Pregnancy First Trimester in Hindi

First Trimester Meaning: गर्भावस्था की पहली तिमाही के लक्षण, भ्रूण विकास और डाइट प्लान

First Trimester Meaning In Hindi : इस पोस्ट के माध्यम से हमने गर्भावस्था की पहली तिमाही के लक्षण, भ्रूण का विकास और डाइट प्लान के बारे में बताया है।

और पढ़ें – जानिए गर्भावस्था की 8 प्रमुख समस्याएं और समाधान।

गर्भावस्था का पहला महीना कब शुरू होता है? – First Trimester Meaning In Hindi

First trimester means in Hindi

गर्भावस्था लगभग 9 महीने (40 सप्ताह) तक रहती है जिसे 3 तिमाही (Trimester) में बांटा गया है। गर्भावस्था की पहली तिमाही सप्ताह 1 से सप्ताह 12 तक होती है।

गर्भवास्था की शुरुआत आपके अंतिम पीरियड के पहले दिन से होती है। इसका मतलब यह है कि शिशु के जन्म की संभावित तारीख जानने के लिए गर्भावस्था की इस समयावधि को अपनी अंतिम पीरियड के समाप्त होने के पहले दिन से जोड़ दीजिए।

पहले तीन महीनों के दौरान निषेचित अंडा (Fertilized egg) तेजी से कोशिकाओं (Cells) की परतों में विभाजित (divide) होता है और गर्भ (Womb) की दीवार में प्रत्यारोपित (Implanted) हो जाता है जहां यह अपना विकास करता है।

कोशिकाओं की यह परत भ्रूण (Embryo) कहलाती है, जिसे इस स्तर पर शिशु कहा जाता है। इस पूरी घटना का पहला संकेत तब मिलता जब आप को पीरियड नहीं आते हैं।

गर्भावस्था की पहली तिमाही (First trimester pregnancy meaning in Hindi) में गर्भपात का खतरा काफी अधिक रहता है और यह खतरा दस सप्ताह तक रह सकता है इसीलिए, इस दौरान प्रेग्नेंट महिला को बहुत सावधान रहने की जरूरत होती है।

गर्भावस्था की पहली तिमाही के लक्षण | Initial symptoms of pregnancy in Hindi

प्रेगनेंसी के लक्षण कितने दिन में दिखते है?

पहली तिमाही (First trimester) में एक महिला का शरीर कई परिवर्तनों से गुजरता है। जो शरीर के हार्मोन के बदलने के कारण होता है और शरीर के लगभग हर एक अंग को प्रभावित करता है। प्रेगनेंसी के 10 से 14 दिन बाद गर्भावस्था के शुरुआती लक्षण सामने आते हैं। जैसे –

प्रेगनेंसी के शुरुवाती लक्षण (Starting symptoms of pregnancy in Hindi)

  • जी मिचलाना (मॉर्निंग सिकनेस), 
  • सुबह और शाम उबकाई या मिचली,
  • पीरियड का ना आना,
  • मुँह का सूखापन और कड़वापन,
  • कुछ खाद्य पदार्थों के लिए लालसा, 
  • स्तनों में हल्का दर्द बना रहना, 
  • मूड में बदलाव, 
  • पेट में जलन, 
  • वजन बढ़ना, 
  • सिर दर्द, 
  • पेट की ख़राबी, 
  • कब्ज़, 
  • सफेद वेजाइनल डिस्चार्ज, 
  • बार-बार पेशाब का होना, इत्यादि शामिल हैं।

गर्भावस्था की पहली तिमाही में भ्रूण विकास | Fetal development during first trimester of  pregnancy in Hindi

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गर्भ में भ्रूण का विकास

शुक्राणु (Sperm) द्वारा अंडे (egg) को निषेचन (fertilize) करना, गर्भावस्था की शुरुआत कहलाती है। यह रोचक घटना एक फैलोपियन ट्यूब (fallopian tube) के अंदर  होती है।

गर्भावस्था की पहली तिमाही के दौरान बच्चे का विकास तेजी से होता है। भ्रूण की कोशिकाएं धीरे-धीरे मस्तिष्क और रीढ़ की हड्डी को विकसित करती हैं, और साथ ही साथ अंगों का निर्माण शुरू हो जाता है।

पहली तिमाही के दौरान ही बच्चे का दिल बन जाता है और धड़कने लगता है। जिस की धड़कन लगभग 110-170/ min तक रहती है। 

पहले कुछ हफ्तों में बच्चे की बांह और पैर उभरना शुरू हो जाते हैं, और आठ सप्ताह के अंत तक हाथ और पैर की उंगलियां बनने लगती हैं। पहली तिमाही के अंत तक, बच्चे के यौन अंग बन जाते हैं। 

इस रोमांचक समय में भ्रूण में आ रहे बदलाव इस प्रकार हैं-
  • हड्डियाँ: 8 वें सप्ताह के आसपास बनाने लगती हैं, 
  • बांह और पैर का  उभरना: 9 वें सप्ताह में शुरू हो जाते हैं,
  • त्वचा: 5 वें सप्ताह से त्वचा का निर्माण शुरू होता है, 
  • बाल और नाखून: 11 वें सप्ताह के आसपास बनते हैं,
  • पाचन तंत्र और गुर्दे का विकास: लगभग 8 वें सप्ताह से बच्चे की आंतों और गुर्दे का विकास शुरू हो जाता है,
  • आंखों की रोशनी: ऑप्टिक नसें और लेंस 4 सप्ताह से बनना शुरू हो जाती हैं, जिसमें रेटिना की शुरुआत 8 वें सप्ताह के आसपास होती है,
  • मस्तिष्क: 5 वें  सप्ताह से  आपके बच्चे का मस्तिष्क का विकास हो जाता है, 
  • स्वाद की भावना: स्वाद ग्रंथियों का विकास लगभग 9 सप्ताह से शुरु हो जाता है
इसके अलावा मांसपेशियों का विकास, कीटाणुओं से लड़ने के लिए श्वेत रक्त कोशिकाओं का उत्पादन और वोकल कॉर्ड्स (आवाज स्‍वरतंत्रियाँ) का विकास पहले ट्राइमेस्टर में होने लगता है।  
 

गर्भावस्था की पहली तिमाही में प्रेगनेंसी टेस्ट | Pregnancy test for first trimester in Hindi

Pregnancy test for first trimester in Hindi
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गर्भावस्था की पुष्टि करने के लिए डॉक्टर एक अल्ट्रासाउंड करते हैं, जिसके बाद आपकी डिलीवरी की अनुमानित तारीख बताई जाती है और साथ ही निम्नलिखित टेस्ट करवाने की सलाह देता है जिसमें –

  • वीनर रोग अनुसंधान प्रयोगशाला (VDRL) जाँच
  • HCG (ह्यूमन कोरिओनिक गोनाडोट्रोपिन) जाँच
  • हेपेटाइटिस (HBV  एंड HCV) जाँच
  • एचआईवी (HIV) परीक्षण
  • थैलासीमिया जाँच
  • थायराइड के स्तर की जाँच
  • पैप जाँच
  • न्यूकल ट्रांसलेंसी (NT) स्कैन

और पढ़ें – गर्भावस्था की पुष्टि के लिए रक्त परीक्षण।

1. प्रेगनेंसी की पहली तिमाही में वीनर रोग अनुसंधान प्रयोगशाला जाँच – VDRL test during first trimester of pregnancy in Hindi

इस परीक्षण का उपयोग यह पता लगाने के लिए किया जाता है कि क्या गर्भवती महिला सिफलिस (Syphilis) पैदा करने वाले बैक्टीरिया से संक्रमित तो नहीं है। यह परीक्षण बैक्टीरिया (Treponema pallidum) के खिलाफ शरीर में बनी एंटीबॉडी की उपस्थिति का पता लगाता है। यह एक  प्रकार का ब्लड टैस्ट है।

2. प्रेगनेंसी की पहली तिमाही में HCG जाँच – HCG pregnancy test during first trimester in Hindi

ह्यूमन कोरियोनिक गॉनाडोट्रोपिन ब्लड टेस्ट (HCG Blood Test) रक्त में मौजूद HCG हार्मोन के स्तर को मापता है।  यह एक  प्रकार का ब्लड टैस्ट है। HCG (ह्यूमन कोरियोनिक गोनाडोट्रोपिन) को प्रेग्नन्सी हार्मोन भी कहा जाता है। एचसीजी (HCG) टेस्ट को निम्नलिखित कारणों से किया जा सकता है: 
  • गर्भावस्था की पुष्टि करने के लिए, 
  • भ्रूण की सटीक उम्र पता करने के लिए, 
  • किसी असाधारण गर्भावस्था को पता लगाने के लिए, 
  • अनुवांशिक विकारों जैसे डाउन सिंड्रोम का पता लगाने के लिए

3. प्रेगनेंसी की पहली तिमाही में हेपेटाइटिस जाँच – Hepatitis test during pregnancy in Hindi

हेपेटाइटिस एक प्रकार का संक्रमण है जो लीवर को गंभीर रूप से नुकसान पहुंचा सकता है और यदि आप गर्भवती हैं, तो आप इसे अपने नवजात शिशु को दे सकती हैं। यदि आप का परीक्षण हेपेटाइटिस संक्रमण के लिए सकारात्मक आता है, तो आपके नवजात शिशु को प्रसव के तुरंत बाद हेपेटाइटिस की वैक्सीन लगाई जाती है।हेपेटाइटिस टेस्ट एक  प्रकार का ब्लड टैस्ट है।

4. प्रेगनेंसी की पहली तिमाही में एचआईवी जाँच – HIV test during pregnancy in Hindi

HIV (मानव इम्युनोडिफीसिअन्सी वायरस) एक वायरस है जो संक्रमण से लड़ने के लिए शरीर की क्षमता को प्रभावित करता है और यदि इसे बिना उपचार  के रखा जाए तो यह एड्स (Acquired immunodeficiency syndrome) को जन्म दे सकता है। यदि गर्भवती को एचआईवी (HIV) है और इसका इलाज नहीं किया गया है, तो आपके शिशु को HIV होने की सम्भावना काफी अधिक रहती है जो शिशु के स्वास्थ को प्रभावित कर सकती है। हालांकि गर्भावस्था में यदि HIV का इलाज कराया जाए तो इसके शिशु में संक्रमण करने की सम्भावना काफी हद तक काम हो सकती है। यह टेस्ट एक  प्रकार का ब्लड टेस्ट है।

5. प्रेगनेंसी की पहली तिमाही में थैलासीमिया जाँच – Thalassemia pregnancy test in Hindi

शरीर में सामान्य से कम लाल रक्त कोशिकाओं और कम हीमोग्लोबिन होना थैलेसीमिया कहलाता है। थैलेसीमिया एक आनुवांशिक (जेनेटिक) रक्त विकार है इसमें रोगी बच्चे के शरीर में रक्त की भारी कमी होने लगती है जिसके कारण उसे बार-बार बाहरी खून चढ़ाना पढता है। डॉक्टर इस रोग की जाँच के लिए आपका HPLC थैलेसीमिया स्क्रीनिंग करवाते हैं। जो कि एक  प्रकार का ब्लड टैस्ट है।

6. प्रेगनेंसी की पहली तिमाही में थायराइड जाँच – Thyroid test for pregnancy in Hindi

गर्भावस्था में बच्चे के सामान्य विकास के लिए थायराइड हार्मोन महत्वपूर्ण है। प्रेगनेंसी की पहली तिमाही में शिशु के मस्तिष्‍क और तंत्रिका तंत्र के विकास के लिए थायराइड हार्मोन विशेष भूमिका निभाता है। थायराइड हार्मोन का अधिक होना हाइपरथायरायडिज्म (Hyperthyroidism) के रूप में जाना जाता है और इसका कम होना हाइपोथायरायडिज्म (Hypothyroidism) कहलाता है। इसलिए इसका नियंत्रित रहना बहुत जरुरी है यह टेस्ट एक  प्रकार का ब्लड टेस्ट है।

7. प्रेगनेंसी की पहली तिमाही में पैप जाँच – Pap test during pregnancy in Hindi

पैप स्मीयर टेस्ट या पैट टेस्ट महिलाओं में गर्भाशय ग्रीवा कैंसर (सर्वाइकल कैंसर) के शुरूआती लक्षणों की जांच के लिए किया जाता है। इस टेस्ट के लिए गर्भाशय ग्रीवा (बच्चेदानी के मुख) की कोशिकाओं से सैंपल निकाला जाता है इस टेस्ट के जरिए कुछ प्रकार के वायरस के संक्रमण की जांच की जाती है। इसमें एचपीवी (HPV) भी शामिल है।  

8. प्रेगनेंसी की पहली तिमाही में न्यूकल ट्रांसलेंसी स्कैनNuclear translational scan during pregnancy in Hindi

ऊपर  दिए गई सब टेस्टों  के बाद लगभग 10-11 सप्ताह के बीच डॉक्टर न्यूकल ट्रांसलेंसी (NT) स्कैन का परीक्षण करवाते हैं। जिसमें बच्चे के सिर और गर्दन की मोटाई को मापने के लिए एक अल्ट्रासाउंड होता है और साथ ही डबल मार्कर (Double marker) ब्लड टेस्ट करवाते हैं। जो यह निर्धारित करने में मदद करता कि आपका बच्चा डाउन सिंड्रोम नामक एक आनुवंशिक (Genetic) विकार (Disorder) के साथ पैदा तो नहीं होगा।  

गर्भावस्था की पहली तिमाही का डाइट प्लान – First trimester diet in Hindi 

First trimester diet in Hindi 
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गर्भावस्था की पहली तिमाही में क्या खाएं? – Food to eat during pregnancy in Hindi

गर्भावस्‍था के दौरान भ्रूण के स्वस्थ विकास और मां के स्वास्थ्य को बनाए रखने के लिए पौष्टिक आहार अतिआवशयक होते हैं। पौष्टिक आहार की अपर्याप्त मात्रा बच्चे के उचित विकास में बाधा पहुंचा सकती है और इससे शिशु का वजन भी कम हो सकता है। पौष्टिक आहार की कमी से बच्चे के बढ़ते मस्तिष्क पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है। इसलिए आप जितना पौष्टिक आहार लेंगी आपकी प्रेग्नेंसी उतनी अच्छी होगी और आप अपने 9 महीने आसानी से निकाल लेंगी। तो चलिए समझते हैं प्रेग्‍नेंसी में आप को कौन-कौन से पोषक तत्व लेने चाहिए। जिससे आप और आपका शिशु दोनों स्वस्थ रहें।  
  • फोलिक एसिड युक्त आहार जैसे पालक, लोबिया, हरे मटर, राजमा, संतरे का रस, एवोकाडो (avocado), हरी गोभी, छोले, सोया, तिल के बीज, अखरोट इत्यादि का सेवन कर सकतें है। 
  • कैल्शियम युक्त आहार जैसे दूध से बने प्रोडक्ट (डेयरी उत्पाद) जैसे दही, पनीर और छेना में कैल्शियम की भरपूर मात्रा होती है।
  • आयरन  युक्त आहार जैसे अंडे, चिकन, बीफ का सेवन कर सकती हैं।  शाकाहारी स्रोतों में सरसों का साग, शलगम का साग, मूली के पत्ते, पुदीना, चौलाई, बथुआ , हरा धनिया, हरी प्याज, हरी गोभी, सूतमूली, टमाटर, मशरूम, चुकंदर, कद्दू, शकरकंदी, सिंहफली, कमल ककड़ी मेवे, किशमिश, खजूर इत्यादि आयरन से भरपूर खाद्य पदार्थ हैं।
  • प्रोटीन युक्त आहार जैसे पिस्‍ता, नारियल, बादाम, सूरजमुखी के बीजों, तिल के बीजों मटर, सोया प्रोटीन उत्पाद, बीन्स, ब्लैक बीन्स, किडनी बीन्स, दाल, स्प्लिट मटर, बादाम, नट्स, मूंगफली,अखरोट इत्यादि प्रोटीन के अच्छे श्रोत माने जाते हैं।  
  • आयोडीन युक्त आहार जैसे नमक, डेयरी उत्पाद, अंडे अच्छी तरह पके हुए, समुद्री मछलियां और समुद्री भोजन, मांस, समुद्री शैवाल (सीवीड), फोर्टिफाइड ब्रेड, पके हुए कॉड, मैकरोनी इत्यादि आयोडीन के अच्छे श्रोत हैं। 

गर्भावस्था की पहली तिमाही में क्या ना खाएं? – Food to avoid during pregnancy in Hindi

Food to avoid during pregnancy in Hindi
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पहली तिमाही के दौरान निम्नलिखित भोज्य पदार्थों से बचें-

  • Unpasteurized दूध,  
  • बहुत तेल-घी खाने से बचें,  
  • कच्चा याअध पका खाना ना खाए, 
  • मेयोनीज भी ना लें,
  • कच्ची मछली ना लें,  ,
  • जंक फूड (pizza and burger),
  • जरुरत से ज्यादा मसालेदार खाना,
  • डब्बा बंद जूस,
  • कॉफी, चाय और कोला-पेप्सी, 
  • कम पके मांस और समुद्री भोजन,
  • कच्चे या हल्के से पके हुए अंडे,
  • स्मोकिंग करने से बचें,
  • ज्यादा ऑयली फूड,
  • कैफीन पदार्थों का ज्यादा सेवन न करें,
  • रेडीमेड पैक्ड सलाद ना खाएं।

गर्भावस्था की पहली तिमाही में सावधानियां – Precautions during first trimester of pregnancy in Hindi

प्रेग्नेंट होने के बाद महिला को निम्नलिखित सावधानियां रखनी चाहिए जो आपके बढ़ते बच्चे को गर्भ के अंदर पलने में मदद करेगी-
  • हानिकारक  रसायनों (जैसे Paint) के संपर्क मे न आएं,
  • अपने ब्लड प्रेशर और ब्लड शुगर के स्तर को नियंत्रित रखें,
  • बिल्लियों, कुत्तों, पक्षियों जैसे पालतू जानवरों के संपर्क में आने से बचें,
  • वीडियो टर्मिनल डिस्प्ले (जैसे कंप्यूटर) के सीधे संपर्क से बचें,
  • बागवानी करते समय दस्ताने का उपयोग करें, खासकर यदि आप मिट्टी के साथ काम कर रहे हैं,
  • लंबे समय तक चलने और खड़े होने से बचें,
  • गर्भावस्था के शुरुआती दो महीनों में संभोग से बचें या सुरक्षित तरीकों का पालन करें,
  • तनावपूर्ण काम से बचें,
  • लंबी यात्रा की योजना बनाते समय अपने चिकित्सक से परामर्श करें गर्भावस्था के दौरान चिकित्सक के परामर्श के बाद ही दवा का सेवन करें, क्योंकि कोई गलत दवा शिशु के जन्म दोष और गर्भपातका दोनो कारण बन सकती हैं।

और पढ़ें – जानिए प्रेगनेंसी में अल्ट्रासाउंड (सोनोग्राफी) कब और क्यों होता है।

गर्भावस्था की पहली तिमाही में प्रोजेस्टेरोन हार्मोन का सामान्य स्तर क्या है? – First trimester progesterone range in Hindi

प्रोजेस्टेरोन हार्मोन प्रेगनेंसी की प्रक्रिया में अहम भूमिका अदा करता है जिसमें यह गर्भावस्था के दौरान भ्रूण के विकास में मदद करता है। वहीं, यह समय पूर्व प्रसव के जोखिम को भी दूर करने में सहायक होता है इसका समान्य स्तर 11.2 से 90.0 नैनोग्राम/मिली तक होता है।

उच्च जोखिम वाली गर्भावस्था क्या है? – High risk pregnancy in Hindi

उच्च जोखिम वाली गर्भावस्था का मतलब है कि आप की प्रेगनेंसी में गंभीर खतरे आ सकते हैं जिनमें निम्न कारण हो सकते हैं-
  • यदि आप18 वर्ष से छोटी हैं,
  • यदि आप 35 वर्ष से अधिक आयु की हैं,
  • आप का वजन ज़्यादा है या आप का वजन कम है,
  • आप का उच्च रक्तचाप है,
  • आप को मधुमेह है,
  • आप को HIV, कैंसर या अन्य स्व-प्रतिरक्षित विकार है,
  • आप के गर्भ में जुडवा बच्चे हो।
पहली तिमाही गर्भपात का सबसे आम समय है, इसलिए यदि आप अपने दोस्तों और परिवार के अन्य सदस्यों को बताना चाहती हैं तो आप को पहली तिमाही के खत्म होने का इंतजार करना चाहिए और जब आप दूसरी तिमाही में प्रवेश करें तो आप अपनी प्रेगनेंसी के बारे में बता सकती हैं।  
 
Disclaimer: ऊपर दी गई जानकारी पूरी तरह से शैक्षणिक दृष्टिकोण से दी गई है और यह कहीं से भी योग्य डॉक्टर द्वारा दिए गए मेडिकल सुझाव का विकल्प नहीं है। कमेंट में बताएं आप को यह पोस्ट कैसी लगी। साथ ही इस पोस्ट को शेयर जरूर करें।

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