सर्वाइकल दर्द में करें इन खाद्य पदार्थों का परहेज

Food To Avoid In Cervical Pain In Hindi| सर्वाइकल दर्द में करें इन खाद्य पदार्थों का परहेज

Cervical pain in Hindi, सर्वाइकल अटैक
Food to Avoid in Cervical Pain

Food to avoid in cervical pain in Hindi: शोधकर्ताओं का मानना है कि सर्वाइकल पेन (सर्वाइकल अटैक) से पीड़ित व्यक्ति, अगर अपने आहार या खाद्य पदार्थों  (Food) में कुछ बदलाव लाएं तो वह सर्वाइकल पेन के लक्षणों में कुछ हद सुधार ला सकते हैं। इस पोस्ट के माध्यम से हम आपको ऐसे खाद्य पदार्थों के बारे में बताने जा रहे हैं, जिनका परहेज (Food to avoid in cervical pain) करने से आप सर्वाइकल दर्द (Cervical pain) के लक्षणों और जटिलताओं को कम कर सकते हैं।

और पढ़ें – सर्वाइकल पेन क्यों होता है, जानिए इसके लक्षण, कारण, बचाव और उपचार

सर्वाइकल पेन क्या है? | Cervical Pain meaning in Hindi

सर्वाइकल पेन, गर्दन में होने वाला दर्द है जो नेक अर्थराइटिस (Neck arthritis) के नाम से भी जाना जाता है। समान्यतः सर्वाइकल पेन 60 वर्ष से अधिक आयु वाले बुजुर्गों में देखा जाता है। हालांकि, आज के समय में बच्चे और युवा वर्ग दोनों ही इस रोग (दर्द) से ग्रस्त हैं। 

डॉक्टर के अनुसार, सर्वाइकल दर्द की गंभीरता के विभिन्न स्तर हैं। ज्यादातर मामलों में सर्वाइकल पेन हल्के दर्द के साथ शुरू होता है, जो आगे चल कर अगर वक्त रहते इसका इलाज ना कराया जाए, तो यह दर्द एक गंभीर दर्द में भी बदल सकता है।

 
 

सर्वाइकल पेन (सर्वाइकल अटैक) के लक्षण | Symptoms of Cervical Pain in Hindi

अगर सर्वाइकल पेन (सर्वाइकल अटैक) के लक्षणों की बात करें तो इसके समान्य लक्षणों में –

  • गर्दन और कंधे के क्षेत्र में दर्द
  • बाहों, हाथ या पैर में दर्द या कमजोरी,
  • पैरों में झुनझुनी या सुन्नता, 
  • शरीर की मांसपेशियों में ऐंठन,
  • सिर के पिछले हिस्से में दर्द होना, 
  • मूत्राशय और आंत को अनियमित रूप से कार्य करना आदि शामिल हैं। 
 

सर्वाइकल पेन (सर्वाइकल अटैक) के कारण | Causes of Cervical Pain in Hindi

गर्दन में दर्द या अकड़न (Cervical pain causes in hindi) कई कारणों से हो सकती है। जोकि निम्नलिखित हैं

  • अधिक घंटों तक कंप्यूटर या स्मार्टफोन का उपयोग करना,
  • बिस्तर में  लेट के पढ़ना,
  • गलत पोजीशन में सोना, 
  • सिर पर भारी वजन रखना,
  • गर्दन को बहुत देर तक झुकाये रहना, 
  • बहुत देर तक एक ही पोजीशन में बैठने रहना, 
  • ऊंचे तकिये का प्रयोग करना, 
  • भारी वजन के हेलमेट का इस्तमाल करना, 
  • गलत उठने और बैठना, 
  • रूमेटाइड अर्थराइटिस (गठिया रोग) का रोग होना,
  • ऑस्टियोपोरोसिस रोग होना आदि सर्वाइकल पेन का कारण हो सकता है।  
 

सर्वाइकल दर्द में क्या ना खाएं | Foods to avoid in cervical pain in Hindi

शोधकर्ताओं का मानना है कि वसा, चीनी, परिष्कृत अनाज, नमक आदि ऐसे खाद्य पदार्थ हैं जो शरीर की सूजन (Inflammation) को बढ़ाने में सहयोग कर सकते हैं, जिसके चलते सर्वाइकल पेन के लक्षण और भी ख़राब हो सकते हैं। 

यदि नीचे दिए गए खाद्य पदार्थों का डॉक्टर या आहार विशेषज्ञ की देख रेख में परहेज किया जाए तो सर्वाइकल दर्द के लक्षणों को कुछ हद तक कम किया जा सकता है।  इन आहारों में शामिल हैं –

1. सर्वाइकल दर्द में लाल मांस ना खाएं – Avoid red meat in cervical pain in Hindi

 
Food to avoid in cervical pain
सर्वाइकल दर्द में लाल मांस ना खाएं
 सफेद मांस की तुलना में लाल मांस में वसा की मात्रा अधिक होती है, विशेष रूप से संतृप्त वसा (सैचुरेटेड फैट) की। शोधकर्ताओं का मानना है  कि रेड मीट के अधिक सेवन से यह शरीर की सूजन (Inflammation) को बढ़ा सकते हैं और साथ ही यह सर्वाइकल पेन के लक्षणों को और भी ज्यादा ख़राब कर सकते हैं। 

अध्ययन में पाया गया है कि रेड मीट की तुलना में चिकन और मछली में कम सूजन (Inflammation) वाले बायोमार्कर होते हैं। इसलिए लाल मांस के मुकाबले सफेद मांस सर्वाइकल पेन के लक्षणों को कम करने के लिए ज्यादा बेहतर विकल्प है। 

 रेड मीट के उदाहरण में शामिल हैं –

  • मटन (Mutton) 
  • लैम्ब (Lamb)
  • भेड़ (Sheep)
  • सूअर (Pork)
  • हैम (Ham) 
  • बीफ (beef)

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2. सर्वाइकल अटैक में सोडियम (नमक) और सैचुरेटेड वसा कम खाएं – Consume less Sodium and Saturated fat in cervical pain in Hindi

Food to avoid in cervical pain in Hindi
सर्वाइकल दर्द में नमक कम खाएं

अत्यधिक प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थों में नमक और वसा की मात्रा उच्च होती है, जो शरीर में सूजन (Inflammation) का कारण बन सकते हैं और जिसके चलते सर्वाइकल पेन के लक्षण और भी ख़राब हो जाते हैं। इसलिए जहां तक संभव हो डिब्बे बंद खाद्य पदार्थों को सीमित रखें, साथ ही उन खाद्य पदार्थों को लेने से बचें जिनमें अधिक मात्रा में अतरिक्त सोडियम (Salt), सैचुरेटेड फैट्स, हाइड्रोजनीकृत तेल और प्रिजर्वेटिव (Preservative) मिले हों। 

संतृप्त वसा वाले खाद्य पदार्थों के उदाहरण हैं:

  • मक्खन, घी, नारियल का तेल और ताड़ का तेल
  • नारियल का दूध और नारियल क्रीम
  • केक और बिस्कुट
  • सॉस
  • पनीर
  • पेस्ट्री
  • मिल्क शेक
  • चॉकलेट 
  • आइसक्रीम
  • बीफ (Beef)
  • सूअर (पोर्क)
  • लैम्ब (Lamb)

3. सर्वाइकल दर्द में ना खाएं ट्रांस फैट – Avoid Trans Fat in cervical pain in Hindi

ट्रांस वसा एक प्रकार का वासा है, जिसे खाद्य निर्माता हाइड्रोजनीकरण (Hydrogenation) की प्रक्रिया के माध्यम से बनाते हैं। हाइड्रोजनीकरण का मतलब हाइड्रोजन को जोड़ने से है। हाइड्रोजन को वसा में जोड़ने से इसकी बनावट, स्थिरता और शेल्फ जीवन बदल जाती है। हालांकि, शोधकर्ताओं मानते हैं कि उपभोग करने के लिए ट्रांस वसा सुरक्षित नहीं है। यदि आपके खाने में ट्रांस फैट ज्यादा है तो यह शरीर की सूजन (Inflammation) बढ़ा सकते हैं और सर्वाइकल दर्द के लक्षणों को और भी ख़राब कर सकते हैं। इसके आलावा ट्रांस फैट मोटापा बढ़ता है तथा टाइप 2 मधुमेह के लिये भी जिम्मेदार हो सकता है। 
 

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4. सर्वाइकल अटैक में ना खाएं कृतिम चीनी – Avoid added sugars (Artificial sugar) in cervical pain in Hindi

Food to avoid in cervical pain
सर्वाइकल दर्द में ना खाएं कृतिम चीनी

ऐसे खाद्य पदार्थों का सेवन ना करें जिसमें अधिक मात्रा में कृतिम चीनी (Artificial sugar) मौजूद होती है। एक अध्ययन में पाया गया कि मीठे पेय पदार्थों (Sweetened beverages) के सेवन करने से यह शरीर की सूजन (Inflammation) को और बढ़ाने में मदद करते हैं।  सोडा, डिब्बा बंद फ्रूट जूस, आइस क्रीम और अन्य कृतिम मीठे पेय पदार्थ हैं जो सर्वाइकल पेन के लक्षणों को बढ़ा सकते हैं। इसलिए कृतिम शुगर या जरुरत से ज्यादा मीठे उत्पाद के सेवन से बचें। 

  • कैंडी
  • केक
  • कुकीज़
  • मीठे रोल, पेस्ट्री, और डोनट्स
  • डेयरी डेसर्ट (desserts), जैसे आइसक्रीम और योगर्ट
  • चीनी से बने मीठे पेय, जैसे सॉफ्ट  ड्रिंक्स , स्पोर्ट्स  ड्रिंक्स , एनर्जी  ड्रिंक्स और जूस  ड्रिंक्स

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5. सर्वाइकल दर्द में शराब कम पियें – Do not drink Alcohol in cervical pain in Hindi

Food to avoid in cervical pain in Hindi
Food to avoid in cervical pain in Hindi

शराब में इन्फ्लेमेटरी गुण होते हैं जो शरीर सूजन (Inflammation) को बढ़ाते है। शराब का अधिक सेवन हड्डियों के स्वास्थ्य को प्रभावित करने और ऑस्टियोपोरोसिस का कारण बनने के लिए भी जाना जाता है। यही कारण है कि डॉक्टर सर्वाइकल पेन से पीड़ित रोगियों को शराब को सीमित करने या पूरी तरह से बचने का सुझाव देते हैं।

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 6. सर्वाइकल अटैक में प्रसंस्कृत खाद्य का करें परहेज – Avoid Processed foods in cervical pain in Hindi

Food to avoid in cervical pain in Hindi
सर्वाइकल दर्द में प्रसंस्कृत खाद्य का करें परहेज

अत्यधिक प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थ (Processed foods) जैसे फ्रोजेन मांस, फास्ट फूड और डिब्बा बंद स्नैक्स, ये सभी ऐसे खाद्य पदार्थ हैं, जो परिष्कृत अनाज, कृतिम शक्कर, उच्च नमक और सैचुरेटेड वसा से बने होते हैं साथ ही इनकी शेल्फ-लाइफ और स्वाद को बनाए रखने के लिए प्रेज़रवेटिव पदार्थों (Preservative substances) का उपयोग भी किया जाता है, जो शरीर की सूजन (Inflammation) को बढ़ाने और सर्वाइकल पेन के लक्षणों को और भी ज्यादा ख़राब करने के लिए जिम्मेदार होते हैं। 

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7. सर्वाइकल दर्द में ओमेगा 6 कम लें – Consume less Omega-6 fatty acids in cervical pain in Hindi

Food to avoid in cervical pain in Hindi
सर्वाइकल दर्द में ओमेगा 6 कम लें

ओमेगा -6 फैटी एसिड शरीर की सामान्य वृद्धि और विकास के लिए एक आवश्यक तत्व है, लेकिन इसका अधिक सेवन, शरीर के लिए नुकसान दायक भी हो सकता है। इसलिए आपको अपने आहार में ओमेगा -6 फैटी एसिड का संतुलन बनाए रखना जरुरी है, जिसे आप ओमेगा -3 फैटी एसिड वाले खाद्य पदार्थों का सेवन करके संतुलित कर सकते हैं। ध्यान रहे ओमेगा -6 फैटी एसिड की अधिक मात्रा शरीर में प्रो-इंफ्लेमेटरी पदार्थों का उत्पादन कर सकती है, जो सर्वाइकल पेन या जोड़ों के दर्द के लिए नुकसान दायक होता है। निम्नलिखित तेलों में ओमेगा-6 फैटी एसिड अधिक मात्रा में पाया जाता है जिसमें 

  • कैनोला का तेल
  • मक्के का तेल
  • कुसुम तेल
  • सूरजमुखी का तेल
  • मूंगफली का तेल

इसके आलावा मक्का, अंगूर के बीज, मूंगफली और सोया में भी ओमेगा -6 फैटी एसिड की अधिक मात्रा होती है।

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ये हैं सर्वाइकल पेन (सर्वाइकल अटैक) में  परहेज करने काले खाद्य पदार्थ की पूरी जानकारी। कमेंट में बताएं आपको यह पोस्ट कैसी लगी। अगर यह पोस्ट पसंद आई हो तो इस पोस्ट को शेयर जरूर करें। ऊपर दी गई जानकारी पूरी तरह से शैक्षणिक दृष्टिकोण से दी गई है। इस जानकारी का उपयोग किसी भी बीमारी के निदान या उपचार हेतु बिना विशेषज्ञ की सलाह के नहीं किया जाना चाहिए, साथ ही किसी भी चीज को अपनी डाइट में शामिल करने या हटाने से पहले किसी योग्य डॉक्टर या आहार विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।  
 
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 सन्दर्भ (References)

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