदीने की चाय पीने से मेटाबॉलिज्म (Metabolism) और पाचन (Digestion) में सुधार होता है साथ ही पुदीने की चाय पीने से यह लीवर की सेहत में भी सुधर लाता है।  

3. तुलसी का सेवन पीसीओडी में लाभकारी | Basil for treatment of PCOD problem in Hindi   

तुलसी के अन्दर एन्टी-एन्ड्रोजेनिक गुण पाया जाता है जो पीसीओडी के लक्षणों को कम करने में मदद करता है।

साथ ही पुदीने में एंटी-इंफ्लेमेटरी और एंटी-ओबेसोजेनिक (Anti-obesogenic) तत्व वजन को प्राकृतिक रूप से कम करने में मदद करती है।

पीसीओडी के जोखिम क्या हो सकते हैं?। Risks of PCOD in Hindi 

Risks of PCOD in Hindi
Risks of PCOD in Hindi

यदि पीसीओडी अनुपचारित छोड़ दिया जाए तो महिलाओं में निम्नलिखित जोखिम बढ़ सकते हैं।

  • गर्भवती ना होना (Infertility or subfertility), 
  • मोटापे का शिकार होना (Weight gain around your middle), 
  • इंसुलिन के प्रति प्रतिरोध होना (Insulin resistance)
  • मधुमेह टाइप 2 होना (Type 2 diabetes)
  • उच्च कोलेस्ट्रॉल होना (High cholesterol) 
  • उच्च रक्त चाप होना (High blood pressure)
  • दिल की बीमारी होना (Heart disease)
  • स्ट्रोक पड़ना (Stroke)
  • स्लीप एपनिया होना – सोते समय सांस रुक रुक के आना (Sleep apnea)
  • डिप्रेशन और चिंता होना (Depression and anxiety)
  • गर्भाशय से रक्तस्राव और गर्भाशय में कैंसर का जोखिम होना (Endometrial cancer)
  • नींद की समस्या (Sleep problems)
  • जिगर की सूजन (Inflammation of the liver)
  • प्रीक्लेम्पसिया विकार (Pre-eclampsia)
आदि शामिल हैं। 

और पढ़ें – नजरअंदाज न करें गर्भावस्था की इन 8 समस्याओं को

ध्यान रखें, गर्भावस्था के दौरान पीसीओडी होने से प्रीक्लेम्पसिया डिसऑर्डर (गर्भवती महिला का उच्च रक्तचाप) का खतरा बढ़ सकता है, जो मां और अजन्मे बच्चे दोनों के लिए खतरनाक है।

इसके आलावा मुँहासे, त्वचा में काले धब्बे, त्वचा की अन्य समस्याएं, शरीर या चेहरे के बालों का बढ़ना आदि जटिलताएं भी पीसीओडी के जोखिम में शामिल हैं। 

पीसीओडी के लिए इंडियन डाइट प्लान | PCOD diet in Hindi

PCOD diet in Hindi
Foods for PCOD in Hindi

पीसीओडी में क्या खाना चाहिए?। PCOD problems diet plan in Hindi

पॉलीसिस्टिक ओवेरियन रोग (पीसीओडी) को नियंत्रित करने में आहार महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। जिसमें फाइब युक्त भोज्य पदार्थ उपयुक्त माने जाते हैं।

उच्च फाइबर वाला भोजन पाचन प्रक्रिया को धीमा करते हैं और रक्त में शर्करा के स्तर को कम रखते हैं जिससे इंसुलिन प्रतिरोध का मुकाबला करने में मदद मिलती है।

फल, सब्जियां और अनाज फाइबर युक्त आहार के प्रमुख स्रोत हैं। जिसमें 

  • ब्रोकोली, फूलगोभी और साग, 
  • हरी और लाल मिर्च 
  • पीली मूंग, हरी मूंग, चना दाल, बीन्स और साबुत दालें,
  • बादाम, नट्स और सीड्स 
  • मीठे आलू, कद्दू, ब्रोकली और कटहल 
  • तरबूज, जामुन, नाशपाती, अनार , ब्लूबेरी और ब्लैकबेरी
  • ईसबगोल की भूसी,
  • जई का दलिया,
  • टोंड दूध, सोया दूध, टोफू, पनीर और दही
  • ओमेगा -3 फैटी एसिड में उच्च फैटी मछली, जैसे सैल्मन और सार्डिन

 आदि शामिल हैं। 

 

पीसीओडी/ पीसीओएस में क्या नहीं खाना चाहिए? । Foods to Avoid in PCOD in Hindi

Foods to Avoid in PCOD in Hindi
Foods to Avoid in PCOD in Hindi

पॉलीसिस्टिक ओवेरियन रोग (पीसीओडी) से पीड़ित महिलाओं को अत्यधिक परिष्कृत कार्बोहाइड्रेट (Refined carbohydrates) और उच्च ग्लाइसेमिक इंडेक्स (High glycemic index) वाले खाद्य पदार्थों से बचना चाहिए।

ऐसा इसलिए, क्योंकि ऐसे खाद्य पदार्थ पीसीओडी के लक्षणों को और भी ज्यादा खराब कर सकते हैं। जिसमें फ्रेंच फ्राइज़, रेड मीट और अन्य प्रोसेस्ड मीट प्रमुख हैं।

इसके अलावा –

  • उच्च ओमेगा -6 वसा वाले खाद्य पदार्थ,
  • कैफीन,
  • प्रिजर्वेटिव भरे खाद्य पदार्थ,
  • कृत्रिम रूप से बने मीठे खाद्य पदार्थ,
  • नमकीन खाद्य पदार्थ, 
  • बहुत तेल-घी वाले खाना,
  • जरुरत से ज्यादा मसालेदार खाना,
  • मफिन्स,
  • ग्लूटेन युक्त आहार जैसे पास्ता और सफेद ब्रेड, 
  • हैम्बर्गर, और सूअर का मांस

 आदि भी पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम के लक्षणों को खराब कर सकते हैं। 

निष्कर्ष (Conclusion)

पॉलीसिस्टिक ओवेरियन रोग या पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम, महिलाओं में होने वाली एक हार्मोनल स्थिति है। जो उनके गर्भधारण करने की क्षमता को प्रभावित करती है।

पीसीओडी से पीड़ित महिलाओं को उनके गर्भावस्था के दौरान कई जटिलताओं का सामना करना पड़ता है जिसमें गर्भपात, उच्च रक्तचाप, गर्भावधि मधुमेह, समय से पहले शिशु का जन्म होना आदि जटिलताएं शामिल हैं।

हालांकि, यदि पीसीओडी का समय रहते इलाज शुरू किया जाए तो यह समस्या महिलाओं को ज्यादा प्रभावित नहीं करती है।

इसलिए महिलाओं का समय से पहले जागरूकता होना जरुरी है। उन्हें सही इलाज मिलना और उनका स्वस्थ भोजन लेना, पीसीओडी की समस्या को काफी हद तक कम कर सकती है।


ये हैं पॉलीसिस्टिक ओवेरियन रोग (पीसीओडी) के लक्षण, कारण और घरेलू उपचार के बारे में बताई गई महत्वपूर्ण जानकारी। कमेंट में बताएं आपको यह पोस्ट कैसी लगी। अगर यह पोस्ट पसंद आई हो तो इस पोस्ट को शेयर जरूर करें। 

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Disclaimer : ऊपर दी गई जानकारी पूरी तरह से शैक्षणिक दृष्टिकोण से दी गई है। इस जानकारी का उपयोग किसी भी बीमारी के निदान या उपचार हेतु बिना विशेषज्ञ की सलाह के नहीं किया जाना चाहिए। इसके अलावा किसी भी चीज को अपनी डाइट में शामिल करने या हटाने से पहले किसी योग्य डॉक्टर या आहार विशेषज्ञ (Dietitian) की सलाह जरूर लें। 

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