Pregnancy Problems And Solutions in Hindi

Pregnancy Problems : गर्भावस्था की 8 प्रमुख समस्याएं और समाधान

Pregnancy problems in Hindi : गर्भावस्था के दौरान महिला के जीवन में कई तरह की समस्याएं (गर्भावस्था की जटिलताएं) आ सकती हैं जो मां और बच्चे दोनों के स्वास्थ्य को प्रभावित कर सकती हैं। हालांकि इनमें से अधिकांश समस्याएं (problems) सामान्‍य होती हैं, लेकिन कुछ समस्याएं ऐसी होती हैं जिन्हें नजरअंदाज नहीं किया जा सकता है। इस पोस्ट के माध्यम से हम गर्भावस्था की 8 प्रमुख समस्याएं और उनके समाधान को विस्तार से बता रहे हैं।

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गर्भावस्था की 8 प्रमुख समस्याएं और समाधान | Pregnancy problems and solution in Hindi

Pregnancy Problems In Hindi,गर्भावस्था की समस्याएं, गर्भावस्था की जटिलताएं

Pregnancy complications in Hindi

गर्भावस्था की समस्याएं (जटिलताएं) कई कारणों से आ सकती हैं। इसलिए गर्भावस्था के दौरान आने वाली समस्याओं को हमेशा अपने डॉक्टर से साझा करें। गर्भावस्था की 8 प्रमुख समस्याएं निम्नलिखित हैं –

1. रक्तस्राव होना (Heavy bleeding)
2. गर्भावधि मधुमेह (Gestational diabetes)
3. गर्भाशय ग्रीवा की अपर्याप्तता (cervical insufficiency)
4. प्लेसेंटल अब्रप्शन (Placental abruption)
5. कम या अधिक एमनियोटिक द्रव (Amniotic fluid)
6. प्री-एक्लेम्पसिया (Preeclampsia)
7. वेनस  थ्रोम्बोसिस (Venous thrombosis)
8. मोलर गर्भधारण (Molar pregnancy)

और पढ़ें- प्रेगनेंसी के बाद डिप्रेशन : जानिए लक्षण, कारण, इलाज और बचाव 

Pregnancy Problems In Hindi
गर्भावस्था के दौरान होने वाली 8 प्रमुख समस्याएं

गर्भावस्था की समस्या है रक्तस्राव (Heavy bleeding pregnancy problems in Hindi)

प्रेगनेंसी में रक्तस्राव की समस्या (जटिलता) निम्नलिखित कारणों के कारण हो सकती है –

a. गर्भावस्था में एक्टोपिक प्रेगनेंसी (Ectopic pregnancy meaning in Hindi)

यदि प्रेग्नेंट महिला को भारी रक्तस्राव हो रहा हो और साथ में तेज पेट दर्द और पीरियड जैसी ऐंठन महसूस हो रही हो, तो यह अस्थानिक गर्भावस्था का संकेत हो सकता है। जिसे एक्टोपिक प्रेगनेंसी (Ectopic pregnancy) या ट्यूबल प्रेग्‍नेंसी भी कहा जाता है। एक्टोपिक गर्भावस्था, तब होती है जब निषेचित अंडा (fertilized egg) गर्भाशय (uterus) के अलावा किसी और जगे (फैलोपियन ट्यूब्स से) जुड़ जाता है। फैलोपियन ट्यूब्स में जगे ना होने के कारण भ्रूण, फैलोपियन ट्यूब में अतिरिक्त दबाव डालता है जिससे फैलोपियन ट्यूब कभी-कभी फट जाती है और जिसके चलते अधिक रक्तस्राव (Pregnancy problems in Hindi) होने लगता है। ऐसी स्थिति कभी-कभी गर्भवती के लिए जानलेवा भी हो सकती है।
एक्टोपिक प्रेगनेंसी की समस्या का समाधान (Solution for Ectopic pregnancy in Hindi)

एक्टोपिक प्रेगनेंसी गर्भावस्था को रोकने का कोई तरीका नहीं है।

b. गर्भावस्था के दौरान गर्भपात (Miscarriage in Hindi)

ऐंठन के साथ भारी रक्तस्राव, गर्भपात का संकेत हो सकता है। ऐसी समस्या पहली तिमाही या शुरुआती दूसरे तिमाही में हो सकती है। इसके विपरीत, तीसरी तिमाही में पेट दर्द के साथ रक्तस्राव, प्लेसेंटल एब्स्ट्रक्शन को दर्शाता है जिसमें प्लेसेंटा, गर्भाशय से अलग हो जाती है और गर्भ की मृत्यु तक हो जाती है।

गर्भपात की समस्या का समाधान (Solution for Miscarriage in Hindi)

हमने कुछ सुझाव दिए हैं जो गर्भपात को रोकने में आपकी मदद कर सकते हैं:

  • नियमित रूप से डॉक्टर का परामर्श लें,
  • नियमित रूप से अपनी जांच करवाएं,
  • प्रेगनेंसी के दौरान भारी वजन ना उठाएं
  • जरुरी वैक्सीन लगवाएं,
  • मल्टीविटामिन लें,
  • दवाइयां डॉक्टर के अनुसार ही लें,
  • पौष्टिक आहार लें,
  • हानिकारक भोज्य पदार्थ से बचें,
  • शरीर को हाइड्रेट रखें,
  • पूरी नींद लें व आराम करें,
  • धूम्रपान न करें,
  • शराब ना पियें,
  • व्यायाम करते रहें।

और पढ़ें – गर्भावस्था के दौरान 8 महत्वपूर्ण पोषक तत्व

गर्भावस्था की जटिलता है गर्भावधि मधुमेह (Gestational diabetes pregnancy problems in Hindi)

गेस्टेशनल डायबिटीज (गर्भावधि मधुमेह) गर्भावस्था की समस्या है, जो एक प्रकार का मधुमेह है।

डॉक्टर गेस्टेशनल डायबिटीज का निदान गर्भावस्था के दौरान करते हैं और यदि इसका इलाज समय रहते ना कराया जाए तो गर्भवती महिला, गर्भावस्था के बाद मधुमेह से पीड़ित हो सकती है। इसके आलावा आगे चल कर गर्भवती महिला टाइप 2 डायबिटीज, हाइपोग्लाइसीमिया और श्वसन संकट सिंड्रोम से भी पीड़ित हो सकती है।

गर्भावधि मधुमेह की समस्या का समाधान (Solution for Gestational diabetes in Hindi)

हालांकि गर्भावधि मधुमेह रोका नहीं जा सकता है। फिर भी महिलाएं इसके होने की संभावनाओं को निम्नलिखित उपायों को अपना कर कम जरूर कर सकती हैं।

  •  गर्भावस्था से पहले अपना अतरिक्त वजन कम करें 
  • मल्टीविटामिन लें,
  • पौष्टिक आहार लें,
  • हानिकारक भोज्य पदार्थ को ना लें,
  • शरीर को हाइड्रेट रखें,
  • पूरी नींद लें व आराम करें,
  • धूम्रपान न करें और शराब ना पियें,
  • व्यायाम करते रहें

और पढ़ें – जानिए गर्भावस्था की 8 प्रमुख समस्याएं और समाधान।

गर्भावस्था की समस्या है कमजोर ग्रीवा (Cervical insufficiency pregnancy complications in Hindi)

कमजोर ग्रीवा, गर्भावस्था के दौरान होने वाली एक समस्या है। प्रेगनेंसी के दौरान बढ़ता बच्चा, गर्भाशय ग्रीवा (uterine cervix) यानी बच्चेदानी का मुख पर लगातार दबाव डालता है। कुछ मामलों में, गर्भाशय ग्रीवा को संभालने के लिए यह दबाव बहुत अधिक हो जाता है और गर्भाशय ग्रीवा के खुलने से बच्चा समय से पहले ही बाहर आ जाता है। जिसे गर्भाशय ग्रीवा की अपर्याप्तता (cervical insufficiency) या अक्षम गर्भाशय ग्रीवा (incompetent cervix) या सरवाइकल की कमजोरी (Cervical weakness) कहा जाता है।

जिन महिलाओं को पहला बच्चा सर्जरी से होता है, ऐसी महिलाऐं इस समस्या के लिए अधिक संवेदनशील होती हैं। सरवाइकल की कमजोरी का पता अल्ट्रासाउंड में किया जाता है जहां गर्भाशय ग्रीवा की लंबाई को मापा जाता है। इसके उपचार में अधिकांश महिलाओं को बेड रेस्ट (bed rest) की सलाह दी जाती है। गर्भाशय ग्रीवा की अपर्याप्तता का उपचार कई कारकों पर निर्भर करता है, जिसमें आपकी आयु, गर्भाशय ग्रीवा की लंबाई और पिछली गर्भावस्था के परिणाम शामिल हैं।

कमजोर ग्रीवा की समस्या का समाधान (Solution for Cervical insufficiency in Hindi)

कमजोर ग्रीवा का समाधान, डॉक्टर द्वारा ग्रीवा में टांके लगा कर किया जा सकता है।

और पढ़ें – जानिए प्रेगनेंसी में अल्ट्रासाउंड (सोनोग्राफी) कब और क्यों होता है।

गर्भावस्था की जटिलता है प्लेसेंटल अब्रप्शन (Placental abruption pregnancy complications in Hindi)

कितने ही मामलो में शिशु के पैदा होने से पहले ही प्लेसेंटा पूरी तरह से या आंशिक रूप से गर्भाशय से अलग हो जाती है। जिससे भ्रूण को उचित पोषक तत्व और ऑक्सीजन प्राप्त नहीं हो पाती है।

आमतौर पर गर्भावस्था के तीसरे तिमाही में यह समस्या सामने आती है। ऐसा होने पर वैजाइना से रक्तस्राव, गर्भाशय में संकुचन और पेट में दर्द हो सकता है।

प्लेसेंटल अब्रप्शन (गर्भावस्था की समस्या) की समस्या के कारण का अभी तक कोई पक्का जवाब नहीं मिला है।

प्लेसेंटल अब्रप्शन की समस्या का समाधान (Solution for Placental abruption in Hindi)

माना गया है कि शारीरिक आघात (strokes) प्लेसेंटा को शिशु से अलग कर सकता है। इसके अलावा उच्च रक्तचाप और अधिक शारीरिक कार्य भी प्लेसेंटा और गर्भाशय को नुकसान पहुंचा सकतें हैं। इसलिए, इस समस्या से बचने के लिए गर्भवती महिलाओं को अधिक सावधानियां बरतनी चाहिए। इसलिए गर्भवती महिलाओं को बिलकुल भी ऐसे कार्य नहीं करने चाहिए जिससे उनको शारीरिक आघात हो। इसके अलावा उच्च रक्तचाप से बचना चाहिए और कम शारीरिक कार्य करना चाहिए।

और पढ़ें – गर्भावस्था की तीसरी तिमाही के प्रेगनेंसी टेस्ट।

गर्भावस्था की समस्या है एमनियोटिक द्रव की कमी या अधिकता (Low or excess amniotic fluid pregnancy complications in Hindi)

एम्नियोटिक द्रव, भ्रूण का कुशन कहलाता है जो भ्रूण को गर्भाशय में होने वाले आघात से सुरक्षा प्रदान करता है। यह गर्भ के अंदर के तापमान को नियंत्रित बनाए रखने में भी मदद करता है।

हालांकि, बहुत कम एमनियोटिक द्रव (ऑलिगोहाइड्रामनिओस) या बहुत अधिक एमनियोटिक द्रव (पॉलीहाइड्रमनिओस) होने से गर्भ में पल रहे शिशु में बुरा प्रभाव पड़ता है। कम एमनियोटिक द्रव, बच्चे की मांसपेशियों, अंगों, फेफड़ों और पाचन तंत्र  के विकास को रोकता है। इसके विपरीत अधिक एमनियोटिक द्रव निम्नलिखित  प्रभाव डालते हैं जैसे –

  • अम्निओटिक झिल्ली का समय से पहले टूटना,
  • प्लेसेंटल अब्रप्शन,
  • समय से पहले प्रसव होना,
  • प्रसव के बाद रक्तस्राव।

एम्नियोटिक द्रव की कमी या अधिकता, आमतौर पर दूसरी तिमाही के दौरान पता चलती है जब भ्रूण साँस लेने लगता है। जिन महिलाओं में एम्नियोटिक द्रव काम होता है उन महिलाओं में खारा द्रव (saline), एमनियोटिक थैली (amniotic sac) में डाला दिया जाया है। बहुत अधिक एमनियोटिक द्रव वाली महिलाओं में, दवा का उपयोग द्रव उत्पादन को कम करने के लिए किया जा सकता है या उनका कुछ एम्नियोटिक द्रव बाहर निकाल दिया जाता है।

एमनियोटिक द्रव की कमी या अधिकता की समस्या का समाधान (Solution for amniotic fluid in Hindi)

निम्नलिखित उपायों द्वारा एमनीओटिक फ्लूइड के स्तर को बढ़ाया जा सकता है –
  • खूब पानी पिएं,
  • उचित आहार लें,
  • एमनियोइन्फ्यूजन
  • एल-आर्जिनिन (L-arginine) सप्लीमेंट लें,
  • शराब न पिएं,
  • हर्बल सप्लीमेंट से बचें,
  • नियमित रूप से हल्के व्यायाम करें।
इसके अलावा गर्भाशय में एमनियोटिक द्रव को दो तरीकों द्वारा कम किया जा सकता है जिसमें पहला एमनियोसेंटेसि प्रक्रिया और दूसरा तरीका मेडिसिन का इस्तेमाल करके है। एमनियोसेंटेसिस एक ऐसी प्रक्रिया है जो डॉक्टर द्वारा की जाती है जिसमें आपके शरीर से अतिरिक्त एमनियोटिक द्रव को बाहर निकला जाता है।

और पढ़ें – गर्भावस्था की दूसरी तिमाही के दौरान प्रेगनेंसी टेस्ट।

गर्भावस्था की जटिलता है प्री-एक्लेम्पसिया (Preeclampsia in pregnancy problem in Hindi)

प्रीक्लेम्पसिया की समस्या (जटिलता) एक ऐसी स्थिति है जो महिला में उच्च रक्तचाप और मूत्र में उच्च प्रोटीन स्तर के कारण होती है। यह आमतौर पर गर्भधारण के 20 सप्ताह के बाद विकसित होती है। हालांकि, इसके होने का कारण अभी तक पता नहीं चला है। प्री-एक्लेम्पसिया के निम्न लक्षण हो सकते हैं –

  • चेहरे और हाथों में सूजन आना,
  • मूत्र उत्पादन में कमी होना,
  • जी मिचलाना,
  • ऊपरी पेट में दर्द,
  • गंभीर सिरदर्द होना,
  • उल्टी होना,
  • सिर चकराना,
  • अचानक वजन बढ़ना

ज्यादातर मामलों में प्री-एक्लेम्पसिया, शिशु के स्वास्थ्य को प्रभावित नहीं करता है। हालांकि, प्री-एक्लेम्पसिया के कुछ मामलों में यह प्लेसेंटा को पर्याप्त रक्त प्राप्त करने से रोक सकता है साथ ही प्रीक्लेम्पसिया शिशु में गंभीर जटिलताएं पैदा कर सकता है। ये समस्याएं निम्नलिखित हैं –

  • शिशु  की धीमी वृद्धि होना,
  • जन्म के वक़्त शिशु के वजन मे कमी होना,
  • शिशु का पहले ही जन्म हो जाना,
  • बच्चे के लिए साँस लेने में कठिनाई होना,
  • प्लेसेंटल अब्रप्शन इत्यादि।

प्री-एक्लेम्पसिया समस्या का समाधान (Solution for Preeclampsia in Hindi)

प्री-एक्लेम्पसिया में (Pregnancy problems in Hindi) डॉक्टर्स, उच्च रक्तचाप को काम करने वाली दवाइयों और कॉर्टिकोस्टेरॉइड्स (Corticosteroid pill) का उपयोग कर सकते हैं।

और पढ़ें – जानिए प्रेगनेंसी के शुरुआती लक्षण क्या हैं, और कब दिखते हैं।

गर्भावस्था की समस्या है वेनस थ्रोम्बोसिस (Venous thrombosis in pregnancy problem in Hindi)

यह एक रक्त का थक्का (गर्भावस्था की जटिलता) है जो सामान्य रूप से पैर की नस में विकसित हो सकता है। महिलाओं में गर्भावस्था और प्रसव के दौरान या विशेष रूप से प्रसव के बाद रक्त का थक्का बनता है। महिलाओं में थक्के विकसित होने का अधिक खतरा तब होता है जब वह:

  • 30 वर्ष की आयु से अधिक हो,
  • पिछले तीन या अधिक प्रसव हुए हों,
  • चलना फिरना कम हो,
  • अधिक वजन वाली हों,
  • पहली डिलीवरी सिजेरियन हुई हो,
  • वेनस थ्रोम्बोसिस किसी परिवार के सदस्य में हो।

वेनस थ्रोम्बोसिस की समस्या का समाधान (Solution for Venous thrombosis in Hindi)

नियमित रूप से पैरों का व्यायाम वेनस थ्रोम्बोसिस की समस्या को दूर किया जा सकता है। इसके अलावा थक्का-रोधी (Anticoagulants) दवाएं द्वारा भी वेनस थ्रोम्बोसिस को रोका जा सकता है।

और पढ़ें – प्रेगनेंसी के दौरान ऐसे करें अपनी देखभाल, होगा स्वस्थ शिशु।

गर्भावस्था की समस्या है मोलर गर्भधारण (Molar pregnancy in pregnancy problem in Hindi)

मोलर गर्भधारण (Pregnancy complication in Hindi), प्लेसेंटा का एक असामान्य रूप है। जिसमें भ्रूण के बजाय,एक असामान्य मास का टुकड़ा फर्टिलाइजेशन के बाद गर्भाशय के अंदर बन जाता है। जिसे गर्भावधि ट्रोफोब्लास्टिक (Gestational trophoblastic) रोग या गर्भाशय ट्यूमर भी कहा जाता है। यह दो प्रकार का हो सकता है: 
  • पूर्ण ( complete) और
  • आंशिक  (partial)
पूर्ण मोलर गर्भधारण तब होती है जब शुक्राणु (sperm) एक खाली अंडे (egg) को फर्टिलाइज करता है। जिससे प्लेसेंटा बन जाती है और गर्भावस्था के हार्मोन जैसे HCG का उत्पादन करता शुरू कर देते है, लेकिन  गर्भाशय के अंदर कोई भ्रूण नहीं होता है। हालांकि, एक आंशिक मोलर गर्भधारण तब होती है जब गर्भाशय के अंदर असामान्य मास का टुकड़ा और भ्रूण दोनों ही होते हैं। ऐसी स्थिति में, बढ़ते हुए असामान्य मास के टुकड़े हो जल्द ही हटा दिया जाता है।

मोलर गर्भधारण की समस्या का समाधान (Solution for Molar pregnancy in Hindi)

मोलर गर्भावस्था को रोकने का कोई तरीका नहीं है। यदि आपकी पिछली मोलर गर्भावस्था हुई है, तो आप अपनी प्रारंभिक मोलर गर्भावस्था के एक वर्ष के बाद दूसरी गर्भावस्था की योजना बनानी चाहिए।

ये हैं गर्भावस्था की 8 प्रमुख समस्याएं और उनका समाधान। कमेंट में बताएं आप को यह पोस्ट (Pregnancy problems in Hindi) कैसी लगी। साथ ही इस पोस्ट को शेयर जरूर करें।

Disclaimer : ऊपर दी गई जानकारी पूरी तरह से शैक्षणिक दृष्टिकोण से दी गई है। इस जानकारी का उपयोग किसी भी बीमारी के निदान या उपचार हेतु बिना विशेषज्ञ की सलाह के नहीं किया जाना चाहिए।

इसके अलावा किसी भी चीज को अपनी डाइट में शामिल करने या हटाने से पहले किसी योग्य डॉक्टर या आहार विशेषज्ञ (Dietitian) की सलाह जरूर लें।

संदर्भ (References)

इस ब्लॉग [WEB POST GURU: THE ULTIMATE GUIDE TO HEALTHY LIVING] में आने और पोस्ट को पढ़ने के लिए आपका धन्यवाद 

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