Benefits Green coffee in Hindi

क्या Green coffee स्वास्थ्य के लिए लाभदायक है? जानिए रिसर्च क्या कहती हैं।

Green Coffee in Hindi : आज ग्रीन कॉफी अपने स्वास्थ्यवर्धक लाभों के कारण लोगों के बीच काफी आम होती जा रही है। पर क्या वास्तव में इसके स्वास्थ्य लाभ हैं? क्या रिसर्च भी ग्रीन कॉफी के स्वास्थ्य लाभों का समर्थन करती हैं?

इस पोस्ट में हम आपको इन सभी सवालों के जवाब दे रहे हैं। साथ ही, ग्रीन कॉफी क्या है?, यह शरीर को कैसे प्रभावित करती है?, ग्रीन कॉफी के फायदे और नुकसान क्या हैं? ग्रीन कॉफी बनाने की विधि क्या है? आदि के बारे में भी बता रहे हैं। 

चलिए अब इस पोस्ट को शुरू करते हैं।

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ग्रीन कॉफी क्या है? | What is Green Coffee in Hindi

What is Green Coffee in Hindi
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ग्रीन कॉफी साधारण कॉफी (ब्लैक कॉफी) की तरह होती है, बस फर्क इतना है कि ब्लैक कॉफी को भुना (>400℉) जाता है, जबकि ग्रीन कॉफी को भुना नहीं जाता, बल्कि पूरी तरह से कच्चा ही रखा जाता है।

दोनों ही प्रकार की कॉफी में क्लोरोजेनिक एसिड और कैफीन जैसे तत्व मौजूद होते हैं।

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क्लोरोजेनिक एसिड एक रसायन (Chemical) है, जिसमें एंटी-ऑक्सिडेंट और एंटी-इंफ्लेमेटरी जैसे शक्तिशाली गुण होते हैं, जो शरीर को स्वस्थ बनाए रखने में मदद करते हैं। (1)

इसके अलावा कैफीन, मेटाबोलिक एक्सेलरेटर की तरह कार्य करती है जो मेटाबोलिज्म (उपापचय) को तंदरुस्त बनाने में मदद करती है।

एक अच्छे मेटाबॉलिज्म का मतलब है कि आपके शरीर के सभी अंग जैसे गुर्दे, यकृत, हृदय आदि सर्वोत्तम क्षमता से काम कर रहे होंगे। (2) इसके साथ ही कैफीन ऊर्जा के स्तर में वृद्धि, सतर्कता बढ़ाने और शारीरिक थकान को कम करने में भी मदद करती है।

हालांकि, कॉफी को भुनने से क्लोरोजेनिक एसिड और कैफीन दोनों की मात्रा कम हो जाती हैं। इसलिए, ब्लैक कॉफी की तुलना में ग्रीन कॉफी में ज्यादा क्लोरोजेनिक एसिड और कैफीन मौजूद होता है। (3)

अधिक मात्रा में क्लोरोजेनिक एसिड और कैफीन होने के कारण ग्रीन कॉफी के स्वास्थ्य लाभ, ब्लैक कॉफी के मुकाबले ज्यादा होते हैं। परन्तु, कॉफी की अधिक मात्रा स्वास्थ के लिए हानिकारक भी हो सकती है। इसलिए डॉक्टर या आहार विशेषयज्ञ के अनुसार ही कॉफी का सेवन करें।

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चलिए अब ग्रीन कॉफी के फायदे और नुकसान को जानते हैं।

ग्रीन कॉफी के फायदे | Benefits of Green Coffee in Hindi

Benefits of Green Coffee in Hindi
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क्या वास्तव में ग्रीन कॉफी के स्वास्थ्य लाभ हैं? इस बारे में रिसर्च क्या कहती हैं? समझते हैं।

रिसर्च के अनुसार ग्रीन कॉफी चाहे किसी भी रूप (ग्रीन कॉफी बीन्स एक्सट्रैक्ट, ग्रीन कॉफी कैप्सूल्स या ग्रीन कॉफी पाउडर) में ली गई हो, इसका फायदा (या उपयोग) निम्नलिखित बिमारियों में किया जा सकता है। जिसमें शामिल हैं –

  • उच्च रक्तचाप,
  • मोटापा,
  • मधुमेह,
  • हृदय रोग,
  • डिप्रेशन,
  • थकान और दर्द,
  • लिवर के रोग, आदि।

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1. ग्रीन कॉफी के फायदे उच्च रक्तचाप कम करने में – Benefits for Green coffee for high blood pressure in Hindi

प्रारंभिक शोध से पता चलता है कि यदि प्रतिदिन 50 मिलीग्राम से 140 मिलीग्राम ग्रीन कॉफी के अर्क (Green coffee extract in Hindi) का सेवन 4 सप्ताह से 12 सप्ताह तक किया जाए, तो यह हल्के और अनुपचारित उच्च रक्तचाप (Blood pressure) को कम करने में मदद कर सकती है, जिसमें सिस्टोलिक रक्तचाप (शीर्ष संख्या) में 5 mmHg से 10 mmHg तक की कमी और डायस्टोलिक रक्तचाप (नीचे की संख्या) में 3 mmHg से 7 mmHg तक की कमी आ सकती है। (4)

2019 की meta-analysis स्टडी में भी ग्रीन कॉफी को उच्च रक्तचाप के लिए फायदेमंद बताया है। जिसमें कहा गया है कि यदि  ग्रीन कॉफी के अर्क का सेवन 4 सप्ताह तक (<400mg) किया जाए तो यह सिस्टोलिक और डायस्टोलिक दोनों ही प्रकार के रक्तचाप को कम करने में मदद कर सकती हैं। (5)

इसलिए उच्च रक्तचाप को कम करने के लिए ग्रीन कॉफी सेहत के लिए फायदेमंद हो सकती है।

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2. ग्रीन कॉफी बीन्स का लाभ है, वजन घटाने में – Green coffee capsules for weight loss in Hindi

ग्रीन कॉफी भूख को नियंत्रित करने और शरीर के चयापचय (metabolism) को बढ़ाने में मदद कर सकती है। ग्रीन कॉफी बीन्स में मौजूद क्लोरोजेनिक एसिड, पाचन तंत्र से कार्बोहाइड्रेट के अवशोषण को कम करने में मदद करती है, जिससे अतरिक्त वजन (ग्रीन कॉफी कैप्सूल्स फॉर वेट लॉस) नहीं बढ़ता है।

NCBI में प्रकाशित एक स्टडी के अनुसार ग्रीन काॅफी के अर्क में पाया जाने वाला एंटीओबेसिटी गुण शरीर के अतिरिक्त वजन को कम (ग्रीन कॉफी वेट लॉस) करने में मदद कर सकता है।

एक मानव परीक्षण में कुछ लोगों को 12 से 18 सप्ताह तक ग्रीन कॉफी के अर्क (Green coffee extract in Hindi) का सेवन करवाया गया। 12 सप्ताह बाद जब उनको जांचा गया तो उनके संपूर्ण शरीर के वजन, वसा और कूल्हे से लेकर कमर तक के अनुपात में 4.97 किलोग्राम तक की कमी दर्ज की गई। (6)

NCBI पर प्रकाशित एक अन्य स्टडी में भी इस बात को बताया गया है कि ग्रीन कॉफी मोटापा कम करने मदद कर सकती है। इसके अलावा, यह एडिपोजेनेसिस (वसा कोशिकाएं) और लिपिड चयापचय (Lipid metabolism) को भी नियंत्रित करती है, जो बढ़ते वजन को कम करने में मदद कर सकती है। (7)

इसलिए, यदि नियमित रूप से ग्रीन कॉफी पी जाए या ग्रीन कॉफी कैप्सूल्स या ग्रीन कॉफी पाउडर का सेवन किया जाए तो यह वजन घटाने (ग्रीन कॉफी के फायदे) में फायदेमंद हो सकती है। 

हालांकि ग्रीन कॉफी पर कुछ मानव शोध अनिर्णायक भी रहे हैं। जिसमें कुछ प्रतिभागियों ने अपना वजन कम नहीं किया था। इसलिए, इस विषय पर बड़े और अच्छी तरह से डिज़ाइन किए गए मानव अध्ययन की आवश्यकता है।

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3. ग्रीन कॉफी कैप्सूल के फायदे हैं, मधुमेह के इलाज में – Green coffee capsules benefits for diabetes in Hindi

ब्लड प्रेशर नियंत्रित करने और वजन घटाने के अतरिक्त ग्रीन कॉफी (Green Coffee in Hindi) के स्वास्थ्य लाभ मधुमेह को नियंत्रित करना भी है। ग्रीन कॉफी में मौजूद क्लोरोजेनिक एसिड (Chlorogenic acid), मधुमेह के जोखिम को कम करने में मदद कर सकता है। 

क्लोरोजेनिक एसिड में मौजूद मधुमेह विरोधी गुण, इंसुलिन प्रतिरोध को कम करने और रक्त शर्करा के स्तर को नियंत्रित करने में मदद कर सकता है।

एक अध्ययन में 8 सप्ताह तक 50 लोगों को प्रतिदिन 400 मिलीग्राम ग्रीन कॉफी का अर्क दिया गया। 8 सप्ताह बाद जब उनकी जाँच की गई, तो उनके मधुमेह के स्तर में महत्वपूर्ण सुधार देखा गया। इस आधार पर हम कह सकते हैं कि ग्रीन कॉफी का फायदा मधुमेह के इलाज में किया जा सकता है। (8)

इसलिए मधुमेह के इलाज में ग्रीन कॉफी कैप्सूल या ग्रीन कॉफी पाउडर का सेहत फायदेमंद हो सकता है।

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4. ग्रीन कॉफी पाउडर का फायदा है, डिप्रेशन कम करने में – Green coffee powder benefits for depression in Hindi

अध्ययनों (Research studies) से पता चलता है कि जो लोग नियमित रूप से ग्रीन कॉफी पीते हैं उनमें अल्जाइमर और डिमेंशिया विकसित होने की सम्भावना कम हो जाती है और साथ ही आत्महत्या के जोखिम में भी कमी देखी गई। इसके अलावा ग्रीन कॉफी का सही तरीके से सेवन करने से यह अनिद्रा (Insomnia) और सिरदर्द को भी कम कर सकती है। (9)

NCBI पर प्रकाशित एक शोध के अनुसार ग्रीन कॉफी में पाई जाने वाली कैफीन, सिर दर्द को कुछ हद तक कम करने में मदद कर सकती है। (10)

इसलिए डिप्रेशन कम करने में ग्रीन कॉफी पाउडर सेहत के लिए फायदेमंद हो सकती है।

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5.ग्रीन कॉफी पाउडर का उपयोग है, हृदय सम्बन्धी रोग में – Benefits of green coffee powder in Hindi

कुछ प्रारंभिक अध्ययनों के आधार पर यह माना जा सकता है कि ग्रीन कॉफी में क्लोरोजेनिक यौगिक न केवल वजन कम करने, बल्कि हृदय रोग जैसी बीमारियों के संभावित जोखिमों को कम करने में भी मदद करता है।

ग्रीन कॉफी पाउडर में मौजूद क्लोरोजेनिक यौगिक, जिसमें एंटीऑक्सीडेंट गुण होते हैं, उच्च रक्तचाप, कोरोनरी हृदय रोग और स्ट्रोक के जोखिमों को कम करने में मदद कर सकता है। इसलिए, यदि आप अच्छी गुणवत्ता वाली ग्रीन कॉफी बीन का अर्क (ग्रीन कॉफी पाउडर ) लेते हैं, तो यह हृदय रोग के विकास के जोखिम को कम करने में मदद कर सकता है। (11)

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6. ग्रीन कॉफी बीन्स का लाभ है, ऊर्जा के स्तर में सुधार लाने में – Benefits of Green Coffee Beans for energy in Hindi

ग्रीन कॉफी में मौजूद कैफीन, थकान कम करने और ऊर्जा के स्तर को बढ़ाने में मदद कर सकती है।

ग्रीन कॉफी में मौजूद यह कैफीन रक्त में अवशोषित होती है और मस्तिष्क तक पहुँचती है। मस्तिष्क में कैफीन एडेनोसाइन को अवरुद्ध करती है। जिससे थकान और दर्द दोनों की संवेदनाएं कम हो जाती हैं और आप ऊर्जावान महसूस करते हैं। (12)

कई अध्ययनों भी इस बात का पक्ष लेते हैं कि ग्रीन कॉफी मस्तिष्क के कार्य के विभिन्न पहलुओं में सुधार करती है जिसमें स्मृति, मनोदशा, सतर्कता, ऊर्जा स्तर और सामान्य मानसिक कार्य शामिल हैं।

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7. ग्रीन कॉफी पीने के फायदे हैं, लिवर को स्वास्थ बनाए रखने में – Benefits of Green Coffee for healthy liver in Hindi

NCBI में प्रकाशित कुछ अध्ययन इस बात का समर्थन करते हैं कि ग्रीन कॉफी बीन के अर्क (Green coffee extract in Hindi) का नियमित सेवन लीवर स्वास्थ्य के लिए अच्छा हो सकता है।

ग्रीन कॉफी (Green Coffee in Hindi) में मौजूद एंटीऑक्सिडेंट की उपस्थिति लीवर और रक्त को डिटॉक्सीफाई करने में मदद कर सकती है। ये एंटीऑक्सिडेंट शरीर से हानिकारक मुक्त कणों को हटाते हैं और शरीर की रक्षा करता है। इसके अलावा एंटीऑक्सिडेंट यकृत की सूजन को भी कम करने में मदद कर सकते हैं। (13)

इसलिए, ग्रीन कॉफी पीने के फायदे लिवर को स्वास्थ बनाए रखने में किया जा सकता है।

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ग्रीन कॉफी बनाने की विधि – Green coffee recipe in Hindi

ग्रीन कॉफी कैसे बनाये – How to make green coffee in Hindi

ग्रीन कॉफी बनाने का तरीका बिल्कुल आसान है। बस नीचे दिए हुए steps का अनुसरण करें –

  • सॉस पैन में एक कप पानी डाल लें,
  • फिर उसमें 1/2-1 चम्मच ग्रीन कॉफी पाउडर डाल लें,
  • फिर इसे 8-10 मिनट तक पानी को उबलने दें,
  • उबलने के बाद पानी को 10-12 मिनट तक ठंडा होने दें,
  • फिर इसे छान लें,
  • अगर मन हो, तो एक चुटकी इलायची या दालचीनी पाउडर डाल सकते हैं,
  • बस तैयार है ग्रीन कॉफी, अब आप इसकी स्वास्थ्यवर्धक चुस्कियां ले सकते हैं।

इसे कम से कम 1-2 महीने तक पिएं। ध्यान रहे एक दिन में 1-2 कप से ज्यादा ग्रीन कॉफी न पिएं।

अब ग्रीन कॉफी के नुकसान के बारे में समझते हैं।

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ग्रीन कॉफी के नुकसान – Side effects of green coffee in Hindi

ग्रीन कॉफी का अधिक सेवन स्वास्थ्य के लिए हानिकारक भी हो सकता है। शोध के अनुसार, ग्रीन कैफीन पीने के नुकसान निम्नलिखित हो सकते हैं। (14, 15 & 16)

Green Caffeine Ke Nuksan – Precautions & warnings for green coffee in Hindi

  • यदि आप पहले से ही तनाव, उच्च रक्तचाप, नींद की समस्या, गैस और पेट में अल्सर जैसी समस्याओं से पीड़ित हैं तो ग्रीन कॉफी का सेवन आपके लिए हानिकारक हो सकता है।
  • ग्रीन कॉफी में मौजूद कैफीन पेट के एसिड को बढ़ा सकती है।
  • ग्रीन कॉफी में मौजूद क्लोरोजेनिक एसिड (Chlorogenic acid), रक्त में प्लाज्मा होमोसिस्टीन (Homocysteine) के स्तर को बढ़ा सकता है, जो रक्त के थक्के (Blood clots) या रक्त वाहिका में रुकावट (Blood vessel blockage) का कारण बन सकता है, और साथ ही हृदय रोग संबधी बिमारियों को जन्म दे सकता हैं।
  • ग्रीन कॉफी पेट में एसिड की मात्रा को बढ़ा सकती है। जिससे आपका पेट खराब हो सकता है। इसलिए यदि आप पहले से ही पाचन सम्बन्धी रोग से पीड़ित हैं, तो ग्रीन कॉफी  के सेवन से बचें।
  • ग्रीन कॉफी की उच्च मात्रा चिंता और घबराहट जैसे लक्षणों को बड़ा सकती है।
  • ग्रीन कॉफी पीने से आपको बार-बार पेशाब भी जाना पड़ सकता है। जिससे आपके शरीर में पानी की कमी हो जाती है। पानी की कमी किडनी को नुकसान पंहुचा सकती है।
  • ग्रीन कॉफी में मौजूद कैफीन, आंखों के अंदर का दबाव बढ़ सकती है। दबाव के बढ़ने से यह ग्लूकोमा जैसी बीमारी को जन्म दे सकती है
  • ग्रीन कॉफी से मिलने वाला कैफीन, मूत्र में कैल्शियम की मात्रा को बढ़ा सकती है जो हड्डियों के कमजोर होने का कारण बन सकता है।
  • गर्भवती या स्तनपान के दौरान ग्रीन कॉफी का उपयोग करना सुरक्षित है या नहीं। यह अभी तक ज्ञात नहीं हुआ है। इसलिए सेवन से पहले डॉक्टर से बात जरूर करें।

और पढ़ें – क्या Green Coffee स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है? जानिए शोध क्या कहते हैं।

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ग्रीन कॉफी और ब्लैक कॉफी में अंतर | Green coffee vs Black coffee in Hindi

Green coffee vs Black coffee in Hindi
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नीचे दी गई टेबल में आप ग्रीन कॉफी और ब्लैक कॉफी में अंतर को समझ सकते हैं।

ग्रीन कॉफी बीन्स

(Green coffee Beans)

ब्लैक कॉफी बीन्स

(Black coffee Beans)

ग्रीन कॉफी बीन्स को भुना नहीं जाता है। ब्लैक कॉफी को भुना जाता है।
ग्रीन कॉफी बीन्स का रंग हरा होता है। ब्लैक कॉफी बीन्स भुनने के कारण गहरे भूरे रंग की हो जाती है।
ग्रीन कॉफी बीन्स में क्लोरोजेनिक एसिड की मात्रा अधिक होती है। ब्लैक कॉफी बीन्स में क्लोरोजेनिक एसिड की मात्रा कम होती है।
ग्रीन कॉफी बीन्स में कैफीन की मात्रा अधिक होती है। ब्लैक कॉफी बीन्स में कैफीन की मात्रा ग्रीन कॉफी बीन्स के मुकाबले थोड़ी कम होती है।
एंटी-ऑक्सिडेंट गुण अधिक होते हैं। ब्लैक कॉफी में एंटी-ऑक्सिडेंट गुण कम होते हैं।
एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण अधिक होते हैं। ब्लैक कॉफी में एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण कम होते हैं।
ग्रीन कॉफी स्वास्थ्य के लिए अधिक लाभदायक मानी जाती है।  ग्रीन कॉफी के मुकाबले ब्लैक कॉफी स्वास्थ के लिए कम लाभदायक मानी जाती है। 

ग्रीन टी और ग्रीन कॉफी में अंतर | Green tea vs Green coffee in Hindi

नीचे दी गई टेबल में आप ग्रीन टी और ग्रीन कॉफी में अंतर को समझ सकते हैं।

ग्रीन टी

(Green tea)

ग्रीन कॉफी

(Green coffee)

ग्रीन टी वह चाय है जो कैमेलिया साइनेंसिस पौधे की पत्तियों और कलियों से निकाली जाती है। ग्रीन कॉफी, कॉफी के पौधे (कॉफी अरेबिका, कॉफी कैनेफ़ोरा) की कच्ची फलियों से प्राप्त की जाती है।
ग्रीन टी में कैफीन की मात्रा कम होती है। ग्रीन कॉफी में कैफीन की मात्रा ज्यादा होती है।
250 ml कप में कैफीन की मात्रा लगभग 35 mg होती है। 250 ml कप में कैफीन की मात्रा लगभग 100 mg होती है।
कैफीन की मात्रा कम होने से यह स्वास्थ के लिए कम हानिकारक होती है। कैफीन की अधिक मात्रा होने के कारण इसकी उच्च खुराक स्वास्थ के लिए हानिकारक हो सकती है।
ग्रीन टी एंटीऑक्सिडेंट, कैटेचिन, पॉलीफेनोल्स और अन्य फाइटोकेमिकल्स से भरपूर होती है। Green Coffee में उच्च क्लोरोजेनिक एसिड होता है।

निष्कर्ष | Conclusion

ग्रीन कॉफी (Green Coffee in Hindi) सामान्य कॉफी की तरह होती है, जो कच्चे हरे बीजों से बनती है, जिसे भुना नहीं जाता है। इसके विपरीत सामान्य कॉफी (ब्लैक कॉफी) भुने हुए बीजों से तैयार की जाती है।

ग्रीन कॉफी में मौजूद क्लोरोजेनिक एसिड और कैफीन, सेहत के लिए काफी फायदेमंद माने जाते हैं।

क्लोरोजेनिक एसिड में पाए जाने वाले एंटी-ऑक्सीडेंट और एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण उच्च रक्तचाप, मोटापा, मधुमेह, हृदय रोग, अवसाद (Depression), यकृत रोग, थकान और दर्द आदि को कम करने में मदद करता है। जबकि कैफीन, ऊर्जा के स्तर में वृद्धि, सतर्कता बढ़ाने, ध्यान केंद्रित करने और शारीरिक थकान को कम करने में मदद करती है। 

हालांकि, ग्रीन कॉफी का अधिक सेवन स्वास्थ पर दुष्प्रभाव भी डाल सकता है। जिसका कारण ग्रीन कॉफी में मौजूद कैफीन का होना बताया जाता है।

कैफीन की सुरक्षित और प्रभावी खुराक क्या है? वह अभी निर्धारित नहीं है, फिर भी, कुछ शोध बताते हैं कि प्रतिदिन 400 मिलीग्राम (लगभग 2-3 कप कॉफी) से कम कैफीन का सेवन किया जा सकता है।

ग्रीन कॉफी पर लगभग सभी शोध एक छोटे से समुदाय में किए गए हैं। जिनमें से कुछ अनिर्णायक रहे हैं। इसलिए ग्रीन कॉफी पर शोध एक बड़े समुदाय में किया जाना चाहिए। ताकि ग्रीन कॉफी के फायदे और नुकसान के बारे में ठीक से पता चल सके।

ध्यान रखें कि प्राकृतिक उत्पाद (Natural products) हमेशा सुरक्षित नहीं होते हैं। इसलिए ग्रीन कॉफी का उपयोग करने से पहले डॉक्टर या आहार विशेषज्ञ (Dietitian) का परामर्श जरूर लें। 

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न | FAQ about Green Coffee in Hindi

ग्रीन कॉफी दिन में कितनी बार पीना चाहिए?

अक्सर लोगों का प्रश्न होता है कि ग्रीन कॉफी दिन में कितनी बार पीनी चाहिए? इसका जवाब है लगभग 2 से 3 कप (300 मिलीग्राम) तक ग्रीन कॉफी का सेवन किया जा सकता है।

ग्रीन कॉफी पीने का सही समय दोपहर का खाना खाने से आधा घंटा पहले या फिर खाने के एक घंटे बाद पी सकते हैं। इसके अलावा ग्रीन कॉफी को आप सुबह खाली पेट पी सकते हैं।

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वजन घटाने के लिए ग्रीन कॉफी पीने का सबसे अच्छा समय क्या है?

ग्रीन कॉफी पीने का सबसे अच्छा समय इस प्रकार है-

  • आप सुबह नाश्ते से पहले ले सकते हैं।
  • सुबह की कसरत से पहले या बाद में लें सकते हैं।
  • लंच से पहले एक कप ग्रीन कॉफी ले सकते हैं।
  • शाम के नाश्ते के साथ इसे लें सकते हैं।

हालांकि, यदि आपको मधुमेह है तो ग्रीन कॉफी पीने का सबसे अच्छा समय भोजन के ठीक बाद का होता है। ऐसा इसलिए है क्योंकि खाने के बाद आपके रक्त शर्करा का स्तर बढ़ जाता है। खाना खाने के बाद ग्रीन कॉफी पीने से यह रक्त में मौजूद अतरिक्त शर्करा को कम करने में मदद करती है।

ध्यान रहे ग्रीन कॉफी पीने के बाद करीब एक घंटे तक कुछ न खाएं।

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ग्रीन कॉफी की खुराक क्या है? 

यदि, ग्रीन कॉफी की खुराक की बात करें तो अभी तक इसकी खुराक निर्धारित नहीं हुई है।

देखा जाए तो ग्रीन कॉफी की उपयुक्त खुराक की मात्रा कई कारकों पर निर्भर करती है जिसमें उपयोगकर्ता की उम्र, स्वास्थ्य और कई अन्य स्थितियां शामिल हैं।  (17)

शोध के अनुसार, प्रतिदिन 400 मिलीग्राम कैफीन का सेवन वयस्कों के लिए सुरक्षित माना जाता है। हालांकि, किशोरों के लिए प्रति दिन 100 मिलीग्राम और बच्चों के लिए प्रति दिन 2.5 मिलीग्राम/किलोग्राम तक कैफीन ले सकते हैं। (18)

हालांकि कैफीन की एक सुरक्षित और प्रभावी खुराक निर्धारित करने के लिए अभी और अधिक शोध की आवश्यकता है।

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ग्रीन कॉफी कैप्सूल खाने का तरीका क्या है?

ग्रीन कॉफी कैप्सूल, भोजन से 30 मिनट पहले एक गोली गुनगुने पानी के साथ लें सकते हैं। हालांकि, सेवन से पहले डॉक्टर का परामर्श जरूर करें।

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ग्रीन कॉफी कहा मिलती है, और ग्रीन कॉफी की कीमत क्या है?

आज बाजार में ग्रीन कॉफी, ग्रीन कॉफी बीन्स एक्सट्रैक्ट, कैप्सूल्स या पाउडर के रूप में उपलब्ध है। आप ग्रीन कॉफी अमेजन या फ्लिपकार्ट से खरीद सकते हैं। ऑनलाइन ग्रीन कॉफी बीन की कीमत (ग्रीन कॉफी का दाम) लगभग 1000/kg है जबकि इसकी MRP-1,565 रुपये है।

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ग्रीन कॉफी बीन्स टैबलेट 700 mg का सेवन कैसे करते है?

ग्रीन कॉफी बीन्स टैबलेट का सेवन खाना खाने के बाद किया जा सकता है। ग्रीन कॉफी बीन्स टैबलेट की डोज़ डॉक्टर के अनुसार ही लें।

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ये हैं ग्रीन कॉफी के फायदे और दुष्प्रभाव के बारे में बताई गई जानकारी। कमेंट में बताएं आपको यह पोस्ट कैसी लगी। यदि आपको Green coffee in Hindi पोस्ट पसंद आई हो तो इसे शेयर जरूर करें।

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Disclaimer : ऊपर दी गई जानकारी पूरी तरह से शैक्षणिक दृष्टिकोण से दी गई है। इस जानकारी का उपयोग किसी भी बीमारी के निदान या उपचार हेतु बिना विशेषज्ञ की सलाह के नहीं किया जाना चाहिए। इसके अलावा किसी भी चीज को अपनी डाइट में शामिल करने या हटाने से पहले किसी योग्य डॉक्टर या आहार विशेषज्ञ (Dietitian) की सलाह जरूर लें।

सन्दर्भ (References)

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