Tonsillitis Symptoms in Hindi

Tonsillitis Symptoms : गले में टॉन्सिल के लक्षण, कारण और आयुर्वेदिक इलाज

Tonsillitis Symptoms in Hindi : टॉन्सिल (Tonsil) में होने वाला संक्रमण टॉन्सिलाइटिस (Tonsillitis) कहलाता है। आमतौर पर टॉन्सिलाइटिस किसी भी गंभीर या स्थायी स्वास्थ्य समस्या का कारण नहीं बनता है। हालांकि, कभी-कभी संक्रमण के ज्यादा गंभीर होने से टॉन्सिलाइटिस टॉन्सिल कैंसर में परिवर्तित हो सकता है। इसलिए टॉन्सिल का इलाज या टॉन्सिल में परहेज ठीक ढंग से किया जाना जरुरी है। इस पोस्ट के माध्यम से हम आपको टॉन्सिलाइटिस क्या है?, टॉन्सिल के प्रकार, टॉन्सिलाइटिस के लक्षण (टॉन्सिल के लक्षण), टॉन्सिल होने का कारण, टॉन्सिल कैंसर के लक्षण, टॉन्सिलाइटिस का निदान, टॉन्सिल की सर्जरी, टॉन्सिल का आयुर्वेदिक दवा, टॉन्सिलाइटिस में परहेज आदि के बारे में विस्तार से बता रहे हैं।

तो आइये अब इस पोस्ट को शुरू करते हैं।

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टॉन्सिल क्या हैं? | Tonsils meaning in Hindi

Tonsils meaning in Hindi
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टॉन्सिल्स गले के अंदर दोनों तरफ मौजूद होते है। यह शरीर के रक्षा-तंत्र में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं, और बाहरी संक्रमण जैसे बैक्टीरिया और वायरस से हमारे शरीर की रक्षा करते हैं। (1)

टॉन्सिल्स की वजह से हम कई प्रकार की बिमारियों से बच पाते हैं।

टॉन्सिल्स आकार में अंडाकार होते हैं जो 2.5 से.मी. लम्बे, 2 से.मी. चौड़े और 1.2 से.मी. मोटे हो सकते हैं।

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टॉन्सिल कैसे काम करते हैं? | How do the tonsils work in Hindi

टॉन्सिल का कार्य – Function of tonsils in Hindi

टॉन्सिल शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली (Immune System) का हिस्सा हैं। गले और तालू पर स्थित होने के कारण, टॉन्सिल मुंह या नाक के माध्यम से शरीर में प्रवेश करने वाले कीटाणुओं (germs) को रोक सकते हैं। (2)

टॉन्सिल की सतह पर माइक्रोफोल्ड सेल (एम सेल या सफेद रक्त कोशिकाए) नामक विशेष एंटीजन कैप्चर सेल होते हैं जो कीटाणुओं द्वारा उत्पादित एंटीजन को मारने का काम करते हैं।

(एंटीजन – एक पदार्थ जो शरीर में प्रवेश करता है और एक ऐसी प्रक्रिया शुरू करता है जो बीमारी का कारण बन सकती है।)

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टॉन्सिलाइटिस (टॉन्सिल) क्या है? | What is Tonsillitis in Hindi

टॉन्सिल संक्रामणTonsil infection in Hindi

टॉन्सिलाइटिस टॉन्सिल में होने वाला एक आम संक्रमण है जिसमें टॉन्सिल लाल और सूजे हुए हो जाते हैं। (3)

टॉन्सिलिटिस के कारण गले में खराश (sore throat), बुखार, ग्रंथियों में सूजन और निगलने में परेशानी हो सकती है।

समान्यतः टॉन्सिलाइटिस छोटे बच्चों से लेकर किशोरावस्था (5-15 साल तक) के बच्चों में अधिक देखा जाता है। परन्तु ये किसी भी उम्र में हो सकता है।

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टॉन्सिल के प्रकार | What are the Types of Tonsillitis in Hindi

टॉन्सिल्स कई प्रकार के हो सकते हैं- (4)

एक्यूट टॉन्सिल्स – Acute tonsillitis in Hindi

एक्यूट टॉन्सिल्स के लक्षण 3-4 दिन में चले जाते हैं या ज्यादा से ज्यादा २ हफ्ते तक रहते हैं।

इस प्रकार के टॉन्सिल्स या तो वायरस या बैक्टीरिया के कारण होता है।

आवर्ती टॉन्सिल्स – Recurring tonsils in Hindi

इस प्रकार के टॉन्सिल्स में व्यक्ति एक साल में कई बार टॉन्सिल्स के लक्ष्णों को महसूस कर सकता है।

क्रोनिक टॉन्सिल्स – Chronic tonsils in Hindi

इस प्रकार के टॉन्सिल्स में व्यक्तिके गले में बहुत सूजन आ जाती है और साथ ही साथ सांस से बदबू आने लगती है।

यदि एक्यूट टॉन्सिल्स संक्रमण का इलाज नहीं किया गया है।

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टॉन्सिलाइटिस (टॉन्सिल) के लक्षण | What are the Symptoms of Tonsillitis in Hindi

Symptoms of Tonsillitis in Hindi

गले में टॉन्सिल के लक्षण/ टॉन्सिल संक्रमण के मुख्य लक्षण – Symptoms of tonsil infection in Hindi

टॉन्सिलिटिस के संभावित लक्षणों में शामिल हैं: (3)

  • गले में खराश,
  • गले में तेज दर्द,
  • निगलने में कठिनाई या दर्द,
  • कर्कश आवाज,
  • बदबूदार सांस,
  • बुखार,
  • ठंड लगना,
  • पेटदर्द,
  • सरदर्द,
  • कान के निचले भाग में दर्द रहना,
  • टॉन्सिल का लाल और सुजा हुआ होना,
  • टॉन्सिल में सफेद या पीले धब्बे पड़ना,
  • छोटे बच्चों में सांस लेने में तकलीफ, एवं लार टपकाना जैसी समस्याएं।

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बच्चों में टॉन्सिलाइटिस (टॉन्सिल) के लक्षण | Tonsillitis Symptoms in children in Hindi

बच्चों में टॉन्सिलिटिस के संभावित लक्षणों में शामिल हैं:

  • पेट की खराबी,
  • उल्टी,
  • पेट दर्द,
  • खाने या निगलने का मन ना करना,
  • गले में खराश।

बार-बार टॉन्सिल होने का कारण | What are the Causes of Tonsillitis in Hindi

टोंसिलिटिस अक्सर वायरस के कारण होता है, लेकिन जीवाणु (bacteria) संक्रमण भी इसका कारण हो सकता है।

वायरल टॉन्सिलाइटिस – viral tonsillitis in Hindi

टॉन्सिलिटिस के अधिकांश मामले (70 प्रतिशत तक) सर्दी या फ्लू (इन्फ्लूएंजा) जैसे वायरस के कारण होते हैं।

वायरल टॉन्सिलिटिस में शामिल हैं-(3)

  • एडिनोवायरस,
  • इन्फ्लूएंजा वायरस,
  • एपस्टीन बार वायरस,
  • पैराइन्फ्लुएंजा वायरस,
  • एंटरोवायरस।

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बैक्टीरियल टॉन्सिलाइटिस (स्ट्रेप थ्रोट) – Bacterial tonsillitis in Hindi

टॉन्सिलाइटिस के अन्य मामले ग्रुप ए स्ट्रेप्टोकोकस बैक्टीरिया (स्ट्रेप्टोकोकस पाइोजेन्स) के कारण होते हैं।

बैक्टीरियल टॉन्सिलिटिस को आमतौर पर स्ट्रेप थ्रोट कहा जाता है।

टॉन्सिलाइटिस के अन्य सामान्य कारणों में शामिल हैं:

  • बर्तन, भोजन या पेय को चूमना या साझा करना,
  • किसी बीमार व्यक्ति के निकट संपर्क में आना,
  • दूषित सतह को छूना और फिर अपनी नाक या मुंह को छूना,
  • बीमार व्यक्ति के छींकने या खांसने पर हवा में उड़ने वाले छोटे-छोटे कणों को अंदर लेना।

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टॉन्सिल कितने दिन में ठीक होता है? | In how many days do tonsils heal in Hindi

वायरल टॉन्सिलिटिस के अधिकांश मामले कुछ दिनों में तरल पदार्थ और भरपूर आराम से ठीक हो जाते हैं।

हालांकि, बैक्टीरियल टॉन्सिलिटिस (स्ट्रेप थ्रोट) ठीक होने में समय लगा सकता है जो एंटीबायोटिक्स दवा लेने के बाद ठीक होती है।

एंटीबायोटिक्स आमतौर पर लगभग 7-10 दिनों में बैक्टीरियल टॉन्सिलिटिस (स्ट्रेप थ्रोट) को खत्म कर देते हैं।

टॉन्सिलाइटिस के जोखिम कारक | What are the Risk Factors of Tonsillitis in Hindi

टॉन्सिलिटिस के जोखिम कारकों में शामिल हैं:

युवा उम्र – Young age

टॉन्सिलिटिस सबसे अधिक बार बच्चों को प्रभावित करता है, और बैक्टीरिया के कारण होने वाला टॉन्सिलिटिस 5 से 15 वर्ष की आयु के बच्चों में सबसे आम है।

बार-बार कीटाणुओं के संपर्क में आना – Frequent exposure to germs

स्कूली उम्र के बच्चे अपने साथियों के साथ निकट संपर्क में होते हैं और अक्सर वायरस या बैक्टीरिया के संपर्क में आ जाते हैं जो टॉन्सिलिटिस का कारण बन सकता है।

ऐसे वयस्क जो छोटे बच्चों के आसपास बहुत समय बिताते हैं, जैसे कि शिक्षक, उनमें भी संक्रमण होने और टॉन्सिलिटिस होने की अधिक संभावना हो सकती है।

टॉन्सिल से होने वाली जटिलताएं | What are the Complications from Tonsillitis in Hindi

Complications from Tonsillitis in Hindi
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टॉन्सिल का बार-बार होना या लम्बे समय तक टॉन्सिलिटिस के होने के कारण कुछ जटिलताएं पैदा हो सकती है जैसे: (5)

  • नींद के दौरान साँस बाधित होना (ऑब्सट्रक्टिव स्लीप एपनिया),
  • संक्रमण का टॉन्सिल के आसपास के ऊतकों में फैलना (टॉन्सिलर सेल्युलाइटिस),
  • संक्रमण के कारण टॉन्सिल में पस का जमा होना,
  • आमवाती बुखार (रुमैटिक फीवर), एक गंभीर सूजन की स्थिति जो हृदय, जोड़ों, तंत्रिका तंत्र और त्वचा को प्रभावित कर सकती है
  • स्कारलेट फीवर (scarlet fever),  इस बीमारी के होने से पूरे शरीर पर लाल और उभरे हुए चकत्ते पड़ जाते हैं।
  • गुर्दे की सूजन (पोस्ट स्ट्रेप्टोकोकल ग्लोमेरुलोनेफ्राइटिस)
  • पोस्टस्ट्रेप्टोकोकल प्रतिक्रियाशील गठिया, एक ऐसी स्थिति जो जोड़ों की सूजन का कारण बनती है,
  • जिन लोगों को साल में 7 बार से ज्यादा टॉन्सिलाइटिस होता है, उन्हें क्रॉनिक टॉन्सिलाइटिस हो सकता है। डॉक्टर टॉन्सिल को हटाने के लिए सर्जरी की सलाह दे सकते हैं, खासकर यदि आप खर्राटे ले रहे हैं या रात में सोने में परेशानी हो रही है। इस सर्जरी को टॉन्सिल्लेक्टोमी कहा जाता है।
  • संक्रमण के अघिक और लम्बे समय तक होने के कारण ये संक्रमण टॉन्सिल कैंसर में भी बदल सकता है।

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टॉन्सिल कैंसर के लक्षण | Symptoms of tonsil cancer in Hindi

टॉन्सिल कैंसर का मुख्य लक्षण है एक टॉन्सिल का दूसरे टन्सिल की तुलना में बड़ा होना।

इसके अलावा लगातार गले में खराश होना भी टॉन्सिल कैंसर का लक्षण हो सकता है।

टॉन्सिल कैंसर के अन्य लक्षणों में शामिल हो सकते हैं: (6)

  • स्वर बैठना या आपकी बोलने की आवाज़ में बदलाव,
  • अत्यधिक थकान,
  • अस्पष्टीकृत वजन का घटना,
  • कान में दर्द होना, विशेष रूप से केवल एक तरफ,
  • निगलने या अपना मुंह खोलने में कठिनाई,
  • मुंह से खून निकलना।

टॉन्सिल कैंसर वाले कुछ लोग ऐसा महसूस करते हैं जैसे उनके गले में कुछ फंस गया हो। आपको मुंह, गले या कान में भी दर्द हो सकता है।

हालांकि, टॉन्सिल कैंसर के लक्षण सभी के लिए अलग-अलग होते हैं, इसलिए इसके लक्षण या संकेत हमेशा स्पष्ट नहीं दिखेंगे।

टॉन्सिल (टॉन्सिलाइटिस) का निदान | How is Tonsillitis Diagnosed in Hindi

Diagnosis of Tonsillitis in Hindi
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टॉन्सिलाइटिस का निदान करने के लिए डॉक्टर निम्नलिखित तरीके से आपका निरीक्षण कर सकते हैं।

  • टॉन्सिल पर लाली, सूजन या सफेद धब्बे देखने के लिए डॉक्टर आपके गले की जांच कर सकते हैं।
  • डॉक्टर आपके अन्य लक्षणों के बारे में पूछ सकते हैं जैसे कि बुखार, खांसी, नाक बहना, दाने या पेट दर्द।
  • टॉन्सिल संक्रमण के अन्य लक्षणों के लिए डॉक्टर अपने कान और नाक की जाँच कर सकते हैं।
  • टॉन्सिल संक्रमण देखने के लिए डॉक्टर आपकी गर्दन के किनारों को महसूस कर सकते हैं और यह जानने की कोशिश करते हैं कि क्या लिम्फ नोड्स सूजे हुए और कोमल तो नहीं हैं।

टॉन्सिलिटिस के निदान की पुष्टि करने के बाद, आपके डॉक्टर को यह निर्धारित करने की आवश्यकता होती है कि क्या संक्रमण वायरस या बैक्टीरिया (स्ट्रेप थ्रोट) से हुआ है।

यह निर्धारित करने के लिए डॉक्टर आपके कुछ परीक्षण (test) करवा सकते हैं। इन परीक्षण में शामिल हैं- (7 & 8)

थ्रोट स्वैब कल्चर टेस्ट – A throat swab

एक एक सरल परीक्षण है जिसके दौरान डॉक्टर आपके स्राव का एक नमूना गले के पिछले हिस्से से स्वैब (रुई) के माध्यम से लेते हैं।

इस टेस्ट से पता चलता है कि संक्रमण बैक्टीरिया (स्ट्रेप्टोकोकल) का है या नहीं, इसकी जाँच क्लिनिक में या लैब में की जाती है।

रक्त जाँच – A blood test

टॉन्सिलिटिस के निदान के लिए डॉक्टर आपके खून की भी जाँच कर सकते हैं। जिसमें डॉक्टर आपके RBCs  और WBCs  की संख्या को देखते हैं और फिर संक्रमण का पता लगते हैं।

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टॉन्सिल में डॉक्टर को कब दिखाना है ?| When to see a doctor in Hindi

निम्नलिखित लक्षणों का अनुभव होने पर आपको तुरंत अपने डॉक्टर को दिखाना चाहिए। यदि –

  • बुखार जो 103°F (39.5°C) से अधिक हो,
  • मांसपेशी में कमज़ोरी,
  • गर्दन में अकड़न,
  • गले में खराश जो 3-4 दिनों के बाद भी ठीक नहीं होता हो,
  • दुर्लभ मामलों में, टॉन्सिलिटिस गले में इतनी सूजन पैदा कर सकता है कि इससे सांस लेने में परेशानी होती है। यदि ऐसा होता है तो तत्काल डॉक्टर को दिखाएं।

वैसे कुछ मामलों में टॉन्सिलिटिस में उपचार की आवश्यकता नहीं होती है और टॉन्सिल संक्रमण खुद ही ठीक हो जाता है।  हालांकि , कुछ मामलों में उपचार की आवश्यकता होती है।

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टॉन्सिलाइटिस (टॉन्सिल) का उपचार | Tonsillitis treatment in Hindi

बैक्टीरिया के कारण होने वाले टॉन्सिलाइटिस का इलाज एंटीबायोटिक दवा से किया जाता है। एंटीबायोटिक्स दवा के लिए आपको डॉक्टर के प्रिस्क्रिप्शन की आवश्यकता होती है।

टॉन्सिलिटिस के इलाज (Tonsil ka ilaj) के लिए आप आमतौर पर लगभग 7-10 दिनों तक एंटीबायोटिक्स मौखिक रूप से (मुंह से) लेते हैं।

टॉन्सिल का एलोपैथिक दवा / टॉन्सिल की अंग्रेजी दवा

टॉन्सिलिटिस के लिए सबसे आम एंटीबायोटिक्स दवा हैं-

  • पेनिसिलिन
  • क्लिंडामाइसिन
  • सेफैलोस्पोरिन

डॉक्टर द्वारा बताई गई एंटीबायोटिक दवाओं का पूरा कोर्स करना बेहद महत्वपूर्ण है, भले ही टॉन्सिल कुछ दिन में ठीक क्यों ना हो जाए। ऐसा इसलिए है क्योंकि दवाई का पूरा कोर्स ना करने पर संक्रमण वापस आ सकता है जो शरीर के किसी अन्य भाग में भी फैल सकता है।

टॉन्सिल का होम्योपैथिक इलाज

होम्योपैथी चिकित्सा कई बीमारियों और स्थितियों के उपचार में मदद करती हैं। कोई भी व्यक्ति होम्योपैथिक उपचार को अपनी दैनिक दिनचर्या में बहुत आसानी से शामिल कर सकता है।

टॉन्सिलिटिस के लिए सबसे आम होम्योपैथिक दवा हैं-

  • आर्सेनिक एल्बम
  • लाइकोपोडियम क्लैवाटम
  • मर्क्यूरियस सॉल्यूबिलिस
  • हेपर सल्फर
  • बैरिटा कार्बोनिका
  • बेलाडोना

ऊपर बताई गई होम्योपैथी दवा टॉन्सिलिटिस को ठीक करने में मदद कर सकती हैं। डॉक्टर के सलाह के अनुसार ही इन दवाओं का सेवन करें।

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टॉन्सिल की सर्जरी | Tonsil surgery in Hindi

Tonsil surgery in Hindi
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टॉन्सिल का ऑपरेशन कब होता है? – When is tonsil surgery done in Hindi

कभी-कभी टॉन्सिल में अधिक संक्रमण होने के कारण डॉक्टर टॉन्सिलिटिस के इलाज (Tonsil ka ilaj) के लिए टॉन्सिल को हटा देते हैं (टॉन्सिल की सर्जरी)।

टॉन्सिल हटाने की प्रक्रिया टॉन्सिल्लेक्टोमी कहलाती है।

टॉन्सिल का ऑपरेशन निम्नलिखित परिस्थितियों में किया जा सकता है। जिसमें शामिल हैं –

  • टॉन्सिल से बार-बार खून बहना,
  • टॉन्सिल का कैंसर,
  • पूरे टॉन्सिल में संक्रमण होना और संक्रमण का आस-पास की कोशिकाओं तक पहुंचना,
  • साल में 6 या अधिक बार टॉन्सिल में संक्रमण होना,
  • नींद के दौरान सांस ना ले पाना (या स्लीप एपनिया)।

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टॉन्सिल का ऑपरेशन कैसे होता है? – How is tonsil surgery done in Hindi

टॉन्सिल की सर्जरी (टॉन्सिल्लेक्टोमी) में लगभग 20 से 30 मिनट का समय लगता है। ऑपरेशन से पहले डॉक्टर जेनरल अनेस्थेसिया देते हैं। टॉन्सिल्लेक्टोमी कई तरीकों से की जा सकती है। जिनमें शामिल हैं – (9 & 10)

इलेक्ट्रोकॉटरी – Tonsil surgery by Electrocauter in Hindi

यह विधि टॉन्सिल को हटाने और किसी भी रक्तस्राव को रोकने के लिए गर्मी का उपयोग करती है।

कोल्ड नाइफ (स्टील) विच्छेदन – Tonsil surgery by Cold knife (steel) dissection in Hindi

टॉन्सिल को एक स्केलपेल से हटा दिया जाता है। रक्तस्राव को फिर टांके या इलेक्ट्रोकॉटरी (अत्यधिक गर्मी) से रोका जाता है।

हार्मोनिक स्केलपेल – Tonsil surgery by Harmonic scalpel in Hindi

यह विधि एक ही समय में टॉन्सिल को काटने और रक्तस्राव को रोकने के लिए अल्ट्रासोनिक कंपन का उपयोग करती है।

अन्य तकनीक – Tonsil surgery by Other methods in Hindi

अन्य तरीकों में रेडियोफ्रीक्वेंसी एब्लेशन, कार्बन डाइऑक्साइड लेजर, और/या माइक्रोडेब्राइडर का उपयोग शामिल है।

टॉन्सिल सर्जरी के बाद रिकवरी – Recovery after tonsil surgery in Hindi

टॉन्सिल सर्जरी के बाद दर्द आम है और यह दर्द 3 से 4 दिन तक रह सकता है। दर्द अक्सर सुबह के समय तेज होता है और 2 सप्ताह तक रह सकता है। हालांकि डॉक्टर दर्द दूर करने के लिए कुछ दवाइयां दे सकते हैं।

सर्जरी के बाद आपके गले में खराश हो सकती है। आपको जबड़े, कान या गर्दन में भी दर्द महसूस हो सकता है। डॉक्टर सर्जरी के बाद पहले दो से तीन दिन तक आराम करने की सलाह देते हैं।

टॉन्सिल्लेक्टोमी के बाद रक्तस्राव का खतरा भी रहता है हालांकि, 10 दिनों के बाद यह जोखिम कम हो जाता है। टॉन्सिल्लेक्टोमी से रिकवर होने में मरीज को लगभग 2 सप्ताह तक का समय लग सकता है।

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टॉन्सिल (टॉन्सिलाइटिस) का आयुर्वेदिक इलाज | Tonsils ayurvedic treatment in Hindi

आयुर्वेदिक इलाज द्वारा टॉन्सिल संक्रमण को रोका जा सकता है। टॉन्सिल का आयुर्वेदिक उपचार या टॉन्सिल के घरेलू उपाय में शामिल हैं-

टॉन्सिल की आयुर्वेदिक दवा है मुलेठी – Muleti : Ayurvedic treatment to cure tonsils in Hindi

मुलेठी में एंटी-बैक्टीरियल गुण होते हैं। गले की खराश और दर्द से आराम पाने के लिए मुलेठी को अपने मुंह में 30 min तक रख सकते हैं

आप चाहें तो शहद में मुलेठी पाउडर मिलाकर भी इसका सेवन टॉन्सिल संक्रमण में कर सकते हैं।

टॉन्सिल का घरेलू इलाज लहसुन के सेवन से – Benefits of Garlic in tonsils in Hindi

पानी में 4-5 लहसुन की कलियाँ डाल कर उबाल लें। और फिर गुनगुने पानी से इसका गरारा करें।

यह घरेलू इलाज टॉन्सिल संक्रमण में सूजन और जलन से आराम दिलाता है।

दूध और हल्दी से टॉन्सिल का उपचार – Milk and Turmeric : Ayurvedic treatment to cure tonsils in Hindi

हल्दी में एंटीसेप्टिक गुण होता है, जो इंफेक्शन को दूर करने में मदद करता है।

गर्म दूध में एक चुटकी हल्दी डालकर रात में सोने से पहले पी लें।

हल्दी का सेवन टॉन्सिल के साथ-साथ कई रोगों को ठीक करने में मदद करता है।

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अदरक द्वारा टॉन्सिल का इलाज – Treatment of tonsils with ginger in Hindi

गर्म पानी में नींबू का रस और अदरक पीस कर मिला दें। फिर इसे पी लें। अदरक  में एंटी-बैक्टीरियल गुण होने के कारण यह टॉन्सिल के इलाज में फायदेमंद हो सकता है।

टॉन्सिल का घरेलू उपचार सेंधा नमक – Benefits of rock salt in tonsils in Hindi

टॉन्सिलाइटिस (गले की परेशानी) में नमक बेहद फायदेमंद साबित होता है। इसके लिए आप सेंधा नमक का उपयोग कर सकते हैं।  सेंधा नमक को गुनगुने पानी में डाल कर गरारा कर लें। इससे आपको तुरंत आराम मिलेगा।

सिरका से टॉन्सिल का इलाज – Vinegar : Ayurvedic treatment to cure tonsils in Hindi

गले की सूजन, जलन आदि दूर करने के लिए पानी में सिरका मिलाकर कुल्ला करें। एक ग्लास पानी में आधा चम्मच सिरका मिलाकर पीने से तुरंत आपको टॉन्सिलाइटिस में आराम मिलता है।

टॉन्सिल के इलाज के लिए प्याज का नुस्खा – Onion to treat tonsils in Hindi

प्याज के रस को गुनगुने पानी में मिलाकर गरारा करने से टॉन्सिल में बहुत लाभ पहुंचाता है।

तुलसी और शहद से टॉन्सिल का उपचार – Basil : Ayurvedic treatment to cure tonsils in Hindi

तुलसी की पत्ती में मौजूद एंटी-बैक्टीरियल और एंटी-वायरल गुण (तुलसी के लाभ) अनेक बिमारियों से लड़ने में मदद करती है।

एक गिलास दूध में 4-6 तुलसी के पत्ते उबाल लें। गुनगुना होने पर आधा चम्मच शहद मिलाकर सेवन करें। इससे आपको टॉन्सिल में आराम मिलेगा।

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टॉन्सिल के घरेलू उपाय अदरक और शहद – Benefits of ginger and honey in tonsils in Hindi

अदरक को शहद के साथ मिला कर चूस सकते हैं, इससे आपको टॉन्सिलाइटिस में तुरंत राहत मिलेगी।

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टॉन्सिल में क्या खाना चाहिए ? | Food to eat in tonsils in Hindi 

टॉन्सिल में खाई जाने वाली चीजों में शामिल हैं-

टॉन्सिल्स में खाएं गरम चावल – Eat hot rice on tonsils in Hindi

गरम चावल मुलायम होता है और इसे आसानी से निगला भी जा सकता है। मसालेदार चावल खाने की बजाए हमेशा प्‍लेन राइस खाइये। आप चाहें तो इसमें लौंग डाल कर भी खा सकते हैं।

उबला आलू – Eat Boiled potato on tonsils in Hindi

उबला आलू आसानी से गले के नीचे उतारा जा सकता है और इसे खाने से पेट भी भर जाता है।

उबली हुई पालक का सूप – Eat Steamed spinach soup on tonsils in Hindi

उबली और भाप में पकाई गई सब्‍जियों का सेवन गले के इंफेक्‍शन को ठीक कर सकता है। आप पालक का सूप काली मिर्च पाउडर डाल कर पी सकते हैं।

उबला हुआ पास्‍ता – Eat Boiled pasta on tonsils in Hindi

उबला हुआ पास्‍ता गले के दर्द को ठीक करने के लिये कारगर है।

प्‍लेन इडली – Eat Plain Idli on tonsils in Hindi

प्‍लेन इडली हेल्‍दी भी होती है और साफ्ट भी। टॉन्सिल को ठीक करने के लिये आप बिना सांभर के गरम-गरम इडली खा सकते हैं। सांभर में कई ऐसे मसाले मिले होते हैं जो टॉन्सिलाइटिस में नुकसानदायक हो सकते हैं। अगर चाहे तो सांभर की जगह थोड़ी सी सॉफ्ट सब्जियां मिला सकते हैं ताकि आपको इडली का स्वाद थोड़ा ज्यादा आये।

टॉन्सिल में गरम पानी का सेवन करें – Drink hot water on tonsils in Hindi

गर्म नमक के पानी से गरारे करने और कुल्ला करने से गले में खराश और टॉन्सिलिटिस के कारण होने वाले दर्द को शांत करने में मदद मिल सकती है।

गर्म नमक का पानी सूजन को भी कम कर सकता है, और टॉन्सिल संक्रमण के इलाज में भी मदद कर सकता है।

और पढ़ें – Chronic Constipation के लक्षण कारण और इलाज

टॉन्सिल में क्या नही खाना चाहिए ? | Food to avoid in tonsils in Hindi

टॉन्सिलाइटिस में परहेज 

  • टॉन्सिलाइटिस होने पर ठंडी चीजों का सेवन बिलकुल भी न करें।
  • ठंडी चीजों के सेवन से टॉन्सिल्स में दर्द अधिक होता है। ठंडी चीजों में शामिल हैं – आइसक्रीम, ठंडा पानी, सोडा, कोल्ड ड्रिक्स आदि।
  • तली-भुनी और मसालेदार चीजों का भी टॉन्सिलाइटिस में परहेज करना चाहिए।
  • फास्टफूड, जंकफूड, चॉकलेट, आदि भी टॉन्सिलाइटिस में नहीं खानी चाहिए।
  • टॉन्सिलाइटिस होने की स्थिति में शराब, गुटखा और धूम्रपान के सेवन से बचें। टॉन्सिलाइटिस में ऐसी चीजें आपकी परेशानी को और भी बढ़ा सकती हैं।

और पढ़ें – कब्ज में क्या खाएं और क्या ना खाएं

टॉन्सिलाइटिस (टॉन्सिल) की रोकथाम | Prevention of Tonsillitis in Hindi

टॉन्सिलिटिस को कैसे रोक सकते हैं ? | How do you Prevent Tonsillitis in Hindi

टॉन्सिलाइटिस की रोकथाम निम्नलिखित तरीकों से की जा सकती है-

  • टॉन्सिलिटिस के रोगियों से सुरक्षित दूरी बनाए रखें और उनके साथ बर्तन और पीने का गिलास साझा करने से बचें,
  • खांसते या छींकते समय अपने मुंह को रुमाल या हाथ से ढक लें और अपने बच्चों को भी ऐसा करना सिखाएं। खांसने या छींकने के बाद हाथ धोएं।
  • अपने हाथों को अच्छी तरह और बार-बार धोएं, खासकर शौचालय का उपयोग करने के बाद और खाने से पहले,
  • खाना, पीने का गिलास, पानी की बोतलें या बर्तन साझा करने से बचें
  • टॉन्सिलिटिस का निदान होने के बाद अपने टूथब्रश को बदलें।

और पढ़ें – Acid reflux (हाइपर एसिडिटी) और खट्टी डकार से छुटकारा पाने का घरेलू इलाज


ये है टॉन्सिलाइटिस (टॉन्सिल) के लक्षण कारण और इलाज के बारे में बताई गई पूरी जानकारी। कमेंट में बताएं आपको Tonsillitis Symptoms in Hindi पोस्ट कैसी लगी। अगर आपको पोस्ट पसंद आई हो, तो इसे शेयर जरूर करें।

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Disclaimer : ऊपर दी गई जानकारी पूरी तरह से शैक्षणिक दृष्टिकोण से दी गई है। इस जानकारी का उपयोग किसी भी बीमारी के निदान या उपचार हेतु बिना विशेषज्ञ की सलाह के नहीं किया जाना चाहिए। इसके अलावा किसी भी चीज को अपनी डाइट में शामिल करने या हटाने से पहले किसी योग्य डॉक्टर या आहार विशेषज्ञ (Dietitian) की सलाह जरूर लें। 

सन्दर्भ (References)

1. InformedHealth.org [Internet]. Cologne, Germany: Institute for Quality and Efficiency in Health Care (IQWiG); 2006-. How do the tonsils work? 2011 Mar 8 [Updated 2019 Jan 17]. 

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