Symptoms Of Labour Pain in Hindi

Labour Pain Symptoms | प्रसव पीड़ा के प्रारंभिक लक्षण क्या हैं?

Labour pain symptoms in Hindi : इस पोस्ट के माध्यम से हम आपको प्रसव पीड़ा के प्रारंभिक लक्षण (नॉर्मल डिलीवरी के लक्षण या लेबर पेन के लक्षण या प्रसव पीड़ा के लक्षण) के बारे में विस्तार से बता रहे हैं। इसके अलावा लेबर पेन लाने के उपाय क्या हैं, झूठे प्रसव के संकेत क्या हैं, कैसे पता चलेगा डिलीवरी नार्मल होगी कि सिजेरियन, आदि के बारे में भी बता रहे हैं।

आइये अब इस पोस्ट को शरू करते हैं।

और पढ़ें –  प्रसव से पहले एमनियोटिक द्रव का रिसाव: लक्षण, कारण और उपचार।

प्रेगनेंसी में प्रसव पीड़ा का अर्थ | Labour pain meaning in Hindi 

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लेबर पेन किसे कहते हैं?

शिशु के जन्म से ठीक पहले मां को होने वाला दर्द या पीड़ा ‘प्रसव पीड़ा’ या ‘लेबर पेन’ (Labour pain in Hindi) कहलाती है। हर गर्भवती महिला को लेबर पेन से होकर गुजरना ही पड़ता है और हर किसी को इसका अनुभव अलग-अलग होता है।  

गर्भावस्था के 37वें सप्ताह से लेकर 40वें सप्ताह के बीच (प्रेग्‍नेंसी के नौंवे महीने में प्रसव पीड़ा) कभी भी प्रसव पीड़ा हो सकती है।

गर्भावस्था के 37वें सप्ताह से पहले होने वाला प्रसव, प्री-मैच्योर डिलीवरी या समय पूर्व प्रसव कहलाता है और यदि गर्भावस्था के 40वें सप्ताह के बाद भी अगर लेबर पेन ना हो, तो ऑपरेशन (सिजेरियन डिलीवरी) कर डिलीवरी कराई जाती है। 

और पढ़ें –  जानिए कैसे होता है तीसरी तिमाही में शिशु का विकास।

हालांकि यह कोई नहीं जानता कि प्रसव पीड़ा का समय कितना लंबा होगा। फिलहाल 80 फीसदी महिलाओं में पानी की थैली (एमनियोटिक झिल्ली) का फटना प्रेगनेंसी में प्रसव पीड़ा का प्रारंभिक लक्षण (Pregnancy labor pain in Hindi) होता है।

एमनियोटिक झिल्ली टूटने के बाद लगभग 12 घंटे के भीतर ही प्रेग्नेंट महिला का प्रसव शुरू हो जाता है।

हालांकि, इस बात का भी ध्यान रखें कि गर्भावस्था के अंतिम हफ्तों के दौरान आपको नकली प्रसव पीड़ा (False labour pain in Hindi) भी हो सकती है इसलिए नकली और असली लेबर पेन में फर्क जानना जरुरी है। 

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प्रेगनेंसी में प्रसव पीड़ा के प्रारंभिक लक्षण | Labour Pain Symptoms in Hindi

आपके मन में भी यह सवाल होगा कि मुझे कैसे पता चलेगा कि बच्‍चा होने वाला है? इस सवाल का जवाब हमने नीचे दिया है।

प्रेगनेंसी में प्रसव पीड़ा (Labour pain in Hindi) शुरू होने से पूर्व गर्भवती महिला कुछ लक्षण अनुभव करती है उनमें से 9 प्रमुख लक्षण नीचे दिए गए हैं-

लेबर पेन शुरू होने के लक्षण (प्रसव पीड़ा के लक्षण)-

  • शिशु का नीचे की ओर आना लेबर पेन के शुरुआती लक्षण हो सकते हैं,
  • लगातार और तेज संकुचन होना लेबर पेन के लक्षण हो सकते हैं,
  • ग्रीवा में बदलाव,
  • म्यूकस के साथ खून का आना,
  • गर्भ में मौजूद एमनियोटिक झिल्ली का फटना,
  • बार-बार यूरिन करने का मन करना,
  • कब्ज या फिर डायरिया होना, 
  • पीठ दर्द,
  • बहुत नींद आना।

आइये अब लेबर पेन के शुरुआती लक्षण को विस्तार से समझते हैं –

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प्रेगनेंसी में प्रसव पीड़ा के लक्षण

1. प्रसव पीड़ा का प्रारंभिक लक्षण है शिशु का नीचे की ओर आना | Early signs of labour pain in Hindi

जैसे ही प्रसव का समय नजदीक आने लगता है वैसे ही आप का शिशु अपना सिर पेल्विक क्षेत्र की ओर करने लगता है और जिस कारण आपको सीने और पेट में हल्कापन (Delivery Ke Lakshan) महसूस हो सकता है और साथ ही मूत्राशय पर दबाव पढ़ने के कारण आपको बार-बार पेशाब करने की जरूरत भी महसूस हो सकती है। 

शिशु का नीचे की ओर आना लेबर पेन के प्रारंभिक लक्षण हो सकते हैं।

और पढ़ें –  मैटरनिटी बैग: प्रसव के समय हॉस्पिटल ले जाने वाला जरुरी समान।

2. लेबर पेन होने के लक्षण है लगातार और तेज संकुचन होना | Signs of labour pain in Hindi

संकुचन (गर्भाशय की मांसपेशियों का ऐंठना) की तीव्रता का लगातार और तेज बढ़ना प्रसव पीड़ा का प्रमुख लक्षण (labour pain ke lakshan) हो सकता है।

यह संकुचन 10 मिनट से कम समय के अंतराल पर हो सकता है। यह संकुचन गर्भाशय के ऊपर से नीचे की ओर चलता है।

आमतौर पर यह संकेत (Pregnancy labor pain in hindi) आप को बताता है कि आपको प्रसव की शुरुआत हो गई है।

प्रारम्भ में संकुचन की तीव्रता धीरे-धीरे बढ़ती है, लेकिन प्रसव का समय नजदीक आते ही यह तीव्रता लगातार बढ़ने लगती है।

हांलाकि बहुत सी गर्भवती महिलाओं को एक अलग प्रकार का संकुचन भी महसूस हो सकता है, जिसे प्रोड्रोमल लेबर या झूठा प्रसव पीड़ा (False labor Pain in hindi) कहते हैं। आमतौर पर यह संकुचन कुछ ही समय के लिए होता है और फिर ठीक हो जाते हैं।

3. नार्मल डिलीवरी के शुरुवाती लक्षण है ग्रीवा में बदलाव होना | Earliest signs of labour pain

जैसे ही प्रसव (Labour pain in hindi) का समय नजदीक आने लगता है, गर्भवती महिला की ग्रीवा पतली और नरम होकर खुलने लगती है। जोकि 10 सेंटीमीटर तक खुल जाती है।

इन दोनों लक्षणों के आधार पर लेबर पेन की पहचान की जा सकती है। ध्यान रहे कि ग्रीवा के खुलने की पुष्टि सिर्फ डॉक्टर द्वारा ही की जा सकती है।  

और पढ़ें –  जानिए प्रसव पीड़ा के प्रारंभिक लक्षण क्या हैं, और कब दिखते हैं।

4. डिलीवरी होने के लक्षण है म्यूकस के साथ खून का आना  | Labour pain signs and symptoms in Hindi

गर्भावस्था के दौरान गर्भाशय ग्रीवा में म्यूकस जमा रहता है। परन्तु, जब गर्भाशय ग्रीवा खुलने लगती है, तो यह म्यूकस खून (Delivery Ke Lakshan) के साथ वजाइना से बहार आने लगता है।

म्यूकस के साथ खून का आना प्रसव प्रक्रिया की शुरुआत होने का लक्षण हो सकता है। आपका यह म्यूकस गुलाबी और गाढ़ा हो सकता है।

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5. 9 महीने में डिलीवरी होने के लक्षण हैं एमनियोटिक झिल्ली का फटना  | Symptoms of labour pain in Hindi

गर्भ में एमनियोटिक द्रव्य से भरी एक थैली होती है। इस थैली को आम बोलचाल की भाषा में ‘पानी की थैली’ भी कहते हैं। यह द्रव्य शिशु को बाहर की चोटों से बचाता है।

पानी की थैली का फटना या एमनियोटिक झिल्ली का फटना लेबर पेन का संकेत हो सकता है। 

आमतौर पर पानी की थैली ठीक संकुचन से पहले फटती है (labour pain ke lakshan)।

हालांकि, 8 प्रतिशत से कम महिलाओं में यह थैली समय से पहले ही फट जाती है फिर भी, अगर थैली फट जाए तो तुरंत ही आपको अपने डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।

हालांकि,आपके बच्चे का सिर इस तरल पदार्थ (एमनियोटिक द्रव्य) को बाहर निकलने से रोकता है। 

और पढ़ें – जानिए गर्भावस्था की 8 प्रमुख समस्याएं और समाधान।

6. लेबर पेन होने के लक्षण है बार-बार यूरिन | Pregnancy labor pain symptoms in Hindi

जैसे ही शिशु अपना सिर पेल्विक क्षेत्र की ओर करने लगता है आपके मूत्राशय पर और भी अधिक दबाव बढ़ने लगता है (Labor pain symptom in hindi) जिस कारण आप को बार बार पेशाब करने की जरूरत महसूस हो सकती है। 

37 सप्ताह के बाद बार-बार यूरिन आना लेबर पेन के संकेत हो सकते हैं।

और पढ़ें – गर्भावस्था की तीसरी तिमाही के प्रेगनेंसी टेस्ट।

7. प्रसव का संकेत है कब्ज या डायरिया होना | Labour pain symptoms & signs in Hindi

डिलीवरी की तारीख नजदीक आने पर पेट खराब होना या कब्ज होना भी प्रसव पीड़ा के संकेत हो सकते हैं।

37 सप्ताह के बाद कब्ज या डायरिया होना एक सामान्य लक्षण (Delivery Ke Lakshan) है। फिर भी डॉक्टर को इस बारे में जरूर बताएं।

याद रखें यदि आपको डायरिया हो जाए तो आपका हाइड्रेटेड रहना जरुरी है इसलिए आप खूब पानी पीती रहें। और यदि कब्ज हो जाए तो फाइबर युक्त भोज्य पदार्थ लेती रहें। 

और पढ़ें – गर्भावस्था की दूसरी तिमाही के दौरान प्रेगनेंसी टेस्ट।

8. नार्मल डिलीवरी के संकेत है पीठ दर्द | Labour pain symptoms in Hindi

यदि आपका शिशु आपके गर्भाशय में असामान्य स्थिति में है, तो आपका संकुचन अधिक गंभीर हो सकता है और साथ में आप पीठ दर्द भी महसूस कर सकती हैं।

पीठ का यह दर्द आपके पेट और टांगों तक भी पहुंच सकता है। 

डिलीवरी की तारीख नजदीक पीठ दर्द होना 9वें महीने में प्रसव पीड़ा के लक्षण हो सकते हैं।

और पढ़ें – गर्भावस्था की पुष्टि के लिए रक्त परीक्षण।

9. प्रसव पीड़ा के प्रारंभिक लक्षण है अतिरिक्त थकान और बहुत नींद आना – Symptoms of labour pain at 38 weeks in Hindi

आपका बढ़ता पेट और संकुचित मूत्राशय, गर्भावस्था के अंतिम दिनों या हफ्तों के दौरान आपको एक अच्छी नींद लेने से वंचित कर सकती हैं जिस कारण आपको थकान और कमजोरी महसूस हो सकती है साथ ही रात में नींद ना आने के कारण आपको दिन में हर समय नींद जैसा अनुभव (Labor pain in hindi) होता है।

यह प्रसव के साथ-साथ लेबर पेन शुरू होने के समय के करीब आने का लक्षण हो सकता है।

कैसे पता चलेगा डिलीवरी नार्मल होगी या सिजेरियन? | How to know whether delivery will be normal or caesarean?

गर्भावस्था के अंतिम कुछ हफ्तों के दौरान भ्रूण का सिर नीचे की ओर होने लगता है और बच्चा अब बाहरी दुनिया में आने के लिए तैयार हो जाता है।

अमेरिकन कॉलेज ऑफ ओब्स्टेट्रिशियन एंड गायनेकोलॉजिस्ट (ACOG) का कहना है कि कुछ स्थितियां सिजेरियन (C-section) को आवश्यक बनाती हैं। इसमे शामिल है:

  • बच्चे के लिए चिकित्सा संबंधी चिंताएं,
  • एक से अधिक बच्चों के साथ गर्भवती होना,
  • प्लेसेंटा का बच्चे के गले में फसना,
  • श्रम के समय बच्चे का ना निकलना,
  • बच्चा का साइज में बड़ा है,
  • गर्भवती महिला का संक्रमित होना या अन्य स्थितियां, जैसे उच्च रक्तचाप या मधुमेह,
  • बच्चे का सिर नीचे की ओर नहीं आना।

और पढ़ें – गर्भावस्था के दौरान 8 महत्वपूर्ण पोषक तत्व

जल्दी डिलीवरी के उपाय | जल्दी डिलीवरी होने के उपाय | How to Induce Labor at Home in Hindi

लेबर पेन जल्दी लाने के उपाय निम्नलिखित हैं :

लेबर पेन लाने का उपाय निप्पल उत्तेजना – Nipple Stimulation to Induce Labor Pain in Hindi

निप्पल को कोमलता के साथ रगड़ने से ऑक्सीटोसिन का स्राव हो सकता है, जो प्रसव पीड़ा को प्रेरित करने में मदद कर सकता है।

लेबर पेन लाने के घरेलू उपाय एक्सरसाइज – Exercise to Induce Labor Pain in Hindi

गर्भावस्था के दौरान कुछ प्रकार के व्यायाम की सलाह दी जाती है। कुछ जानकारों का मानना है कि डिलीवरी डेट के कुछ दिन पहले यदि व्यायाम (पैदल चलना आदि) किया जाए तो यह लेबर पेन लाने में मदद कर सकता है।

लेबर पेन को प्रेरित करने के लिए सेक्स – Sex to Induce Labor Pain in Hindi

डिलीवरी डेट के कुछ दिन पहले अपने साथी के साथ यौन संबंध बनाने से यह लेबर पेन को प्रेरित कर सकता है। ऐसा इसलिए क्योंकि यौन संबंध से गर्भाशय संकुचन होता है, निप्पल उत्तेजना से ऑक्सीटोसिन होर्मोनेस का स्त्राव होता है, और वीर्य में मौजूद प्रोस्टाग्लैंडीन गर्भाशय संकुचन में मदद करता है।

प्रसव लाने का घरेलू उपाय है अरंडी का तेल – Castor Oil to Induce Labor Pain in Hindi

कुछ जानकर गर्भाशय संकुचन के लिए अरंडी का तेल लेने की सलाह देते हैं। हालांकि, ऐसा करने से पेट खराब हो सकता है, परन्तु यह लेबर पेन लाने में मदद कर सकता है।

लेबर पेन लाने का प्राकृतिक उपाय मसालेदार भोजन – Spicy Food to Induce Labor Pain in Hindi

मसालेदार भोजन और अनानास सहित कुछ खाद्य पदार्थ ऐसे हैं जो प्रसव लाने में मदद कर सकते हैं। हालांकि, अभी इन दावों का समर्थन करने के लिए वैज्ञानिक प्रमाणों की कमी है।

लेबर पेन जल्द लाने के लिए हर्बल प्रोडक्ट – Herbal Supplements to Induce Labor Pain in Hindi

जानकर प्रसव लाने के लिए हर्बल सप्लीमेंट्स का उपयोग करने को कहते हैं, जिसमें रास्पबेरी लीफ टी, ब्लू कोहोश और इवनिंग प्रिमरोज़ ऑयल शामिल हैं। हालांकि, यह हर्बल सप्लीमेंट्स कभी कभी स्वस्थ के लिए हानिकारक भी हो सकते हैं।

Note: ऊपर बताए गई सभी उपाए केवल जानकारी मात्र के लिए हैं। इन्हें करने से पहले अपने डॉक्टर से अवश्य बात करें और साथ ही धैर्य रखें।

डिलीवरी डेट निकल जाए तो क्या करना चाहिए? | What should I do if the delivery date is over?

प्रेगनेंसी के नौ महीने बीत जाने या 42 हफ़्ते चले जाने के बाद भी अगर प्रसव पीड़ा (Labour pain in Hindi) शुरू नहीं होती है तो जितनी जल्दी हों सके अपने डॉक्टर से संपर्क कर लें।

क्योंकि डिलीवरी की तारीख निकल जाने पर शिशु का गर्भ में रहना आपके लिए और आपके शिशु दोनों के लिए ही नुकसानदायक हो सकता है। शिशु का वजन बढ़ने के कारण गर्भ में शिशु को दिक्कत हो सकती है और साथ ही कभी-कभी शिशु गर्भ में ही मल त्याग कर देते हैं जिससे संक्रमण होने का खतरा बढ़ जाता है। 

डिलीवरी के बाद ब्लीडिंग कब तक होती है? | How long does bleeding last after delivery?

पहले 24 घंटे तक बहुत ज्यादा ब्लीडिंग होती है जिसमें टमाटर के छिलके जितने खून के थक्‍के आ सकते हैं। 2 से 6 दिन बाद ब्लीडिंग काम होती है और थक्‍के का साइज भी अंगूर जितना छोटा हो जाता है। 

प्रसव (Labour pain in hindi) के 7 से 14 दिन तक ब्लीडिंग  पीरियड जितनी होने लगती है।  डिलीवरी के 3 से 4 हफ्ते तक ब्लीडिंग  होना बहुत कम हो जाता है। हालांकि, आपको भूरे या हल्‍के लाल रंग जैसा डिस्‍चार्ज हो सकता है। अधिकांश मामलों में डिलीवरी के 5 से 7 हफ्ते के बाद ब्‍लीडिंग रुक जाती है।

ये हैं प्रेगनेंसी में प्रसव पीड़ा के प्रारंभिक लक्षण (Symptoms Of Labour Pain) की पूरी जानकारी। कमेंट में बताएं आप को यह पोस्ट (Symptoms Of Labour Pain In Hindi) कैसी लगी। साथ ही इस पोस्ट को शेयर जरूर करें। 

झूठे प्रसव के संकेत क्या हैं? | False labour pain in Hindi

निम्नलिखित लक्षण फॉल्स लेबर पेन (झूठे प्रसव) के संकेत हो सकते हैं। जिसमें शामिल हैं-
  • संकुचन नियमित रूप से नहीं आता।
  • दर्द पेट के निचले हिस्से की ओर ही सीमित रहता है।
  • यह दर्द कुछ देर होने के बाद ठीक हो जाता है 
  • समय के साथ संकुचन की तीव्रता या दर्द में बदलाव नहीं होता है।
  • बात करते समय किसी भी प्रकार का दर्द या तकलीफ का अनुभव नहीं होता है।
  • चलने पर आप का दर्द कम हो जाता है।

और पढ़ें – जानिए प्रेगनेंसी में अल्ट्रासाउंड (सोनोग्राफी) कब और क्यों होता है।

प्रसव से पहले आपके मन में आने वाले सवाल | Pregnancy Labor pain FAQ in Hindi

Q 1. कैसे पता चलेगा कि बच्चा होने वाला है?

Ans. निम्न लक्षणों से पता चल सकता है कि बच्चा होने वाला है-
  • शिशु का नीचे की ओर आना,
  • लगातार और तेज संकुचन होना, 
  • ग्रीवा में बदलाव,
  • म्यूकस के साथ खून का आना,
  • गर्भ में मौजूद एमनियोटिक झिल्ली का फटना,
  • बार-बार यूरिन करने का मन करना,
  • कब्ज या फिर डायरिया होना, 
  • पीठ दर्द,
  • दस्त,
  • बहुत नींद आना।

और पढ़ें – गर्भावस्था की तीसरी तिमाही: लक्षण, शिशु विकास और ब्लड टेस्ट।

Q 2. डिलीवरी कितने दिन में होती है?

Ans. समान्यतः बच्चा 37 हफ़्ते (259 दिन) से लेकर 42 हफ़्ते (294 दिन) के बीच कभी भी डिलीवरी  हों सकती है। 

Q 3. गर्भ में बच्चा उल्टा होने के कितने प्रकार हैं?

Ans. गर्भावस्था में महिलाएं ब्रीच प्रेग्नेंसी (ब्रीच बर्थ) की स्थिति से ग्रस्त हों सकती हैं। ब्रीच प्रेग्नेंसी का मतलब शिशु की गर्भ में स्थिति (पोजीशन) से है। 

ब्रीच प्रेग्‍नेंसी के तीन प्रकार की होते हैं – 

1. फ्रैंक (Frank): जब बच्चे के दोनों पैर और सिर ऊपर की ओर एवं कूल्हा नीचे की ओर हो।

2. कंप्‍लीट (Complete): बच्चे के पैर और कूल्हे नीचे की ओर एवं दोनों घुटने मुड़े हों।   

3. फुटलिंग (Footling): जब बच्चा गर्भ में अपने पैरों को क्रॉस करके बैठा हुआ हों।

Q 4. गर्भ में बच्चा उल्टा होने के क्या कारण हैं?

Ans. गर्भ में शिशु के उल्टा होने के कई कारण हो सकते हैं, जैसे कि :
  • अगर कई बार गर्भधारण हो चुकी हों,
  • गर्भा में जुड़वा बच्चे हों,
  • गर्भाशय का आकार असामान्य हो,
  • गर्भाशय में बहुत अधिक या बहुत कम एमनियोटिक द्रव हो।

और पढ़ें – जानिए प्रेगनेंसी में क्या नहीं खाना चाहिए।

Q 5. बच्चे का सिर कौन से महीने में नीचे आता है?

Ans. बच्चे का सिर गर्भावस्था के 34वें और 37वें सप्ताह (5 महीने के बाद भ्रूण खिसकना शुरु कर देता है) में नीचे की तरफ (Delivery Ke Lakshan) खिसकता है। लेकिन कुछ महिलाओं में ऐसा प्रसव पीड़ा के कुछ समय पहले भी हो सकता है। 

Q 6. लेबर पेन लाने के उपाय क्या हैं?

Ans. मसालेदार भोजन, लाल रास्पबेरी की पत्तियों की चाय, अरंडी का तेल, लहसुन, मालिश, खजूर, एक्यूप्रेशर, व्यायाम,  इत्यादि लेबर पेन लाने के उपाय हो सकते हैं।


ये हैं प्रेगनेंसी में प्रसव पीड़ा के प्रारंभिक लक्षण के बारे में बताई गई पूरी जानकारी। कमेंट में बताएं आपको Symptoms Of Labour Pain in Hindi पोस्ट कैसी लगी। अगर आपको पोस्ट पसंद आई हो, तो इसे शेयर जरूर करें।

वेब पोस्ट गुरु ब्लॉग में आने और पोस्ट पढ़ने के लिए आपका धन्यवाद।

Disclaimer : ऊपर दी गई जानकारी पूरी तरह से शैक्षणिक दृष्टिकोण से दी गई है। इस जानकारी का उपयोग किसी भी बीमारी के निदान या उपचार हेतु बिना विशेषज्ञ की सलाह के नहीं किया जाना चाहिए। इसके अलावा किसी भी चीज को अपनी डाइट में शामिल करने या हटाने से पहले किसी योग्य डॉक्टर या आहार विशेषज्ञ (Dietitian) की सलाह जरूर लें। 
 

संदर्भ (References)

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