Incomplete Miscarriage (Abortion): अपूर्ण गर्भपात के लक्षण, कारण और उपचार

Incomplete Miscarriage in Hindi: सामान्य स्थिति में गर्भपात के बाद भ्रूण के सभी अंग शरीर से बहार निकल आते हैं। लेकिन, कभी-कभी किसी कारण से भ्रूण के कुछ हिस्से गर्भाशय में रह जाते हैं। भ्रूण का गर्भाशय से पूरी तरह से बाहर ना निकलना अपूर्ण गर्भपात (अधूरा गर्भपात या असफल गर्भपात) कहलाता है। यदि इन ऊतकों को जल्द ना हटाया जाय, तो यह बहुत अधिक रक्तस्राव या संक्रमण का कारण बन सकते हैं।

अधिकांश महिलाएं अपूर्ण गर्भपात (Incomplete Abortion in Hindi) का पता नहीं लगा पाती हैं, जिससे उन्हें कई दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। इस पोस्ट में हम आपको अपूर्ण गर्भपात के लक्षण, कारण और इसके उपचार के बारे में बता रहे हैं। तो आइये अब इस पोस्ट को पूरा पढ़ते हैं। 

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गर्भपात के कारण क्या हैं? (What are the causes of miscarriage in Hindi?)

यदि गर्भावस्था (Pregnancy) के 20वें सप्ताह से पहले ही गर्भ में भ्रूण की मृत्यु हो जाती है, तो इसे गर्भपात यानि मिसकैरेज (Miscarriage) कहा जाता है। “गर्भपात” का मतलब ये बिलकुल भी नहीं है कि आप दुबारा गर्भवती नहीं हो सकती हैं। बल्कि, कुछ महीनों बाद आप दुबारा गर्भवती हो सकती हैं और स्वस्थ शिशु को जन्म दे सकती हैं। 

महिलाओं में गर्भपात के कई कारण हो सकते हैं। गर्भपात के मुख्य कारणों में खानपान पर ध्यान ना देना, पेट पर अधिक भार डाल देना, पेट में चोट लगना या योनि में इंफेक्शन होना आदि शामिल हैं। इसके अलावा भी गर्भपात के दूसरे कई कारण हो सकते हैं जैसे कि आपकी अधिक आयु (>35), क्रोमोसोमल असामान्यता, हाई ब्लड प्रेशर, पॉलिसिस्टिक ओवरी डिसऑर्डर (पीसीओडी), अनियंत्रित थायरॉयड या मधुमेह।

गर्भपात के प्रकार (Types of miscarriage in Hindi)

गर्भपात को मुख्य रूप से पांच प्रकार होते हैं जिनमें शामिल हैं:-

  • मिस्ड गर्भपात (Missed abortion):  इस प्रकार के गर्भपात में न कोई रक्तस्राव होता है और न ही किसी तरह के लक्षण दिखाई देते हैं। कुछ मामलों में तो गर्भपात होने के बाद भी भ्रूण गर्भ में ही रहता है और इसका पता तब चलता है जब गर्भ में भ्रूण का विकास रुक जाता है। डॉक्टर इसका पता अल्ट्रासाउंड से करते हैं।
  • पूर्ण गर्भपात (Complete abortion): गर्भपात के बाद भ्रूण के सभी भाग (ऊतक) शरीर से बहार निकल जाते हैं।
  • अपूर्ण गर्भपात या अधूरा गर्भपात (Incomplete abortion): गर्भपात के बाद भ्रूण के कुछ ही भाग शरीर से बाहर निकलते हैं।
  • अपरिहार्य गर्भपात (Inevitable miscarriage): इस प्रकार के गर्भपात में गर्भाशय ग्रीवा खुल जाती है, जिससे भ्रूण बाहर आ जाता है।
  • संक्रामक गर्भपात: गर्भ में संक्रमण होने से गर्भपात हो जाता है। यह संक्रमण रुबेला इन्फेक्शन, यूरिनरी ट्रैक इन्फेक्शन, फंगल इन्फेक्शन और वायरल इन्फेक्शन के कारण हो सकता है। 

अपूर्ण गर्भपात की पहचान क्या है इसके बारे में विस्तार से पढ़ते हैं।  

अपूर्ण गर्भपात (या अधूरा गर्भपात) क्या है? | Incomplete miscarriage (incomplete Abortion) in Hindi?

सामान्यतः गर्भपात होने पर गर्भ का पूरा भाग (ऊतक) योनि के माध्यम से बहार निकल जाते हैं। इस तरह के गर्भपात को पूर्ण गर्भपात कहा जाता है। वहीं, अपूर्ण गर्भपात (अधूरा गर्भपात) तब कहा जाता है जब गर्भपात के बाद भी भ्रूण का कुछ हिस्सा (ऊतक) महिला के गर्भाशय में ही रह जाते हैं।

यदि भ्रूण के इन ऊतकों (Tissues) को जल्द ना हटाया जाय, तो अधूरा गर्भपात बहुत भारी रक्तस्राव या संक्रमण का कारण बन सकता है। हालांकि, अधूरा गर्भपात की स्थिति बहुत कम महिलाओं में देखी जाती है।

ज्यादातर मामलों में अपूर्ण गर्भपात में चिकित्सा उपचार की आवश्यकता होती है। अधूरा गर्भपात के दौरान महिलाएं इसके कई लक्षण अनुभव कर सकती हैं। अपूर्ण गर्भपात के लक्षण और उपचार नीचे बताए जा रहे हैं।  

अपूर्ण गर्भपात के लक्षण या अधूरा गर्भपात के लक्षण (Symptoms of incomplete miscarriage in Hindi)

Symptoms of incomplete miscarriage in Hindi
Symptoms of incomplete miscarriage in Hindi

गर्भपात पूरा हुआ या अधूरा कैसे पता करें? – Incomplete Abortion Symptoms in Hindi

यदि गर्भपात होने के बाद आपको निम्नलिखित लक्षण दिखाई देते हैं, तो इसका मतलब है कि आपका गर्भपात पूरी तरह से नहीं हुआ है (या अधूरा हुआ है)। अपूर्ण गर्भपात के मुख्य लक्षणों में शामिल हैं –

  • गर्भपात के बाद अपेक्षा से अधिक रक्तस्त्राव होना (एक घंटे में एक से अधिक पैड का उपयोग करना),
  • रक्तस्राव का तीन सप्ताह से अधिक रहना, 
  • रक्त में थक्कों का आना,
  • योनि के माध्यम से सफेद-गुलाबी श्लेष्मा का निकलना,
  • पेट में बहुत तेज दर्द या ऐंठन होना, 
  • पेट दर्द अधिक समय तक रहना, 
  • पेट दबाने पर बेचैनी होना, 
  • लगातार कमर दर्द रहना,
  • फ्लू जैसे लक्षण दिखाई देना (तेज बुखार जो एक या दो दिन से अधिक समय तक रहता है।)

अधूरा गर्भपात (Incomplete Abortion) होने पर माँ को संक्रमण का अघिक खतरा रहता है। रक्तस्राव अक्सर पूर्ण गर्भपात की तुलना में अधिक समय तक रहता है, अगर समय पर इलाज ना किया जाए तो स्वास्थ्य पर बहुत भरी प्रभाव पड़ सकता है। इसलिए, यदि आप गर्भावस्था में भारी रक्तस्राव या पेट दर्द का अनुभव करती हैं, तो अपने डॉक्टर से तुरंत परामर्श करें।

असफल गर्भपात के कारण (Causes of incomplete miscarriage in Hindi)

Causes of incomplete miscarriage in Hindi
Causes of incomplete miscarriage in Hindi

डॉक्टर की देखरेख के बिना किया गया गर्भपात एक विफल गर्भपात का कारण बन सकता है। आमतौर पर, भ्रूण के मर जाने के बाद शरीर गर्भावस्था के सभी ऊतकों को बाहर निकाल देता है। हालांकि, एक अधूरा गर्भपात शरीर के सभी ऊतकों को स्वाभाविक रूप से बाहर निकालने में असमर्थता के कारण होता है।

गर्भपात के अन्य कारणों में शामिल हैं:

  • इम्यूनोलॉजिकल फैक्टर (मां के शरीर में मौजूद एंटी-एम्ब्रायोनिक एंटीबॉडीज का बनना),
  • एंडोक्राइन कारक (हार्मोनल अनियमितताएं),
  • क्रोमोसोमल असामान्यता (DNA में म्युटेशन),
  • पॉलिसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम (ओवरी में छोटे-छोटे सिस्ट का होना),
  • सरवाइकल अपर्याप्तता,
  • गर्भाशय की असामान्यताएं,
  • निषेचित अंडे की गर्भ में गलत आरोपण स्थिति,
  • संक्रमण (एचआईवी और यौन संचारित वायरस)।

इसके अलावा गर्भपात की गोलियों (Abortion pills) का उपयोग भी अधूरा गर्भपात का कारण बन सकता हैं। यदि आप बिना डॉक्टर की सलाह के गर्भपात के लिए गोलियां लेती हैं, तो इस बात की बहुत अधिक संभावना है कि आपका गर्भपात अधूरा हो।

अधूरा गर्भपात का निदान कैसे किया जाता है? (How is Incomplete Miscarriage diagnosed in Hindi?)

अधूरे गर्भपात (Incomplete Miscarriage) का पता लगाने के लिए कई परीक्षण हैं। जिसमें स्त्री रोग विशेषज्ञ निम्नलिखित परीक्षण करवा सकते हैं-

1. भ्रूण दिल की धड़कन (Fetal heartbeat for Incomplete Miscarriage)

गर्भ के छठे सप्ताह के बाद भ्रूण के दिल की धड़कन का पता लगाया जा सकता है। इसलिए, भ्रूण के दिल की धड़कन की जांच से पुष्टि होगी कि गर्भावस्था समाप्त हो गई है या नहीं।

2. एचसीजी परीक्षण (HCG test for Incomplete Miscarriage)

एचसीजी परीक्षण द्वारा महिला के शरीर में एचसीजी के स्तर की जांच की जाती हैं, जो सामान्यतः गर्भपात (अबॉर्शन) के बाद कम हो जाता है।

3. अल्ट्रासाउंड (Ultrasound for Incomplete Miscarriage)

अल्ट्रासाउंड जांच से पता चलता है कि गर्भपात अधूरा है या नहीं। यदि यह अधूरा है, तो अल्ट्रासाउंड दिखाएगा कि गर्भाशय में कितना भ्रूण बचा है।

अपूर्ण गर्भपात कितना दर्दनाक होता है? (How painful is an incomplete abortion in Hindi?)

महिलाएं अलग-अलग तरीके से गर्भपात को महसूस करती हैं। कुछ महिलाएं गर्भपात के समय पेट में दर्दनाक ऐंठन महसूस करती हैं, जबकि अन्य महिलाओं को केवल मासिक धर्म होता है। इसके अलावा आपके गर्भपात का प्रकार आपके दर्द के स्तर को भी प्रभावित कर सकता है। उदाहरण के लिए, यदि आपका घर पर ही अपूर्ण गर्भपात हुआ है, तो आपको उस महिला की तुलना में अधिक दर्द हो सकता है, जिसका पूर्ण गर्भपात हुआ है या जिसने गर्भावस्था को हटाने के लिए शल्य चिकित्सा का विकल्प चुना है।

अपूर्ण गर्भपात के उपचार क्या हैं? (What are the treatments of incomplete abortion in Hindi?)

Treatments of incomplete abortion in Hindi

1. सर्जरी के बिना अधूरा गर्भपात का इलाज (अपूर्ण गर्भपात की दवा) – Medicine for Incomplete Abortion in Hindi

ये उन महिलाओं के लिए एक आदर्श विकल्प है जो सर्जिकल प्रक्रियाओं से गुजरना नहीं चाहती हैं या गर्भपात पूरा होने के लिए चार सप्ताह तक का इंतजार नहीं करना चाहती। मिसोप्रोस्टोल जैसी दवाओं का उपयोग गर्भाशय ग्रीवा को नरम करने और गर्भाशय के संकुचन को ट्रिगर करने के लिए किया जाता है। लगभग 90% महिलाएं दवा लेने के 24 घंटे बाद सभी गर्भावस्था के ऊतकों और प्लेसेंटा को बाहर निकालने में सक्षम होती हैं।

2. सर्जरी द्वारा अपूर्ण गर्भपात का इलाज – Surgery for Incomplete Abortion in Hindi

जिन महिलाओं को उपचार के दौरान सक्रिय संक्रमण होता है, वे अक्सर शल्य प्रक्रिया से गुजरती हैं जिसे डाइलेशन और क्यूरेटेज (D&C) कहा जाता है। इस प्रक्रिया के लिए डॉक्टर शल्य चिकित्सा उपकरण (मूत्रवर्धक) या सक्शन का उपयोग करके गर्भाशय की परत को साफ (गर्भाशय से भ्रूण, प्लेसेंटा और अन्य ऊतक को हटाने के लिए) करते हैं। 

और पढ़ें –  भ्रूण स्थानांतरण के बाद गर्भावस्था लक्षण एवं सावधानियां

अपूर्ण गर्भपात की रोकथाम कैसे करें?(How to prevent incomplete abortion in Hindi?)

अधूरे गर्भपात (Incomplete Abortion in Hindi) को रोका नहीं जा सकता, लेकिन ठीक से देखभाल की जाए तो इसके जोखिम को जरूर कम किया जा सकता है। आपके निम्नलिखित कदम अधूरे गर्भपात के जोखिम को कम करने में मदद कर सकते हैं-

  • गर्भपात कराने से पहले अपना अल्ट्रासाउंड करवाएं। अल्ट्रासाउंड डॉक्टरों को गर्भावस्था की लंबाई की पुष्टि करने और तदनुसार उपचार प्रक्रिया का पालन करने में मदद करेगा।
  • गर्भपात केवल प्रशिक्षित डॉक्टर से ही करवाएं।
  • अगर आपको मधुमेह या उच्च रक्तचाप है तो इसे नियंत्रित बनाए रखें। 
  • गर्भावस्था के दौरान हानिकारक चीजों से बचें, जिसमें एक्स-रे, मनोरंजक दवाएं, शराब का उपयोग और कैफीन का अधिक सेवन शामिल हैं।
  • गर्भावस्था से पहले फ्लू, उच्च रक्तचाप, मधुमेह या अन्य बीमारियों का शीघ्र निदान और उपचार करवाएं।
  • गर्भावस्था से पहले फोलिक एसिड और विटामिन की खुराक जरूर लें। इन्हें लेने से अधूरे गर्भपात का खतरा कम हो जाता है।
  • स्वस्थ गर्भावस्था बनाए रखने के लिए नियमित व्यायाम करें और स्वस्थ आहार खाएं।

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गर्भपात का जोखिम कब तक रहता है? (How long does the risk of miscarriage last in Hindi?)

आपके गर्भवती होने के हर हफ्ते गर्भावस्था के नुकसान का जोखिम कम हो जाता है। लगभग 15% महिलाओं की प्रेगनेंसी गर्भपात में समाप्त होती है। दूसरी तिमाही (13 से 19 सप्ताह) में गर्भपात का जोखिम 1% से 5% के बीच रह जाता है। कई कारक आपके गर्भपात के जोखिम को प्रभावित करते हैं जैसे कि आपकी उम्र और स्वास्थ्य। हालांकि, गर्भावस्था के प्रत्येक सप्ताह में गर्भपात का जोखिम कम हो जाता है यदि गर्भवती महिला के पास कोई अन्य स्वास्थ्य स्थिति नहीं है।

और पढ़ें – जानिए गर्भावस्था की 8 प्रमुख समस्याएं और समाधान।

क्या गर्भपात होने के बाद मैं दोबारा गर्भवती हो सकती हूँ? (Can I get pregnant again after having an abortion?)

हां। अधिकांश महिलाएं जिनका गर्भपात हो जाता है, वह दुबारा प्रेग्नेंट हो सकती हैं। गर्भपात होने का मतलब यह नहीं है कि आपको फर्टिलिटी की समस्या है या आप दुबारा माँ नहीं बन सकती हैं। ज्यादातर मामलों में आप एक महीने के भीतर दुबारा प्रेग्नेंट हो सकती हैं। हालांकि, दुबारा प्रेग्नेंट होने के लिए डॉक्टर कम से कम एक पीरियड के आने और जाने तक का इंतजार करने की सलाह देते हैं। इससे संक्रमण होने का जोखिम कम रहता है। याद रखें, अधिकांश गर्भपात क्रोमोसोमल असामान्यता के कारण होता है, आपके द्वारा किए गए किसी कारण से नहीं।

अपूर्ण गर्भपात के लिए आहार (Diet for Incomplete Abortion in Hindi)

गर्भपात के बाद, कुछ महिलाओं को मतली, कब्ज या दस्त जैसे दुष्प्रभाव का अनुभव हो सकता है। अच्छे स्वास्थ्य को बनाए रखने के लिए संतुलित आहार फायदेमंद होता है। गर्भपात के बाद डॉक्टर भरपूर मात्रा में प्रोटीन, आयरन, विटामिन बी और कैल्शियम लेने की सलाह देते हैं क्योंकि शरीर को ठीक होने के लिए इन पोषक तत्वों की आवश्यकता होती है।

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निष्कर्ष (Conclusion)

स्वतः गर्भपात (spontaneous abortion) को किसी भी प्रकार से रोका नहीं जा सकता है, हालांकि, यदि महिलाएं अपनी ठीक से देखभाल करें, तो इसके जोखिम को जरूर कम कर सकती हैं। प्रेगनेंसी में डॉक्टर की सलाह के अनुसार ही दवा का सेवन करना चाहिए। अगर आप किसी कारण से अपना गर्भपात करवाना चाहती हैं और खुद से दवा का सेवन करती हैं, तो इस बात की बहुत अधिक संभावना है कि आपका गर्भपात अधूरा हो। इसलिए, गर्भावस्था में डॉक्टर के अनुसार ही चलें।

मैं आशा करती हूँ कि अब आपको अपूर्ण गर्भपात के लक्षण और उपचार के बारे में पता चल गया होगा। कमेंट में बताएं आपको Incomplete Miscarriage in Hindi पोस्ट कैसी लगी। अगर आपको पोस्ट पसंद आई हो तो इसे शेयर जरूर करें।

Disclaimerऊपर दी गई जानकारी पूरी तरह से शैक्षणिक दृष्टिकोण से दी गई है। इस जानकारी का उपयोग साइनोसाइटिस बीमारी (साइनस संक्रमण या साइनस रोग) के निदान या उपचार हेतु बिना विशेषज्ञ की सलाह के नहीं किया जाना चाहिए। इसके अलावा किसी भी चीज को अपनी डाइट में शामिल करने या हटाने से पहले किसी योग्य डॉक्टर या आहार विशेषज्ञ (Dietitian) की सलाह जरूर लें।

सन्दर्भ (References)

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  6. Redinger A, Nguyen H. Incomplete Abortions. [Updated 2022 Jun 27]. In: StatPearls [Internet]. Treasure Island (FL): StatPearls Publishing; 2022 Jan-. Available from: https://www.ncbi.nlm.nih.gov/books/NBK559071/

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