Parkinson’s Diet Plan in Hindi

Parkinson’s Diet Plan | पार्किंसन में क्या खाना चाहिए और क्या नहीं खाना चाहिए

Parkinson’s Diet Plan in Hindi : पार्किंसन्स बीमारी एक न्यूरोडीजेनेरेटिव डिसऑर्डर (तंत्रिका तंत्र की बीमारी) है जिसमें हाथ या पैर से दिमाग तक पहुंचाने वाली नसें या तंत्रिका काम करने में असमर्थ हो जाती है। हालांकि, विशेषज्ञों को अब तक यह पता नहीं है कि पार्किसन बीमारी का विकास कैसे होता है। ज्यादातर मामलों में 60 साल से ज्यादा उम्र के लोग इस बीमारी का शिकार होते हैं। पर यह जरूरी नहीं है की वृद्ध लोग ही इस बीमारी का शिकार हों, बहुत से अनुवांशिक कारण हैं जिसमें बच्चे भी इस बीमारी का शिकार हो सकते हैं। (1)

शोधकर्ताओं की माने तो पार्किंसन से पीड़ित व्यक्ति अगर अपने खान-पान (आहार) में कुछ बदलाव लाएं तो वह पार्किंसन के लक्षणों में कुछ हद तक सुधार ला सकते हैं। इस लेख की सहायता से हम जानेंगे कि पार्किंसन में क्या खाना चाहिए और क्या नहीं खाना चाहिए। ताकि पार्किंसन रोग के जोखिम से बचा जा सके। 

पोस्ट शुरू करने से पहले जान लेते हैं कि पार्किंसन रोग के लक्षण और कारण क्या हैं और साथ ही जानते हैं कि इसकी कितनी स्टेज होती हैं।

पार्किंसन रोग के लक्षण | Parkinson’s signs and symptoms in Hindi

शुरुआत में इस बीमारी के लक्षण दिखाई नहीं देते हैं पर जैसे-जैसे समय निकलता है आपको हाथ पैरों में कमजोरी महसूस होने लगती है, और इसका असर आपके चलने, बात करने, सोने, सोचने से लेकर लगभग हर काम पर पड़ने लगता है।

पार्किंसन बीमारी के प्रमुख लक्षण इस प्रकार हैं – (2)

  • हाथों और पैरों का कांपना  (यह पार्किंसन बीमारी का एक प्रमुख लक्षण है, जिसमें हाथ और पैर या उनकी उंगलियां कांपने लगती हैं।)
  • कार्य क्षमता कम,
  • मूवमेंट में परिवर्तन,
  • लिखने में दिक्कत,
  • आवाज में बदलाव होना,
  • मांसपेशियों का कठोर हो जाना,
  • स्वचालित कार्यो का न होना (जैसे आँखे झपकना, चलते समय हाथों का हिलना, हंसना इत्यादि।)।

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पार्किंसन रोग के कितने स्टेज हैं? | Stages of Parkinson’s Disease in Hindi

पार्किंसंस रोग के कुल 5 चरण हैं जो इस प्रकार हैं- (3)

  1. पार्किंसंस रोग के पहले चरण में हल्के लक्षण दिखाई देते है। ये लक्षण व्यक्ति के जीवन की गुणवत्ता को प्रभावित नहीं करते हैं और दैनिक गतिविधियां बहुत अधिक प्रभावित नहीं होती हैं।
  2. बीमारी के दूसरे चरण में, लक्षण बिगड़ने लगते हैं, ये लक्षण दिन-प्रतिदिन की गतिविधियों को और अधिक कठिन बना देते हैं और एक सरल कार्य को पूरा करने में अधिक समय लगता है।
  3. स्टेज 3 को मिड स्टेज भी कहा जाता है। पार्किंसंस रोग के लक्षण गंभीर होने लगते है और दैनिक गतिविधियों जैसे कि ड्रेसिंग, भोजन, ब्रश आदि को करने में कठिनाई होने लगती है।
  4. चौथे चरण में पार्किंसंस रोग बहुत गंभीर हो जाता है और रोगी को अपनी दैनिक गतिविधियों और चलने में भी सहायता की आवश्यकता होती है। इस स्टेज में व्यक्ति संतुलन खो देते हैं और खुद को गिरने और चोट पहुंचाने की सम्भावना बढ़ जाती है।
  5. स्टेज 5, व्यक्ति को पूरी तरह से असहाय बना देता है। ऐसे व्यक्ति अकेले अपना जीवन यापन नहीं करपाते हैं  उन्हें सहायता की आवश्यकता होती है।

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पार्किंसन रोग कैसे होता है? | पार्किंसन रोग का कारण | Parkinson disease causes in Hindi

पार्किंसन रोग में मस्तिष्क में मौजूद कुछ तंत्रिका कोशिकाएं (न्यूरॉन्स) धीरे-धीरे खराब होने लगती हैं या नष्ट हो जाती हैं। ये न्यूरॉन्स हमारे मस्तिष्क में डोपामाइन नामक रसायन उत्पन्न करते हैं। ये रसायन मस्तिष्क की गतिविधि का नियंत्रण करती है। इन न्यूरॉन्स के नष्ट होने से डोपामाइन के स्तर में कमी आ जाती है। जो असामान्य मस्तिष्क गतिविधि का कारण बनती है, जिसके परिणामस्वरूप पार्किंसंस रोग के संकेत मिलते हैं। (4)

इसके अलावा जेनेटिक म्युटेशन (Genetic Mutations) या पर्यावरण से संबंधित कारण भी इस रोग का कारण हो सकता है। 

चलिए अब समझते है कि पार्किंसन में क्या खाना चाहिए और क्या नहीं खाना चाहिए (Diet for parkinson in Hindi)।

पार्किंसन में क्या खाना चाहिए? | Parkinson’s Diet Plan in Hindi

Parkinson’s Diet Plan in Hindi, पार्किंसन में क्या खाना चाहिए

पार्किंसन रोग के जोखिम को कम करने के लिए निम्नलिखित खाद्य पदार्थ फायदेमंद हो सकते हैं।

1. एंटीऑक्सिडेंट युक्त आहार – Eat Antioxidant in Parkinson’s Disease in Hindi 

एंटीऑक्सिडेंट युक्त आहार पार्किंसंस रोग में काफी फायदेमंद होते हैं। शोध से पता चला है कि एंटीऑक्सिडेंट युक्त आहार मस्तिष्क को सुरक्षा प्रदान करने में अहम भूमिका निभाते हैं। (5)

एंटीऑक्सीडेंट ऐसे पदार्थ हैं जो फ्री रेडिकल्स (मुक्त कणों) के कारण शरीर में होने वाले नुकसान को रोक सकते हैं या धीमा कर सकते हैं। शरीर में मौजूद फ्री रेडिकल्स, ऑक्सीडेटिव तनाव (स्ट्रेस) को बड़ा सकते हैं । लंबे समय तक ऑक्सीडेटिव तनाव डीएनए (DNA) और शरीर के अन्य महत्वपूर्ण अणुओं को नुकसान पहुंचा सकते हैं।

ये  एंटीऑक्सीडेंट मुख्यतः फल और सब्जियों से प्राप्त किये जा सकते हैं। सब्जियों और फलों में एंटीऑक्सीडेंट प्रचुर मात्रा में होते हैं। (6) रेड बीन्स (राजमा), ब्लैक बीन्स (काले सेम), स्ट्रॉबेरी, ब्लूबेरी, अनार, अंजीर, लाल अंगूर, पालक, केल, ब्रोकली, लाल पत्ता गोभी,फ्लेक्स सीड्स, चिया के बीज, कद्दू के बीज, सरसों के बीज आदि खाद्य पदार्थ एंटीऑक्सीडेंट के अच्छे उदाहरण हैं।

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2. ओमेगा -3 फैटी  एसिड्स – Omega 3 fatty acids in Parkinson’s Disease in Hindi 

पार्किंसन रोग में ओमेगा 3 जैसे आहार का सेवन करना अच्छा माना जाता है। ओमेगा 3 फैटी एसिड (Diet for parkinson in Hindi) हमारे शरीर के लिए एक महत्वपूर्ण फैटी एसिड (पॉलीअनसैचुरेटेड वसा) है, जो शरीर की कोशिकाओं और मांसपेशियों को कार्य करने के लिए ताकत प्रदान करता है। इसके अलावा ओमेगा 3, दिल को स्वस्थ रखने, स्ट्रोक से बचाने और मस्तिष्क को मजबूत करने आदि में भी हमारी मदद करता है। (7)

हमारा शरीर ओमेगा 3 फैटी एसिड को प्राकृतिक रूप से नहीं बना पाता है, इसलिए ओमेगा 3 हमें अपने आहार में शामिल करना जरुरी होता है। वसायुक्त मछलियां, ओमेगा -3 का एक उत्कृष्ट आहार स्रोत मानी जाती हैं, जबकि शाकाहारी लोग ओमेगा 3 सब्जियों, नट्स और बीजों से प्राप्त कर सकते हैं।

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3. फिश ऑयल – Fish Oil in Parkinson’s Disease in Hindi 

पार्किंसन बीमारी में फिश ऑयल का सेवन करना अच्छा माना जाता है। फिश ऑयल मस्तिष्क कि रक्षा करता है और तंत्रिका कोशिकाएं का विकास करता है। (8)

फिश ऑयल एक प्रकार का वसा है जो मछली के ऊतकों से निकाला जाता है। लगभग 30% मछली का तेल ओमेगा -3 फैटी एसिड से बना होता है, जबकि शेष 70% अन्य वसा से बना होता है। इसके अलावा, मछली के तेल में आमतौर पर कुछ विटामिन ए और डी भी मौजूद होते हैं। मछली का तेल (ओमेगा 3 फैटी एसिड) आमतौर पर तैलीय मछलियों जैसे ट्यूना, हलिबेट, शैवाल, क्रिल्ल आदि से निकला जाता है। 

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4. आयरन युक्त खाद्य पदार्थ – Iron rich foods in Parkinson’s Disease in Hindi 

आयरन से भरपूर खाद्य पदार्थ खाने से पार्किंसन रोग का जोखिम कम रहता है। (9)

शाकाहारियों के लिए ब्रोकली, पालक, चुकंदर, केल और टमाटर आयरन के सबसे महत्वपूर्ण आहार हैं जो हीमोग्लोबिन बढ़ाने में मदद करते हैं। इन सब्जियों में प्रति 100 ग्राम में 0.27 मिलीग्राम से लेकर 2.7 मिलीग्राम तक आयरन होता है।

अनार, शहतूत और जैतून जैसे फलों में आयरन की मात्रा सबसे अधिक होती है जो खून की कमी को दूर करने में मदद करते हैं। अनार में 0.3 mg/ 100gm आयरन होता है जबकि शहतूत में 1.9 mg/ 100gm आयरन होता है। इसके अलावा जैतून में प्रति 100 ग्राम में 3.3 मिलीग्राम आयरन होता है।

मूंगफली, बादाम, अखरोट और काजू आयरन से भरपूर आहार हैं, जो एनीमिया से लड़ने में मदद करते हैं। नट्स (मेवे) में आयरन के अलावा प्रोटीन, फाइबर, कैल्शियम, मैग्नीशियम, जिंक, फोलिक एसिड, विटामिन E और आवश्यक वसा भी होते हैं जो शरीर की ऊर्जा बनाए रखने में मदद करते हैं।

साथ ही अंजीर, खजूर, आलूबुखारा, खुबानी और किशमिश ऐसे सूखे फल हैं, जिनमें आयरन की मात्रा अधिक होती है।

और पढ़ें – आयरन की कमी को दूर करते हैं ऐसे आहार।

5. विटामिन डी युक्त खाद्य पदार्थ – Take Vitamin D in Parkinson’s Disease in Hindi 

विटामिन डी का सेवन करना भी पार्किंसन रोग में फायदेमंद होता है(10)। निम्नलिखित खाद्य पदार्थ विटामिन डी के अच्छे स्रोत हैं:

  • मछली,
  • लाल मांस,
  • अंडे की जर्दी,
  • दूध और दही।

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6. विटामिन सी युक्त खाद्य पदार्थ – Take Vitamin C in Parkinson’s Disease in Hindi 

आहार में विटामिन सी का सेवन पार्किंसंस रोग के जोखिम को कम करता है (11)। निम्नलिखित खाद्य पदार्थ विटामिन सी के अच्छे स्रोत हैं:

  • खट्टे फल,
  • काली मिर्च,
  • स्ट्रॉबेरीज,
  • ब्रोकोली,
  • आलू।

और पढ़ें – एक अच्छे कुकिंग ऑयल का चुनाव कैसे करें?

7. जिंक युक्त खाद्य पदार्थ –  Eat zinc rich foods in Parkinson’s Disease in Hindi 

निम्नलिखित खाद्य पदार्थ जिंक के अच्छे स्रोत हैं जो पार्किंसंस रोग के जोखिम को कम करते हैं। (12)

  • तिल,
  • बाजरा,
  • पनीर,
  • काला चना,
  • रामदाना (राजगिरा),
  • मशरूम।

और पढ़ें – पोटेशियम की कमी दूर करते हैं ये आहार

पार्किंसन में क्या नहीं खाना चाहिए? | पार्किंसन में परहेज | Food to avoid in Parkinson’s Disease in Hindi 

Food to avoid in Parkinson's Disease in Hindi, पार्किंसन में क्या नहीं खाना चाहिए

शोधकर्ताओं का मानना है कि वसा, चीनी, परिष्कृत अनाज, नमक आदि ऐसे खाद्य पदार्थ हैं जो पार्किंसन के लक्षण को और भी ज्यादा खराब कर सकते हैं। पार्किंसन में जिन खाद्य पदार्थों का परहेज करना हैं उन खाद्य पदार्थों में शामिल हैं –

  • सैचुरेटेड वसा,
  • ट्रांस फैट,
  • कृतिम चीनी,
  • शराब,
  • प्रसंस्कृत भोजन।

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पार्किंसन में सैचुरेटेड वसा नहीं खाएं – Avoid Saturated fat foods in Parkinson in Hindi

पार्किंसन की बीमारी में उन खाद्य पदार्थों को खाने से बचें जिनमें अधिक मात्रा में सैचुरेटेड फैट हों (Diet for parkinson in Hindi)। सैचुरेटेड वसा वाले खाद्य पदार्थों में शामिल हैं-

  • मक्खन, घी, नारियल का तेल और ताड़ का तेल,
  • नारियल का दूध और नारियल क्रीम,
  • केक और बिस्कुट,
  • सॉस,
  • पनीर,
  • पेस्ट्री,
  • मिल्क शेक,
  • चॉकलेट,
  • आइसक्रीम आदि।

हालांकि पार्किंसन में सैचुरेटेड वसा की विशिष्ट भूमिका का अभी भी अध्ययन किया जा रहा है।

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पार्किंसन में ट्रांस फैट खाने से बचें – Avoid Trans Fat foods in Parkinson in Hindi

पार्किंसन में ट्रांस फैट खाने से बचना चाहिए। जिन खाद्य पदार्थों में ट्रांस वसा हो सकता है उनमें शामिल हैं:

  • मक्खन,
  • कुकीज़,
  • केक,
  • फ्रेंच फ्राइज़,
  • चिप्स ,
  • डोनट्स,
  • पिज़्ज़ा,
  • बर्गर,,
  • फ्राइड फूड्स आदि।

और पढ़ें –  इन एंटीऑक्सीडेंट आहार से करें अपना वजन कम।

पार्किंसन में कृतिम चीनी नहीं खाएं – Avoid high sugar foods in Parkinson in Hindi

पार्किंसन में ऐसे खाद्य पदार्थों का सेवन नहीं करना चाहिए जिसमें अधिक मात्रा में कृतिम चीनी (Artificial sugar) मौजूद होती है। सोडा, डिब्बा बंद फ्रूट जूस आदि ऐसे पेय पदार्थ हैं जिनमें अधिक मात्रा में कृतिम चीनी मौजूद हो सकती है। इसके अलावा 

  • कैंडी,
  • केक,
  • कुकीज़,
  • मीठे रोल,
  • पेस्ट्री,
  • डोनट्स,
  • आइसक्रीम,
  • योगर्ट, आदि।

पार्किंसन में शराब का करें परहेज – Avoid Alcohol in Parkinson in Hindi

पार्किंसन में शराब पीने से बचना चाहिए। शराब में इन्फ्लेमेटरी गुण होते हैं जो शरीर की सूजन (Inflammation) को बढ़ा सकते हैं। इसके अलावा शराब का अधिक सेवन ऑस्टियोपोरोसिस का कारण बन सकता है। जो पार्किंसन के लक्षण को और भी खराब करते हैं।

पार्किंसन में प्रसंस्कृत भोजन (प्रोसेस्ड फूड) ना खाएं – Avoid Processed foods in Parkinson in Hindi

पार्किंसन में प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थ (Processed foods) खाने से परहेज करना चाहिए। जैसे-

  • फ्रोजेन मांस,
  • फास्ट फूड और
  • डिब्बा बंद स्नैक्स।

और पढ़ें – सूखे आलूबुखारा (सूखे पल्म) के फायदे और नुकसान 

ये सभी ऐसे खाद्य पदार्थ ऐसे हैं जो परिष्कृत अनाज (refined grains), कृतिम शक्कर, उच्च नमक और सैचुरेटेड वसा से बने होते हैं साथ ही इनकी शेल्फ-लाइफ और स्वाद को बनाए रखने के लिए प्रेज़रवेटिव पदार्थों (Preservative substances) का भी उपयोग किया जाता है, जो शरीर की सूजन (Inflammation) को बढ़ाने और पार्किंसन के लक्षणों को और भी ज्यादा खराब करने के लिए जिम्मेदार होते हैं।

निष्कर्ष | Conclusion

पार्किंसन बीमारी एक तंत्रिका तंत्र सम्बंधित बीमारी है जिसमें हाथों और पैरों का कांपना शामिल हैं इसके अलावा चलने और संतुलन में भी कठिनाई देखी जाती है।

ऐसे कई खाद्य पदार्थ हैं जो पार्किंसन के लक्षणों को कुछ कम कर सकते हैं। जिनमें एंटीऑक्सिडेंट युक्त आहार, ओमेगा -3 फैटी  एसिड्स, फिश ऑयल, आयरन युक्त खाद्य पदार्थ, विटामिन डी, विटामिन सी और जिंक जैसे आहार शामिल हैं। हालांकि, कुछ ऐसे खाद्य पदार्थ भी हैं जिनसे पार्किंसन से पीड़ित व्यक्ति को परहेज करना चाहिए इन खाद्य पदार्थों में शामिल हैं- सैचुरेटेड वसा, ट्रांस फैट, कृतिम चीनी, शराब और प्रसंस्कृत भोजन।

पार्किंसन से पीड़ित व्यक्ति को भोजन चबाने और निगलने में भी कठिनाई हो सकती है। इसलिए, वे उन खाद्य पदार्थों से भी बचना चाह सकते हैं जिन्हें चबाना और निगलना मुश्किल है, जैसे कि सख्त मांस।

और पढ़ें – हृदय रोगियों के लिए डाइट प्लान।


ये हैं पार्किंसन में क्या खाना चाहिए और क्या नहीं खाना चाहिए के बारे में पूरी जानकारी। कमेंट में बताएं यह पोस्ट (Parkinson’s Diet Plan in Hindi) कैसी लगी। अगर यह पोस्ट पसंद आई हो तो इस पोस्ट को शेयर जरूर करें।

Disclaimer : ऊपर दी गई जानकारी पूरी तरह से शैक्षणिक दृष्टिकोण से दी गई है। इस जानकारी का उपयोग किसी भी बीमारी के निदान या उपचार हेतु बिना विशेषज्ञ की सलाह के नहीं किया जाना चाहिए। इसके अलावा किसी भी चीज को अपनी डाइट में शामिल करने या हटाने से पहले किसी योग्य डॉक्टर या आहार विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।  

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सन्दर्भ (References)

1. Zafar S, Yaddanapudi SS. Parkinson Disease. [Updated 2021 Aug 11]. In: StatPearls [Internet]. Treasure Island (FL): StatPearls Publishing; 2022 Jan-.

2. Kouli A, Torsney KM, Kuan WL. Parkinson’s Disease: Etiology, Neuropathology, and Pathogenesis. In: Stoker TB, Greenland JC, editors. Parkinson’s Disease: Pathogenesis and Clinical Aspects [Internet]. Brisbane (AU): Codon Publications; 2018 Dec 21. Chapter 1.

3. Carrarini C, Russo M, Dono F, Di Pietro M, Rispoli MG, Di Stefano V, Ferri L, Barbone F, Vitale M, Thomas A, Sensi SL, Onofrj M, Bonanni L. A Stage-Based Approach to Therapy in Parkinson’s Disease. Biomolecules. 2019 Aug 20;9(8):388.

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11. Brown TM. Parkinsonism and Vitamin C Deficiency. Fed Pract. 2017 Aug;34(8):28-32. PMID: 30766292; PMCID: PMC6370430.

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