Dengue Fever in Hindi

Symptoms of Dengue | डेंगू के लक्षण, बचाव, इलाज और डाइट प्लान

Symptoms of Dengue in Hindi: बरसात शुरू होते ही बीमार का होना भी स्वाभाविक है, इसमें से कुछ बीमारियां ऐसी हैं जो काफी घातक हो सकती हैं, जैसे डेंगू। डेंगू, हड्डी तोड़ बुखार के नाम से भी जाना जाता है। डेंगू बुखार की चपेट में बड़े-बुजुर्ग से लेकर बच्चे तक आसानी से आ जाते हैं। डेंगू बुखार के लक्षण (Dengue Fever Symptoms in Hindi) हल्के से लेकर गंभीर तक हो सकते हैं, जो कभी-कभी जानलेवा भी हो जाते है।

दुर्भाग्यवश, डेंगू का कोई पूर्णतः इलाज नहीं है। ऐसे में इस बीमारी से बचाव के उपाय ही हमें स्वस्थ रख सकते हैं। तो आइये अब इस पोस्ट के माध्यम से जानते हैं कि डेंगू फीवर क्या है और क्यों होता है? साथ ही समझते हैं इसके लक्षण, कारण, बचाव, इलाज और डाइट प्लान के बारे।

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डेंगू बुखार क्या है, और क्यों होता है? | Dengue meaning in Hindi

डेंगू बुखार एक वायरल संक्रमण है, जो संक्रमित मच्छरों के काटने से इंसानों में फैलता है। डेंगू बुखार “हड्डी तोड़ बुखार” (Breakbone fever) के नाम से भी जाना जाता है, क्योंकि इससे पीड़ित व्यक्ति को इतना अधिक दर्द हो सकता है कि जैसे उनकी हड्डियां टूट गयी हों।

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डेंगू के लक्षण क्या हैं? या हड्डी तोड़ बुखार के लक्षण क्या हैं? | Symptoms of Dengue in Hindi

Symptoms of Dengue, डेंगू बुखार के लक्षण
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संक्रमण होने के 3 से 14 दिनों के बाद डेंगू बुखार के लक्षण सामने आते हैं। वयस्कों और बच्चों में डेंगू के मुख्य लक्षण निम्नलिखित हैं। जिसमें –

डेंगू बुखार के लक्षण इन हिंदी- Dengue Fever Symptoms in Hindi

  • तेज बुखार (104°F तक ),
  • सिरदर्द,
  • त्वचा पर चेचक जैसे लाल चकत्ते,
  • मांसपेशियों और जोड़ों में दर्द,
  • हड्डी में दर्द,
  • जी मिचलाना,
  • उल्टी,
  • आँखों के पीछे दर्द
  • प्लेटलेट्स कम होना,
  • भूख ना लगना,
  • ब्लड प्रेशर (Blood pressure) कम होना,
  • हृदयगति का कम होना आदि शामिल हैं

समान्तः डेंगू बुखार के लक्षण  5-7 दिन तक रहते हैं। हालांकि, यदि यह लक्षण 5-7 दिन के बाद भी रहते हैं तो  आप शायद अब गंभीर चरण में प्रवेश करने वाले हैं जिसमें आपकी प्लेटलेट गिनती में तेजी से कमी आती है।

आपके लिए यह जानना महत्वपूर्ण है कि कुछ मामलों में डेंगू के कोई भी लक्षण या बीमारी विकसित नहीं होती है। फिर भी, डॉक्टर से परामर्श करने या लक्षणों का सावधानीपूर्वक विश्लेषण करने की सलाह दी जाती है।

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डेंगू का कारण क्या है? या हड्डी तोड़ बुखार का कारण क्या है? | Causes of Dengue Fever in Hindi

डेंगू मुख्यतः चार वायरसों के काटने के कारण होता है, जो इस प्रकार हैं – डीईएनवी-1, डीईएनवी-2, डीईएनवी-3 और डीईएनवी-4

जब मच्छर किसी डेंगू संक्रमित व्यक्ति को काटता है तो वायरस मच्छर के शरीर में प्रवेश कर जाता है। और बीमारी तब फैलती है जब वह मच्छर किसी स्वस्थ व्यक्ति को काटता है।

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डेंगू वायरस का नाम क्या है? | Dengue Virus Name in Hindi

डेंगू फीवर एडीस एजिप्टी (Aedes egypti) नामक प्रजाति के मच्छरों से फैलता है। इसके कारण हर साल अनेक लोगों की मृत्यु हो जाती है।

डेंगू मच्छर कब काटता है? | When Does Dengue Mosquito Bite in Hindi

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के मुताबिक डेंगू का मच्छर सुबह और शाम के समय काटता है। दोपहर और रात को यह घर के कोने, पर्दे के पीछे या नमी वाली जगह पर छिप जाता है।

डेंगू सीधे एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में नहीं फैल सकता है। हालांकि, डेंगू बुखार से संक्रमित और पीड़ित व्यक्ति अन्य मच्छरों को संक्रमित कर सकता है।

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डेंगू फीवर कितने प्रकार का होता है? | Types of Dengue fever in Hindi

डेंगू की गंभीरता और लक्षणों के आधार पर, डेंगू को तीन प्रकार में वर्गीकृत किया गया है।

  • हल्का डेंगू बुखार (Mild Dengue Fever)
  • डेंगू रक्तस्रावी बुखार (Dengue Hemorrhagic fever)
  • डेंगू शॉक सिंड्रोम (Dengue Shock syndrome)

1. हल्का डेंगू बुखार (Mild Dengue Fever)

इसमें रोगी को हल्का बुखार या तेज बुखार आ सकता है, साथ ही मांसपेशियों में दर्द, जोड़ों में दर्द, उल्टी, तेज और लंबे समय तक सिरदर्द शामिल हो सकता है। 

2. डेंगू रक्तस्रावी बुखार (Dengue Hemorrhagic fever)

कुछ लोगों में डेंगू बुखार जीवन के लिये खतरा भी हो सकते हैं। यदि डेंगू रक्तस्रावी बुखार है या डेंगू शॉक सिंड्रोम है।

डेंगू रक्तस्रावी बुखार के कारण रक्त वाहिकाओं (रक्त ले जाने वाली नलिकाएं) में आंतरिक रक्तस्राव या रिसाव होता है, तथा रक्त प्लेटलेट्स (जिनके कारण रक्त जमता है) का स्तर कम हो जाता है।

इसके अलावा ठंड लगना, चिपचिपी त्वचा, नाक से खून आना, बेचैनी और रक्तचाप में कमी इसके लक्षण हो सकते हैं।

3. डेंगू शॉक सिंड्रोम (Dengue Shock syndrome)

डेंगू शॉक सिंड्रोम (डीएसएस) आम तौर पर अगली स्थिति है, जो रोगी अनुभव करते हैं। डेंगू शॉक सिंड्रोम में रोगी का रक्तचाप खतरनाक रूप से निम्न  हो जाता है। डीएसएस मुख्य रूप से 10 साल से कम उम्र के बच्चों में देखा जाता है।

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डेंगू बुखार का तापमान पैटर्न क्या है? | Dengue Fever Temperature Pattern in Hindi 

पहले 2 से 7 दिन व्यक्ति को तेज बुखार, सामान्य शरीर दर्द तथा सिरदर्द हो सकता है। लगभग 50 से 80% लोगों के त्वचा में लाल चकत्ते भी हो जाते हैं। पहले या दूसरे दिन, चकत्ते लाल त्वचा जैसे दिख सकते हैं।

बीमारी के बाद के दिनों में (चौथे से सातवें दिन पर) चकत्ते चेचक जैसे लग सकते हैं।  बुख़ार 2 से तीन दिन के बाद अपने आप कम (बेहतर) होने लगता है।

हालांकि, कुछ लोगों में, उच्च बुख़ार के जाने के बाद बीमारी गंभीर चरण में प्रवेश कर जाती है। गंभीर चरण एक से दो दिनों या उससे अधिक दिनों तक तक चल सकता है। इस चरण के दौरान, छाती तथा पेट में तरल का निर्माण हो सकता है और साथ ही प्लेटलेट्स काउंट में कमी आ सकती है।

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डेंगू कितने दिन में ठीक होता है? (डेंगू रिकवरी टाइम) | Dengue Recovery Time Hindi

समान्तः डेंगू बुखार लगभग 5-7 दिन तक रहता है और रोगी ठीक हो जाता है। ज्यादातर लोग करीब एक हफ्ते बाद ठीक हो जाते हैं।

डेंगू में प्लेटलेट्स कितना होना चाहिए? | Dengue Platelet Count in Hindi

डेंगू जैसे बुखार में शरीर की प्लेटलेट्स काउंट घट जाता है। डेंगू में प्लेटलेट्स घटने से नाक से खून आना, मसूड़ों से खून आना या स्किन पर नीले-भूरे रंग के धब्बे पड़ने लगते हैं। डॉक्टर्स के अनुसार शरीर का नार्मल प्लेटलेट्स काउंट डेढ़ लाख से साढ़े चार लाख तक होना चाहिए।

डेंगू की जाँच कब करवानी चाहिए? | When Should I Get Tested for Dengue in Hindi

जब उच्च तापमान (40 डिग्री सेल्सियस या 104 डिग्री फारेनहाइट) के साथ आंखों की मांसपेशियों के पीछे गंभीर दर्द, सिरदर्द, जोड़ों में दर्द , मिचली, उल्टी, सूजी हुई ग्रंथियां व चकत्ते जैसे कोई भी दो लक्षण हों तो डेंगू की जांच करवानी चाहिए।

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डेंगू की जाँच कैसे होती है? | Dengue Blood Test Name in Hindi

यदि किसी व्यक्ति को बुखार, मांसपेशियों में दर्द और कमजोरी है या डेंगू के कोई अन्य लक्षण हैं, तो डॉक्टर निम्नलिखित डेंगू परीक्षण करवाने की सलाह दे सकते हैं। डेंगू परीक्षण ब्लड सैंपल से किया जाता है।

  • डेंगू  NS1 एंटीजन टेस्ट, लक्षण दिखने के पहले पांच दिनों के भीतर करवाया जाता है।
  • IgM एंटीबॉडी टेस्ट, लक्षण दिखने के सात से दस दिनों के बाद करवाया जाता है।
  • IgG एंटीबॉडी टेस्ट, लक्षण दिखने के सात से दस दिनों के बाद करवाया जाता है।
  • डेंगू  RNA PCR टेस्ट, लक्षण दिखने के पहले पांच दिनों के भीतर करवाया जाता है।

ध्यान रहे रोग के प्रारंभिक चरण में सभी परीक्षण नेगेटिव हो सकते हैं। इसलिए डॉक्टर के अनुसार ही डेंगू टेस्ट करवाएं।

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डेंगू ब्लड टेस्ट रिपोर्ट का मतलब | Dengue Test Report in Hindi

किसी व्यक्ति की डेंगू ब्लड टेस्ट रिपोर्ट निम्नलिखित हो सकती है।

  • पॉजिटिव NS1 परीक्षण का मतलब है कि आप डेंगू वायरस से संक्रमित हैं।
  • पॉजिटिव IgM एंटीबॉडी टेस्ट का मतलब है कि आप हाल ही में डेंगू वायरस से संक्रमित हुए हैं।
  • पॉजिटिव IgG एंटीबॉडी टेस्ट का मतलब है कि आपको पहले कभी डेंगू वायरस का संक्रमण हुआ था।
  • पॉजिटिव डेंगू RNA PCR टेस्ट न केवल संक्रमण की पुष्टि करता है बल्कि, डेंगू वायरस के विभिन्न सीरोटाइप (और जीनोटाइप) की पहचान करने में भी मदद करता है। एंटीजन या एंटीबाडी टेस्ट की तुलना में PCR टेस्ट अधिक सटीक होता है। हालांकि,  PCR टेस्ट  अधिक मेहेंगा होने के कारण यह व्यापक रूप से उपलब्ध नहीं हैं। 

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डेंगू बुखार की दवाएं कौन सी हैं? | Dengue Medicine in Hindi

डेंगू संक्रमण के इलाज के लिए कोई विशिष्ट दवा नहीं है। केवल बुखार कम करने के लिए पैरासिटामॉल दी जाती है। ब्लड में प्लेटलेट्स की संख्या बढ़ाने के लिए डॉक्टर ज्यादा से ज्यादा लिक्विड लेने की सलाह देते हैं।

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डेंगू का इलाज क्या है? | Dengue Treatment in Hindi

जैसे की आप जान गए हैं की डेंगू संक्रमण के इलाज के लिए कोई विशिष्ट दवा नहीं है। इसलिए डॉक्टर केवल पैरासिटामॉल दवा देते है। इसके अलावा डॉक्टर शरीर को हाइड्रेटेड (तरल पदार्थ पीना) रखकर डेंगू को कंट्रोल में रखते हैं। ऐसे में पर्याप्त मात्रा में स्वच्छ पानी पीना चाहिए। हालांकि, गंभीर लक्षणों वाले मरीजों को अस्पताल में भर्ती कराने की जरूरत होती है।

यदि अत्यधिक गंभीर मरीज की बात करें तो डॉक्टर नसों में तरल पदार्थ यानी इंट्रावेनस फ्लूइड (Intravenous fluid) या इलेक्ट्रोलाइट सप्लीमेंट देते हैं। कुछ मामलों में ब्लड प्रेशर मॉनिटरिंग और ब्लड ट्रांस्फ्यूजन के जरिए भी इलाज किया जाता है।

ध्यान रखें आप खुद से एस्पिरिन या इबुप्रोफेन जैसी दवाओं का सेवन भूलकर भी ना करें, क्योंकि ये रक्तस्राव के जोखिम को बढ़ा सकते हैं।

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डेंगू से बचाव के उपाय क्या हैं? | Dengue Prevention Tips in Hindi

डेंगू से बचाव के तरीके निम्नलिखित हैं-

  • अपने आसपास पानी इकट्ठा ना होने दें। इन जगहों पर ही मच्छर अंडे देते हैं,
  • कूलर का पानी बदलते रहें,
  • पानी को ढंक कर रखें,
  • कीट विकर्षक का प्रयोग करें,
  • शरीर पर मच्छर भगाने वाली दवाओं का उपयोग करें,
  • मच्छरदानी का उपयोग करें,
  • बहार जाएं तो लंबी बाजू की शर्ट और लंबी पैंट पहनें, और
  • अपने घर के अंदर और बाहर मच्छरों को नियंत्रित करें।

मई 2019 में, FDA ने डेंगू के पहले टीके को मंजूरी दी। इस वैक्सीन का नाम डेंगवैक्सिया (Dengvaxia) है यह वैक्सीन चारों विषाणुओं (Virus) के कारण होने वाले डेंगू को रोक सकता है। हालांकि, यह वैक्सीन उन बच्चों (उम्र 9 से 16 साल) के लिए उपलब्ध है जो पहले डेंगू से संक्रमित हो चुके हैं।

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डेंगू बुखार में क्या खाना चाहिए और क्या नहीं? | Diet Plan For Dengue Patient in Hindi

चलिए अब जानते हैं कि डेंगू में क्या खाना चाहिए और क्या नहीं या क्या परहेज करना चाहिए।

डेंगू में क्या खाना चाहिए | Food to eat in Dengue in Hindi

  • पपीते के पत्तों का जूस डेंगू में फायदेमंद होता है। यह जूस प्लेटलेट काउंट बढ़ाने में आपकी मदद कर सकता है।
  • नारियल पानी डेंगू में फायदेमंद होता है। नारियल पानी में एंटीऑक्सीडेंट्स, अमीनो- एसिड, एंजाइम्स, विटामिन सी जैसे कई पोषक तत्व पाए जाते हैं, जो आपको हाइड्रेट रख सकता है।
  • हल्दी का दूध डेंगू फीवर में फायदेमंद माना जाती है। हल्दी में एंटी-इंफ्लेमेटरी गुणों और एंटी-बैक्टीरियल गुणों से भरपूर है, जो मेटाबॉलिज्म और इम्यूनिटी को बूस्ट करता है।
  • कीवी, संतरा आदि फलों का सेवन डेंगू फीवर में फायदेमंद माना जाता है। इसके अलावा, डेंगू बुखार के बाद इन फलों का सेवन कर इम्यूनिटी को मजबूत बनाया जा सकता है।

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डेंगू में क्या नहीं खाना चाहिए | डेंगू में परहेज | Food to avoid in Dengue in Hindi

  • डेंगू के मरीजों को ऑयली या फ्राइड फूड बिल्कुल भी नहीं खाना चाहिए।
  • डेंगू के मरीजों को कुकीज़, केक, फ्रेंच फ्राइज़, चिप्स , डोनट्स, पिज़्ज़ा, बर्गर, फ्राइड फूड्स आदि खाने से बचना चाहिए।
  • डेंगू फीवर में शराब ना पियें।
  • डेंगू के मरीजों को मसालेदार खाना खाने से बचाना चाहिए।
  • डेंगू में प्रसंस्कृत भोजन (प्रोसेस्ड फ़ूड) नहीं खाना चाहिए। इन प्रोसेस्ड फ़ूड में शामिल हैं फ्रोजेन मांस, फास्ट फूड और डिब्बा बंद स्नैक्स।
  • डेंगू में कैफीन वाले ड्रिंक्स जैसे चाय या कॉफी से बचाना चाहिए।
  • डेंगू के मरीजों को नॉनवेज भी नहीं खाना चाहिए क्योंकि इसमें खूब सारा मसाला होता है और ये आसानी से पचता भी नहीं है।

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निष्कर्ष | Conclusion

डेंगू बुखार एक वायरल संक्रमण है जो संक्रमित मच्छरों के काटने से इंसानों में फैलता है। संक्रमण होने के 3 से 14 दिनों के बाद डेंगू बुखार के लक्षण सामने आते हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के मुताबिक डेंगू का मच्छर सुबह और शाम के समय काटता है।

समान्तः डेंगू बुखार लगभग 5-7 दिन तक रहता है और रोगी ठीक हो जाता है। ज्यादातर लोग करीब एक हफ्ते बाद ठीक हो जाते हैं। डेंगू  की जाँच NS1 एंटीजन, IgM एंटीबॉडी टेस्ट, IgG एंटीबॉडी टेस्ट और डेंगू  RNA PCR जैसे टेस्ट से की जाती है।

डेंगू संक्रमण के इलाज के लिए कोई विशिष्ट दवा नहीं है। केवल बुखार कम करने के लिए पैरासिटामॉल दी जाती है। ब्लड में प्लेटलेट्स की संख्या बढ़ाने के लिए डॉक्टर ज्यादा से ज्यादा तरल पदार्थ लेने की सलाह देते हैं।


ये हैं डेंगू के लक्षण, बचाव, इलाज और डाइट प्लान (Symptoms of Dengue in Hindi) के बारे में पूरी जानकारी। कमेंट में बताएं आप को यह पोस्ट कैसी लगी। साथ ही अगर आपको यह पोस्ट पसंद आई हो तो इस पोस्ट को शेयर जरूर करें।

Disclaimer : ऊपर दी गई जानकारी पूरी तरह से शैक्षणिक दृष्टिकोण से दी गई है। इस जानकारी का उपयोग किसी भी बीमारी के निदान या उपचार हेतु बिना विशेषज्ञ की सलाह के नहीं किया जाना चाहिए। इसके अलावा किसी भी चीज को अपनी डाइट में शामिल करने या हटाने से पहले किसी योग्य डॉक्टर या आहार विशेषज्ञ (Dietitian) की सलाह जरूर लें।

संदर्भ (References)

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