Low Oxalate Diet in Hindi

Low Oxalate Diet क्या है? किडनी स्टोन में लो ऑक्सलेट डाइट के फायदे

Low Oxalate Diet in Hindi : लो ऑक्सलेट डाइट जिसे किडनी स्टोन डाइट भी कहा जाता है गुर्दे की पथरी के विकास के जोखिम को कम करने में मदद कर सकती है। लो ऑक्सलेट डाइट कैल्शियम ऑक्सलेट स्टोन (पथरी का प्रकार) के लिए काफी फायदेमंद है। हालांकि, हाल के शोध ने सवाल उठाया है कि क्या गुर्दे की पथरी को रोकने के लिए कम ऑक्सालेट आहार आवश्यक हैं। इस पोस्ट के माध्यम से हम आपको लो ऑक्सलेट डाइट के महत्त्व के बारे में समझा रहे हैं। जिसमें लो ऑक्सलेट डाइट क्या है, लो ऑक्सलेट डाइट में क्या खाना चाहिए क्या नहीं और साथ ही लो ऑक्सलेट डाइट के फायदे और नुकसान के बारे में भी बता रहे हैं।

चलिए इस लेख को शुरू करने से पहले समझते हैं गुर्दे की पथरी क्या है, ऑक्सलेट क्या होते हैं और उच्च ऑक्सलेट डाइट के क्या नुकसान हैं।

और पढ़ें – गुर्दे की विफलता के 10 लक्षण और कारण

Contents hide

गुर्दे की पथरी क्या है? | What are kidney stones in Hindi

What are kidney stones in Hindi
Image source: freepik.com

गुर्दा की पथरी गुर्दे एवं मूत्रनलिका की बीमारी है जिसमें किडनी के अंदर, मूत्रमार्ग या मूत्राशय में छोटे-छोटे या बड़े पत्थर का निर्माण हो जाता है। यह पत्थर मूत्र में उपस्थित रसायनों से बने होते हैं। (1)

ज्यादातर किडनी स्टोन बिना डॉक्टर की मदद के शरीर से बाहर निकल जाते हैं। लेकिन कभी-कभी यह मूत्र मार्ग (यूरिनरी ट्रैक्ट) में फंस जाते हैं और मूत्र के प्रवाह को अवरुद्ध करते हैं।

पथरी रेत के दाने जितनी छोटी या गोल्फ की गेंद जितनी बड़ी हो सकती है।

और पढ़ें – क्रोनिक किडनी डिजीज, कहीं मौत का कारण ना बन जाए यह रोग

कैल्शियम ऑक्सलेट गुर्दे की पथरी का सबसे आम प्रकार है। यह तब बनता है जब कैल्शियम मूत्र में मौजूद ऑक्सलेट के साथ मिल जाता है।

किडनी स्टोन के कारण कमर (या पीठ) के ऊपरी हिस्से में तेज दर्द हो सकता है। इसके अलावा निम्नलिखित लक्षण भी किडनी स्टोन की ओर इशारा कर सकते हैं। जिनमें –

  • पेशाब में खून,
  • बुखार और ठंड लगना,
  • उल्टी,
  • पेशाब की बहुत दुर्गंध,
  • पेशाब करते समय जलन महसूस होना।

आदि शामिल हैं।

और पढ़ें –  Kidney Stone के लक्षण, कारण और इलाज | किडनी स्टोन डाइट चार्ट | किडनी स्टोन में परहेज

ऑक्सलेट क्या है? | Oxalate meaning in Hindi 

ऑक्सलेट, जिसे ऑक्सालिक एसिड भी कहा जाता है – पौधों में पाया जाने वाला एक कार्बनिक यौगिक है। यह मुख्यतः पत्तेदार सब्जियां, फल, नट और बीज में पाए जाते हैं। (2)

हमारा शरीर अपने आप (endogenous synthesis) ऑक्सलेट को बना सकता है या इसे भोजन से प्राप्त कर सकता है। इसके अलावा शरीर के अंदर विटामिन सी मेटाबोलाइज हो कर ऑक्सलेट में बदल सकता है।

ऑक्सालेट और कैल्शियम की थोड़ी मात्रा हमारे मूत्र पथ में मौजूद होती है और इनकी उपस्थिति से कोई समस्या पैदा नहीं होती है।

हालांकि, कुछ मामलों में, कैल्शियम और ऑक्सालेट आपस में बंध जाते हैं और कैल्शियम ऑक्सालेट स्टोन (यानि पथरी) बनाते हैं।

और पढ़ें – किडनी सिस्ट क्या है? जानिए इसके लक्षण, कारण और इलाज

ऑक्सलेट के नुकसान क्या हैं? | Side Effect of oxalate diet in Hindi

ऑक्सालेट की अधिक मात्रा शरीर के लिए नुकसानदायक है। उच्च ऑक्सलेट से होने वाले नुकसान में शामिल हैं – (3)

Disadvantages of oxalate in Hindi.लो ऑक्सलेट डाइट, किडनी स्टोन डाइट

ऑक्सलेट की अधिकता खनिज अवशोषण को कम कर करते हैं – Oxalate can reduce mineral absorption

रिसर्च के अनुसार ऑक्सलेट आंत में मौजूद महत्वपूर्ण खनिजों के साथ बांध सकता है और उन्हें अवशोषित होने से रोक सकता है। इसलिए ऑक्सलेट की अधिक मात्रा शरीर में खनिजों की कमी कर सकता है।

उदाहरण के लिए, पालक में कैल्शियम और ऑक्सलेट दोनों की मात्रा अधिक होती है, परन्तु ऑक्सलेट, कैल्शियम को शरीर में अवशोषित होने से रोकता है।

इसी प्रकार ऑक्सलेट और फाइबर युक्त आहार को एक साथ खाने से पोषक तत्वों के अवशोषण में बाधा आ सकती है। (4)

कुछ अन्य रिसर्च के अनुसार, भले ही ऑक्सलेट के कारण पालक से कैल्शियम का अवशोषण कम हो जाता है, लेकिन दूध और पालक का एक साथ सेवन करने से दूध से कैल्शियम का अवशोषण प्रभावित नहीं होता है।

इसलिए यह याद रखना महत्वपूर्ण है कि केवल कुछ ही खनिज ऑक्सलेट से बंधते हैं।

और पढ़ें – क्रोहन (क्रोन) रोग क्या है, जानिए इसके लक्षण, कारण व उपचार

ऑक्सलेट का उच्च स्तर गुर्दे की पथरी का कारण बन सकता है – Oxalate may contribute to kidney stones

समान्यतः हमारी यूरिन में कैल्शियम और थोड़ी मात्रा में ऑक्सलेट दोनों ही मौजूद रहते हैं। ये दोनों खनिज घुलनशील होते हैं और शरीर में कोई समस्या पैदा नहीं करते हैं।

हालांकि, कुछ मामलों में कैल्शियम ऑक्सलेट के साथ बंध जाता हैं और एक विशेष प्रकार के क्रिस्टल का निर्माण करते हैं।

ये क्रिस्टल विशेष रूप से तब बनते हैं जब शरीर में ऑक्सलेट की मात्रा अधिक और मूत्र की मात्रा कम होती है। (5)

लगभग 80% किडनी में बनने वाले स्टोन कैल्शियम-ऑक्सलेट से बने होते हैं।

और पढ़ें – स्वस्थ रहने के लिए शुरू करें लो कार्ब डाइट

यही कारण है कि जिन लोगों में कैल्शियम-ऑक्सलेट स्टोन की समस्या होती है, डॉक्टर उन्हें डाइट में कम ऑक्सलेट लेने कि सलाह देते हैं।

हालांकि, कुछ विशेषज्ञों का मानना ​​है, कि गुर्दे में पथरी का एक मात्रा कारण अधिक ऑक्सलेट डाइट नहीं हो सकती है। ऐसा इसलिए क्योंकि हमारा शरीर खुद भी ऑक्सलेट का निर्माण कर सकता है।

अधिकांश मूत्र रोग विशेषज्ञ अब केवल उन लोगों को कम ऑक्सलेट आहार (प्रति दिन 50 मिलीग्राम से कम) खाने की सलाह देते हैं जिनके मूत्र में ऑक्सलेट का उच्च स्तर होता है।

इसलिए, यूरिन में ऑक्सलेट का सही पता लगाने के लिए समय-समय पर परीक्षण किया जाना महत्वपूर्ण है। ताकि डाइट में ऑक्सलेट की मात्रा कम या ज्यादा की जा सके।

और पढ़ें – मेनियार्स रोग क्या है? जानिए इसके लक्षण, कारण और इलाज

लो ऑक्सलेट डाइट क्या है? | What is a low oxalate diet in Hindi

कम ऑक्सलेट आहार – Low oxalate diet meaning in Hindi

लो ऑक्सलेट डाइट को हिंदी भाषा में कम ऑक्सलेट आहार कहा जाता है।

लो ऑक्सलेट डाइट (Low Oxalate Diet) का मतलब है आहार में ऐसे चीजों का सेवन कम करना जिनमें ऑक्सलेट की मात्रा अघिक हो। (2)

दरसल शरीर के अंदर ऑक्सलेट, खनिजों (कैल्शियम और आयरन) के साथ मिल कर कुछ अन्य प्रकार के यौगिक बना सकता है, जिसमें कैल्शियम ऑक्सलेट और आयरन ऑक्सलेट शामिल हैं।

यह यौगिक ज्यादातर कोलन, गुर्दे और मूत्र पथ में होते हैं। अधिकांश लोग ऑक्सलेट को मल या मूत्र के माध्यम से बाहर निकाल देते हैं। हालांकि, संवेदनशील व्यक्ति ऑक्सलेट को बाहर नहीं निकाल पाते हैं – जिसकारण ऑक्सलेट किडनी स्टोन या अन्य बीमारी का का कारण बनता है।

और पढ़ें – जानिए घबराहट के दौरे क्या हैं, और क्यों आते हैं।

लो ऑक्सलेट डाइट का उद्देश्य क्या है? | Purpose of low oxalate diet in Hindi

कम ऑक्सालेट आहार का उद्देश्य शरीर द्वारा प्रतिदिन उपभोग किए जाने वाले ऑक्सालेट की मात्रा को सीमित करना है।

लो ऑक्सलेट डाइट आमतौर पर उन व्यक्तियों के लिए लागू होती है जो गुर्दे की पथरी से पीड़ित होते हैं या जिनमें गुर्दे की पथरी या ऑक्सालिक एसिड के बढ़े हुए स्तर का इतिहास होता है।

लो ऑक्सलेट डाइट आमतौर पर प्रति दिन 100-50 मिलीग्राम से कम ऑक्सलेट लेने की सलाह देती है। हालांकि हर एक व्यक्ति में इसकी मात्रा भिन्न हो सकती है।

इसलिए डॉक्टर या आहार विशेषज्ञ के अनुसार ही ऑक्सलेट युक्त आहार का सेवन करें।

और पढ़ें – हृदय रोगियों के लिए डाइट प्लान

लो ऑक्सलेट डाइट में क्या खाना चाहिए? | What to eat on a low oxalate diet in Hindi

What to eat on a low oxalate diet in Hindi
Image source: freepik.com

निम्नलिखित खाद्य पदार्थ कम ऑक्सलेट आहार श्रेणी में रखे गए हैं। (13)

लो ऑक्सलेट डाइट चार्ट

कम ऑक्सलेट आहार (Foods low in Oxalate)

सब्जियां बैंगन, शकरकंद,गोभी, फूलगोभी, प्याज, मटर, मिर्च, हरी ब्रोकोली, मशरूम, तोरी, जैतून, गाजर, भिंडी, आलू, सूरजमुखी के बीज, आंवला, खीरा, शलजम, एवोकाडो, गाजर और मूली।
फल सेब, खुबानी, एवोकैडो, केला, चेरी, क्रैनबेरी, पपीता, आड़ू, नाशपाती, अनानास, स्ट्रॉबेरी, खरबूजा, नारियल, आम, तरबूज, अमरुद और बेर।
अनाज  गेहूं का आटा, मक्का
पेय पदार्थ कॉफी, फलों का रस, गन्ने का रस, सब्जियों का रस, रूट बियर, हर्बल चाय, पानी और वाइन।
डेरी प्रोडक्ट दूध, दही, मक्खन, सोया मिल्क, सोया बटर और पनीर।
मांस अंडा, मछली,बीफ, लैम्ब और पोर्क।
ब्रेड और स्टार्च गेहूँ की ब्रेड,दलिया,सफेद चावल।

और पढ़ें – किडनी रोगियों के लिए कम प्रोटीन डाइट

लो ऑक्सलेट डाइट में क्या नहीं खाना चाहिए? | Food to avoid in low oxalate diet in Hindi

कुछ आहार ऐसे होते हैं जिनमें ऑक्सलेट की मात्रा उच्च होती है। इसलिए ऐसे खाद्य पदार्थों को गुर्दे की पथरी में परहेज करना चाहिए।

जिन खाद्य पदार्थों को उच्च ऑक्सलेट आहार श्रेणी में रखा गया है उनमें शामिल हैं -(13)

उच्च ऑक्सलेट आहार चार्ट

उच्च ऑक्सलेट फूड

(High  Oxalate Foods)

नट्स मूंगफली, मूंगफली का तेल, बादाम और काजू
फल कीवी, खजूर, रसभरी, संतरे, कीनू, अंगूर, किशमिश, अंजीर, आलूबुखारा, नींबू और नींबू का रस
सब्जियां बीन्स, पालक, आलू, चुकंदर, शलजम,चुकंदर और भिंडी
बीज सूरजमुखी के बीज और कद्दू के बीज
स्टार्च भूरे चावल
पेय पदार्थ चॉकलेट, चॉकलेट दूध, कोको, हॉट चॉकलेट, चाय और टमाटर का रस।

ध्यान रखें कि भिगोने और पकाने से कई सब्जियों और फलियों में ऑक्सलेट की मात्रा काफी हद तक कम हो सकती है।

और पढ़ें – फ्लेक्सिटेरियन डायट : फायदे, नुकसान और डाइट प्लान

क्या लो ऑक्सलेट डाइट गुर्दे की पथरी को रोकने में मदद करती है? | Does low oxalate die help prevent kidney stones?

कुछ शोध से पता चलता है कि डाइट में ऑक्सलेट की अधिक मात्रा मूत्र में ऑक्सालेट की मात्रा को बड़ा सकती है जिससे कैल्शियम ऑक्सालेट स्टोन (गुर्दे की पथरी) के बनने की सम्भावना बढ़ जाती है।

हालांकि, शोध बताते हैं कि कैल्शियम युक्त आहार के अधिक सेवन से मूत्र में ऑक्सालेट की मात्रा को कम किया जा सकता है। मतलब, गुर्दे की पथरी से बचा जा सकता है।

शरीर में कैल्शियम की अधिक मात्रा ऑक्सलेट के अवशोषण को कम करने में मदद करती है, क्योंकि कैल्शियम आंत में ऑक्सालेट को बांधता है और इसके अवशोषण को रोकता है जिससे पथरी बनने के लिए पेशाब में ऑक्सालेट की मात्रा पर्याप्त नहीं होती है।

इसलिए जानकर गुर्दे की पथरी के बचाव के लिए प्रति दिन 1000-1200 मिलीग्राम कैल्शियम लेने की सलाह देते हैं।

हालांकि, इस विषय पर अब तक बहुत कम अध्ययन हुए हैं। इसलिए इस बारे में ठीक से कहा जाना जल्दबाजी होगी।

और पढ़ें – जानिए किडनी बचाव के 11 घरेलू उपाय

लो ऑक्सलेट डाइट के क्या लाभ हैं? | Benefits of a low Oxalate diet in Hindi

लो-ऑक्सलेट डाइट अपनाने से निम्नलिखित फायदे हो सकते हैं।  (6)

Benefits of a low Oxalate diet,ऑक्सलेट डाइट

गुर्दे की पथरी के लिए लो ऑक्सलेट डाइट के लाभ – Low oxalate diet benefits for kidney stone in Hindi

लो ऑक्सलेट डाइट गुर्दे में पथरी बनने से रोकती है। शरीर में ऑक्सलेट की अधिक मात्रा कैल्शियम के साथ मिलकर क्रिस्टल (पथरी) का निर्माण करते हैं। ये क्रिस्टल किडनी या हमारी यूरिनरी ट्रैक में अटक जाते हैं और दर्द का कारण बनते हैं। इसलिए कैल्शियम ऑक्सलेट स्टोन में कम ऑक्सलेट लेने कि सलाह देते हैं।

और पढ़ें – हार्ट अटैक (Myocardial infarction) के लक्षण,कारण और बचाव

सिस्टिक फाइब्रोसिस के लिए लो ऑक्सलेट डाइट के फायदे – Low Oxalate diet benefits for cystic fibrosis in Hindi

कम ऑक्सलेट आहार सिस्टिक फाइब्रोसिस के जोखिम को कम कर सकती है।

सिस्टिक फाइब्रोसिस (सीएफ) एक अनुवांशिक विकार है जो विभिन्न अंगों जैसे फेफड़ों, पैंक्रियाज, यकृत, गुर्दे और आंत को नुकसान पहुँचाती है। यह बीमारी अंगों में चिपचिपा बलगम बनाती है और उन्हें संक्रमित करती है।

और पढ़ें – हृदय रोग क्या है? जानिए इसके प्रकार, लक्षण, कारण और बचाव

अंडरएक्टिव थायराइड के लिए कम ऑक्सलेट आहार के फायदे – Low Oxalate diet benefits for underactive thyroid in Hindi

जब शरीर में अतिरिक्त ऑक्सलेट होता है, तो यह विभिन्न ऊतकों और थायरॉयड में जमा हो जाता है। यह अतिरिक्त ऑक्सलेट थायराइड से निकलने वाले हार्मोन से जुड़ जाता है और क्रिस्टल का निर्माण करता है।

यह क्रिस्टल थायरॉयड ग्रंथि की गतिविधि को कम करते हैं, जिससे वजन बढ़ना, थकान, उच्च कोलेस्ट्रॉल स्तर, मासिक धर्म संबंधी समस्याएं पैदा होने लगती हैं।

इसलिए लो ऑक्सलेट डाइट अंडरएक्टिव थायराइड के इलाज के लिए फायदेमंद हो सकती है।

और पढ़ें – इस्केमिक हृदय रोग क्या है? जानिए इसके लक्षण, कारण और इलाज

स्पेक्ट्रम के लक्षणों को नियंत्रित करने में लो ऑक्सालिक आहार के लाभ – Low Oxalate diet benefits for spectrum in Hindi

शोधकर्ताओं के अनुसार कम ऑक्सालिक आहार स्पेक्ट्रम के लक्षणों को नियंत्रित करने में मदद कर सकता है।

ऑटिज़्म स्पेक्ट्रम डिसऑर्डर एक गंभीर मानसिक रोग है, जो तंत्रिका तंत्र के प्रभावित होने से होता है।

ऑटिज़्म स्पेक्ट्रम डिसऑर्डर से पीड़ित व्यक्ति को बातचीत करने में, पढ़ने-लिखने में और समाज में मेलजोल बनाने में परेशानियां आती हैं।

और पढ़ें – हार्ट फेल का कारण बन सकता है कार्डियक अस्थमा

लो ऑक्सलेट डाइट के नुकसान क्या हैं? | Side effects of a low Oxalate diet in Hindi

Side effects of a low Oxalate diet in Hindi
Image source: freepik.com

लो ऑक्सलेट डाइट (कम ऑक्सलेट आहार) कई प्रकार के खाद्य पदार्थों को प्रतिबंधित करता है, जिसमें हरी पत्तेदार सब्जियां, नट, बीज और स्टार्च शामिल हैं।

उदाहरण के लिए, पालक में ऑक्सलेट की अधिक मात्रा होती है, साथ ही पालक में आयरन, फाइबर, विटामिन ए, कैल्शियम और मैग्नीशियम जैसे अन्य पोषक तत्व भी मौजूद होते हैं।

लो ऑक्सलेट डाइट अपनाने से आपको अपनी डाइट से पालक हटाना होता है जिसकारण आप पालक में मौजूद महत्वपूर्ण पोषक तत्वों से वंचित हो जाते हैं।  (7)

इसी तरह, चुकंदर में भी ऑक्सलेट की उच्च मात्रा होती है और यह फोलेट, पोटेशियम और मैंगनीज जैसे पोषक तत्वों से भरा होता है। (8)

और पढ़ें – थायराइड के प्रारंभिक लक्षण, कारण और इलाज

हरी सब्जियां, बीन्स और नट्स ऐसे पौष्टिक खाद्य पदार्थ हैं जो प्रोटीन से भरपूर होते हैं। लेकिन ऑक्सलेट डाइट के प्रतिबंध के कारण आप इन पोषक तत्वों को अपने आहार से नहीं ले पाते हैं, और जिसके कारण शरीर में प्रोटीन की कमी हो जाती है।

प्रोटीन की कमी के कई नकारात्मक प्रभाव हो सकते हैं, जिनमें कमजोर प्रतिरक्षा, कमजोरी, एनीमिया और अवरुद्ध विकास शामिल हैं। (9)

इसलिए, यदि आप कम ऑक्सलेट आहार का पालन करते हैं, तो आपको यह सुनिश्चित करने की आवश्यकता होगी कि आपका आहार आपकी पोषण संबंधी आवश्यकताओं को पूरा करता हो।

और पढ़ें – सर्वाइकल दर्द में करें इन खाद्य पदार्थों का परहेज

मूत्र में ऑक्सलेट को कैसे नियंत्रित करें? | How to control oxalate in urine in Hindi

How to control oxalate in urine in Hindi

निम्नलिखित तरीकों से मूत्र में ऑक्सलेट की मात्रा को नियंत्रित किया जा सकता है। (10)

कम ऑक्सलेट आहार खाएं – Eat a low oxalate diet

ऐसे खाद्य पदार्थों का सेवन करें जिनमें ऑक्सलेट कम मात्रा में हों। कम ऑक्सलेट आहार की सूची ऊपर दी गई है।

ऑक्सलेट युक्त सब्जियों को खाने से पहले उबाल लें – Boil Oxalate Vegetables Before Eating

ऐसे आहार जिनमें ऑक्सालेट की मात्रा ज्यादा होती हैं उनका सेवन करने से पहले उबाल लें। ऐसा इसलिए क्योंकि उबालने से oxalate की मात्रा कम हो जाती है।

आहार में कैल्शियम की मात्रा बढ़ाएं – Increase the amount of calcium in your diet

आपके आहार में कम मात्रा में कैल्शियम किडनी स्टोन (कैल्शियम ऑक्सलेट) बनने की संभावना को बढ़ा सकता है।

“कैल्शियम ऑक्सलेट स्टोन्स” नाम के कारण बहुत से लोग को लगता है कि कैल्शियम खाने से स्टोन हो सकता है। परन्तु ऐसा बिलकुल भी नहीं है। (11 & 12)

कैल्शियम आंतों में ऑक्सलेट को बांधने में मदद करता है। कैल्शियम से भरपूर आहार आपके शरीर द्वारा अवशोषित ऑक्सलेट की मात्रा को कम करने में मदद करता है, जिससे पथरी होने की संभावना कम हो जाती है।

विशेषज्ञों के अनुसार, गुर्दे की पथरी से पीड़ित लोगों को प्रतिदिन 100 -50 मिलीग्राम से कम ऑक्सलेट और 1000-1200 मिलीग्राम / दिन तक कैल्शियम लेने की सलाह दी जाती है।

हालांकि, वैज्ञानिकों को इस विषय पर और अधिक शोध करने की आवश्यकता है।

ऐसे खाद्य पदार्थ जो अधिक मात्रा में कैल्शियम प्रदान करते हैं उनमें शामिल हैं –

  • ब्रोकोली,
  • गोभी,
  • राजमा,
  • चने,
  • बीन,
  • नेवी बीन,
  • सैल्मन मछली।

और पढ़ें – जानिए हाई कोलेस्ट्रॉल हमारे स्वास्थ्य के लिए क्यों खराब है।

विटामिन सी की मात्रा सीमित करें – Consume less vitamin C in your diet

विटामिन सी की अधिक खुराक आपके मूत्र में ऑक्सलेट की मात्रा को बढ़ा सकता है, जिससे किडनी स्टोन बनने का खतरा बढ़ जाता है।

यदि आप विटामिन सी का कोई सप्लीमेंट ले रहे हैं तो रोजाना 1000 मिलीग्राम से ज्यादा विटामिन सी न लें।

और पढ़ें – साइनोसाइटिस के लक्षण, कारण और इलाज (आयुर्वेदिक और होम्योपैथिक)

तरल पदार्थों का सेवन अधिक करें – Drink more fluids

पर्याप्त मात्रा में तरल पदार्थ का सेवन करें विशेष रूप से पानी। आपका लक्ष्य एक दिन में 10-12 गिलास होना चाहिए।

पानी के अलावा आप नींबू पानी पीने पर भी विचार कर सकते हैं।

शोध बताते हैं कि नींबू पानी कैल्शियम-ऑक्सलेट स्टोन बनने के जोखिम को कम करता है।

रोजाना सही और कम मात्रा में प्रोटीन खाएं – Eat the right amount of protein daily

पथरी में डॉक्टर पशु आधारित प्रोटीन कम खाने की सलाह दे सकते हैं। क्योंकि, प्रोटीन से भरपूर खाद्य पदार्थ मूत्र में एसिड की मात्रा बढ़ा सकते हैं। (29)

पेशाब में एसिड की अधिक मात्रा पथरी के निर्माण में मदद कर सकती है।

इसके अलावा पशु प्रोटीन या प्रोटीन पाउडर के अधिक सेवन से कैल्शियम का उत्सर्जन बढ़ सकता है।

इसलिए सीमित मात्रा में केवल अच्छे प्रोटीन ही खाएं ना की प्रोटीन पाउडर का सेवन करें।

पशु आधारित प्रोटीन में शामिल हैं-

  • बीफ
  • पोल्ट्री
  • फिश
  • पोर्क
  • लैम्ब
  • दूध,
  • पनीर और
  • अन्य डेयरी उत्पाद

और पढ़ें – Acid reflux (हाइपर एसिडिटी) और खट्टी डकार से छुटकारा पाने का घरेलू इलाज

अपने आहार में सोडियम की मात्रा कम करें – Consume less sodium in your diet

सोडियम की अधिक मात्रा भी यूरिन में उच्च ऑक्सलेट का कारण हो सकता है। इसलिए अपनी डाइट में नमक की मात्रा नियंत्रित रखें।

अधिक नमक वाले खाद्य पदार्थ में शामिल हो सकते हैं –

  • पिज्जा,
  • बर्गर,
  • चीज,
  • मेयोनीज,
  • डिब्बा बंद सूप,
  • डिब्बा बंद जूस
  • डिब्बा बंद सब्जियां।

निष्कर्ष | Conclusion

ऑक्सलेट एक कार्बनिक यौगिक है जो विभिन्न प्रकार के खाद्य पदार्थों में पाया जाता है, जिसमें कुछ प्रकार के फल, सब्जियां, बीन्स, नट्स और अनाज शामिल हैं।

मूत्र में ऑक्सालेट की अधिकता कैल्शियम ऑक्सालेट स्टोन (गुर्दे की पथरी) के निर्माण में योगदान कर सकता है।

कैल्शियम ऑक्सलेट स्टोन के खतरे को कम करने का सबसे आसान तरीका है अपने आहार में लो ऑक्सलेट डाइट को अपनाना और अधिक मात्रा में कैल्शियम युक्त खाद्य पदार्थों का सेवन करना है। इसके अतरिक्त अधिक मात्रा में तरल पदार्थ पीने से भी मूत्र में ऑक्सलेट की मात्रा कम होती है।

हालांकि कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि यदि उच्च कैल्शियम डाइट को लो ऑक्सलेट डाइट के साथ अपनाया जाए और प्रोटीन की मात्रा को नियंत्रित कर दिया जाए तो किडनी स्टोन बनने की क्रिया को कुछ हद तक आसानी से कम किया जा सकता है। फिलहाल अभी भी इस विषय में और रिसर्च चल रही है।

विशेषज्ञों के अनुसार, लो ऑक्सलेट डाइट के फायदे ना केवल किडनी स्टोन के लिए लाभकारी है, बल्कि सिस्टिक फाइब्रोसिस, अंडरएक्टिव थायराइड और स्पेक्ट्रम के लक्षणों को नियंत्रित करने में मदद कर सकता है।

और पढ़ें – ओमेगा 3 फैटी एसिड के फायदे और नुकसान


ये हैं किडनी स्टोन में लो ऑक्सलेट डाइट (कम ऑक्सलेट आहार) के फायदे। कमेंट में बताएं आपको यह पोस्ट कैसी लगी। यदि आपको Low Oxalate Diet in Hindi पोस्ट पसंद आई हो तो इसे शेयर जरूर करें।

Disclaimer : ऊपर दी गई जानकारी पूरी तरह से शैक्षणिक दृष्टिकोण से दी गई है। इस जानकारी का उपयोग किडनी स्टोन के निदान या उपचार हेतु बिना विशेषज्ञ की सलाह के नहीं किया जाना चाहिए। इसके अलावा किसी भी चीज को अपनी डाइट में शामिल करने या हटाने से पहले किसी योग्य डॉक्टर या आहार विशेषज्ञ (Dietitian) की सलाह जरूर लें।

सन्दर्भ (References)

  1. Khan SR, Pearle MS, Robertson WG, et al. Kidney stones. Nat Rev Dis Primers. 2016;2:16008.
  2. Mitchell T, Kumar P, Reddy T, et al. Dietary oxalate and kidney stone formation. Am J Physiol Renal Physiol. 2019;316(3):F409-F413.
  3. Massey LK, Roman-Smith H, Sutton RA. Effect of dietary oxalate and calcium on urinary oxalate and risk of formation of calcium oxalate kidney stones. J Am Diet Assoc. 1993 Aug;93(8):901-6.
  4. Kelsay JL, Prather ES. Mineral balances of human subjects consuming spinach in a low-fiber diet and in a diet containing fruits and vegetables. Am J Clin Nutr. 1983 Jul;38(1):12-9.
  5. Worcester EM, Coe FL. Clinical practice. Calcium kidney stones. N Engl J Med. 2010;363(10):954-963.
  6. https://pharmeasy.in/blog/what-is-a-low-oxalate-diet-how-does-the-body-get-benefits-from-it/
  7. https://fdc.nal.usda.gov/fdc-app.html#/food-details/168462/nutrients
  8. https://fdc.nal.usda.gov/fdc-app.html#/food-details/169145/nutrients
  9. Wu G. Dietary protein intake and human health. Food Funct. 2016 Mar;7(3):1251-65.
  10. https://www.kidney.org/atoz/content/calcium-oxalate-stone
  11. Taylor EN, Curhan GC. Dietary calcium from dairy and nondairy sources, and risk of symptomatic kidney stones. J Urol. 2013 Oct;190(4):1255-9.
  12. Ferraro PM, Bargagli M, Trinchieri A, Gambaro G. Risk of Kidney Stones: Influence of Dietary Factors, Dietary Patterns, and Vegetarian-Vegan Diets. Nutrients. 2020;12(3):779.
  13. Holmes RP, Knight J, Assimos DG. Lowering urinary oxalate excretion to decrease calcium oxalate stone disease. Urolithiasis. 2016;44(1):27-32.

Related Posts

Leave a Reply

Your email address will not be published.