Postpartum Depression: प्रसवोत्तर अवसाद के लक्षण, कारण और उपचार

प्रसवोत्तर अवसाद जिसे अंग्रेजी में पोस्टपार्टम डिप्रेशन (Postpartum Depression in Hindi) कहा जाता है एक गंभीर मानसिक बीमारी है जो महिलाओं के व्यवहार और शारीरिक स्वास्थ्य दोनों को प्रभावित करता है। अधिकांश महिलाएं डिलीवरी के बाद तनाव का शिकार होने लगती हैं। कई बार यह तनाव इतना बढ़ जाता है कि यह मां और बच्चे दोनों के लिए हानिकारक साबित होता है। सौभाग्यवश, कुछ घरेलू उपाय द्वारा पोस्टपार्टम डिप्रेशन से बचा जा सकता है। इस पोस्ट के माध्यम से हम आपको प्रसवोत्तर अवसाद के लक्षण, कारण, उपचार समेत इसके बचाव के बारे में विस्तार से बता रहे हैं।

Postpartum Depression

प्रसवोत्तर अवसाद क्या होता है? (Postnatal depression meaning in Hindi)

पोस्टपार्टम डिप्रेशन (या पोस्टनेटल  डिप्रेशन) जिसे हिंदी भाषा में प्रसवोत्तर अवसाद (प्रसवोत्तर मनोविकृति) कहते हैं एक गंभीर मानसिक बीमारी है जो महिलाओं के व्यवहार और शारीरिक स्वास्थ्य को प्रभावित करता है। यही कारण है कि पोस्टपार्टम डिप्रेशन से ग्रस्त महिलाओं में चिड़चिड़ापन, चिंता, उदासी, निराशा, अकेलापन और भूख कम या ज्यादा लगना समेत कई लक्षण नजर आते हैं। 

“अधिकांश महिलाएं डिलीवरी के बाद तनाव का शिकार होने लगती हैं। कई बार यह तनाव इतना बढ़ जाता है कि यह मां और बच्चे दोनों के लिए हानिकारक साबित होता है।”

हालांकि, प्रसव के बाद होने वाले तनाव या डिप्रेशन (प्रसवोत्तर मनोविकृति) का अभी तक कोई सही कारण ज्ञात नहीं हुआ है। पर फिर भी माना जाता है कि मां के शारीरिक और भावनात्मक स्थिति में बदलाव के कारण यह स्थिति उत्पन्न होती है। इसके अलावा हार्मोन परिवर्तन और नींद का अभाव भी इसके प्रमुख कारण हो सकते हैं।

पोस्टपार्टम डिप्रेशन शिशु के जन्म के बाद कभी भी हो सकता है। महिलाओं को यह डिप्रेशन डिलीवरी के तुरंत बाद लगभग 1 से 3 सप्ताह के भीतर शुरू हो जाता है जबकि कई महिलाओं में पोस्टपार्टम डिप्रेशन एक साल बाद भी देखा गया है। पोस्टपार्टम डिप्रेशन, 7 में से 1 महिला (लगभग 15 प्रतिशत) को प्रभावित करता है। कुछ मामलो में देखा गया है कि यह स्थिति बच्चे को भी नकारात्मक रूप से प्रभावित कर सकती है। 

चलिए अब प्रसवोत्तर अवसाद के लक्षण और कारण के बारे मैं समझते हैं।

क्या हैं प्रसवोत्तर अवसाद के लक्षण? (Symptoms of Postpartum depression (Postnatal depression) in Hindi)

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पोस्टनेटल  डिप्रेशन के लक्षण

पोस्टपार्टम डिप्रेशन (प्रसवोत्तर अवसाद) महिलाओं को अलग-अलग तरह से प्रभावित कर सकता है, नीचे प्रसवोत्तर अवसाद के सामान्य संकेत और लक्षण दिए गए हैं:
  • चिंतित होना, 

  • निराश होना, 

  • चिड़चिड़ापन,

  • भूख कम लगना,

  • थकान और सुस्ती,

  • मूड का उदास होना,

  • असहाय महसूस करना,

  • बच्चे के साथ लगाव न होना,

  • दर्द, जैसे सिरदर्द या पेट दर्द,

  • बेचैनी, बिना बात के गुस्सा होना,

  • निर्णय लेने में असमर्थ महसूस करना,

  • बार-बार रोने का मन करना या रोना आना, 

  • सोचने या ध्यान केंद्रित करने में कठिनाई होना, 

  • बच्चे की देखभाल करने में असमर्थ महसूस करना,

  • दोस्तों और परिवार से बात ना करने का मन करना

  • बच्चे के साथ भावात्मक संबंध बनाने में कठिनाई।

प्रसवोत्तर अवसाद के कारण क्या हैं? (Causes of Postpartum depression in Hindi)

Postpartum depression causes in Hindi

प्रसवोत्तर अवसाद (Postnatal depression) का सही कारण क्या है इस बात की अभी तक कोई पुष्टि नहीं हुई है। हालांकि डॉक्टर्स का मानना है कि आनुवंशिक और पर्यावरणीय कारक इसमें विशेष रूप से योगदान देते हैं।

निम्न कारण प्रसवोत्तर अवसाद (Postpartum Depression) के जोखिम को बढ़ा सकते हैं:

1. प्रसवोत्तर अवसाद का कारण है हार्मोन के स्तर में बदलाव

शिशु के जन्म के बाद आपके एस्ट्रोजन और प्रोजेस्टेरोन होर्मोनेस में होने वाली तेज गिरावट, पोस्टपार्टम डिप्रेशन का एक अहम कारण हो सकता है साथ ही थायरॉयड ग्रंथि द्वारा उत्पन्न थायरॉयड हार्मोन में होने वाली गिरावट आपको थका हुआ, सुस्त और उदास महसूस करा सकता है।

2. पोस्टपार्टम डिप्रेशन का कारण है नींद की कमी होना

जब आप नींद से वंचित और अभिभूत होती हैं, तो आपको छोटी-छोटी समस्याओं को भी संभालने में परेशानी हो सकती है जो पोस्टपार्टम डिप्रेशन का कारण बन सकती है।

और पढ़ें – गर्भावस्था की पुष्टि के लिए रक्त परीक्षण।

3. प्रसवोत्तर मनोविकृति का कारण है चिंता होना

आप नवजात शिशु की देखभाल को लेकर चिंतित हो सकती हैं। जो आगे चल के जो पोस्टपार्टम डिप्रेशन का कारण बनती है।

4. पोस्टनेटल डिप्रेशन का कारण है स्व-छवि ख़राब होना

शिशु के जन्म के बाद आप कम आकर्षक महसूस कर सकती हैं, अपनी पहचान की भावना के साथ संघर्ष कर सकती हैं, या महसूस कर सकती हैं कि आपने अपने जीवन पर नियंत्रण खो दिया है। इनमें से कोई भी समस्या पोस्टपार्टम डिप्रेशन में अहम योगदान कर सकती है।

5. प्रसवोत्तर अवसाद के अन्य कारण

  • आर्थिक तनाव,
  • अपर्याप्त डाइट,
  • महिला का अकेले रहना
  • जुड़वाँ या तीन बच्चे होना
  • अच्छी मां बनने का दबाव,
  • खाली समय का आभाव होना,
  • प्रसव के दौरान जटिलताएं होना,
  • अपने लिए समय न निकाल पाना,
  • स्तनपान कराने में कठिनाई होना,
  • समय से पहले शिशु का जन्म होना,
  • ऑफिस में या घर पर अतिरिक्त तनाव,
  • डिप्रेशन का पारिवारिक इतिहास होना,
  • स्वास्थ्य समस्याओं वाले बच्चे का होना
  • परिवार और दोस्तों से समर्थन ना मिलना,
  • जन्म के समय कम वजन वाले बच्चे का होना,
  • हाल ही में तलाक या किसी प्रियजन की मृत्यु होना। 

क्या प्रसवोत्तर अवसाद (पोस्टपार्टम डिप्रेशन) आपके बच्चे को प्रभावित कर सकता है? (Can Postpartum Depression affect your baby in Hindi?)

जी हाँ बिलकुल, पोस्टपार्टम डिप्रेशन आपके बच्चे को प्रभावित कर सकता है। जो माँएं पोस्टपार्टम डिप्रेशन से गुजर रही होती हैं और उसका इलाज नहीं हो रहा होता है, उनके बच्चों में भावनात्मक और व्यवहारिक समस्याएं देखी जा सकती हैं।

ऐसे बच्चों को अटेंशन डिफिसिट हाइपरएक्टिविटी डिसऑर्डर (एडीएचडी) का खतरा रहता है जिसमें उनका अत्यधिक रोना, सोना, खाने में के समय परेशान करना, भाषा के विकास में देरी होना और उनके मानसिक स्वास्थ्य में नकारात्मक असर पड़ना है।

पोस्टपार्टम डिप्रेशन का इलाज (Treatment of Postpartum depression in Hindi)

अगर पोस्टपार्टम डिप्रेशन (Postpartum depression) के लक्षण शुरुआती हैं तो इसके इलाज के लिए दवाइयों की जरूरत नहीं होती है। केवल काउंसलिंग और परिवार वालों के सहयोग से ही यह समस्या दूर हो सकती है।

पर यदि बीमारी बढ़ जाए तो मनोचिकित्सक को दिखाना जरूरी होता है। इस दौरान मरीज की मेडिकेशन थेरेपी होती है, दवाइयां दी जाती हैं और साथ ही साथ उसकी काउंसलिंग भी की जाती है।

पोस्टपार्टम डिप्रेशन का उपचार डॉक्टर की देख रेख में तीन तरह से किया जा सकता है जी निम्नलिखित हैं –

1. बिना दवाओं द्वारा पोस्टपार्टम डिप्रेशन का उपचार 

डिलीवरी के बाद महिला के परिवार के लोग उसे इमोशनल सपोर्ट देकर भी डिप्रेशन से बाहर निकाल सकते हैं।

इसके साथ ही परिवार के लोग उनके दैनिक कार्यों में भी हाथ बटा सकते हैं,

परिवार के सदस्य महिला को भावनात्मक सहयोग प्रदान करें,

नई मां को एक अच्छी मां बनने पे बार-बार जोर ना डालें, उसे पौष्टिक डाइट दें, पर्याप्त नींद लेने के लिए बोलें, पति उसकी समस्याओं को समझे और समस्याओं का समाधान करे, डॉक्टर की सलाह पर हल्के व्यायाम और योग करें, गाने सुने और मूवी देखें, समय निकालकर शॉपिंग पर जाएं, पति के साथ अपना टाइम व्यतीत करें। इन सब चीजों को अपनाने से पोस्टपार्टम डिप्रेशन के लक्षण को कम किया जा सकता है।

और पढ़ें –  मैटरनिटी बैग: प्रसव के समय हॉस्पिटल ले जाने वाला जरुरी समान।

2. दवाओं द्वारा प्रसवोत्तर अवसाद का उपचार

प्रसव के बाद होने वाला तनाव यदि गंभीर स्थिति में है तो उसके उपचार के लिए डॉक्टर एंटी-डिप्रेसेंट, मूड स्टेबलाइजर्स या एंटीसाइकोटिक दवाओं  का इलाज के लिए इस्तेमाल कर सकते हैं।

यदि आप स्तनपान करा रही हैं, तो यह न सोचें कि आप ऊपर बताई गई दवा नहीं ले सकतीं। इसके लिए आप अपने डॉक्टर से बात करें। डॉक्टर की देखरेख में कई महिलाएं स्तनपान कराते समय दवा लेती हैं। 

3. थेरेपी द्वारा प्रसवोत्तर मनोविकृति का इलाज

प्रसव के बाद महिला के शरीर में कम होने वाले एस्ट्रोजन के स्तर को संतुलित करने के लिए डॉक्टर हार्मोन थेरेपी का इस्तेमाल करते हैं।  इस थेरेपी को अपनाने से पोस्टपार्टम डिप्रेशन का असर कम होने लगता है।

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अनुपचारित पोस्टपार्टम डिप्रेशन के जोखिम (Risk of postpartum depression in Hindi)

पोस्टपार्टम डिप्रेशन (प्रसवोत्तर अवसाद) की स्थिति तब ज्यादा खतरनाक हो जाती है जब इसका इलाज नहीं कराया जाए। प्रारम्भिक इलाज के अभाव से महिला के मन में खुद को या दूसरों को नुकसान पहुंचाने का विचार आता है। एक बार जब यह विचार मन में आने लगते हैं, तो चिकित्सा हस्तक्षेप आवश्यक हो जाता है।

गंभीर प्रसवोत्तर अवसाद के लक्षणों में शामिल हैं:

  • तर्कहीन बात करना,

  • बकवास बात करना,

  • सताया हुआ महसूस करना,

  • क्रोध या हिंसक कार्य करना,

  • महत्वहीन चीजों को अधिक महत्व देना,

  • अपने बच्चे को नुकसान पहुँचाने का विचार आना, 

  • आत्मघाती विचार या आत्महत्या का प्रयास करना,

  • परिवार के प्रति आपका अजीब या अनिश्चित व्यवहार, 

  • ऐसी चीजें देखना, सुनना, सूंघना या महसूस करना जो वास्तव में नहीं हैं।

और पढ़ें – गर्भावस्था की पुष्टि के लिए रक्त परीक्षण।

पोस्टपार्टम डिप्रेशन (पोस्टनेटल  डिप्रेशन) का बचाव (Prevention of postpartum depression in Hindi)

Prevention of  postpartum depression in Hindi

प्रेगनेंसी के बाद पोस्टपार्टम डिप्रेशन का बचाव – Postnatal Care tips in Hindi

नीचे बताए गए बातों को फॉलो करने पर महिलाएं कुछ हद तक पोस्टपार्टम डिप्रेशन (प्रसवोत्तर अवसाद) के विकास की संभावनाओं को कम करने में सक्षम हो सकती हैं:

  • भावनाओं और चिंताओं के बारे में अपने पति और परिवार के सदस्यों से खुल कर बात करें,

  • जब आप पहली बार घर जाएं तो कम मेहमानो को अपने घर बुलाएं,

  • बच्चे के जन्म से पहले अपना फाइनेंसियल सिस्टम तैयार कर लें,

  • कम से कम 7 से 8 घंटे की अच्छी गुणवत्ता वाली नींद अवश्य लें,

  • रोज डॉक्टर द्वारा बताए गए व्यायाम करें, 

  • अपने भोजन में पौष्टिक आहार लेती रहें, 

  • शराब और कैफीन से बचें।

और पढ़ें – जानिए प्रेगनेंसी के शुरुआती लक्षण क्या हैं, और कब दिखते हैं।

निष्कर्ष (Conclusion)

घर में आया मासूम मेहमान परिवार की गतिशीलता में बदलाव लता है और साथ ही यह आपके नींद के पैटर्न को भी बदल देता है। आप ये मत सोचिये की आपको पूरी तरह से निपुण बनाना है। इसलिए अपने मन को शांत रखिये और अपने कार्यों को धीरे-धीरे करते रहिये। समय के साथ आप हर एक काम आसानी से सीख जाएंगी। अगर डिप्रेशन जैसे लक्षण दिखें तो अपने चिकित्सक को तुरंत लक्षणों की रिपोर्ट करें। केवल प्रारंभिक उपचार ही आपको तेजी से ठीक होने में मदद कर सकता है।

ये हैं पोस्टपार्टम डिप्रेशन के लक्षण, कारण, इलाज और बचाव की पूरी जानकारी। कमेंट में बताएं आपको यह पोस्ट (Postpartum Depression in Hindi ) कैसी लगी। अगर आपको यह पोस्ट पसंद आई हो तो इसे शेयर जरूर करें।

Declaration: ऊपर दी गई जानकारी पूरी तरह से शैक्षणिक दृष्टिकोण से दी गई है। इस जानकारी का उपयोग किसी भी बीमारी के निदान या उपचार हेतु बिना विशेषज्ञ की सलाह के नहीं किया जाना चाहिए साथ ही किसी भी चीज को अपनी डाइट में शामिल करने या हटाने से पहले किसी योग्य डॉक्टर या आहार विशेषज्ञ (Dietitian) की सलाह जरूर लें।

और पढ़ें – गर्भावस्था के दौरान 8 महत्वपूर्ण पोषक तत्व

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और पढ़ें –  प्रसव से पहले एमनियोटिक द्रव का रिसाव: लक्षण, कारण और उपचार।

सन्दर्भ (References)  

NCBI-

Other-

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