Low Platelet Count Symptoms: प्लेटलेट्स की कमी के लक्षण, कारण और उपाय

ब्लड में मौजूद बिम्बाणु, या प्लेटेलेट एक प्रकार की कोशिकाएं हैं, जो खून में थक्का जमाने का काम करती हैं। जब शरीर में कहीं चोट लगती है या किसी वजह से शरीर के अंग से खून निकलता है, तो प्लेटलेट्स उस जगह पर सक्रिय होकर थक्का बना देती हैं और खून बहने से रुक जाता है। परन्तु, कभी-कभी प्लेटलेट्स की कमी (थ्रोम्बोसाइटोपेनिया) के कारण नसों से ब्लीडिंग होने की आशंका बढ़ जाती है और शरीर से खून निकलने लगता है। अधिक गंभीर मामलों में मृत्यु होने का भी खतरा रहता है। इसलिए, यदि आप प्लेटलेट्स की कमी से जूझ रहे हैं, तो इसे गंभीरता से लिया जाना चाहिए। इस पोस्ट में हम आपको प्लेटलेट्स की कमी के लक्षण (Low Platelet Count symptoms in Hindi), कारण और इसके बचाव के उपाय के बारे में बता रहे हैं।

लो प्लेटलेट काउंट क्या है? (What is a low platelet count in Hindi?)

प्लेटलेट काउंट रक्त में मौजूद प्लेटलेट्स की संख्या है। एक सामान्य प्लेटलेट काउंट 150,000 से 450,000  प्रति माइक्रो-लीटर तक होता है।

जब खून में प्लेटलेट्स काउंट 150,000 प्रति माइक्रोलीटर से नीचे चला जाता है, तो इसे लो प्लेटलेट्स या थ्रोम्बोसाइटोपेनिया (Thrombocytopenia) कहा जाता है। ध्यान रहे जरुरत से कम प्लेटलेट काउंट रक्तस्राव का कारण बन सकता है। 

“लो प्लेटलेट काउंट थ्रोम्बोसाइटोपेनिया कहलाता है। यदि किसी व्यक्ति का प्लेटलेट्स काउंट 20 हजार से नीचे है, तो चोट न लगने पर भी उसका खून बह सकता है। ऐसे में ब्लीडिंग को रोकना मुश्किल हो जाता है।”

प्लेटलेट का सामान्य स्तर क्या है? (What is a normal platelet count in Hindi?)

स्वस्थ वयस्कों में प्लेटलेट्स की संख्या 150,000 से 450,000 प्रति माइक्रोलीटर रक्त तक होती है। प्लेटलेट काउंट कम होने पर रक्तस्राव का खतरा अधिक होता है। हालांकि, रक्तस्राव की समस्या की संभावना तब तक नहीं होती है जब तक कि प्लेटलेट की संख्या 100,000 प्लेटलेट्स प्रति μl से कम न हो। 

यदि किसी व्यक्ति को प्लेटलेट्स की कमी या थ्रोम्बोसाइटोपेनिया है तो इसका स्तर इस प्रकार हो सकता हैं-

1. हल्का थ्रोम्बोसाइटोपेनिया (Mild thrombocytopenia)

यदि प्लेटलेट का स्तर 100,000 और 140,000 प्रति माइक्रोलीटर रक्त के बीच है तो इसे हल्का थ्रोम्बोसाइटोपेनिया कहा जाता है। आमतौर पर हल्का थ्रोम्बोसाइटोपेनिया होने पर कोई लक्षण दिखाई नहीं देते हैं। 

2. मध्यम थ्रोम्बोसाइटोपेनिया (Moderate thrombocytopenia)

मध्यम थ्रोम्बोसाइटोपेनिया तब कहा जाएगा जब प्लेटलेट का स्तर 50,000 से 100,000 प्रति माइक्रोलीटर रक्त के बीच होता है।

3. गंभीर थ्रोम्बोसाइटोपेनिया (Severe thrombocytopenia)

51,000 और 21,000 माइक्रोलिटर रक्त के बीच प्लेटलेट का स्तर गंभीर थ्रोम्बोसाइटोपेनिया कहा जाता है।

लो प्लेटलेट्स की कमी के लक्षण (थ्रोम्बोसाइटोपेनिया के लक्षण) | Low platelet count symptoms (Thrombocytopenia) in Hindi

Low Platelet Count Symptoms in Hindi
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प्लेटलेट्स की कमी के लक्षण (Symptoms of Low Platelet Count) या थ्रोम्बोसाइटोपेनिया के लक्षण इस बात पर निर्भर करते हैं कि आपका प्लेटलेट काउंट कितना कम है।

प्लेटलेट्स की कमी का सबसे सामान्य लक्षण रक्तस्राव का होना है। हालांकि, ज्यादातर लोग जिनका प्लेटलेट्स काउंट 100,000 और 140,000 प्रति माइक्रोलीटर रक्त के बीच होता है वह प्लेटलेट्स की कमी के लक्षण का अनुभव नहीं करते हैं।

“प्लेटलेट्स की कमी से आपको आंतरिक रक्तस्राव भी हो सकता है। यदि आप आंतरिक रक्तस्राव के किसी भी लक्षण का अनुभव करते हैं, तो तत्काल अपने डॉक्टर से बात करें। दुर्लभ मामलों में, थ्रोम्बोसाइटोपेनिया से आपके मस्तिष्क या आंत में आंतरिक रक्तस्राव हो सकता है, जो जीवन के लिए खतरा है।”

प्लेटलेट्स की कमी के संकेत निम्नलिखित हो सकते हैं।

1. अधिक रक्त स्त्राव (Excessive bleeding from cuts or wounds is a symptom of low platelet count)

भारी रक्तस्राव कम प्लेटलेट काउंट (थ्रोम्बोसाइटोपेनिया) का एक सामान्य लक्षण (Symptoms of Low Platelet Count in Hindi) है। प्लेटलेट्स की कमी के कारण घाव वाली जगह पर थक्के नहीं बन पाते हैं, जिससे छोटे-छोटे कट या घाव में भी बहुत खून बहने लगता है।

2. मसूड़ों से खून निकलना (Bleeding gums are a low platelet count symptoms)

कम प्लेटलेट काउंट (थ्रोम्बोसाइटोपेनिया) के कारण आप अपने टूथब्रश पर खून देख सकते हैं या आपके मसूड़े सूजे हुए दिखाई दे सकते हैं। टूथब्रश करने पर यदि हल्का सा भी घाव हो जाए तो प्लेटलेट्स की कमी के कारण अधिक रक्तस्राव हो सकता है।

3. शरीर पर लाल, भूरे व जामुनी रंग के निशान होना (Red, brown and purple marks on the body)

प्लेटलेट्स की कमी के कारण आपके शरीर में लाल, भूरे व जामुनी रंग के निशान दिख सकते हैं। ये भी प्लेटलेट की कमी के लक्षण (लो प्लेटलेट सिम्पटम्स इन हिंदी) हो सकते है। 

4. मासिक धर्म में अधिक रक्तस्राव (Heavy menstrual bleeding)

महिलाओं में प्लेटलेट्स की कमी के कारण उनके पीरियड के दौरान अधिक रक्तस्राव हो सकता है। जो प्लेटलेट्स की कमी का संकेत हो सकता है। 

5. मलाशय से खून आना या मल में खून आना (Bleeding from the rectum or passing blood in the stool)

मल या मलाशय से खून आना भी प्लेटलेट्स की कमी के लक्षण (Low Platelet Count Symptoms in Hindi) हो सकते हैं। यदि प्लेटलेट्स की कमी की समस्या अधिक गंभीर है तो मलाशय से रक्तस्राव हो सकता है।

6. पेशाब में खून आना (Blood in urine)

कुछ मामलों में प्लेटलेट्स की कमी के कारण यूरिन में ब्लड आने लगता है। मूत्र में रक्त का आना हेमट्यूरिया कहलाता है। हेमट्यूरिया के कई और भी कारण हैं जैसे- संक्रमण, कैंसर और रक्‍त विकार। 

7. अत्यधिक थकान (Excessive fatigue)

लो ब्लड प्लेटलेट काउंट अत्यधिक थकान का कारण बन सकता है। हालांकि, अधिक थकन का होना अन्य बीमारी का भी कारण हो सकता है।   

8. सिर दर्द (Headache)

सिर दर्द भी लो ब्लड प्लेटलेट काउंट का कारण बन सकता है।

कम प्लेटलेट काउंट के कारण क्या है? (What is the cause of low platelet count in Hindi?)

Cause of low platelet count in Hindi

थ्रोम्बोसाइटोपेनिया विभिन्न कारकों के कारण हो सकता है। दुर्लभ मामलों में, यह अनुवांशिक भी हो सकता है। कम प्लेटलेट काउंट के कुछ सामान्य कारण नीचे सूचीबद्ध हैं।

1. डेंगू  फीवर (Dengue fever)

सामान्यतः डेंगू बुखार कम प्लेटलेट काउंट का मुख्य कारण है। डेंगू बुखार के कारण आपकी रक्त कोशिकाएं प्रभावित होती हैं, जो प्लेटलेट की क्षति का कारण बनता है।

और पढ़ें: डेंगू के लक्षण, बचाव, इलाज और डाइट प्लान

2. प्रेगनेंसी (Pregnancy)

प्रेगनेंसी के दौरान शरीर प्लेटलेट्स को अत्यधिक उपयोग करता है जिस कारण महिलाएं प्लेटलेट्स की कमी अनुभव कर सकती हैं। ज्यादातर मामलों में डिलीवरी के करीब यह अधिक सामान्य है।

3. ऑटोइम्यून रोग (Autoimmune diseases)

कुछ ऑटोइम्यून बीमारियों के कारण प्लेटलेट्स नष्ट हो सकती हैं। ऑटोइम्यून बीमारियों में आईटीपी, ल्यूपस और रुमेटीइड गठिया जैसे रोग शामिल हैं।

4. संक्रमण (Infection)

जीवाणु या वायरल संक्रमण किसी व्यक्ति के प्लेटलेट काउंट को अस्थायी रूप से कम कर सकते हैं। मुख्यतः डेंगू प्लेटलेट की कमी का कारण होता है।

5. दवाएं (Medicines)

हेपरिन (रक्त पतला करने वाली दवा), quinine और anti-seizure दवाएं जैसी दवाएं आपके प्लेटलेट काउंट को कम कर सकती हैं। कभी-कभी दवाएं प्रतिरक्षा प्रणाली को भ्रमित करती हैं और प्लेटलेट्स को नष्ट करने का कारण बनती हैं।

ओवर-द-काउंटर (ओटीसी) दवाएं भी कम प्लेटलेट काउंट का कारण बन सकती हैं उनमें शामिल हैं:

  • एसिटामिनोफ़ेन
  • आइबुप्रोफ़ेन
  • नेपरोक्सन
  • एस्पिरिन

6. ब्लड कैंसर (Blood cancer)

ब्लड कैंसर के कारण बोन मैरो पर्याप्त प्लेटलेट्स नहीं बना पाती हैं। यह तब हो सकता है जब आपको ल्यूकेमिया या लिंफोमा जैसे रक्त कैंसर हों। 

7. बड़ी हुई स्प्लीन (Enlarged spleen)

कभी कभी आपकी स्प्लीन प्लेटलेट्स को अधिक स्टोर करने लगती हैं। सामान्यतः, आपकी स्प्लीन आपके प्लेटलेट की आपूर्ति का लगभग एक तिहाई हिस्सा स्टोर करती है।

8. अप्लास्टिक एनीमिया (Aplastic anemia)

अप्लास्टिक एनीमिया तब होता है जब अस्थि मज्जा पर्याप्त संख्या में नई रक्त कोशिकाओं को बनाना बंद कर देती हैं।

9. पर्यावरण (Environment factors)

जहरीले रसायन (जैसे कीटनाशक, आर्सेनिक और बेंजीन) के संपर्क में आने पर भी प्लेटलेट्स का उत्पादन धीमा हो सकता है।

10. जीवनशैली की आदतें (Lifestyle habits)

अत्यधिक शराब प्लेटलेट्स के उत्पादन को धीमा कर देती है। बहुत अधिक शराब पीने से आपका प्लेटलेट काउंट थोड़े समय के लिए गिर सकता है। यह उन लोगों में अधिक होता है जिनमें विटामिन बी12 या फोलेट का स्तर कम होता है।

कैसे किया जाता है लो प्लेटलेट्स का निदान?  (How is low platelets diagnosed in Hindi?)

How is low platelets diagnosed in Hindi

थ्रोम्बोसाइटोपेनिया के लिए कई निदान विधियां हैं। डॉक्टर आपकी स्वास्थ्य स्थिति के आधार पर टेस्ट का सुझाव देते हैं।  

1. पूर्ण रक्त गणना (सीबीसी) – Complete blood count (CBC)

कंप्लीट ब्लड काउंट टेस्ट (CBC) कुल प्लेटलेट काउंट का पता लगाने में मदद करता है। यह परीक्षण संक्रमण और अन्य स्थितियां जैसे एनीमिया और ल्यूकेमिया का भी पाता लगाता है। इसके अलावा इस टेस्ट के साथ डॉक्टर HIV और HCV टेस्ट भी करावा सकते हैं। 

2. ब्लड स्मीयर टेस्ट – Blood smear test

रक्त स्मीयर परीक्षण कोशिका के आकार को देखने में मदद करता है। यह परीक्षण निर्धारित करता है कि कोशिकाएं सामान्य हैं या क्षतिग्रस्त। एक रक्त स्मीयर परीक्षण परजीवियों की उपस्थिति को इंगित करने में भी मदद करता है।

4. अस्थि मज्जा परीक्षण – Bone marrow test

प्लेटलेट काउंट का पता लगाने के लिए बोन मैरो टेस्ट किया जा सकता है। बोन मैरो टेस्ट परीक्षण दो प्रकार के होते हैं।

  • बायोप्सी
  • एस्पिरशन 

कैसे किया जाता है प्लेटलेट्स की कमी का इलाज? (Treatment of platelet deficiency in Hindi)

Treatment of platelet deficiency in Hindi

प्लेटलेट्स की कमी का उपचार (या थ्रोम्बोसाइटोपेनिया का इलाज) इस बात पर निर्भर करता है कि इसका क्या कारण है। यदि आपको हल्का या मध्यम थ्रोम्बोसाइटोपेनिया है, तो आमतौरपर इसके लिए आपको उपचार की आवश्यकता नहीं होती है। इसे आप कुछ घरेलू उपायों द्वारा ठीक भी कर सकते हैं। 

यदि किसी दवा की प्रतिक्रिया कम प्लेटलेट काउंट का कारण बन रही है, तो आपका डॉक्टर दूसरी दवा लिख सकते हैं। यदि आपकी प्रतिरक्षा प्रणाली कम प्लेटलेट काउंट का कारण बन रही है, तो आपका प्रदाता प्रतिरक्षा प्रणाली को दबाने के लिए दवाएं लिख सकते हैं।

थ्रोम्बोसाइटोपेनिया की गंभीर स्थिति में डॉक्टर प्लेटलेट काउंट बढ़ाने के लिए दवाएं, प्लेटलेट ट्रांसफ्यूजन या स्प्लेनेक्टोमी जैसे उपचार लिख सकते हैं। इन उपचार का मुख्य लक्ष्य रक्तस्राव के कारण होने वाली मृत्यु और विकलांगता को रोकना है।

1. प्लेटलेट्स बढ़ाने की टेबलेट (Medication to increase platelets)

प्लेटलेट्स बढ़ाने की टेबलेट में शामिल हैं –

  • प्रेडनिसोन
  • एल्ट्रोमबोपैग
  • रोमिप्लोस्टिम
  • इम्युनोग्लोबुलिन
  • रीटक्सिमैब
  • फोलेट 

कॉर्टिकोस्टेरॉइड्स, जैसे प्रेडनिसोन, आमतौर पर कम प्लेटलेट काउंट के इलाज के लिए उपयोग में लाई जाती हैं। ये दवाएं, जिन्हें संक्षेप में स्टेरॉयड कहा जाता है, आपके प्लेटलेट काउंट को बढ़ाने में मदद करती हैं।

आपके शरीर को अधिक प्लेटलेट्स बनाने में मदद करने के लिए आपको एल्ट्रोमबोपैग और रोमिप्लोस्टिम जैसी दवाओं की आवश्यकता हो सकती है। इम्युनोग्लोबुलिन और रीटक्सिमैब जैसी दवाएं आपकी प्रतिरक्षा प्रणाली को आपके प्लेटलेट्स को नष्ट करने से रोकने में मदद कर सकती हैं। इसके अलावा फोलेट एक बी विटामिन है, जो खून की कोशिकाओं के लिए जरूरी है।

2. प्लेटलेट ट्रांसफ्यूजन द्वारा प्लेटलेट की कमी का इलाज (Platelet transfusion)

प्लेटलेट ट्रांसफ़्यूज़न का उपयोग उन लोगों के इलाज के लिए किया जाता है जिनमें प्लेटलेट की कमी से भारी रक्तस्राव होता है या रक्तस्राव के उच्च जोखिम में हैं। इस प्रक्रिया के दौरान, रोगी को रक्त वाहिकाओं के जरिये प्लेटलेट्स चढ़ाई जाती है।

3. स्प्लेनेक्टोमी (Splenectomy)

यदि अन्य उपचार काम नहीं करते हैं, तो डॉक्टर रक्त में प्लेटलेट काउंट बढ़ाने के लिए आपकी स्प्लीन को हटा सकते हैं। स्प्लीन हटाने की प्रक्रिया स्प्लेनेक्टोमी कहलाती है। कभी कभी स्प्लीन प्लेटलेट्स को अधिक स्टोर करने लगती है जिससे ब्लड प्लेटलेट्स की कमी हो जाती है। 

प्लेटलेट्स बढ़ाने के घरेलू उपाय (Home remedies to increase platelets in Hindi)

Home remedies to increase platelets in Hindi

1 प्लेटलेट्स बढ़ाने वाले फल (Fruits to increase platelets)

विटामिन सी आयरन के अवशोषण और प्लेटलेट काउंट को बढ़ाने में मदद करता है। प्लेटलेट्स बढ़ाने वाले फलों में शामिल हैं – नींबू, संतरा, अनानास, और अनार आदि। इसके अलावा कीवी और पपीता प्लेटलेट्स की मात्रा बढ़ाने के लिए काफी फायदेमंद माना जाता है।

और पढ़ें: कीवी का जूस पीने के फायदे जानकर हो जाएंगे हैरान

2. प्लेटलेट्स बढ़ाने वाले सब्जी (vegetables to increase platelets)

प्लेटलेट बढ़ाने के लिए विटामिन C, फोलेट और विटामिन K जैसे फ़ूड खाने की सलाह दी जाती है। ब्रोकली, हरी सब्जियां, पत्‍तेवाली सब्जियां, सोयाबीन, कददू, बीन्स,स्‍प्राउट, लाल हरी शिमला मिर्च, चुकंदर आदि सब्जियों के सेवन से आप आपने ब्लड में प्लेटलेट काउंट बड़ा सकते हैं।

3. विटामिन डी युक्त खाद्य पदार्थ (Vitamin D to increase platelets) 

विटामिन डी से भरपूर खाद्य पदार्थ आपकी प्लेटलेट्स बढ़ाने में मदद कर सकते हैं। इन खाद्य पदार्थों में शामिल हैं – अंडे की जर्दी, वसायुक्त मछली जैसे – सैल्मन, टूना, मैकेरल, मछली के जिगर का तेल, फोर्टिफाइड दूध और दही।

4 नारियल पानी (Coconut water to increase platelets) 

नारियल पानी में इलेक्ट्रोलाइट्स अच्छी मात्रा में होता है। इसके अलावा यह मिनिरल्स का भी अच्छा स्रोत है जो शरीर में ब्लड प्लेटलेट्स की कमी को पूरा करने में मदद कर सकता है।

5. गिलोय (Giloy to increase platelets) 

गिलोय का जूस प्‍लेटलेट्स को बढ़ाने का सर्वोत्तम उपाय हो सकता है। इसके अलावा इसका सेवन करने से आपकी रोग-प्रतिरोधक क्षमता भी मजबूत होती है। दो चुटकी गिलोय के सत्व को एक चम्मच शहद के साथ दिन में दो बार पियें या फिर गिलोय की डंडी को रात भर पानी में भिगो कर सुबह उसका छना हुआ पानी पी लें। कुछ ही दिनों में आपको सकारात्मक परिणाम दिखने लगेंगे।

6. प्लेटलेट्स कम होने पर क्या नहीं खाना चाहिए (परहेज) – Foods to avoid in low platelet count

प्‍लेटलेट्स बढ़ाने के लिए जिन खाद्य पदार्थों का परहेज करना हो सकता है उनमें शामिल हैं –

  • लाल मांस (मटन, लैम्ब, भेड़, सूअर, हैम, बीफ)
  • रिफाइंड भोजन (पास्ता, पिज्जा, सफेद ब्रेड और नूडल्स हैं।)
  • अल्कोहल
  • प्रोसेस्ड और डीप-फ्राइड फूड आइटम्स
  • मक्खन
  • कुकीज़
  • केक
  • फ्रेंच फ्राइज़
  • चिप्स
  • डोनट्स
  • पिज़्ज़ा
  • बर्गर,
  • फ्राइड फूड्स
  • कैंडी
  • केक
  • कुकीज़
  • मीठे रोल,
  • पेस्ट्री,
  • डोनट्स
  • आइसक्रीम

निष्कर्ष (Conclusion)

प्लेटलेट्स की कमी (थ्रोम्बोसाइटोपेनिया) किसी को भी हो सकती है। समान्यतः इसकी कमी के लक्षण दिखाई नहीं देते हैं। गंभीर स्थिति में प्लेटलेट्स की कमी के कारण घाव वाली जगह पर ठीक से थक्के नहीं बन पाते हैं, जिससे छोटे कट या घाव में भी बहुत खून बहने लगता है। यदि आप प्लेटलेट्स की कमी (थ्रोम्बोसाइटोपेनिया) के कारण शरीर में कोई असामान्य लक्षण अनुभव कर रहे हैं, तो तुरंत अपने डॉक्टर से परामर्श करें। क्‍योंकि, अगर आपका काउंट बहुत कम है, तो बिना चोट लगे ही इंटरनल ब्‍लीडिंग हो सकती है। दुर्लभ मामलों में, थ्रोम्बोसाइटोपेनिया आपके मस्तिष्क या आंत में आंतरिक रक्तस्राव का कारण बन सकता है, जो जीवन के लिए खतरा है।

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Disclaimer: ऊपर दी गई जानकारी पूरी तरह से शैक्षणिक दृष्टिकोण से दी गई है। इस जानकारी का उपयोग किसी भी बीमारी के निदान या उपचार हेतु बिना विशेषज्ञ की सलाह के नहीं किया जाना चाहिए। इसके अलावा किसी भी चीज को अपनी डाइट में शामिल करने या हटाने से पहले किसी योग्य डॉक्टर या आहार विशेषज्ञ (Dietitian) की सलाह जरूर लें।

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अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)

Q. प्लेटलेट की कमी से कौन सा रोग होता है?

यदि आपके ब्लड में प्लेटलेट की कमी हो जाए तो बिना चोट लगे नसों से ब्लीडिंग होने की आशंका बढ़ जाती है और शरीर से खून निकलने लगता है। अधिक गंभीर मामलों में मृत्यु होने का भी खतरा रहता है।

Q. प्लेटलेट्स कम होने का मुख्य कारण क्या है?

डेंगू फीवर,प्रेगनेंसी, बड़ी हुई स्प्लीन,ऑटोइम्यून रोग,संक्रमण,दवाएं (हेपारटिन),ब्लड कैंसर,अप्लास्टिक एनीमिया जैसी स्थितियां प्लेटलेट्स कम होने का मुख्य कारण हो सकती हैं।

Q. प्लेटलेट्स कम होने पर क्या खाना चाहिए?

ब्रोकली, हरी सब्जियां, पत्‍तेवाली सब्जियां, सोयाबीन, कददू, बीन्स,स्‍प्राउट, लाल हरी शिमला मिर्च, चुकंदर जैसी सब्जियां प्लेटलेट्स बढ़ाने में मदद करती हैं।

Q. प्लेटलेट्स बढ़ाने के लिए क्या करें?

प्लेटलेट्स बढ़ाने के लिए विटामिन डी से भरपूर खाद्य पदार्थों को अपनी डाइट में शामिल करें। इन खाद्य पदार्थों में शामिल हैं – अंडे की जर्दी, वसायुक्त मछली जैसे – सैल्मन, टूना, मैकेरल, मछली के जिगर का तेल, फोर्टिफाइड दूध और दही। इसके अलावा प्लेटलेट्स बढ़ाने  में नारियल पानी और गिलोय भी मदद करते हैं।

Q. तुरंत प्लेटलेट काउंट कैसे बढ़ाएं?

प्लेटलेट तुरंत बढ़ाने के लिए डॉक्टर प्लेटलेट ट्रांसफ्यूज़ करते हैं। प्लेटलेट ट्रांसफ़्यूज़न का उपयोग उन लोगों के इलाज के लिए किया जाता है जिनमें प्लेटलेट की कमी के कारण रक्तस्राव होने की सम्भावना होती है या रक्तस्राव के उच्च जोखिम में हैं।

Q. कौन सा फल प्लेटलेट्स बढ़ाता है?

नींबू, संतरा, अनानास, अनार, कीवी और पपीता प्लेटलेट्स जैसे फल प्लेटलेट्स बढ़ाने के लिए काफी फायदेमंद हो सकते हैं।

Q. प्लेटलेट्स कम होने पर क्या क्या नहीं खाना चाहिए?

प्लेटलेट्स कम होने पर जिन खाद्य पदार्थों का परहेज करना हो सकता है उनमें शामिल हैं – लाल मांस (मटन, लैम्ब, भेड़, सूअर, हैम, बीफ), रिफाइंड भोजन (पास्ता, पिज्जा, सफेद ब्रेड और नूडल्स), अल्कोहल, प्रोसेस्ड और डीप-फ्राइड फूड आइटम्स (चिप्स और फ्रेंच फ्राइज़)

Q. प्लेटलेट्स कब चढ़ाना चाहिए?

यदि प्लेटलेट्स काउंट पचास हजार से कम है तो डॉक्टर प्लेटलेट ट्रांसफ्यूज़ की सलाह दे सकते हैं।

सन्दर्भ (References)

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