चौलाई खाने के फायदे और नुकसान

Cholai Ke Fayde | चौलाई (राजगिरा) खाने के 14 फायदे और नुकसान

Cholai ke fayde: चौलाई एक पौधा है जो राजगिरा, लाल साग या रामदाना के रूप में जाना जाता है। लोग अक्सर साग बनाकर चौलाई का सेवन करते हैं। इसके अतरिक्त अधिकांश लोग चौलाई के बीज खाना भी पसंद करते हैं। क्योंकि चौलाई के बीज को अनाज नहीं माना जाता है, इसलिए व्रत के दौरान इसका सेवन लड्डू बना कर भी किया जा सकता है।

चौलाई में कई प्रकार के पौषक तत्व मौजूद होते हैं जिसकी वजह से चौलाई या रामदाना के फायदे (cholai ke fayde) डायबिटीज, कैंसर और एनीमिया जैसी बिमारियों से बचने में किया जा सकता है। हालांकि, इसका अधिक सेवन कभी-कभी स्वास्थ के लिए हानिकारक (चौलाई के नुकसान) भी हो सकता है।

इस पोस्ट के माध्यम से हम आपको चौलाई के फायदे और नुकसान सहित इसके उपयोग के बारे में विस्तार से बता रहे हैं। साथ ही चौलाई के लड्डू बनाने की विधि और चौलाई की सब्जी बनाने की विधि भी बता रहे हैं। तो आइये अब चौलाई खाने के फायदे और नुकसान के बारे में पढ़ते हैं।

चौलाई के फायदे | Cholai Ke Fayde in Hindi

चौलाई एक ऐसा साग है जो की लाल और हरे दोनों ही रंग में आता है। चौलाई न सिर्फ एक स्वादिष्ट सब्जी है बल्कि चौलाई के फायदे बहुत से रोगों को ठीक करने में किया जा सकता है।

चौलाई या इसके बीज के स्वास्थ्यवर्धक फायदे (राजगिरा या रामदाना या लाल साग के फायदे) निम्नलिखित हैं-  

Cholai Ke Fayde, चौलाई के फायदे

अब इन फायदों (Cholai Ke Fayde) को विस्तार से समझते हैं-

1. ग्लूटेन मुक्त – Amaranth Is Naturally Gluten-Free in Hindi

जौ और गेहूं जैसे अनाज में एक प्रकार का प्रोटीन होता है जिसे ग्लूटेन (gluten) कहा जाता है। सीलिएक रोग (celiac disease) वाले लोग ग्लूटेन नहीं खा सकते हैं क्योंकि उनका शरीर ग्लूटेन के प्रति संवेदनशील (Sensitive) होता है और प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया (immune response) उत्पन्न करता है जिससे पाचन तंत्र में सूजन और क्षति होती है।

क्योंकि राजगिरा के बीज (चौलाई के बीज) प्राकृतिक रूप से ग्लूटेन मुक्त (gluten free) होता है, इसलिए सीलिएक रोगी (celiac patient), राजगिरा या इसकी बानी रोटीआसानी से खा सकते हैं। (1)

और पढ़ें – पोटेशियम की कमी दूर करते हैं ऐसे आहार

2. एंटीऑक्सिडेंट्स गुण – Amaranth Contains Antioxidants in Hindi

चौलाई स्वास्थ्य को बढ़ावा देने वाले एंटीऑक्सीडेंट का एक अच्छा स्रोत है।

एंटीऑक्सीडेंट को हिंदी भाषा में प्रतिऑक्सीकारक कहते हैं। एंटीऑक्सीडेंट ऐसे पदार्थ हैं जो फ्री रेडिकल्स (मुक्त कणों) के कारण शरीर में होने वाले नुकसान (विशेष रूप से कैंसर) को रोक सकते हैं या धीमा कर सकते हैं। (2)

इसके अलावा, एंटीऑक्सिडेंट विभिन्न रोगों जैसे कि लीवर की बीमारी, हृदय रोग, मधुमेह, अल्जाइमर और पार्किंसंस रोग से बचने में भी मदद करते हैं।

चूहे में किये गए एक अध्ययन से पता चलता है कि चौलाई में मौजूद एंटीऑक्सिडेंट गुण शराब के खिलाफ जिगर की रक्षा करने में मदद कर सकता है।

हालांकि, चौलाई में मौजूद एंटीऑक्सिडेंट गुण मनुष्यों को कैसे प्रभावित कर सकता है। इसके लिए अभी और शोध कि आवश्यकता है।

और पढ़ें – लो कैलोरी डाइट के फायदे, नुकसान और आहार योजना।

3. लाल चौलाई के फायदे हैं कोलेस्ट्रॉल कम करने में – Benefits of red amaranth for Cholesterol in Hindi

Benefits of red amaranth in Hindi
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चौलाई में पाए जाने वाला एंटीऑक्सीडेंट (Anti-oxidant) और एंटी-इंफ्लेमेटरी (Anti-inflammatory) गुण, कोलेस्ट्रॉल (Cholesterol) और ट्राइग्लिसराइड्स (Triglycerides) को कम करने में मदद करता है।

हमारे शरीर में दो तरह के कोलेस्ट्रॉल पाए जाते हैं, जिनमें से एक फायदेमंद कोलेस्ट्रॉल होता है और दूसरा नुकसानदायक कोलेस्ट्रॉल होता है।

लो डेंसिटी लिपिड कोलेस्ट्रॉल (LDL) को नुकसानदायक माना जाता है जबकि  HDL (High-density lipoprotein) कोलेस्ट्रॉल एक अच्छा कोलेस्ट्रॉल माना जाता है।

हैम्स्टर पर की गई एक स्टडी में पता चला है कि चौलाई के बीज का तेल कुल और “खराब” एलडीएल कोलेस्ट्रॉल में क्रमशः 15% और 22% की कमी लता है। इसके अलावा, ये “अच्छा” एचडीएल कोलेस्ट्रॉल को बढ़ाते हुए “खराब” एलडीएल कोलेस्ट्रॉल को कम करता है। (3)

इसके अतिरिक्त, मुर्गियों में किये गए एक अध्ययन से पता चलता है कि चौलाई खाने से कुल कोलेस्ट्रॉल में 30% तक और “खराब” एलडीएल कोलेस्ट्रॉल में 70% तक की कमी आ सकती है। (4)

हालांकि, चौलाई मनुष्यों को कैसे प्रभावित कर सकती है। इसके लिए अभी और शोध की आवश्यकता है।

और पढ़ें – हाई कोलेस्ट्रॉल के लक्षण, कारण और घरेलू उपचार

4. रामदाना के फायदे हैं आँखों के लिए – Benefits of Rajgira for Eyes Health in Hindi

चौलाई के पत्तों में पाए जाने वाले कैरोटीनॉयड और विटामिन ए, आंखों के स्वस्थ (Benefits of rajgira in hindi) को बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका अदा करता है। (5)

नियमित रूप से चौलाई के सेवन से बढ़ती उम्र के साथ होने वाली दृष्टि संबंधित समस्याओं को कम किया जा सकता है।

और पढ़ें – एक अच्छे कुकिंग ऑयल का चुनाव कैसे करें?

5. चौलाई साग के फायदे करें पाचन तंत्र को तंदरुस्त – Amaranth Grain benefits for Digestion in Hindi

चौलाई में पर्याप्त फाइबर पेट की कब्ज और सूजन को कम करने में मदद करता है और साथ ही शरीर में वसा की मात्रा को भी कम कर सकता है।। (6)

चौलाई ना केवल पाचन स्वास्थ्य को बढ़ावा देता है बल्कि, खराब कोलेस्ट्रॉल और उच्च रक्तचाप को कम करने में भी सहायता प्रदान करता है। इसके अतरिक्त चौलाई शर्करा के अवशोषण को भी धीमा कर सकता है। जिससे शुगर की बीमारी से  बचा जा सकता है। (9)

और पढ़ें – कब्ज में क्या खाएं और क्या ना खाएं

6. राजगिरा के फायदे हैं सूजन कम करने में – Benefits of Ramdana for Inflammation in Hindi

एन सी बी आई (NCBI) की एक स्टडी (2016) के मुताबिक एंटीऑक्सीडेंट शरीर की सूजन को कम करने में मदद कर सकते हैं। (7)

एक पशु अध्ययन से पता चला है कि चौलाई (राजगिरा) इम्युनोग्लोबुलिन ई के उत्पादन को रोकने में मदद कर सकता है, इम्युनोग्लोबुलिन ई एक प्रकार की एंटीबॉडी है जो एलर्जी से होने वाली सूजन के लिए जिम्मेदार है। (7)

इस लिहाज से देखा जाए तो चौलाई (राजगिरा) का एंटीऑक्सीडेंट गुण अर्थराइटिस के लक्षणों को कम (Amaranth benefits in hindi) करने में मदद कर सकता है।

हालांकि, मनुष्यों में चौलाई के संभावित Anti-inflammatory प्रभावों को मापने के लिए अभी और अधिक शोध की आवश्यकता है।

और पढ़ें – जानिए मधुमेह रोगी डायबिटीज में क्या खाएं और क्या न खाएं।

7. कैंसर के जोखिम को कम करने में लाल साग के फायदे – Ramdana benefits for cancer treatment in Hindi

चौलाई में पॉलीफेनोल (Polyphenol) की उच्च मात्रा होती है। पॉलीफेनोल एक प्रकार का एंटी-ऑक्सीडेंट है। जो कैंसर फैलाने वाली कोशिकाओं को पनपने से रिक्त है। (8)

इसलिए नियमित रूप से चौलाई खाने से कैंसर जैसी गंभीर बीमारी से बचा जा सकता है।

हालांकि, इस बात का ध्यान रखें कि चौलाई का सेवन किसी भी तरीके से कैंसर का इलाज नहीं है। इसका इस्तेमाल कैंसर से बचाव में कुछ हद तक लाभकारी हो सकता है। अगर आप में से कोई कैंसर पीड़ित है, तो उसका डॉक्टरी इलाज करवाना जरूरी है।

8. चौलाई के फायदे हैं हृदय स्वास्थ्य के लिए – Health Benefits of Rajgira for heart health in Hindi

चौलाई के पत्तों में पोटेशियम की प्रचुर मात्रा में होता है जो हृदय की मांसपेशियों और रक्त वाहिकाओं की दीवारों के तनाव को कम करने में मदद करती है। (9)

चौलाई के पत्तों में पाए जाने वाले यह यौगिक (पोटेशियम) कोलेस्ट्रॉल के निर्माण को रोकने, उच्च रक्तचाप को कम करने, हृदय के कार्य छमता को बढ़ाने और साथ ही हृदय के जोखिमों को काम करने में भी मदद कर सकता है।

और पढ़ें – हृदय रोगियों के लिए डाइट प्लान।

9. मधुमेह को नियंत्रण में रामदाना का उपयोग – Ramdana ke fayde for diabetes in Hindi

Ramdana ke fayde
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डायबिटीज से पीड़ित लोगो के लिए चौलाई (या रामदाना) एक औषधि है।

एक स्टडी के मुताबिक रामदाना का एंटीऑक्सीडेंट गुण हाइपरग्लाइसीमिया (हाई ब्लड शुगर) को नियंत्रित करने और मधुमेह के जोखिम को रोकने में फायदेमंद साबित हो सकता है। (10)

और पढ़ें –  जानिए मधुमेह रोगी डायबिटीज में क्या खाएं और क्या न खाएं।

10. रामदाना के फायदे प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए – Benefits of Ramdana to increase immunity in Hindi

 चौलाई (राजगिरा) में विटामिन सी उच्च मात्रा में पाया जाता है जो हमें रोग प्रतिरोधक क्षमता प्रदान करने में मदद करता है।

इसके अलावा चौलाई (राजगिरा) में मौजूद एंटी-बैक्टीरियल, एंटी-फंगल, एंटी-माइक्रोबियल और एंटी-पैरासिटिक गुण हमें विभिन्न रोगों के संक्रमण से बचाते  हैं। (11)

चौलाई आयरन का एक बड़ा स्रोत है। जो रक्त कोशिकाओं और हीमोग्लोबिन को बनाए रखने में हमारी मदद करता है जिससे रोग प्रतिरोधक शक्ति बढ़ती है। (12)

इसलिए नियमित रूप से चौलाई का सेवन करने से यह हमारी इम्युनिटी को बढ़ाने में मदद कर सकती है।

और पढ़ें – आयरन की कमी को दूर करते हैं ऐसे आहार।

11. लाल साग खाने के फायदे हैं वजन कम करने में – Amaranth Leaves benefits for Weight Loss in Hindi

पॉलीफेनोल्स (Polyphenols) एक शक्तिशाली एंटीऑक्सीडेंट हैं जिसमें एंटी-ओबेसोजेनिक गुण होता है जो स्वाभाविक रूप से कैलोरी बर्न करने और वजन कम करने में मदद करता है। इसके अलावा पॉलीफेनोल्स मेटाबॉलिक रेट को भी बढ़ाता है, जिससे पाचन क्रिया में सुधार होता है। (13)

 चौलाई (राजगिरा) फाइबर और प्रोटीन से भरपूर होता है, ये दोनों ही वजन घटाने में मदद करते हैं।

एक अध्ययन से पता चला है कि उच्च प्रोटीन वाला नाश्ता भूख बढ़ाने वाले हार्मोन (ग्रेलिन) के स्तर को कम करने में मदद करता है। जबकि फाइबर पेट भरे होने की भावना को बढ़ावा देने में मदद करता है। (14)

और पढ़ें –  इन एंटीऑक्सीडेंट आहार से करें अपना वजन कम।

12. गर्भावस्था में राजगिरा (रामदाना) के लड्डू के फायदे – Cholai Ke Laddu Ke Fayde Pregnancy Main

प्रेगनेंसी में सही और संतुलित पोषक तत्व लेना मां के स्वास्थ और शिशु के अच्छे विकास दोनों के लिए महत्वपूर्ण होता है।

रामदाना या चौलाई के बीज के बने लड्डू गर्भावस्था में काफी फायदेमंद माने जाते हैं।

इसके अलावा हरी सब्जियां प्रेगनेंसी के दौरान खाये जाने वाले मुख्य आहारों (भोजन) में से एक हैं। जिसमें चौलाई मुख्य रूप से महत्वपूर्ण है। (15)

चौलाई की सब्जी गर्भावस्था में कब्ज की समस्या से बचने के लिए फाइबर, एनीमिया (खून की कमी) के खतरे को दूर रखने के लिए आयरन और हड्डियों के स्वास्थ्य के लिए कैल्शियम की पूर्ति का काम कर सकती है।

और पढ़ें – गर्भावस्था के दौरान 8 महत्वपूर्ण पोषक तत्व

13. राजगिरा के फायदे हैं त्वचा के लिए – Amaranth Benefits for skin in Hindi

चौलाई के पत्तों (राजगिरा के पत्तों) में मौजूद विटामिन C, त्वचा के लिए उपयोगी माना जाता है।

विटामिन-सी एक एंटीऑक्सीडेंट है, जो त्वचा को यूवी विकिरण से होने वाले नुकसान से बचा सकता है। इसके अतिरिक्त विटामिन-सी मुंहासों को दूर करने और त्वचा में कोलेजन को बढ़ाने में मदद कर सकता है।

और पढ़ें – किडनी स्टोन में लो ऑक्सलेट डाइट के फायदे।

14. चौलाई के औषधीय गुण रखें हड्डियों को मजबूत – Cholai ke Fayde for Bones in Hindi

हड्डियों को स्वस्थ बनाए रखने के लिए कैल्शियम की आवश्यकता होती है। पर्याप्त कैल्शियम के बिना, हड्डियां कमजोर और अतिसंवेदनशील हो जाती है जिससे फ्रैक्चर और टूटने का डर बना रहता है। (16)

चौलाई में गाय के दूध से लगभग दोगुना कैल्शियम होता है। चौलाई में मौजूद कैल्शियम ऑस्टियोपोरोसिस की शुरुआत को रोकने या धीमा करने में मदद कर सकता है।

और पढ़ें – ओमेगा 3 फैटी एसिड के फायदे और नुकसान।

चौलाई (राजगिरा) के पौष्टिक तत्व | Amaranth Nutritional Value in Hindi

राजगिरा (चौलाई) में खनिज, विटामिन ए, सी, आयरन,कैल्शियम और फॉस्फोरस प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं। राजगिरा या रामदाना में मौजूद अन्य पौष्टिक तत्वों और उनकी मात्रा के बारे में आप नीचे दिए गए टेबल के माध्यम से जान सकते हैं।

चौलाई के पोषण मूल्य प्रति 100 ग्राम

पोषक तत्व
मात्रा प्रति 100 ग्राम
ऊर्जा  371 kcal
प्रोटीन 
14 g
कार्ब्स  65 g
फैट 
7 g
मैंगनीज  3.4 mg
मैग्नीशियम  248 mg
फॉस्फोरस  557 mg
आयरन  7.6 mg
कैल्शियम  159 mg
विटामिन ई (अल्फा-टोकोफेरॉल) 1.19 mg
विटामिन सी, कुल एस्कॉर्बिक एसिड 4.2 mg

राजगिरा का उपयोग | How to Use Rajgira (Amaranth) in Hindi

राजगिरा (चौलाई) का उपयोग निम्न प्रकार से किया जा सकता है-

  • आप व्रत में राजगिरा का मीठा हलवा बनाकर खा सकते हैं।
  • राजगिरा (चौलाई) के बीजों का उपयोग खिचडी बनाने में किया जा सकता है।
  • राजगिरा (चौलाई) के बीज को घी में भूनने के बाद इसे दूध के साथ उबालकर पिया जा सकता है।
  • राजगिरा (चौलाई) का आटा पराठे बनाने में किया जा सकता है।
  • भूने हुए राजगिरा (रामदाना) के बीज लड्डू बनाने में किया जा सकता है।
  • राजगिरा (चौलाई) के बीज को पट्टी (चिक्की) बनाकर खाया जा सकता है।
  • राजगिरा (चौलाई) का इस्तेमाल मीठी खीर बनाने में भी किया जा सकता है।
  • सूप में गाढ़ापन जोड़ने के लिए राजगिरा (चौलाई) का उपयोग किया जा सकता है।

और पढ़ें – गले में टॉन्सिल के लक्षण, कारण और आयुर्वेदिक इलाज

राजगिरा (चौलाई) की खुराक | Rajgira (Amaranth) Dose in Hindi

राजगिरा (चौलाई) की उपयुक्त खुराक कई कारकों पर निर्भर करती है जैसे कि उपयोगकर्ता की उम्र, स्वास्थ्य और कई अन्य स्थितियां। फिलहाल राजगिरा की उचित खुराक कितनी होनी चाहिए इसके बारे में अभी पर्याप्त वैज्ञानिक जानकारी नहीं है।

ध्यान रखें कि प्राकृतिक उत्पाद हमेशा सुरक्षित नहीं होते हैं। जब भी आप कोई उत्पाद लेने जाएं तो उसके लेबल को ध्यान से पढ़ें और उस पर लिखे निर्देशों का पालन करें।

इसके अलावा उपयोग करने से पहले अपने फार्मासिस्ट या चिकित्सक या अन्य स्वास्थ्य देखभाल पेशेवर से परामर्श लें।

चौलाई (राजगिरा) खाने के नुकसान | Side Effects of Rajgira (Amaranth) in Hindi

  • राजगिरा (चौलाई) में कोई ज्ञात विषाक्तता नहीं है और यह सामान्य खपत के लिए अच्छा है। हालांकि, इसे कच्चा नहीं खाना चाहिए क्योंकि इसमें कुछ प्राकृतिक एंटी-पोषक तत्व होते हैं, जैसे ऑक्सालेट्स और नाइट्रेट्स, जिन्हें उबालकर और उचित तैयारी से समाप्त किया जा सकता है।
  • चौलाई (रामदाना) में पोटेशियम होता है। पोटेशियम शरीर में महत्वपूर्ण खनिज है। शरीर में इसके स्तर का सही संतुलन बनाए रखना महत्वपूर्ण है। जिन लोगों के रक्त में पोटेशियम का स्तर बढ़ा हुआ होता है उन्हें इसका सेवन करने से परहेज करना चाहिए। साथ ही इसके लिए चिकित्सक से परामर्श लेना चाहिए
  • राजगिरा (चौलाई) का अधिक सेवन ब्लड प्रेशर के साथ किडनी स्टोन के जोखिम को बढ़ा सकता है
  • राजगिरा (चौलाई) में फाइबर की मात्रा अधिक होती है। वैसे फाइबर स्वस्थ के लिए अच्छा होता है। परन्तु,  अधिक मात्रा में फाइबर का सेवन करने से पेट फूलने और पेट में ऐंठन की समस्या हो सकती है।
  • कुछ लोगों, खासकर बच्चों को राजगिरा (चौलाई) में मौजूद लाइसिनिक प्रोटीन से एलर्जी होती है जो दस्त और पेट दर्द का कारण बन सकता है।
  • इसके अलावा, लाइसिन का एक और दुष्प्रभाव शरीर के कैल्शियम अवशोषण को बढ़ाता है और शरीर में मुक्त कैल्शियम की हानि-क्षति उत्पन्न करता है।
  • हाइपोग्लाइकेमिक वाले लोगों को बहुत अधिक रामदाना (राजगिरा) खाने से बचना चाहिए। ऐसा इसलिए क्योंकि यह इंसुलिन के स्तर को बहुत कम कर सकता है।

इसलिए, एक ही समय में राजगिरा (रामदाना) की अधिक खुराक का सेवन स्वास्थ के लिए हानिकार हो सकता है।

और पढ़ें –  कच्चा प्याज खाने के फायदे और नुकसान

चौलाई के लड्डू बनाने की विधि | Chaulai Ke Laddu Recipe in Hindi)

राजगिरा (रामदाना) के लड्डू के फायदे
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सामग्री:

150 ग्राम राजगिरा के दानों (या चौलाई के बीज) + 250 ग्राम गुड + 1 कप पानी + 2 चम्मच घी + 10-12 किशमिश और काजू

1. चौलाई के लड्डू बनाने के लिए सबसे पहले राजगिरा के दानों (या चौलाई के बीज) को कढ़ाई में हल्की आंच पर भून लें। (Note:  दाने भूनते समय लगातार कर्छी को चलाती रहें।)

2. जब दाने या बीज चटकने लगे या फूल जाएं, तो इन्हें कर्छी से बाहर निकाल दें।

3. इसके बाद इन्हें छलनी से छान लें। इससे बारीक दाने (जो नहीं भुने हैं) निकल जाएंगे।

4. इसके बाद फूले हुए दानों का उपयोग लड्डू बनाने के लिए करें।

5. अब कढ़ाई में 2 छोटे चम्मच घी डाल दीजिये, घी को पिघलने पर गुड़ और 1 कप पानी डाल दीजिये,

6. गुड के पूरी तरह से मेल्ट होने के बाद, 3-5 मिनिट पका लीजिये (Note: गुड़ में अगर कुछ गंदगी दिखाई दे रही हैं तो चाशनी को छान लीजिये,)

7. इसके बाद भुने हुए राजगिरा के दाने डाल दें। आप चाहें तो इसमें ड्राय फ्रूट्स भी डाल सकते हैं

8. अब सभी सामग्री को अच्छी तरह से मिला लें।

9. ठंडा होने दें, हाथों पर घी लगाएं और इसके लड्डू बना लें।

आपके स्वादिष्ट लड्डू तैयार हैं, इन्हें एक कंटेनर में भर के रख दें और कभी भी खाएं।

चौलाई की सब्जी बनाने की विधि | Chaulai Ki Sabji Recipe in Hindi

चौलाई का साग की सामग्री

  • 500 ग्राम धुली हुई चौलाई
  • 5 कली लहसुन
  • 1 इंच अदरक
  • 2 हरी मिर्च या लाल खडी मिर्च
  • 1/4 चम्मच लाल मिर्च और जीरा
  • 2 तेजपत्ता
  • नमक स्वादानुसार
  • 2 चम्मच तेल
  • 2 प्याज

1. कढ़ाई में 2 चम्मच तेल डालें और फिर गर्म करें। इसके बाद इसमें जीरा डालें। जब यह चटकने लगे तो इसमें तेजपत्ता, अदरक और लहसुन डालकर हल्का भूरा होने तक भूनें।

2. इसमें में प्याज डालें और नरम होने तक भूनें।

3. अब कढ़ाई में चौलाई, नमक, गरम मसाला, लाल मिर्च, धनिया पाउडर डालकर अच्छी तरह मिक्स करें।

4. इसे मीडियम आंच पर बिना ढके नरम होने तक पकाते रहें।

नोट: आप चौलाई की संजय में उबले हुए आलू, पनीर, गाजर या अपनी पसंद की अन्य कोई सब्जी भी डाल सकते हैं जिससे इसका स्वाद और भी बढ़ जाएगा।

निष्कर्ष | Conclusion

चौलाई (राजगिरा) एक पौष्टिक, ग्लूटेन मुक्त अनाज है जो भरपूर मात्रा में फाइबर, प्रोटीन और महत्वपूर्ण सूक्ष्म पोषक तत्व प्रदान करता है। चौलाई ना  केवल शरीर की सूजन कम करने बल्कि कोलेस्ट्रॉल के स्तर को कम करने, वजन घटाने सहित कई स्वास्थ्य लाभों से भी जुड़ा है।

चौलाई या इसके बीज (रामदाना) की सबसे अच्छी बात यह है कि इसे तैयार करना बेहद आसान है और इसे विभिन्न प्रकार के व्यंजनों में आसानी जोड़ा जा सकता है। जो न सिर्फ आपके स्वाद को बढ़ाता है बल्कि उन्हें और भी ज्यादा पौष्टिक बनता है।

और पढ़ें – Chronic Constipation के लक्षण कारण और इलाज


ये हैं चौलाई खाने के फायदे और नुकसान के बारे में बताई गई पूरी जानकारी। कमेंट में बताएं आपको Rajgira (Amaranth) Benefits in Hindi पोस्ट कैसी लगी। अगर आपको पोस्ट पसंद आई हो, तो इसे शेयर जरूर करें।

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Disclaimer : ऊपर दी गई जानकारी पूरी तरह से शैक्षणिक दृष्टिकोण से दी गई है। इस जानकारी का उपयोग किसी भी बीमारी के निदान या उपचार हेतु बिना विशेषज्ञ की सलाह के नहीं किया जाना चाहिए। इसके अलावा किसी भी चीज को अपनी डाइट में शामिल करने या हटाने से पहले किसी योग्य डॉक्टर या आहार विशेषज्ञ (Dietitian) की सलाह जरूर लें। 

सन्दर्भ (References)

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