Mouth Ulcer Treatment: मुंह के छालों का इलाज (अंग्रेजी दवा, होम्योपैथिक और आयुर्वेदिक दवा)

मुंह के छाले (Mouth Ulcers) एक प्रकार के छोटे घाव होते हैं, जो आपके मसूड़ों, होठों, गालों के अंदरूनी हिस्से या तालू (मुंह की छत) पर बन सकते हैं। मुंह में छालों (Muh ke chaale) का प्रमुख कारण पेट की खराबी या कब्ज (बदहजमी) होना है (1)। हालांकि, तीखा या गर्म खाना, मुँह की चोट, हार्मोनल परिवर्तन और भावनात्मक तनाव भी मुंह में छालों का कारण बन सकता है। मुंह के छाले (माउथ अल्सर) संक्रामक नहीं होते हैं और ये अपने आप ठीक हो जाते हैं। परन्तु, ये जब तक बने रहते हैं काफी दिक्कत देते हैं। इस पोस्ट में हम आपको मुंह के छालों का इलाज (Mouth Ulcer Treatment) बता रहे हैं जिसमें आप मुंह के छालों की अंग्रेजी दवा, होम्योपैथिक दवा और आयुर्वेदिक दवा के बारे में जानेंगे। 

Mouth Ulcer in Hindi

मुंह के छाले कितने प्रकार के होते हैं? | Mouth Ulcer Types in Hindi

मुंह के छाले (Oral ulcer in Hindi) तीन प्रकार के हो सकते हैं:

1. छोटे छाले (Minor Ulcer)

यह बहुत ही सामान्य प्रकार के छाले होते हैं जो आकार में 3 से 10 मिलीमीटर तक बड़े हो सकते हैं। छोटे छाले 10 से 14 दिनों के भीतर ठीक हो जाते हैं। इनके ठीक हो जाने के बाद कोई निशान नहीं छोड़ते हैं।

2. बड़े छाले (Major Ulcer)

छोटे छाले से बड़े छाले और गहरे रंग के होते हैं, जो 10 मिलीमीटर से अधिक चौड़े हो सकते हैं। ये छाले ठीक होने में कुछ हफ्तों से लेकर कुछ महीनों तक का समय ले सकते हैं और ठीक होने के बाद निशान छोड़ सकते हैं।

3. हर्पेटिफोर्म छाल (Herpetiform)

बहुत छोटे छाले के समूह को हर्पेटिफोर्म छाले कहा जाता है। इन छाले का आकार बहुत छोटा (2-3 मिलीमीटर) होता है, लेकिन ऐसे फफोले एक बार में 100 तक हो सकते हैं। हर्पेटिफोर्म छाले निशान छोड़े बिना ठीक हो जाते हैं। 

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मुंह में छाले होने का कारण | Reason of mouth ulcer in Hindi

Mouth ulcer reason in Hindi
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मुंह में छाले (mouth sore in hindi) क्यों पड़ते हैं? इसका सही कारण अभी भी ज्ञात नहीं है। फिर भी, कुछ सामान्य कारण और कई कारक हैं जो मुंह के छालों को बढ़ा सकते हैं, जिनमें शामिल हैं- (2, 3, 4 & 5)

माउथ अल्सर का प्रमुख कारण – Canker sore causes in hindi

  • खट्टे फल और अन्य खाद्य पदार्थ जो अम्लता या मसाले में उच्च होते हैं, छाले का कारण बन सकता है।
  • छाले होने का कारण पेट की खराबी या फिर कब्ज होना हो सकता है  
  • मुंह में सफेद छाले होने का कारण दांतों पर हार्ड ब्रश का इस्तेमास करना हो सकता है।
  • हार्ड ब्रश दांतों के किनारे की स्किन में घाव करते हैं जिससे छाले आ सकते हैं,
  • खाना चबाते समय गलती से गाल के अंदर कट लगने से छाले आ सकते हैं,
  • विटामिन बी-12, जिंक, फोलिक एसिड और आयरन की कमी से मुँह में छाले आ सकते हैं,
  • हेलिकोबैक्टर पाइलोरी नामक बैक्टीरिया की मौजूदगी की वजह से मुंह में छाले आ सकते हैं,
  • महिलाओं में पीरियड्स के दौरान होने वाले हार्मोन्स में बदलाव के कारण मुँह में छाले होते हैं,
  • गर्भावस्था, यौवन और रजोनिवृत्ति के दौरान हार्मोनल परिवर्तन मुँह में छाले
  • कुछ लोगों को अंडा, स्ट्रॉबेरी, नट्स या तीखा भोजन खाने से एलर्जी होती है उन्हें मुँह में छाले आ जाते हैं।
  • बैक्टीरियल, वायरल या फंगल संक्रमण भी मुँह में छाले बनने का कारण हो सकता है।

इसके अलावा कई बीमारियां और स्वास्थ्य स्थितियां भी मुंह में छाले का कारण बन सकता है। इन में शामिल हैं-

  • एचआईवी और एड्स,
  • क्रोहन रोग,
  • चिड़चिड़ा आंत्र सिंड्रोम (आईबीएस),
  • एचपीवी (मानव पेपिलोमा वायरस),
  • सीलिएक रोग,
  • एनीमिया ( खून की कमी )। 

“मुँह के छालों का प्रमुख कारण विटामिन बी-12, जिंक, फोलिक एसिड और आयरन की कमी माना जाता है।”

गले में अल्सर (छाले) के लक्षण | Mouth ulcer symptoms in Hindi

मुंह के छालों (Canker sore in hindi) को आसानी से पहचाना जा सकता है। मुंह के छालों के मुख्य लक्षण में शामिल हैं – (1, 3  & 6)

  • मुंह में छाले के कारण होंठ, मसूड़ों, जीभ, भीतरी गाल या मुंह की छत पर घाव दिखाई देना,
  • माउथ अल्सर आमतौर पर केंद्र में सफेद, पीले या भूरे रंग के होते हैं,
  • मुंह के अल्सर के आसपास सूजन हो सकती हैं,
  • ब्रश करते समय मुंह के छाले के आस पास के क्षेत्र में दर्द बढ़ना,
  • दर्द जो मसालेदार, नमकीन या खट्टा खाना खाने पर बढ़ सकता है,
  • छाले में दर्द के कारण अधिक चिड़चिड़ापन हो जाना,
  • मुंह में छाले होने के कारण भूख में कमी आ सकती है,
  • आपको हमेशा लगेगा कि आप थके हुए हैं।

“मुंह के छालों के लिए किसी विशेष जाँच की ज़रूरत नहीं होती, मुंह के छालों का निदान के लिए डॉक्टर मुंह का निरीक्षण करते हैं और छालों की पहचान करते हैं।”

ऐसे करें मुंह के छालों का इलाज  (Mouth Ulcer Treatment in Hindi)

Mouth Ulcer Medicin in Hindi
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मुंह के छालों (Mouth Ulcers) को ठीक करने के लिए डॉक्टर कुछ समय के लिए एंटीबायोटिक चला सकते हैं। इसके साथ ही दर्द से राहत के लिए कुछ पेनकिलर और जख्म को खत्म करने के लिए जरूरी विटामिन और क्रीम दे सकते हैं। आप नीचे मुंह के छालों की अंग्रेजी दवा और होम्योपैथी दवा के बारे में पढ़ सकते हैं। ध्यान रहे, इन सभी दवाओं का उपयोग डॉक्टर के अनुसार ही करें। 

1.  मुंह के छालों की अंग्रेजी दवा- Allopathic medicine for mouth ulcer in Hindi

शरीर में विटामिन बी की कमी के कारण मुंह में छाले होते हैं इसलिए आप ऐसी दवा का सेवन कर सकते हैं जिनमें बिटामिन बी मौजूद हो। माउथ अल्सर की अंग्रेजी दवा या मुंह के छाले की टेबलेट का नाम बीकोसूल कैप्सूल (Becosules capsules for mouth ulcers in hindi) या हाइड्रोकार्टिसोन है।

2. मुंह के छालों की होम्योपैथिक दवा – Homeopathic medicine for mouth ulcers in Hindi

आर्सेनिकम एल्बम (Arsenicum Album) मुंह के छालों के लिए एक उपयोग होम्योपैथी दवा है इसके अलावा होम्योपैथी दवा में आप 

  • आर्सेनिकम एल्बम (Arsenicum Album)
  • नक्स वोमिका (Nux Vomica)
  • नाइट्रिकम एसिडिकम (Nitricum Acidicum)
  • बोरेक्स वेनेटा (Borax Veneta)
  • मर्क्यूरियस सोलूबिलिस (Mercurious solubulis) और 
  • मर्क्यूरियस कोरोसिवस (Mercurius corrosivus) दवा भी ले सकते हैं। 

3. मुंह के छाले की क्रीम और माउथ अल्सर जेल – Mouth ulcer cream and gel in Hindi

ओरेक्स क्रीम और ओरासोर जेल मुख्य रूप से मुंह के छालों के इलाज के लिए प्रयोग किया जाता है। यह दवा अल्सर के दर्द, सूजन, लालिमा और जलन को कम करता है. यह बैक्टीरिया के विकास को रोकता है और अल्सर को तेजी से ठीक होने में मदद करता है।

यह दवा आमतौर पर सुरक्षित है और इससे कोई साइड इफेक्ट नहीं होता।

4. मुंह के छाले के लिए फिटकरी – Alum gargle for mouth ulcers in Hindi

माउथ अल्सर ठीक करने के लिए फिटकरी भी काफी फायदेमंद मानी जाती है। इसके लिए फिटकरी का घोल मुंह के छाले या घाव में 30 सेकंड तक लगया जाता है और फिर साफ पानी से कुल्ला किया जाता है। ऐसा दिन मे दो-तीन बार करने से मुंह के छाले ठीक होते हैं।

5. मुंह के छालों की अन्य दवाई – Other mouth ulcer medicine in Hindi

इसके अलावा मुँह के छालों की दवा में शामिल हैं –

  • Anabel Liquid
  • Curasil
  • Dentogel
  • Dologel-CT
  • Emergel
  • Fitgel
  • Hexigel
  • Garbenz
  • Mugel Freshora
  • OmnisootheOrafast
  • Oraflora LA
  • Orawin
  • Tantum
  • Tess CS
  • Ulciwok
  • Viloral
  • Zytee RB

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ये हैं मुंह के छालों की आयुर्वेदिक दवा (Ayurvedic medicine for mouth ulcers in Hindi)

Ayurvedic treatment for mouth ulcers in Hindi
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मुंह के छालों का आयुर्वेदिक इलाज (Home remedies for Mouth Ulcers) में शामिल हैं –

  • दिन में दो बार तुलसी के पत्ते (4-5)चबाकर खाने से मुंह के छालों से राहत मिलती हैं,
  • शहद में मुलेठी का चूर्ण मिलाकर इस लेप को मुँह के छालों पर लगाएँ। इससे छालों के दर्द से राहत मिलती है।
  • कत्था मुँह के छालों के लिए बहुत लाभकारी होता है। कत्था, मुलेहठी का चूर्ण और शहद मिलाकर मुँह के छालों पर लगाएँ,
  • शहद और इलायची का पाउडर मिलाकर इस मिश्रण को मुँह के छालों पर लगाएँ,
  • ग्लिसरीन में हल्दी का पाउडर मिलाकर छालों पर दिन में चार से पांच बार लगाएँ,
  • नीम के पानी से कुल्ला करना मुंह के छालों के लिए फायदेमंद होता है,
  • चमेली के पत्तों को पीस कर उसके रस को छालों पर लगाएं,
  • जामुन की छाल का काढ़ा बनाकर गरारा करने से छालों में राहत मिलती है,
  • नारियल का तेल मुँह के छालों के लिए काफी फायदेमंद होता है। इसलिए नारियल का तेल मुँह के छालों में लगाया जा सकता है,
  • मुंह के छालों से लड़ने में लहसुन फायदेमंद हो सकता है। इसके लिए लहसुन की कली को छील कर उसे छालों पर रगड़ें और फिर  20-25 मिनट बाद कुल्ला कर लें।

मुंह के छालों (माउथ अल्सर) से बचने के उपाय – Prevention tips of mouth ulcers in Hindi

माउथ अल्सर से बचने के उपाय में शामिल हैं- (7, 8, 9 & 10)

  • बहुत अधिक गर्म भोजन खाने और पेय पदार्थ पीने से बचें,
  • नरम टूथब्रश का उपयोग करें और नियमित रूप से दांत साफ करें,
  • खट्टे फल कम खाएं
  • खाना खाते समय खाना धीरे-धीरे चबाएं,
  • मसालेदार भोजन खाने से बचें
  • प्रतिदिन 7-8 गिलास पानी पिएँ,
  • कब्ज से बचें। इसके लिए फाइबर युक्तआहार का सेवन अधिक करें  ,
  • यदि माउथ अल्सर आयरन, जिंक और विटामिन्स (B1, B2, B6, B12, or C) की कमी से होते हैं तो इनके सप्लीमेंट का सेवन करें, 
  • धूम्रपान न करें या तंबाकू का प्रयोग न करें,
  • शराब के सेवन से बचें या सीमित करें
  • मुँह की सफाई का विशेष ध्यान रखें
  • रोजाना सुबह और शाम व्यायाम या योगासन करें,
  • खाना खाने के बाद कुछ देर टहलें,
  • भोजन करने के बाद एकदम बेड पर न लेटें
  • समय पर भोजन करें,
  • भोजन के तुरंत बाद पानी ना पियें,
  • भोजन को अच्छी प्रकार से चबाकर एवं धीरे-धीरे खाएं,
  • रात में देर तक जागने से बचें साथ ही रात में कॉफ़ी का सेवन ना करें,
  • तनावमुक्त जीवन जीने की कोशिश करें।

माउथ अल्सर कितने दिन में ठीक होते हैं | Mouth ulcers healing time in Hindi

ज्यादातर मामलों में, मुंह के छाले (Canker sore) लगभग 10 से 14 दिनों में अपने आप ठीक हो जाते हैं।

हालांकि, यदि आपके मुंह के अल्सर तीन सप्ताह से अधिक समय तक रहते हैं, तो आप तुरंत अपने स्वास्थ्य सेवा प्रदाता (डॉक्टर) के साथ अपॉइंटमेंट लें।

गले में अल्सर होने पर डॉक्टर को कब दिखाएं | When to see a doctor

आमतौर पर मुंह के छाले बिना चिकित्सा उपचार के ठीक हो जाते हैं। हालांकि, निम्नलिखित लक्षणों का अनुभव होने पर आपको तुरंत अपने डॉक्टर को दिखाना चाहिए। यदि –

  • मुंह के छाले (Muh ke chaale) 2 सप्ताह से अधिक समय तक बने रहें।
  • हर एक से दो माह में छाले hona
  • छालों का सामान्य से बड़ा हो जाना
  • छालों से खून आना और दर्दनाक हो जाना 
  • गर्दन में सूजन आ जाना 
  • आपकी जीभ या आपके मुंह के किसी अन्य भाग में सुन्नता
  • छालों के साथ अन्य लक्षणों का होना, जैसे कि बुखार, दस्त, सिरदर्द, या त्वचा पर लाल चकत्ते।

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और पढ़ें – सर्वाइकल दर्द में करें इन खाद्य पदार्थों का परहेज।

निष्कर्ष | Conclusion

मुंह के छाले (Mouth Ulcers) एक प्रकार के छोटे घाव हैं जो आपके मसूड़ों, होठों, गालों के अंदरूनी हिस्से या तालू (मुंह की छत) पर बन सकते हैं। मुंह में छालों (Muh ke chaale) का प्रमुख कारण बदहजमी या कब्ज होना है। आमतौर पर मुंह के छाले बिना किसी उपचार के अपने आप ठीक हो जाते हैं।

लक्षणों को शांत करने के लिए कई घरेलू उपचार उपलब्ध हैं। हालांकि, यदि मुंह के छाले तीन सप्ताह से अधिक समय तक रहते हैं, तो तुरंत डॉक्टर को दिखाएं। क्योंकि छालों का अधिक समय तक रहना या बार-बार होना किसी गंभीर बीमारी का संकेत हो सकता है।

ये हैं Mouth Ulcers (मुंह के छाले) का कारण, लक्षण व आयुर्वेदिक इलाज के बारे में बताई गई पूरी जानकारी। कमेंट में बताएं आपको Mouth Ulcers in Hindi पोस्ट कैसी लगी। अगर आपको पोस्ट पसंद आई हो, तो इसे शेयर जरूर करें।

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Disclaimer : ऊपर दी गई जानकारी पूरी तरह से शैक्षणिक दृष्टिकोण से दी गई है। इस जानकारी का उपयोग किसी भी बीमारी के निदान या उपचार हेतु बिना विशेषज्ञ की सलाह के नहीं किया जाना चाहिए। इसके अलावा किसी भी चीज को अपनी डाइट में शामिल करने या हटाने से पहले किसी योग्य डॉक्टर या आहार विशेषज्ञ (Dietitian) की सलाह जरूर लें। 

सन्दर्भ (References)

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