Pregnancy Care Tips in Hindi

Pregnancy Care Tips | प्रेगनेंसी में ऐसे करें अपनी देखभाल, होगा स्वस्थ शिशु

Pregnancy Care Tips In Hindi : अगर आप पहली बार मां बन रही हैं तो आपके लिए क्या सही है और क्या गलत, इसे लेकर आप असमंजस में पड़ सकती हैं। गर्भावस्था की पहली तिमाही में गर्भपात का खतरा बहुत अधिक होता है और यह जोखिम 12वें सप्ताह तक बना रह सकता है। है। इसलिए, गर्भावस्था के दौरान अपना ख्याल (प्रेगनेंसी में देखभाल) रखना बहुत महत्वपूर्ण हो जाता है। इस पोस्ट के माध्यम से आप समझ पाएंगी कि आपको स्वस्थ प्रेगनेंसी के लिए कैसे अपनी देखभाल करनी है (प्रेगनेंसी में देखभाल), ताकि आपका शिशु स्वस्थ पैदा हो।

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1 प्रेगनेंसी में देखभाल | Pregnancy Care Tips In Hindi

प्रेगनेंसी में देखभाल | Pregnancy Care Tips In Hindi

Pregnancy Care Tips In Hindi,प्रेगनेंसी में देखभाल

गर्भावस्था में देखभाल कैसे करे? इसके लिए निम्न बातों का ध्यान रखें-

  • नियमित रूप से डॉक्टर का परामर्श लें,
  • नियमित रूप से अपनी जांच करवाएं,
  • जरुरी वैक्सीन लगवाएं,
  • मल्टीविटामिन लें,
  • दवाइयां डॉक्टर के अनुसार ही लें,
  • पौष्टिक आहार लें,
  • हानिकारक भोज्य पदार्थ से बचें,
  • शरीर को हाइड्रेट रखें,
  • पूरी नींद लें व आराम करें,
  • धूम्रपान न करें,
  • शराब ना पियें,
  • व्यायाम करते रहें
 

1. प्रेगनेंसी में देखभाल के लिए नियमित रूप से डॉक्टर का परामर्श लें – Care tips during pregnancy in Hindi

  • यदि आपकी प्रेग्नेंसी में कोई परेशानी नहीं है, तब भी आपको नियमित रूप से अपना चेकअप करवाना चाहिए। 28 हफ्तों तक हर 4 सप्ताह के अंतराल में अपने डॉक्टर के पास जाइये और अगर आपको कोई समस्या है तो डॉक्टर से जरूर साझा करें। 
  • 36वें हफ्ते तक हर दो सप्ताह में एक बार अपना चेकअप (प्रेगनेंसी में देखभाल) जरूर करवाएं। हालांकि, जब आपकी डिलीवरी का समय नजदीक आ जाए तो हर सप्ताह अपने डॉक्टर से मिलिए। चेकअप के दौरान डॉक्टर आपके वजन, ब्लड प्रेशर, अल्ट्रासाउंड और बच्चे का विकास आदि की जांच करवा सकते हैं।

2. गर्भावस्था में ख्याल के लिए नियमित रूप से अपनी जांच करवाएं – Pregnancy care tips in Hindi

प्रेगनेंसी में देखभाल के लिए डॉक्टर नियमित रूप से अपनी जांच करते हैं। जांच में निम्न परीक्षण शामिल हो सकते हैं।

प्रेगनेंसी में अल्ट्रासाउंड परीक्षण (Ultrasound scan during pregnancy) 

यह देखने के लिए कि आपके बच्चे का विकास ढंग से हो रहा है या नहीं।  

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प्रेगनेंसी में Beta HCG जांच (Beta HCG test during pregnancy)

बीटा HCG (ह्यूमन कोरियोनिक गॉनाडोट्रोपिन) गर्भावस्था के दौरान नाल (placenta) द्वारा निर्मित एक हार्मोन है, जो रक्त में पाया जाता है। यह ब्लड टेस्ट (प्रेगनेंसी में देखभाल) रक्त में मौजूद HCG हार्मोन के स्तर को मापता है। साथ ही यह टेस्ट अनुवांशिक विकारों जैसे डाउन सिंड्रोम का पता लगता है। 

प्रेगनेंसी में VDRL जांच (VDRL test during pregnancy)

इस परीक्षण का उपयोग यह पता लगाने के लिए किया जाता है कि क्या गर्भवती महिला सिफलिस (Syphilis) पैदा करने वाले बैक्टीरिया से संक्रमित तो नहीं है।

प्रेगनेंसी में हेपेटाइटिस जांच (Hepatitis screening test during pregnancy) 

हेपेटाइटिस एक प्रकार का संक्रमण है जो लीवर को गंभीर रूप से नुकसान पहुंचा सकता है और यदि आप गर्भवती हैं, तो आप इसे अपने नवजात शिशु को दे सकती हैं।

प्रेगनेंसी में इकोकार्डियोग्राफी (Echocardiography during pregnancy)

बच्चे के दिल की जांच करने के लिए भ्रूण इकोकार्डियोग्राफी होता है।  

प्रेगनेंसी में एमनियोसेंटेसिस परीक्षण (Amniocentesis test during pregnancy)

जन्म दोष और आनुवंशिक समस्याओं की जांच करने के लिए किया जाता है।

प्रेगनेंसी में रक्त प्रकार परीक्षण (Blood type test during pregnancy)

जैसे कि Rh और ABO ब्लड ग्रुप सम्मिलित हैं।

प्रेगनेंसी में थायराइड स्तर की जांच (Thyroid test during pregnancy)

थायराइड टेस्ट एक प्रकार का ब्लड टेस्ट है जो ब्लड में थायराइड के स्तर को मापने के लिए किया जाता है।प्रेगनेंसी की पहली तिमाही में शिशु के मस्तिष्‍क और तंत्रिका तंत्र के विकास के लिए थायराइड हार्मोन विशेष भूमिका निभाता है। 

प्रेगनेंसी में पैप स्मीयर जांच (Pap smear test during pregnancy)

महिलाओं में गर्भाशय ग्रीवा कैंसर (सर्वाइकल कैंसर) के शुरूआती लक्षणों की जांच के लिए किया जाता है।

प्रेगनेंसी में न्यूकल ट्रांसलेंसी स्कैन (Nuclear translational scan during pregnancy)

बच्चे के सिर और गर्दन की मोटाई को मापने के लिए एक अल्ट्रासाउंड होता है।

प्रेगनेंसी में ग्लूकोज स्क्रीनिंग (Glucose screening during pregnancy)

गर्भावस्था के दौरान गर्भावधि मधुमेह यानि जेस्टेशनल डायबिटीज (Gestational diabetes) होने की आशंका बनी रहती है। यह टेस्ट ब्लड में ग्लूकोज के स्तर को मापने के काम आता है। 

कॉर्डोसेंटेसिस जांच (Cardiocentesis test during pregnancy)

यह एक डयग्नोस्टिक टैस्ट है जिसमें भ्रूण की असमान्यताओं का पता लगाने के लिए भ्रूण का ब्लड टैस्ट किया जाता है।

प्रेगनेंसी में डबल मार्कर (Double marker screening test during pregnancy)

यह निर्धारित करने में मदद करता कि आपका बच्चा डाउन सिंड्रोम नामक एक आनुवंशिक (Genetic) विकार (Disorder) के साथ पैदा तो नहीं होगा। 

प्रेगनेंसी में ट्रिपल मार्कर स्क्रीन टैस्ट (Triple marker screening test during pregnancy)

यह टैस्ट भ्रूण के न्यूरल ट्यूब डिफेक्ट, डाउन सिंड्रोम (Down Syndrome) या अन्य क्रोमोसोमल असामान्यताएं (Trisomy 18) का पता लगाने में किया जाता है।

और पढ़ें –  जानिए कैसे होता है तीसरी तिमाही में शिशु का विकास।

3. गर्भावस्था में देखभाल के लिए जरुरी वैक्सीन लगवाएं – Care tips in pregnancy in Hindi

रुबेला वैक्सीन, हेपेटाइटिस वैक्सीन, इन्फ्लुएंजा वैक्सीन एवं टिटनेस वैक्सीन, हर गर्भवती महिला को लेनी जरूरी होती हैं। इसलिए डॉक्टरी की देखरेख में रहकर ही आप ये वैक्सीन समय पर लगवाएं। 

और पढ़ें –  जानिए दूसरी तिमाही में शिशु (भ्रूण) का विकास सप्ताह अनुसार।

4. प्रेगनेंसी में देखभाल के लिए मल्टीविटामिन लें – Care in pregnancy in Hindi

आपके स्वास्थ और शिशु के बढ़ते विकास के लिए आप का संतुलित आहार लेना बहुत जरुरी है। जो विटामिन और खनिजों से भरपूर हो। हालांकि, भोज्य पदार्थों से आप इनकी मात्रा काफी नहीं ले पाती है इसलिए डॉक्टर आपको प्रसवपूर्व विटामिन और खनिज लेने को कह सकते हैं जैसे –

फोलिक एसिड (Folic acid)

फोलिक एसिड शरीर में नई कोशिकाओं और न्यूक्लिक एसिड (DNA) के निर्माण में मदद करता है।

कैल्शियम (Calcium)

भ्रूण में स्वस्थ हड्डियों और दांतों के विकास के लिए कैल्शियम आवश्यक है।

आयरन (Iron)

गर्भावस्था के दौरान आयरन मां में एनीमिया के खतरे को कम करने में मदद करता है। 

और पढ़ें –  जानिए कैसे होता है गर्भावस्था की पहली तिमाही में शिशु (भ्रूण) का विकास।

5. दवाइयां डॉक्टर के अनुसार लें – Pregnancy care Hindi tips

बहुत सी ऐसी दवाइयां हैं जो प्रेगनेंसी के समय आपको और आपके शिशु दोनों को ही नुकसान पंहुचा सकती हैं। जैसे एंटीबायोटिक्स, एंटी-फंगल ड्रग, एंटीहिस्टामाइन्स, हर्बल रेमेडी, एस्पिरिन, नेजल डिकंजेस्टेन्ट, इत्यादि। इसलिए हमेशा अपने डॉक्टर के परामर्श से ही दवाइयां लें।  

6. पौष्टिक आहार लें – Pregnant lady care tips in Hindi

स्वस्थ भोजन आपको तंदरुस्त बनाए रखता है और आपके गर्भ में पल रहे शिशु को आवश्यक पोषक तत्व  प्रदान करता है। आपके खानपान से ही शिशु को शारीरिक और मानसिक विकास में मदद मिलती है। 

पौष्टिक आहार में गाय का दूध, नारियल का पानी, नींबू पानी, दलिया दाल, आलू, गाजर, पालक, पनीर इत्यादि शामिल हैं। 

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7. प्रेगनेंसी में देखभाल के लिए हानिकारक भोज्य पदार्थ से बचें – Pregnant lady health tips in Hindi

कभी-कभी कुछ आहार ऐसे होते हैं जो अनजाने में आप खा लेती हैं और आगे चल के आप के गर्भ में पल रहे शिशु के लिए वह हानिकारक हो जाता है।

ऐसे में जरूरी है कि आपको यह पता होना चाहिए कि आपको प्रग्नेंसी के समय (प्रेगनेंसी में देखभाल) किन चीजों का सेवन नहीं करना है जिसमें शामिल हैं कच्चा दूध, बहुत तेल-घी वाले खाने से बचें, कच्ची मछली, कच्चे मांस, बासी कच्चे स्प्राउट्स, कच्चे या नर्म उबले अंडे, बिना धुली सब्ज़ियाँ और फल, जंक फूड, कॉफी, चाय, शीतल पेय और कोको, जरुरत से ज्यादा मसालेदार खाना, डब्बा बंद जूस, डिब्बा बंद भोजन, उच्च पारे वाली मछलियां, पपीता, अनानास इत्यादि। 

इसलिए प्रेगनेंसी में अपनी देखभाल के लिए इन हानिकारक भोज्य पदार्थ से दूर रहना चाहिए।

8. शरीर को हाइड्रेट रखें – Pregnancy care Hindi tips

गर्भावस्था के दौरान अपनी देखभाल के लिए शरीर में पानी की मात्रा बनाए रखें। इसलिए दिनभर में कम से कम 8 गिलास पानी जरूर पिएं। साथ ही घर में फलों का जूस बना कर भी नियमित अंतराल पर पीती रहें। इससे अपना शरीर  हाइड्रेट रहेगा।

9. पूरी नींद लें व आराम करें – Pregnancy care in Hindi

गर्भावस्था में समय तनाव या ज्यादा थकान बच्चे व मां दोनों के लिए हानिकारक हो सकता है। इसलिए प्रेगनेंसी में अपनी देखभाल के लिए थोड़े-थोड़े अंतराल के दौरान ब्रेक लेना जरुरी है। लंबे समय तक एक ही जगह बैठ कर काम न करें। काम करते वक्त पीठ के पीछे कुशन का सहारा लेकर बैठें। अपनी टांगों को मोड़ कर न बैठें, क्योंकि ऐसा करने से खून का बहाव अच्छे से नहीं हो पता है।

और पढ़ें –  प्रेग्नेंसी के 8 आवश्यक पोषक तत्व और उनसे जुड़ी सावधानियां।

10. धूम्रपान न करें – Pregnancy care tips in Hindi

प्रेगनेंसी के समय आपका सिगरेट पीना आपके बच्चे के लिए बेहद खतरनाक हो सकता है। सिगरेट का जहरीला पदार्थ जो आपके रक्तप्रवाह से गुजरते हुए आपके बच्चे के शरीर तक पहुंचता है, जो बच्चे में श्वसन संबंधी बीमारियों के अलावा जन्म दोष भी पैदा कर सकता हैं। इसलिए आपको गर्भावस्था के दौरान धूम्रपान न करने की सलाह दी जाती है।

11. शराब ना पियें – Pregnancy care in Hindi

शराब आपके बच्चे के विकास में बुरा प्रभाव डाल सकती है। जो गर्भवती शराब पीती हैं, उनके बच्चों में भ्रूण अल्कोहल सिंड्रोम (एफएएस) हो सकता है। भ्रूण अल्कोहल सिंड्रोम के लक्षणों में शामिल हैं:

  • जन्म के वक़्त शिशु के वजन मे कमी होना,
  • शिशु का विकलांग होना, 
  • व्यवहार की समस्याएं,
  • वृद्धि और विकास का कम होना।

12. प्रेगनेंसी में देखभाल के लिए व्यायाम करते रहें – Care during pregnancy in Hindi

तंदरुस्त शरीर और दिमाग के लिए व्यायाम करना अति महत्वपूर्ण है और गर्भावस्था के दौरान इसके महत्व को कम नहीं किया जा सकता है। नीचे कुछ ऐसे व्यायाम दिए गए हैं जिन्हें आप गर्भावस्था के दौरान स्वस्थ रहने के लिए कर सकती हैं:

प्रेगनेंसी में चहलकदमी (Walking in pregnancy)

चलना गर्भावस्था के लिए एक सुरक्षित व्यायाम माना जाता है।  रोजाना 30 मिनट तक पैदल चलना आपके स्वस्थ के लिए बहुत जरुरी है। 

प्रेगनेंसी में तैराकी (Swimming in pregnancy) 

यदि आप तैरना जानती हैं तो आप डॉक्टर के बताए निर्देशों के अनुसार इसे 30 मिनट, सप्ताह में 2 से 3 बार कर सकती हैं। 

प्रेगनेंसी में योग (Yoga in pregnancy)

योग मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य के लिए बहुत अच्छा है। गर्भावस्था के दौरान इसे सुरक्षित माना जाता है।

प्रेगनेंसी में साइकिलिंग (Cycling in pregnancy)

यदि आप को साइकिल चलानी आती है तो आप व्यायाम के रूप में साइकिल चला सकती हैं। हालांकि, सुनिश्चित करें कि आप अपनी गति को नियंत्रित रखेंगी।  

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ये हैं प्रेगनेंसी के दौरान की जाने वाली देखभाल (Care tips in pregnancy in Hindi) की जानकारी। कमेंट में बताएं आपको यह पोस्ट कैसी लगी। अगर यह पोस्ट पसंद आई हो तो इसे जरूर शेयर करें। 

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Disclaimer : ऊपर दी गई जानकारी पूरी तरह से शैक्षणिक दृष्टिकोण से दी गई है। इस जानकारी का उपयोग किसी भी बीमारी के निदान या उपचार हेतु बिना विशेषज्ञ की सलाह के नहीं किया जाना चाहिए। इसके अलावा किसी भी चीज को अपनी डाइट में शामिल करने या हटाने से पहले किसी योग्य डॉक्टर या आहार विशेषज्ञ (Dietitian) की सलाह जरूर लें। 

संदर्भ (References)

इस ब्लॉग [WEB POST GURU: THE ULTIMATE GUIDE TO HEALTHY LIVING] में आने और पोस्ट को पढ़ने के लिए आपका धन्यवाद। 

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